HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesमाँ की सहेली के दूध से भरे बोबे चूसकर चूत गांड फाड़ी

माँ की सहेली के दूध से भरे बोबे चूसकर चूत गांड फाड़ी

माँ की सहेली के दूध से भरे बोबे चूसकर चूत गांड फाड़ी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का सारांश :- एक 21 साल का जवान कॉलेज स्टूडेंट अपनी कामुक इच्छाओं को लेकर संघर्ष कर रहा है। उसे बड़ी उम्र की महिलाएं खासकर अपनी मां की हमउम्र औरतें बहुत आकर्षित करती हैं। उनकी अनुभवी देह, सौम्य स्वभाव और चुदाई के प्रति उनका पूर्ण समर्पण उसे दीवाना बना देता है।

एक दिन पड़ोस में रहने वाली एक सुंदर आंटी के साथ उसकी मुलाकात होती है और धीरे धीरे बातें बढ़ती जाती हैं। फिर वो पल आता है जब दोनों की कामुकता एक दूसरे को खींच लेती है। घोड़ी बनाकर गांड चुदाई, लंड चूसना, चूत चाटना जैसी कट्टर चुदाई से भरी यह कहानी युवा जोश और परिपक्व कामुकता के मिलन को बेहद ज्वलंत तरीके से पेश करती है। पाठक इस रोमांचक यात्रा में खो जाएंगे जहां हर स्पर्श और हर धक्का दिल को छू लेगा।


Maa ki saheli ke doodh se bhare bobe chuskar chut gaand faadi Antarvasna Hindi Sex Kahani :- मैं अर्जुन हूँ इक्कीस साल का जवान कॉलेज स्टूडेंट जो दिल्ली के एक शांत से इलाके में रहता हूँ। मेरी माँ की उम्र पैंतालीस साल है और मुझे उनकी हमउम्र महिलाओं को देखकर हमेशा से ही तीव्र उत्तेजना होती है। उनकी मोटी चूतड़ भारी बोबे और अनुभवी भोसड़ी देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो जाता है। मैं अक्सर सोचता रहता हूँ कि ऐसी औरतें चुदाई करते समय कितनी रंडीबाज बन जाती हैं और दिल से लंड लेती हैं।

मेरे मन में रोजाना यही विचार घूमता है कि कैसे मैं किसी बड़ी उम्र की औरत को घोड़ी बनाकर उसकी गांड में अपना मोटा लौड़ा ठोकूँ और पूरा माल उसके अंदर छोड़ दूँ। हस्तमैथुन (Masturbation) करते समय भी मैं इन्हीं कल्पनाओं में खो जाता हूँ और मुट्ठी मारकर गरम वीर्य निकालता हूँ। ये महिलाएँ साफ दिल की होती हैं और सेक्स में पूरी तरह से डूबकर चोदवाती हैं जिससे मुझे असीम आनंद मिलता है।

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माँ की सहेली के दूध से भरे बोबे चूसकर चूत गांड फाड़ी Maa ki saheli ke doodh se bhare bobe chuskar chut faadi Antarvasna Hindi Sex Kahani
Maa ki saheli ke doodh se bhare bobe chuskar chut faadi Antarvasna Hindi Sex Kahani

मेरी कॉलेज की पढ़ाई के बीच भी मैं पड़ोस की अधेड़ औरतों को घूरता रहता हूँ। उनकी साड़ी में लिपटी चूतड़ देखकर मेरे अंडकोष में खलबली मच जाती है। एक दिन मैंने सोचा कि अब मौका निकालना ही पड़ेगा वरना मेरा लंड फट जाएगा। मेरी माँ अक्सर कहती हैं कि पड़ोस में मीनाक्षी आंटी बहुत अच्छी हैं लेकिन मुझे तो उनकी चौड़ी कमर और बड़े निप्पल वाली चुचियों का ख्याल आता है।

मैं रात भर उनके बारे में सोचकर लंड रगड़ता रहता हूँ और कल्पना करता हूँ कि उनकी रसदार चूत में उंगली डालकर चूत का रस चाटूँगा। ये सब विचार मुझे और ज्यादा कामुक बना देते हैं। मैं जानता हूँ कि ऐसी औरतें जब चुदाई में आती हैं तो पूरी तरह से वेश्या बन जाती हैं लेकिन दिल से चोदवाती हैं।

