बिलकुल मुफ्त में पढ़ें बारिश की रात तूफ़ानी चुदाई से पहले बेटे ने चाटी बेहया सौतेली माँ की रसीली चूत अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी – Bilkul muft mein padhein Baarish ki raat toofani chudai se pehle bete ne chaati behaya sauteli maa ki raseeli chut antarvasna Hindi sex kahani – Read absolutely free On a rainy night, before the stormy fucking, the son licked his shameless step-mother’s juicy pussy. Erotic Hindi sex story full of inner lust …
मैं खिड़की के पास खड़ा लखनऊ की उस सड़क को देख रहा था जो अगस्त की मूसलाधार बारिश में पूरी तरह डूब चुकी थी। मेरा नाम रोहन है और मैं 22 साल का एक अकेला लड़का हूँ जिसकी ज़िंदगी में बस एक ही खूबसूरत तूफ़ान था, मेरी सौतेली माँ नेहा। वह महज़ 34 साल की थी, लेकिन उसका 36D का बदन और गोरे चेहरे का जादू मेरे बीस साल के खून को हर रात उबाल देता था।
बारिश की तेज़ बूंदें शीशे से टकराकर एक भीगी हुई धुन बुन रही थीं और हवा में भीनी-भीनी मिट्टी की गंध के साथ उसके शरीर की महक जैसे मिलकर मुझे पागल किए दे रही थी। मैं उस आवाज़ को जानता था, वह रसोई से आ रही चूड़ियों की खनक और गीली साड़ी के पल्लू के फड़फड़ाने की आहट थी। पिताजी किसी काम से बाहर थे और यह मौसम जैसे हमारे बीच की दूरी को बारिश की तरह पिघलाने आया था।
बिलकुल मुफ्त में पढ़ें बारिश की रात तूफ़ानी चुदाई से पहले बेटे ने चाटी बेहया सौतेली माँ की रसीली चूत अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

मैंने अपनी साँसों को काबू करने की कोशिश की, लेकिन मेरे पजामे के अंदर का लंड पहले ही तनकर सख़्त हो चुका था। नेहा माँ… नहीं, आज वह मुझे सिर्फ़ एक औरत लग रही थी, एक ऐसी कामुक औरत जिसकी हर अदा मेरे दिमाग़ की नसों में बिजली दौड़ा रही थी। मैंने मुड़कर देखा तो वह एक पतली सफ़ेद साड़ी में लिपटी हुई रसोई से बाहर आ रही थी, उसके गीले बाल कंधों पर चिपक रहे थे और चेहरे पर एक अनकही प्यास तैर रही थी।
उसके पैरों की आहट जब मेरे करीब पहुँची तो मेरे अंडकोषों में एक भारीपन सा दौड़ गया। “रोहन, बेटा, तुम्हारा दिमाग़ कहाँ भटक रहा है?” उसकी आवाज़ में मिठास से ज़्यादा एक तीखा खिंचाव था, जैसे वह मेरे मन की हलचल को सूंघ रही हो। मैंने उसकी आँखों में देखा, वे गहरी काली झीलें जहाँ शर्म और एक जंगली चाहत दोनों एक साथ तैर रही थीं। आज उसने साड़ी के नीचे ब्लाउज़ नहीं पहना था, और भीगे कपड़े के पीछे उसके स्तनों की तनी हुई नोकें साफ़ झलक रही थीं।
मैंने हिम्मत जुटाकर एक कदम और बढ़ाया और अपनी उँगलियाँ उसकी कलाई पर रख दीं। उसकी त्वचा बारिश की बूंदों से ठंडी थी, मगर अंदर का खून किसी भट्टी की तरह सुलग रहा था। “माँ, तुम आज बहुत अलग लग रही हो,” मेरा गला सूख रहा था जब मैंने जानबूझकर ‘माँ’ शब्द को हल्का सा तोड़ा। उसने अपने होंठ चबाए, एक ऐसी हरकत जिसने मेरे लंड की रग में एक और ज़ोरदार धकधकी भर दी। बाहर बादल गरजे और अंदर हमारी साँसें एक दूसरे के चेहरे पर पड़ने लगीं।
“रोहन… यह ग़लत है,” उसने फुसफुसाते हुए कहा, लेकिन उसने अपना हाथ नहीं छुड़ाया। उसके शब्द हवा में घुलते जा रहे थे और उसकी नाक की फड़फड़ाहट मुझे बता रही थी कि अंदर ही अंदर उसकी चूत शायद मुझसे भी ज़्यादा पिघल चुकी है। मैंने अपनी उँगलियाँ धीरे-धीरे उसकी हथेली तक सरकाईं और उसकी नब्ज़ मेरी उँगलियों के नीचे एक पागल ढोल की तरह बजने लगी। उसने अचानक अपनी आँखें बंद कीं और एक लंबी साँस छोड़ी जिसमें उसकी पूरी उम्र का दबा हुआ हरम सिसक रहा था।
