HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesदिवाली वाली रात चुदवाकर सुहागरात मनाई सगे बेटे के साथ

दिवाली वाली रात चुदवाकर सुहागरात मनाई सगे बेटे के साथ

दिवाली वाली रात चुदवाकर सुहागरात मनाई सगे बेटे के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मेरा नाम मंजू है, और मैं 38 साल की एक विधवा औरत हूँ, जो दिल्ली के एक छोटे से मोहल्ले में अपने 19 साल के बेटे, रवि, के साथ रहती हूँ। ये कहानी उस दीवाली की रात की है, जब मैंने और रवि ने एक-दूसरे की हवस की आग में जलकर अपनी निषिद्ध इच्छाओं को पूरा किया। मैंने दुल्हन की तरह सजकर अपने बेटे के लिए सुहागरात सजाई, और उसने अपने पिता का शादी का जोड़ा पहनकर मुझे अपनी दुल्हन बनाया।

हमारा छोटा सा घर, जो दीयों और रंगोली से सजा था, उस रात एक सुहाग की सेज में बदल गया, जहाँ हम माँ बेटे ने मिलकर अपनी अंतर्वासना को बेकाबू होने दिया। यह माँ बेटे की हिंदी चुदाई कहानी हास्य, शर्मिंदगी, और गहरे जुनून का मिश्रण है, जो हर पल को गंदी और उत्तेजक भाषा में बयान करती है। यह पूरी तरह काल्पनिक है, और इसमें हर किरदार और घटना मेरी रचनात्मकता से उपजी है।


Diwali wali raat chudwakar suhagraat manayi sage bete ke saath Antarvasna Hindi 18+ XXX Threesome Sex Story:- मैं, मंजू शर्मा , 38 साल की हूँ। मेरा फिगर 36-28-38 है, और मेरी गोरी त्वचा, लंबे काले बाल, और भरे हुए स्तन मोहल्ले के मर्दों की नज़रों का केंद्र हैं। मेरे पति पाँच साल पहले गुजर गए, और तब से मैंने अपनी ज़िंदगी रवि को समर्पित कर दी। लेकिन मेरी चूत की भूख ने मुझे उस रात एक ऐसी राह पर ले जाया, जहाँ मैंने अपनी माँ की मर्यादा को ताक पर रख दिया। मैंने उस रात लाल जोड़ा पहना, जैसे कोई नई-नवेली दुल्हन, और अपने बेटे की हवस को अपनी चूत से शांत किया।

रवि, मेरा बेटा, 19 साल का है। वो लंबा, कसरती, और गोरा नौजवान है, जिसकी आँखों में शरारत और जवानी की आग साफ दिखती है। कॉलेज में पढ़ता है, और उसकी मुस्कान में एक ऐसी चमक है, जो मेरे मन को बेचैन कर देती थी। उस रात उसने अपने पिता का शादी का शेरवानी पहना, और मेरी सुहागरात का दूल्हा बन गया। उसकी हवस भरी नज़रों ने मुझे शर्मिंदगी और उत्तेजना के बीच झुला दिया।

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Diwali wali raat chudwakar suhagraat manayi sage bete ke saath Antarvasna Hindi Threesome Sex Story

स्थान: हमारा घर दिल्ली के एक पुराने मोहल्ले में है। दो मंजिला मकान, जहाँ नीचे लिविंग रूम है, और ऊपर मेरा और रवि का बेडरूम। दीवाली की रात, घर दीयों, रंगोली, और फूलों से सजा था। मेरा बेडरूम सुहाग की सेज में बदला था, जहाँ गुलाब की पंखुड़ियाँ, अगरबत्ती की खुशबू, और मंद रोशनी ने एक उत्तेजक माहौल बनाया।