फिर एक दिन मेरी माँ किसी रिश्तेदार की शादी में बाहर गईं और पूरे हफ्ते के लिए चली गईं। घर अकेला था और तभी मीनाक्षी आंटी आ गईं जो मेरी माँ की पुरानी सहेली हैं। वे अड़तालीस साल की हैं विधवा हैं और उनका शरीर अभी भी बहुत आकर्षक है।

उन्होंने कहा कि माँ ने उन्हें बुलाया था घर देखने को। मैंने उन्हें अंदर बिठाया और उनकी साड़ी से बाहर झांकती चुचियों को देखकर मेरा लंड पैंट में तन गया। वे मुस्कुराईं और बोलीं अर्जुन बेटा तुम बड़े हो गए हो। मैंने मन ही मन सोचा कि आंटी अब मैं तुम्हारी भोसड़ी फाड़ने वाला हूँ। उनकी बातों में एक छिपी हुई प्यास झलक रही थी।

उसके बाद हम दोनों चाय पीने बैठे और बातें करने लगे। मीनाक्षी आंटी ने बताया कि पति के जाने के बाद वे बहुत अकेली हैं और रातें बिना चुदाई के कटती हैं। मैंने हिम्मत करके कहा आंटी आप तो अभी भी बहुत कामुक लगती हैं और आपकी चूतड़ देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।

वे शर्मा गईं लेकिन उनकी आँखों में चमक आ गई। मैंने उनके हाथ को छुआ और धीरे से बोबों की तरफ बढ़ाया। वे सिसक उठीं और बोलीं अर्जुन तुम्हारा लंड तो बहुत मोटा दिख रहा है। मैंने कहा आंटी इसे छूकर देख लो यह तुम्हारी गांड मारने के लिए तैयार है। तभी माहौल गर्म हो गया।

आंटी के साथ पहला कामुक स्पर्श और लंड चूसने की शुरुआत

इसके बाद मैंने मीनाक्षी आंटी को अपने पास खींचा और उनके होंठों पर गहरा चुंबन किया। उनकी जीभ मेरी जीभ से उलझ गई और हम दोनों सांसें तेज चले लगे। मैंने उनकी साड़ी का पल्लू खींचा और बड़े बोबे बाहर निकाल लिए। उनके निप्पल तने हुए थे और मैंने उन्हें मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया और उनका दूध पीने लगा। आंटी सिसकार रही थीं मुझे अपने बूब्स का दूध पिलाते हुए और कह रही थीं अर्जुन चूसो मेरे चुचों को जोर से इनमें बहुत दूध है बेटा आज तुम सारा का सारा दूध ख़त्म कर देना।

आंटी के दूध से भरे बोबे चूसते चूसते अब मेरा लंड अब पैंट फाड़ने को था। उनका दूध पीकर मेरे अंदर ताकत आ गयी थी उनकी चुदाई करके गांड और चूत फाड़ने की। माँ की सहेली ने मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध स्थापित करने के इरादे से मेरी पैंट उतार दी और मेरा खड़ा लंड देखकर बोलीं वाह क्या मोटा लौड़ा है भोसड़ीके इसे मुंह में ले लूँ। फिर वे घुटनों के बल बैठ गईं और मेरा लंड पूरा मुंह में ले लिया। उनकी गरम जीभ मेरे लंड की नसों पर फिसल रही थी और वे जोर जोर से चूस रही थीं। मैं उनके सिर को पकड़कर मुंह चुदाई कर रहा था और सोच रहा था कि ये रंडी कितनी अच्छी लंडचूस है।

मेरा लंड माँ की सहेली के मुंह में पूरा गीला हो चुका था और वे गोटे भी चूस रही थीं। मैंने कहा आंटी तुम्हारी मुंह चुदाई बहुत बढ़िया है अब अपनी चूत दिखाओ। उन्होंने साड़ी ऊपर की और उनकी बालों वाली रसदार चूत सामने आई। मैंने झुककर चूत चाटना शुरू किया। उनकी चूत से मीठा रस निकल रहा था और मैं उसका पूरा स्वाद ले रहा था। आंटी चीख रही थीं अर्जुन चूत चाटो जोर से मेरी भोसड़ी को चाट डालो। मेरी उंगली उनके गांड के छेद में घुस गई और वे और ज्यादा उत्तेजित हो गईं। हम दोनों की सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूंज रही थीं।

