चूत में जलन थी वैद्य ने पूरी रात चुदाई करके इलाज करा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश (Chut mein jalan thi, vaidya ne poori raat chudai karke ilaj kara):- मेरा नाम रेखा शर्मा है, और मैं लखनऊ की एक 29 साल की शादीशुदा औरत हूँ। मेरे पति, राजेश, सेना में हैं और पिछले चार महीनों से घर से कोसों दूर बोर्डर पर तैनात हैं। मेरा जिस्म 36D-28-36 का भरा हुआ है, और मेरी गोरी चमड़ी, लंबे काले बाल, और गोल-मटोल नितंब हर मर्द की नजर खींच लेते हैं। मेरी दो बेटियाँ, 6 और 8 साल की, मेरे साथ रहती हैं।
अपने पति से गांड और चूत की चुदाई नहीं करवा पाने की वजह से, शारीरिक सुख की कमी ने मुझे बेचैन कर रखा था, और मैं अक्सर अपनी उंगलियों से अपनी चूत की आग बुझाती थी। ये कहानी उस रात की है जब मैं अपने गाँव के एक वैद्य, हरिया, के पास अपनी चूत में जलन की शिकायत लेकर गई। चूत में जलन का इलाज करने के बहाने जो हुआ, उसने मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। ये कहानी गंदी गालियों, नंगे जिस्मों, और बेहद उत्तेजक चुदाई की है, जिसमें हास्य, शर्म, और लाचारी के भाव गूंथे हुए हैं।
अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी की शुरुआत :- मैं रेखा, लखनऊ के पास एक छोटे से गाँव, सैरपुर, में रहती हूँ। मेरा घर गाँव के आखिरी छोर पर है, जहाँ चारों तरफ खेत और हरियाली है। मेरे पति राजेश सेना में हैं, और उनकी ड्यूटी की वजह से वो महीनों घर नहीं आते। मेरी दोनों बेटियाँ, रिया और सिया, स्कूल जाती हैं, और दिन में मैं अकेली रहती हूँ। मेरा जिस्म भरा हुआ है—36D के बूब्स, पतली कमर, और गोल-मटोल गांड। गाँव के मर्द मुझे घूरते हैं, और मैं उनकी आँखों में वासना साफ देखती हूँ। लेकिन मैं एक पतिव्रता औरत हूँ, और अपनी जरूरतें मैं खुद पूरी करती हूँ—रात में उंगलियाँ मेरी चूत में जाती हैं, और मैं सिसकारियाँ भरते हुए अपनी आग बुझाती हूँ।
लेकिन पिछले कुछ दिनों से मेरी चूत में जलन और खुजली हो रही थी। रात को नींद नहीं आती थी, और मैं बेचैन होकर करवटें बदलती थी। गाँव में कोई लेडी डॉक्टर नहीं थी, और नजदीकी शहर जाने का वक्त नहीं था। गाँव की एक सहेली, शांति, ने मुझे हरिया वैद्य के बारे में बताया। हरिया हमारे गाँव का मशहूर वैद्य था, जो जड़ी-बूटियों से हर बीमारी का इलाज करता था। लोग कहते थे कि उसका इलाज जादू जैसा है। मैंने सोचा, चलो, एक बार दिखा ही लेती हूँ।
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शाम का वक्त था। मैंने एक हल्की सी नीली साड़ी पहनी, जिसके नीचे मैंने सिर्फ ब्लाउज और पैंटी पहनी थी। मेरे बूब्स साड़ी के ऊपर से उभरे हुए थे, और मेरी गांड हर कदम पर मटक रही थी। हरिया का झोपड़ा गाँव के बाहर एक बड़े पीपल के पेड़ के नीचे था। मैं वहाँ पहुँची तो देखा, हरिया अकेला बैठा था। वो करीब 40 साल का था, काला-कलूटा, मोटी मूंछें, और गठीला बदन। उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मुझे देखते ही और तेज हो गई।