अन्य किरदार: कमला आंटी, 46 साल की पड़ोसन, जो अपनी गंदी हँसी और फूहड़ बातों से मोहल्ले में मशहूर है। उसकी चुगलियाँ और मज़ाक इस कहानी में हास्य का तड़का लगाते हैं। विकास, रवि का दोस्त, जो उस रात हमारे घर आया और अनजाने में कहानी में एक नया मोड़ लाया।

दिवाली वाली रात सगे बेटे के लंड से चुदवाकर सुहागरात मनाने की शुरुआत

दिवाली की रात थी। मोहल्ला दीयों की रोशनी और पटाखों की आवाज़ से गूँज रहा था। मैंने लाल जोड़ा पहना था, जो मेरे पति ने हमारी सुहागरात के लिए चुना था। साड़ी मेरे बदन पर इस तरह लिपटी थी कि मेरे बूब्स और गांड की गोलाई साफ दिख रही थी। मैंने गहरी लाल लिपस्टिक, काजल, और मांग में सिंदूर भरा, जैसे कोई नई दुल्हन। मेरे गले में मंगलसूत्र और हाथों में चूड़ियाँ खनक रही थीं। मैं आईने में खुद को देख रही थी, और मेरी चूत में एक अजीब सी गुदगुदी हो रही थी। मैं जानती थी कि आज रात कुछ गलत होने वाला है, लेकिन मेरी हवस ने मुझे रोकने नहीं दिया।

रवि ने अपने पिता की शादी की शेरवानी पहनी थी। वो दूल्हे की तरह सजा था, और उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी, जो मेरे बदन में आग लगा रही थी। मैं रसोई में मिठाई सजा रही थी, जब कमला आंटी आ धमकी। “अरे मंजू, तू तो आज दुल्हन बनकर तैयार है! कहीं रवि तुझे अपनी बीवी तो नहीं बना लेगा?” उसकी गंदी हँसी गूँज उठी। मैंने हँसकर कहा, “आंटी, तुम भी ना, बस गंदी बातें करती हो!” लेकिन मेरे मन में एक तूफान उठ रहा था।

रवि बाहर पटाखे जला रहा था। उसकी हँसी और मोहल्ले के बच्चों के साथ मस्ती देखकर मेरा दिल भर आया। लेकिन जब वो घर लौटा, उसकी नज़र मेरे बूब्स पर टिक गई। मैंने उसे डाँटा, “क्या देख रहा है, बेटा? जा, हाथ-मुँह धो ले।” वो हँस पड़ा, “माँ, तू आज इतनी सेक्सी लग रही है कि मेरा लंड खड़ा हो गया।” उसकी बात सुनकर मैं शरमा गई, लेकिन मेरी चूत गीली हो रही थी। मैंने कहा, “बेशर्म, माँ के सामने ऐसी बातें करता है?” लेकिन मेरी आवाज़ में शर्मिंदगी थी, गुस्सा नहीं।

सुहागरात की सेज सजाई सगे बेटे से चुदवाकर अन्तर्वासना शांत करवाने के लिए

मेरी अन्तर्वासना काफी ज्यादा भड़क रही थी इस लिए मैं मेरे बेटे से चुदवाकर अपनी तड़प शांत करना चाहती थी। मगर ये मेरे लिए जरा भी आसान नहीं था। मैं घबरा रही थी की यदि मैंने सेक्स करने के लिए पहल करी तो कहीं मेरा बेटा मुझे रंडी ना समझ ले। फिर भी मैंने हिम्मत करके रात को खाना खाने के बाद मैंने रवि को अपने कमरे में बुलाया। मैंने बेडरूम को सुहाग की सेज की तरह सजाया था। बिस्तर पर गुलाब की पंखुड़ियाँ बिखरी थीं, और अगरबत्ती की खुशबू कमरे में फैल रही थी। मैंने जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका लिया, ताकि मेरे बूब्स का उभार दिखे। रवि अंदर आया, और उसकी आँखें मेरे बदन पर टिक गईं। वो बोला, “माँ, तू तो आज सचमुच दुल्हन लग रही है।” मैंने शरमाते हुए कहा, “बेटा, आज तू मेरा दूल्हा है।”