मैंने मेरी कामुक सौतेली माँ को दीवार से सटाकर उसके माथे पर अपनी साँस गिराई और उसके पूरे शरीर की गर्मी मेरे जिस्म में उतरने लगी। नेहा की साड़ी का पल्लू खिसककर नीचे गिर गया और उसका वह भरा-भरा सीना अब सिर्फ़ एक पतले गीले कपड़े से ढका था। मैंने सीधे उसके बोबों की तरफ देखा, जिन पर बारिश की कुछ बूंदें अब भी चमक रही थीं। “तुम्हारी बोबों की मालिश करने का मन कर रहा है, नेहा,” मैंने पहली बार उसका नाम ऐसे लिया जैसे कोई रंडीबाज किसी धंधेवाली को बुलाता है, और उसने मेरी आँखों में बिना किसी शिकायत के देखा।
मेरी हथेलियाँ काँपते हुए ऊपर उठीं और पहली बार जब उन्होंने उसकी भीगी साड़ी के ऊपर से उसके दाहिने स्तन को पूरी तरह दबोचा, तो नेहा के मुँह से एक दबी-सी हिस्सी निकल गई। उसका स्तन 36D का था, एक पक्का भारी फल जो मेरी उँगलियों के बीच पूरी तरह समा नहीं रहा था। मैंने धीरे-धीरे उसे मसलना शुरू किया, पहले हल्की गोलाइयों में, फिर ज़ोर से, मानो आटा गूँध रहा हूँ। नेहा ने अपना सिर पीछे दीवार से सटा लिया और उसकी कमर अपने आप आगे की तरफ झुकती चली गई, जैसे मेरी हथेलियों में घुल जाना चाहती हो।
“तेरी चूचियाँ कितनी गरम हैं, नेहा,” मैंने उसके कान में गुनगुनाया और मेरी उँगलियाँ उसकी निप्पलों को ढूँढते हुए उन्हें हल्का-सा चिकोटने लगीं। हर चिकोटी के साथ उसकी चूत से एक बारीक-सी सिहरन उठती और उसके कुल्हों तक दौड़ जाती। मैंने साड़ी को पूरी तरह खिसका दिया और उसके दोनों बोबों को खुले आसमान में देखा, दूधिया गोरा माँस, जिस पर नसों की हल्की नीली नदियाँ बह रही थीं। उसकी निप्पलें सिकुड़ी हुई काली पपड़ियाँ बन चुकी थीं, और मैंने बिना एक पल गँवाए उन्हें अपने होंठों में भर लिया।
दाँतों के बीच उस कड़ी निप्पल को दबाकर चूसने का अंदाज़ ऐसा था जैसे मैं उसकी रूह को खींच रहा हूँ। नेहा ने मेरे बालों को ज़ोर से पकड़ा और “अह्ह्ह… बेटा… और चूस,” कहकर अपना सीना मेरे चेहरे पर घिसने लगी। मेरी जीभ उसकी निप्पल के चारों ओर गोल-गोल घूमती, फिर तेज़ी से उसे चाटती और उसके दूसरे बोबे को हाथ से ऐसे बेरहमी से दबाती जैसे कोई पूरबिया गांड दबा रहा हो। उसके मुँह से निकलने वाली गालियाँ और सिसकियाँ अब धीरे-धीरे खुलती जा रही थीं, “मेरी चूत का रस अब नीचे तक टपक रहा है, रोहन… सूँघ, मेरी बालों वाली चूत की खुशबू ले।”
मेरे घुटने ज़मीन पर टिक गए और मेरा चेहरा अब मेरी सौतेली माँ की सेक्सी नाभि (Sexy Navel) के बिल्कुल सामने था। उसने अपनी साड़ी की तहें उठाकर खुद ही एक पाँव सोफ़े की बाँह पर रख दिया और मेरे सामने पहली बार उसकी रसदार चूत खुलकर आ गई। काली और मोटी झांट के बालों के पीछे वह फूली हुई बुर चमक रही थी, उसके लबों पर एक चिपचिपी-सी सफ़ेदी लगी हुई थी जिसे देख मेरे मुँह में पानी भर आया। नेहा की चूत की गंध समुंदर की नमकीन लहरों और ताज़ा खिले चमेली के बीच का एक तीसरा ही कोई नशीला जंक्शन थी, जिसने मेरे दिमाग़ की सब सोच को पूरी तरह मिटा दिया।
मैंने अपनी जीभ चपटी करके पूरे फुद्दी के छेद पर फेरी और नेहा की पिंडलियाँ काँप उठीं। पहले चाट हल्की थी, बस एक स्वाद लेने की कोशिश, लेकिन जैसे ही उसका नमकीन और ज़रा-सी मीठी चूत का रस मेरे गले के नीचे उतरा, मैं पागलों की तरह पूरी बुर को मुँह में भरकर चूसने लगा। “हाँ… ऐसे ही चूस मेरी भोसड़ी को,” वह ज़ोर से चीख़ी और उसने अपने कुल्हे मेरी जीभ पर ऐसे पटके जैसे कोई छिनाल सड़क पर कमर तोड़ चुदाई करवा रही हो। मेरी उँगली धीरे से उसके गीले भोसड़े के अंदर गई और गर्म माँस की दीवारों ने उसे ऐसे जकड़ा जैसे सालों की प्यासी योनि किसी मर्दाना हाथ का स्वागत कर रही हो।