“क्या बात है, रेखा भाभी? बीमार लग रही हो,” उसने मुस्कुराते हुए कहा। उसकी आवाज में एक अजीब सी गर्मी थी। मैंने शर्माते हुए अपनी चूत की जलन और खुजली की बात बताई। उसने मुझे गौर से देखा, और बोला, “आओ, अंदर चलो। ठीक से देखना पड़ेगा।” उसका झोपड़ा छोटा था, लेकिन साफ-सुथरा। एक लकड़ी का तख्त था, जिस पर एक चटाई बिछी थी। उसने मुझे तख्त पर लेटने को कहा। मैं थोड़ी झिझकी, लेकिन फिर लेट गई। मेरी साड़ी मेरे घुटनों तक सरक गई थी, और मेरे गोरे पैर नंगे हो गए थे।
गाँव का देसी वैध हरिया मेरे पास आकर बैठ गया और बोला, “भाभी, साड़ी थोड़ी ऊपर करनी पड़ेगी। चूत को देखना जरूरी है तभी बीमारी का सही से पता चल पायगा की आखिर आपकी चूत में जलन क्यों रहती है।” मैं चौंक गई। गाँव के उस देसी वैध ने इतने खुले शब्दों में “चूत” कहा था कि मेरी साँसें रुक गईं। लेकिन उसकी आवाज में एक अजीब सा आत्मविश्वास था। मैंने धीरे से साड़ी कमर तक उठा दी। मेरी काली पैंटी साफ दिख रही थी। हरिया वैध ने मेरी सेक्सी पैंटी की ओर देखा और बोला, “इसे भी उतारना पड़ेगा, भाभी। नहीं तो दवा कैसे लगेगी आप की चूत के अंदर?” मेरी चूत में पहले से ही गीलापन था, और उस देसी वैध की बात सुनकर मेरी धड़कनें तेज हो गईं। मैंने शर्माते हुए पैंटी उतार दी। अब गाँव के देसी वैध की आखों के सामने मेरी गुलाबी चूत पूरी तरह से नंगी थी, और हरिया की आँखें उस पर टिकी थीं।
मेरी चूत गोरी थी, और उस पर हल्के-हल्के झांट के बाल भी थे। चूत में जलन की वजह से वो थोड़ी लाल हो रही थी। हरिया वैध ने एक छोटी सी शीशी निकाली, जिसमें कोई तेल जैसा था। उसने अपनी उंगली में तेल लगाया और मेरी गुलाबी चूत के होठों पर धीरे से मलना शुरू किया। उसकी उंगली मेरी चूत की फांकों पर ऐसे फिसली रही थी जैसे मक्खन की टिकीया पर छुरी फिसल रही हो, और मैं सिहर उठी। “आह्ह… हरिया वैध, ये क्या कर रहे हो?” मैंने सिसकारी लेते हुए कहा। उसने हँसते हुए जवाब दिया, “अरे भाभी, ये तो चूत की जलन मिटाने की दवा है, यह आपकी चूत की जलन को बिलकुल ठंडा करेगी।” गाँव के उस देसी वैध की उंगली अब मेरी चूत के अंदर जा रही थी, और मैं शर्म और उत्तेजना के मारे तड़प रही थी।
उसके बाद, हरिया ने अपनी दो उंगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं। मेरी चूत इतने दिनों से लंड की प्यासी थी कि वो तुरंत गीली हो गई। मैंने आँखें बंद कर लीं और सिसकारियाँ लेने लगी। “उह्ह… हरिया… धीरे… आह्ह…” मेरी आवाज में वासना साफ सुनाई दे रही थी। हरिया ने मेरी तरफ देखा और बोला, “भाभी, तुम्हारी चूत तो बहुत टाइट है। लगता है, भैया ने इसे ढीला नहीं किया।” उसकी गंदी बात सुनकर मुझे शर्मिंदगी हुई, लेकिन मेरी चूत और गीली हो गई।