उसने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। मैंने विरोध करने की कोशिश की, “रवि, ये गलत है। मैं तेरी माँ हूँ।” लेकिन मेरी चूत उसकी गर्म साँसों से गीली हो रही थी। उसने मेरी साड़ी खींचकर उतार दी, और मैं सिर्फ़ ब्लाउज़ और पेटीकोट में रह गई। मेरे बूब्स ब्लाउज़ में कसकर उभरे हुए थे, और मेरे निप्पल सख्त हो गए थे। रवि ने मेरे ब्लाउज़ के हुक खोले, और मेरे बूब्स आज़ाद हो गए। वो बोला, “माँ, तेरे बूब्स तो किसी रंडी से कम नहीं।”

मैं शरमा गई, लेकिन मेरी चूत में आग लग रही थी। मैंने कहा, “बेटा, तू कितना गंदा बोलता है।” लेकिन मेरी आवाज़ में मज़ा था। उसने मेरे बूब्स को ज़ोर से दबाया, और मैं सिसकारी भरने लगी, “आआहह… रवि… धीरे…” उसने मेरे निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। मेरी चूत से रस बहने लगा, और मैं बेकाबू हो रही थी मन तो कर रहा था की जल्दी से अपने सगे बेटे से चुदवाकर उसकी रखैल बन जाऊ जिन्दगी भर के लिए।

सगे बेटे के साथ दिवाली वाली रात निषिद्ध चुदाई की शुरुआत

सुहागरात मनाने के लिए मेरे बेटे रवि ने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे पेटीकोट को उतार दिया। मैं अब पूरी तरह नंगी थी, और मेरी चूत गीली होकर चमक रही थी। उसने अपनी शेरवानी उतारी, और मेरी कोख से जन्में मेरे सगे बेटे का लंड मेरे सामने तना हुआ था। मैंने उसे देखकर कहा, “बेटा, तेरा लंड तो तेरे बाप के लंड से काफी ज्यादा बड़ा और मोटा है।” वो हँस पड़ा, “माँ, आज ये लंड तेरी चूत और गांड को फाड़कर लहूलुहान कर देगा।”

चोदने से पहले मेरे बेटे ने मेरी दोनों टाँगें फैलाईं और मेरी रसीली चूत को कुत्ते की तरह चाटने लगा। उसकी जीभ मेरी चूत के अंदर तक जा रही थी, और मैं चिल्ला रही थी, “ओह्ह… रवि… चाट… मेरी चूत को चाट… आआहह…” मेरे मुँह से ऐसी गंदी बातें निकल रही थीं, जो मैंने पहले कभी नहीं बोली थीं। वो मेरी चूत को चूस रहा था, जैसे कोई भूखा कुत्ता हड्डी चबा रहा हो। मैं बार-बार झड़ रही थी, और मेरी चूत रस से लबालब थी।

उसने अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा और एक ज़ोरदार धक्का मारा। मैं चीख पड़ी, “आआहह… रवि… धीरे… तेरा लंड मेरी चूत को चीर देगा…” लेकिन वो रुका नहीं। वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा, और मैं चिल्ला रही थी, “चोद… मुझे चोद… फाड़ दे मेरी चूत…” उसका लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर-बाहर हो रहा था, और मैं हवस की आग में जल रही थी।

दिवाली के अगले कमला आंटी की गंदी हँसी

दिवाली के अगले दिन सुबह, कमला आंटी फिर आ धमकी। वो बोली, “मंजू, रात को तूने और रवि ने मिलकर क्या धमाल मचाया? मोहल्ले में सब कह रहे हैं कि तेरे घर से अजीब सी आवाज़ें आ रही थीं तुम माँ बेटे की।” उसकी गंदी हँसी ने मुझे शर्म से लाल कर दिया। मैंने कहा, “आंटी, बस करो, तुम तो हमेशा गंदी बातें करती रहती हो।” लेकिन मेरे मन में रात को हुई हम माँ बेटे की पहली चुदाई की यादें ताज़ा हो गईं।