फिर मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया और अपना लंड उनकी चूत पर रगड़ा। वे चिल्लाईं अर्जुन डाल दो अपना मोटा लंड मेरी टाइट चूत में। मैंने एक जोरदार धक्का मारा और पूरा लंड उनकी भोसड़ी में घुस गया। उनकी चूत बहुत गरम और रस से भरी थी। मैं अपनी हवस मिटाने के लिए बिलकुल जंगली होकर जोर जोर से आंटी को चोदने लगा और उनके बोबे दबा रहा था। आंटी कह रही थीं चोदो बेटा मुझे जोर जोर से चोदो मेरी चूत फाड़ दो। चुदाई की आवाज पूरे घर में फैल रही थी और मैं लगातार धक्के मार रहा था।

उसके बाद मैंने मेरी माँ की सहेली को घोड़ी बनाया और उनकी मोटी गांड को थपथपाया। उनका गांड का छेद देखकर मेरा लंड और तन गया। मैंने लंड पर थूक लगाया और धीरे से नंगी आंटी की गांड में डाला। ऐनल सेक्स के दौरान आंटी दर्द के मारे बहुत जोर से चीखीं लेकिन बोलीं मारो अर्जुन बेटा मेरी गांड और इसे आज फाड़ दो। मैंने पूरा लंड उनके गुदे में ठोंक दिया और जोर से गांड मारने लगा। उनकी गांड बहुत टाइट थी और मैं हर धक्के पर माल छोड़ने को हो रहा था।

मेरी माँ की सहेली किसी धंधा करने वाली रंडी की तरह चुद रही थीं और कह रही थीं और जोर से गांड की चुदाई करो। मैंने कई मिनट तक उनकी गांड चोदी और फिर माल उनके अंदर छोड़ दिया। गरम वीर्य उनकी गांड से बह रहा था। हम दोनों पसीने से तर थे और थक गए थे लेकिन मेरी भूख अभी बाकी थी।

दूसरी रात की तीव्र चुदाई में आंटी की चूत और गांड दोनों फाड़ने का पूरा मजा

अगली सुबह हम दोनों नंगे लेटे थे और मैं फिर से मेरी माँ की सहेली के दूध से भरे बोबे सहला रहा था। मीनाक्षी आंटी ने कहा अर्जुन तुम्हारा लंड तो कभी नहीं थकता। मैंने हँसकर कहा आंटी आज पूरे दिन तुम्हारी चूत और गांड चोदूँगा। हमने नहाया और फिर बिस्तर पर लौट आए। उन्होंने मेरा लंड चूसना शुरू किया और मैं उनकी चूत में उंगलियाँ डाल रहा था। उनका चूत का रस मेरी उंगलियों पर चिपक रहा था।

फिर मैंने उन्हें दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से लंड डाल दिया। उनकी चूत अब ढीली हो गई थी लेकिन फिर भी बहुत मजा दे रही थी। मैं तेज तेज धक्के मार रहा था और उनके निप्पल मरोड़ रहा था। आंटी चुदवाते हुए जोर जोर से चिल्ला रही थीं चोदो मेरी भोसड़ी को फाड़ दो अर्जुन बेटा आज। हम दोनों की चुदाई की आवाजें पूरे फ्लैट में गूंज रही थीं।

दोपहर को हमने खाना खाया और फिर से शुरू कर दिया। इस बार मैंने उन्हें कुर्सी पर बैठाकर चूत चाटा और वे मेरे लंड पर बैठ गईं। वे ऊपर नीचे उछल रही थीं और कह रही थीं मेरा लंड लो पूरा अंदर ले लो। उनकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी। मैंने उनके कुल्हे पकड़कर और जोर से चोदा।

शाम को फिर घोड़ी बनाकर गांड मारी। मैंने उनके गांड के छेद को चौड़ा किया और पूरा मोटा लंड अंदर डाल दिया। वे चीख रही थीं लेकिन मजे ले रही थीं। मैंने मेरी माँ की सहेली से कहा आंटी तुम्हारी गांड बहुत स्वादिष्ट है आज इसे पूरी तरह फाड़ दूँगा। कई घंटे तक गांड चुदाई चली और मैंने दो बार माल उनके गुदे में छोड़ा।

रात को हम थककर सो गए लेकिन आधी रात के बाद बीच में जागकर फिर से बिलकुल जंगली होकर चुदाई की। इस बार मुखमैथुन और गुदा सेक्स का पूरा कम्बिनेशन था। मीनाक्षी आंटी पूरी तरह से मेरी रंडी बन गई थीं और हर पोजीशन में चोदवाती जा रही थीं।