गाँव के देसी वैध हरिया की उंगलियों का मेरी चूत के अंदर गंदा खेल शुरू
हरिया ने अब अपनी उंगलियों की रफ्तार बढ़ा दी। उसकी उंगलियाँ मेरी चूत में अंदर-बाहर हो रही थीं, और हर धक्के के साथ मेरी सिसकारियाँ तेज हो रही थीं। “हरिया… ये क्या कर रहा है, कमीने? ये दवा है या कुछ और?” मैंने गुस्से और मजे के मिश्रण में कहा। उसने हँसते हुए जवाब दिया, “अरे भाभी, ये तो बस शुरुआत है। असली दवा तो अभी आएगी।” उसने अपनी पैंट खोली, और उसका लंड बाहर निकला। मैंने देखा तो मेरे मुँह में पानी आ गया। उसका लंड काला, मोटा, और कम से कम 8 इंच लंबा था। उसकी नसें उभरी हुई थीं, और लंड का सुपारा लाल और चमकदार था।
“ये क्या है, हरिया वैद्य? तू ये क्या करने जा रहा है?” मैंने डरते हुए वैद्य से कहा, लेकिन मेरी चूत उस लंड को देखकर और गीली हो गई। उसने मेरी साड़ी पूरी तरह खोल दी, और मेरा ब्लाउज भी उतार दिया। मेरे 36D के बूब्स अब नंगे थे, और मेरे निप्पल टाइट होकर खड़े थे। हरिया ने मेरे बूब्स को अपने हाथों में लिया और जोर से दबाया। “आह्ह… कमीने, धीरे कर!” मैंने चीखते हुए कहा, लेकिन मेरी आवाज में मजे की सिसकारी थी। उसने मेरे निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी, और मैं पागल हो रही थी।
उसके बाद, हरिया वैद्य ने अपनी पैंट और बनियान भी उतार दी। अब वो पूरी तरह नंगा था। उसका गठीला बदन और मोटा लंड देखकर मेरी चूत में आग लग गई। मेरी चूत का इलाज करने के लिए गाँव के उस देसी वैद्य ने मेरी दोनों टांगें चौड़ी कीं और थूक लगाकर अपना लंड मेरी टाइट चूत पर रगड़ने लगा। “हरिया… ये गलत है… मैं शादीशुदा हूँ…” मैंने कमजोर आवाज में कहा, लेकिन मेरी चूत उसके लंड को अंदर लेने के लिए तड़प रही थी। उसने हँसते हुए कहा, “अरे भाभी, ये तो दवा है। तेरी चूत की जलन को ये लंड ही ठीक करेगा।” उसने एक जोरदार धक्का मारा, और उसका मोटा लंड मेरी चूत में पूरा घुस गया।
“आह्ह… मर गई… हरिया… तेरा लंड तो मेरी चूत फाड़ देगा!” मैं चीख पड़ी। उसका लंड इतना मोटा था कि मेरी चूत में दर्द और मजा दोनों हो रहे थे। उसने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के के साथ मेरे बूब्स उछल रहे थे, और मेरी चूत गीली होकर फच-फच की आवाज कर रही थी। मैंने अपनी टांगें और चौड़ी कर दीं, और हरिया की गांड को पकड़कर उसे और गहराई में धकेलने लगी। “चोद, कमीने! और जोर से चोद! मेरी चूत को फाड़ दे!” मैं चिल्लाने लगी।
गाँव के देसी वैध का मेरी गांड में लंड और मुँह में रस
सेक्स करने के दौरान हरिया वैद्य अब अपनी पूरी रफ्तार में था। गाँव के उस देसी वैध का गधे जैसा तगड़ा लंड मेरी चूत में बार-बार अंदर-बाहर हो रहा था, और मेरे बूब्स हवा में लटके हुए जोर जोर से झूल रहे थे। उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मेरी गांड को थप्पड़ मारने लगा। “क्या मस्त गांड है, भाभी! इसे तो आज लंड की सैर करानी पड़ेगी!” उसने गंदी हँसी के साथ कहा। उसने अपनी उंगली मेरी गांड के छेद में डाली, और मैं सिहर उठी। “नहीं, हरिया… वहाँ नहीं…” मैंने डरते हुए कहा, लेकिन उसने मेरी एक न सुनी। उसने अपनी उंगली पर तेल लगाया और मेरी गांड में डाल दिया।