रवि रसोई में था, और वो हमारी बातें सुनकर हँस रहा था। उसने आँख मारकर कहा, “माँ, आंटी को बता दे, हमने रात को सुहागरात मनाई।” मैंने उसे घूरा, लेकिन मेरी चूत फिर से गीली हो रही थी। कमला आंटी ने हँसकर कहा, “अरे, मंजू, तू तो अब भी जवान माल है। रवि को संभाल ले, नहीं तो वो किसी और की चूत में लंड डाल देगा।” उसकी बात सुनकर मैं शरमा गई, लेकिन मेरे मन में फिर से हवस जाग रही थी।

उस रात रवि फिर मेरे कमरे में आया। इस बार वो और बेशर्म था। उसने मुझे बिस्तर पर पटक दिया और मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। मैं चिल्ला रही थी, “रवि… और ज़ोर से… चोद मुझे…” वो मुझे डॉगी स्टाइल में चोद रहा था, और मेरी गांड हवा में थी। मैं चिल्ला रही थी, “हाँ… बेटा… मेरी गांड मार… फाड़ दे मेरी चूत…” वो हँस रहा था, “माँ, तू तो सनी लियोन से भी ज़्यादा रंडी है!”

बेटे के दोस्त विकास का आगमन और थ्रीसम सेक्स का तमाशा

अगले दिन विकास, रवि का दोस्त, हमारे घर आया। वो 20 साल का था, और उसकी आँखों में वही हवस थी, जो मैंने वाले दिन मेरे बेटे रवि की आखों में देखी थी। मैं भी मेरे बेटे के दोस्त से चुदना चाहती थी इस लिए मैंने जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरका दिया, ताकि मेरे खरबूज के आकर के बूब्स का उभार दिखे। जब मैं मेरे बेटे के दोस्त को लुभाने का प्रयास कर रही थी उस दौरान अचानक से मेरे बेटे रवि ने मुझे देखा और हँस पड़ा, “माँ, तू तो अब पूरी रंडी बन गई है मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने के बावजूद तुम्हारी चुदास शांत नहीं हुई क्या जो अब मेरे दोस्त को भी पटा रह हो सेक्स करने के लिए।” मैंने उसे चुप कराया, लेकिन मेरे मन में एक नया विचार आया।

रात को मेरे बेटे का दोस्त विकास हमारे घर रुका। मैंने जानबूझकर अपनी साड़ी ढीली छोड़ी, ताकि मेरे खरबूज के आकर के बूब्स उसे दिखें। रवि और विकास दोनों लेपटोप पर ब्लू फिल्म देख रहे थे, और मैं उनके लिए चाय लेकर गई। मैंने चाय रखते वक्त जानबूझकर विकास के सामने झुका, ताकि मेरे खरबूज के आकर के बूब्स उसकी आँखों के सामने हों और मेरे बूब्स देखकर उसे सेक्स चढ़ जाये। वो घबरा गया, लेकिन उसका लंड तन गया। मेरे बेटे रवि ने हँसकर अपने दोस्त से कहा, “विकास भाई क्या तू भी मेरी माँ की चूत और गांड का मज़ा लेना चाहता है?” मैं शरमा गई, लेकिन मेरी चूत गीली हो रही थी सेक्स करने के लिए।

उस रात, जब विकास सो रहा था, रवि मेरे कमरे में आया। उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया। मैं चिल्ला रही थी, “रवि… और ज़ोर से… चोद मुझे…” तभी अचानक से मेरे बेटे का दोस्त विकास कमरे में आ गया और उसने हम माँ बेटे को अवैध सेक्स संबंध बनाते देख लिया। वो हमें देखकर चौंक गया, लेकिन उसकी आँखों में हवस थी। रवि ने हँसकर कहा, “विकास भाई तू भी आ जा हम तीनो मिलकर थ्रीसम सेक्स करते हैं।”