तीसरे दिन की तीव्र चुदाई और आंटी के अंदर बार बार माल छोड़ने का रोमांच

तीसरे दिन मैंने मीनाक्षी आंटी को पूरी तरह नंगा करके बिस्तर पर लिटाया और उनके पूरे नंगे शरीर पर चुम्बन करने लगा। उनकी जांघों के बीच चूत चाटते हुए मैं उंगली गांड में डाल रहा था। वे सिसकार रही थीं और मेरे लंड को मुट्ठी में लेकर रगड़ रही थीं। मैंने कहा आज तुम्हें तीनों छेद चोदूँगा।

फिर हमने स्नानघर में बिलकुल जंगली होकर चुदाई की अपनी कामवासना शांत करने के लिए। पानी के नीचे खड़े होकर मैंने उनकी चूत में लंड डाला और जोर से चोदा। पानी की छींटें चुदाई की आवाज के साथ मिल रही थीं। आंटी चिल्ला रही थीं और मेरी पीठ पर नाखून गाड़ रही थीं।

बाहर आकर हमने फिर से जंगली सेक्स करा और मैंने उन्हें घोड़ी बनाकर गांड मारी। मैंने माँ की सहेली के बाल पकड़कर घोड़ी बनाया और लंड गांड में ठोंका जिससे उनकी गांड में से उनकी लेट्रिंग बाहर निकल आयी। उनकी गांड अब ढीली हो गई थी लेकिन उनकी गांड से लेट्रिंग निकलते देख गांड मारने का मज़ा दोगुना हो गया था। मैं लगातार धक्के मारता रहा और वे कह रही थीं फाड़ दो मेरी गांड को अर्जुन बेटापूरा माल अंदर छोड़ दो।

शाम तक हमने कई बार सेक्स किया। मैंने उनके मुंह में लंड डालकर मुखमैथुन (Blowjob) कराया और फिर चूत और गांड दोनों में माल छोड़ा। मीनाक्षी आंटी पूरी तरह संतुष्ट थीं और कह रही थीं तुमने मेरी सारी भूख मिटा दी। अंत में जब माँ वापस आने वाली थीं तो हमने आखिरी चुदाई की। इस बार बहुत धीरे और गहरी चुदाई थी जिसमें हम दोनों भावनात्मक रूप से जुड़ गए थे।

आखिरी चुदाई का भावुक और कट्टर मिलन जो दोनों को हमेशा याद रहेगा

आखिरी रात हमने बिस्तर पर लेटकर लंबी चुदाई की। मैंने उनकी चूत में लंड डालकर धीरे धीरे चोदा और दूध से भरे बोबे चूसकर बुध पिया। आंटी रो रही थीं खुशी के आंसू और कह रही थीं अर्जुन तुमने मुझे नई जिंदगी दी। मैंने कहा आंटी तुम्हारी चूत और गांड अब मेरी है हमेशा।

फिर मैंने उन्हें घोड़ी बनाया और आखिरी बार गांड में लंड डाला। पूरा लंड अंदर बाहर करते हुए मैंने जोर से चोदा और माल छोड़ दिया। वे चीखकर झड़ गईं। हम दोनों थककर एक दूसरे से लिपटे सो गए। मीनाक्षी आंटी अब मेरी गुप्त प्रेमिका बन गई हैं और जब भी मौका मिलता है हम कट्टर चुदाई करते हैं।


अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Maa ki saheli ke doodh se bhare bobe chuskar chut faadi Antarvasna Hindi Sex Kahani :- इस पूरी चुदाई की कहानी के बाद मैंने महसूस किया कि बड़ी उम्र की महिलाओं के साथ सेक्स न सिर्फ शारीरिक सुख देता है बल्कि भावनात्मक रूप से भी बहुत संतोष देता है। मीनाक्षी आंटी के साथ मेरी ये मुलाकात ने मुझे और ज्यादा आत्मविश्वासी बना दिया और अब मैं अपनी कामुक इच्छाओं को खुलकर जीता हूँ। आंटी भी अब अपना अकेलापन भूलकर खुश रहती हैं। पाठकों को उम्मीद है कि यह कहानी आपको भी उत्तेजित करेगी और आप अपनी कल्पनाओं को जीने का साहस करेंगे। ऐसी और कहानियाँ पढ़ने के लिए कमेंट में बताएं।

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