पहले तो दर्द हुआ, लेकिन फिर मजा आने लगा। हरिया ने अब अपने लंड पर तेल लगाया और मेरी गांड के छेद पर रख दिया। “हरिया, ये कौनसा इलाज कर रहा है, हरामी? तेरे इस गधे के लंड के जैसे लंबे मोटे लंड से मेरी गांड फट जाएगी!” मैंने चीखते हुए कहा। उसने हँसते हुए जवाब दिया, “अरे भाभी, ये तो असली दवा है इसी से तो आपका इलाज होगा। इस इलाज से तेरी गांड को भी ठंडक मिलेगी।” फिर उसने एक जोरदार धक्का मारा, और उसका गधे जैसा लंड मेरी टाइट गांड में आधा घुस गया। मैं दर्द से चीख पड़ी, लेकिन हरिया ने मेरी कमर पकड़कर और जोर से धक्का मारा। अब उसका पूरा लंड मेरी गांड में था, और मैं शर्म, दर्द, और मजे के मारे तड़प रही थी।
हरिया वैद्य ने अपने गधे जैसे लंबे और मोटे लंड से मेरी टाइट गांड को चोदना शुरू किया। गांड चुदाई के दौरान हर धक्के के साथ मेरी चीखें तेज हो रही थीं। “आह्ह… हरिया… तेरा लंड मेरी गांड फाड़ रहा है… और जोर से चोद, कमीने!” मैं चिल्ला रही थी। उसने मेरे बूब्स पकड़ लिए और उन्हें जोर-जोर से मसलने लगा। मेरी चूत अब इतनी गीली थी कि रस टपक रहा था। हरिया ने मुझे पलट दिया और मेरा मुँह अपने लंड के सामने कर दिया। “चूस, भाभी! अपने मुँह से मेरे लंड को चाट!” उसने हुक्म दिया।
मैंने उस देसी वैध का गधे जैसा लंड अपने मुँह में लिया और किसी बदचलन रंडी के जैसे गपागप चूसने लगी। उसका लंड मेरे गले तक जा रहा था, और मैं उसका स्वाद ले रही थी। हरिया मेरे बाल पकड़कर मेरे मुँह को चोदने लगा। “हाँ, रेखा… तू तो रंडी जैसी चूस रही है… और जोर से चूस!” उसने गंदी गाली दी। मैंने उसका लंड और तेजी से चूसा, और कुछ ही पलों में उसने मेरे मुँह में अपना रस छोड़ दिया। मैंने उसका सारा रस गटक लिया और उसका लंड चूस-चूसकर साफ कर दिया।
पूरी रात चुदाई करी गाँव के देसी वैध ने चूत में जलन का इलाज करने के बहाने
पूरी रात भर चुदाई करते करते अब हम दोनों बुरी तरह थक चुके थे, लेकिन मेरी चूत अभी भी भूखी थी अभी तक मेरी चूत का सही ढंग से इलाज नहीं हुआ था। हरिया ने मुझे अपनी गोद में उठाया और झोपड़े के एक कोने में ले गया, झोपड़े के अंदर जहाँ एक पुराना पलंग था। उसने मुझे पलंग पर लिटाया और मेरे ऊपर चढ़ गया। “अब तेरी चूत को पूरी रात चोदूंगा, रेखा। तैयार रह!” उसने हँसते हुए कहा। उसने अपना गधे के लंड का जैसा लंड मेरी टाइट चूत में थूक लगाकर डाला और तेज-तेज धक्के मारने लगा। मेरी चूत फच-फच की आवाज कर रही थी, और मेरे बूब्स हर धक्के के साथ उछल रहे थे।