मेरे बेटे का हरामी दोस्त तो पहले से सही मौके की तलाश में था की कब उसे मौका मिले और वो मेरी चुदाई करे। फिर विकास ने मेरी साड़ी उतारी और मेरे बूब्स को चूसने लगा। मैं बेकाबू हो रही थी। रवि मेरी चूत चोद रहा था, और विकास मेरे रसीले बूब्स को चूस रहा था। मैं चिल्ला रही थी, “हाँ… चोदो… मेरी चूत और गांड आज फाड़ दो… ओह्ह…” दोनों ने मिलकर मुझे रात भर कई सारी सेक्स पोजीशन में चोदा। बेटे और उसके दोस्त के साथ थ्रीसम सेक्स करने के दौरान मैं बार-बार झड़ रही थी, और मेरी चूत रस से लबालब थी। मुझे उन दोनों से चुदवाकर अपनी अन्तर्वासना शांत करवाने में बड़ा आनंत आया…


दिवाली वाली रात चुदवाकर सुहागरात मनाई सगे बेटे के साथ अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का समापन

Diwali wali raat chudwakar suhagraat manayi sage bete ke saath Antarvasna Hindi Threesome Sex Story :- उस रात के थ्रीसम सेक्स के बाद मेरी ज़िंदगी बदल गई थी। बेटे और उसके दोस्त के लंड से चुदवाकर मेरी बैचेनी शांत हो चुकी थी जो कई वर्षों से मेरे अंदर पल रही थी मेरा जवान बेटा रवि और मैं अब हर रात सुहागरात मनाते हैं। मेरे बेटे का दोस्त विकास भी कभी-कभी हमारे साथ शामिल हो जाता है और हम तीनो मिलकर पूरी पूरी रात थ्रीसम सेक्स करते हैं। मैं जानती हूँ कि ये गलत है, लेकिन मेरी चूत की आग मुझे मेरे बेटे और उसके दोस्त से चुदवाने के लिए बहुत मजबूर कर देती है। कमला आंटी को शक हो गया है की मेरे अपने ही सगे बेटे और उसके दोस्त के साथ अवैध सेक्स संबन्ध है, और वो अपनी गंदी हँसी के साथ मुझे आयदिन ताने मारती है की “मंजू साली, तू तो अब अपनी कोख से जन्में सगे बेटे की रंडी बन गई है।” मैं हँसकर टाल देती हूँ, लेकिन मेरे मन में शर्मिंदगी और मज़े का मिश्रण रहता।

मैं अब भी एक माँ हूँ, लेकिन रात के अंधेरे में मैं एक ऐसी विधवा औरत हूँ, जो हर रात अपनी हवस को जीती है और सगे बेटे से चुदवाकर अपनी अन्तर्वासना शांत करती है। रवि और विकास मेरे लिए अब सिर्फ़ बेटा और उसका दोस्त नहीं, बल्कि मेरी बैचेन चूत और गांड की प्यास बुझाने वाले मर्द हैं। मैंने अपनी इच्छाओं को आज़ाद कर दिया है, और अब मैं हर रात उस सुहागरात की आग में जलती हूँ, जो मुझ विधवा औरत को जिंदा रखती है। दोस्तों मुझे बताएँ, आपको ये दिवाली वाली रात चुदवाकर सुहागरात मनाई सगे बेटे के साथ हम माँ बेटे और बेटे के दोस्त की हिंदी थ्रीसम सेक्स कहानी कैसी लगी? क्या आपको रवि और मेरे बीच की सुहागरात की केमिस्ट्री पसंद आई? या फिर विकास का आना आपको और मज़ेदार लगा? क्या कहानी में और गंदा हास्य या और गहरे सीन होने चाहिए थे? आपकी राय मेरे लिए ज़रूरी है।

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