मैंने अपनी टांगें हरिया वैद्य की कमर पर लपेट लीं और उसे और गहराई में खींचने लगी। “चोद, हरिया मुझे आज अपनी रंडी समझकर चोद और आज मेरी चूत की खुजली का सही ढंग से इलाज कर दे! आज तो मेरी चूत का इलाज करते करते इसे फाड़ दे! तेरा गधे जैसा लंड कितना मस्त है… आह्ह… और जोर से हरामी !” मैं चुदाई करवाते करवाते जोर जोर से चिल्ला रही थी। हरिया ने मेरी चूचियों को मुँह में लिया और चूसने लगा। उसकी जीभ मेरे बूब्स के निप्पल पर गोल-गोल घूम रही थी, और मैं वासना के मारे पागल हो रही थी। उसने मुझे फिर से घोड़ी बनाया और मेरी गांड में लंड डाल दिया। इस बार दर्द कम था, और मजा ज्यादा। मैं अपनी गांड पीछे-आगे कर रही थी, और हरिया मेरी कमर पकड़कर मुझे चोद रहा था।
चुदाई करते करते रात के करीब 3 बज चुके थे। पूरी रात भर चुदाई करते करते हम दोनों पसीने से तर-बतर हो चुके थे। हरिया वैद्य ने मुझे अपनी गोद में उठाया और खड़े-खड़े चोदने लगा। उस देसी वैद्य का लंड मेरी चूत में इतनी गहराई तक जा रहा था कि मैं चुदाई के दौरान जोर जोर से चीख रही थी। “आह्ह… हरिया… तू तो मेरी चूत का भोसड़ा बना देगा… और जोर से चोद!” मैं चिल्ला रही थी। उसने मेरी एक टांग उठाई और और तेजी से चोदने लगा। मेरी चूत में कसाव बढ़ने लगा, और मैं झड़ गई। मेरा पानी उसकी जाँघों पर टपक रहा था। हरिया ने भी अपनी रफ्तार बढ़ाई और मेरी चूत में अपना रस छोड़ दिया।
चूत में जलन थी वैद्य ने पूरी रात चुदाई करके इलाज करा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
Chut mein jalan thi, vaidya ne poori raat chudai karke ilaj kara Antarvasna Hindi Sex Story :- हम दोनों पलंग पर लेट गए, एक-दूसरे से लिपटकर। गाँव के देसी वैध से पूरी रात चुदाई करवाने के बाद मेरी चूत और गांड में हल्का दर्द था, लेकिन मन में एक अजीब सी तृप्ति थी जो मुझे मेरे पुरे जीवन में पहली बार महसूस हुई थी। हरिया वैध ने मुझे कुछ जड़ी-बूटियाँ दीं और बोला, “भाभी, ये रोज लगाना अपनी गांड और चूत के अंदर। और हाँ, अगर फिर से चूत के अंदर जलन या खुजली हो तो मेरे पास आ जाना मैं फिर से मेरे लंड पर दवा लगाकर अंदर तक लगा दूंगा।” उसकी आँखों में वही गंदी चमक थी। मैंने कपड़े पहने और घर लौट आई। रास्ते में मुझे शर्मिंदगी हो रही थी, लेकिन मेरी चूत की आग बुझ चुकी थी और चूत में जलन का भी बड़े अच्छे से इलाज हो चूका था।
इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी में रेखा और गाँव के देसी हरिया वैध के बीच की चुदाई ने मेरी जिंदगी को एक नया रंग दिया। मैं अब भी पतिव्रता हूँ, लेकिन हरिया का गधे के जैसा लंड मेरी चूत की प्यास बुझाने के लिए काफी था। अगर आपको ये कहानी पसंद आई, तो कृपया बताएँ कि आपको कहानी का कौन सा हिस्सा सबसे ज्यादा उत्तेजक लगा। क्या आपको रेखा का किरदार पसंद आया? क्या हरिया की गंदी बातें और चुदाई का तरीका आपको उत्तेजित कर गया? अपनी राय जरूर बताएँ।