जब मेरी जीभ उसकी चूत के छेद में बार-बार अंदर-बाहर हो रही थी, तब मेरी नाक की नोंक उसकी झांट के बालों पर रगड़ खाकर छिल रही थी। उसकी गुदा के छेद ने भी जैसे हवा में एक नया आकार ले लिया था, हर बार जब मैं चूत चाटता, तो उसकी गांड का सुराख सिकुड़ता और फिर फैलता। मैंने उसी लय में अपनी बीच वाली ऊँगली नेहा के चूतड़ की दरार में डाल दी और उसकी गांड के छेद के बाहरी घेरे पर रगड़ने लगा। “भोसड़ी के, तू तो पूरी रंडी निकली, नेहा,” मैंने साँस रोकते हुए कहा और उसने जवाब में बस अपनी गांड को और पीछे ठेल दिया।
नेहा अब पूरी तरह से खुल चुकी थी, उसने अपना पूरा बदन सोफ़े पर पसार दिया और अपने पैरों को मोड़कर चौड़ा कर लिया। “अब बहुत हुआ चूत चाटना, मुझे अपनी तना हुआ लंड से चोद, रोहन,” उसने अपनी आँखों में एक गहरी बेशर्मी लिए मेरी तरफ देखा। मैं खड़ा हुआ और अपना लंड बाहर निकाला, जो 8 इंच का एक खड़ा और गुस्सैल साँप बन चुका था जिसकी ऊपर की नसें नीली पड़ गई थीं। नेहा ने लपककर मेरा लौड़ा पकड़ लिया और अपने होठों पर रगड़ते हुए बोली, “इस मोटा लौड़े को देखकर तो मेरी चूत की प्यास और बढ़ गई।”
उसने बिना किसी संकोच के मेरे लंड के सिरे को अपने मुँह में खींच लिया और उसकी गर्म जीभ ने पहले ही स्पर्श में मेरे अंडकोषों में जमा सारा माल बाहर खींचने की कोशिश की। “धीरे, नेहा, वरना तेरी रांड जैसी चाल से मैं अभी झड़ जाऊँगा,” मैंने दाँत पीसते हुए कहा। उसने मज़ाकिया अंदाज़ में मेरे लंड के गोटों को अपनी उँगलियों से सहलाया और फिर पूरे लंड को अपने गले तक उतार लिया, इस तरह जैसे सड़क की कोई पुरानी कॉलगर्ल हर ग्राहक को बिना उल्टी किए मुँह में भर लेती हो।
2 मिनट के इस तूफ़ानी ब्लोजॉब के बाद, जब मुझे लगा कि मेरा खड़ा लंड अब एक सेकंड और नहीं टिक पाएगा, मैंने उसे ज़ोर से पलटकर घोड़ी बनने का इशारा किया। नेहा ने अपने दोनों हाथ सोफ़े की पीठ पर टिकाए, गांड को ऊपर उठाया और अपनी चूत के छेद को मेरी तरफ़ करके जैसे पूरा आकाश पलट दिया। उसके चूतड़ों की गोलाई पर पसीने की बूंदें मोतियों की तरह चमक रही थीं और बीच की दरार मुझे पागलों की तरह बुला रही थी।
मैंने अपने लंड का सुपारा मेरी सौतेली माँ की टाइट चूत के दरवाज़े पर लगाया और बिना किसी चेतावनी के एक ही झटके में पूरा अंदर तक घुसा दिया। “आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दी, हरामी,” वह दर्द और मज़े के मिले-जुले स्वर में चीख़ी, लेकिन उसने तुरंत अपनी गांड को पीछे धकेलकर मेरे लंड को और गहराई तक निगल लिया। अंदर की गर्मी किसी आग के गोले की तरह थी, हर धक्के के साथ उसकी भोसड़ी की माँसपेशियाँ मेरे लौड़े को दबोच लेती थीं और फिर छोड़ देती थीं। “तेरी तो चूत का जादू ही कुछ और है, नेहा,” मैंने उसकी कमर पकड़कर धक्के तेज़ कर दिए।
हर चुदाई के झटके के साथ कमरे में हम माँ-बेटे की गीली त्वचा के टकराने की चिपचिपी आवाज़ गूँजने लगी। नेहा अब पूरी तरह से बेलगाम हो चुकी थी, “चोद, और ज़ोर से चोद अपनी सौतेली माँ की रसदार चूत में।” उसके शब्दों ने मेरे दिमाग़ की आख़िरी दीवार भी ढहा दी और मैंने एक हाथ से उसके बालों की जड़ पकड़कर पीछे की तरफ खींची जबकि दूसरे हाथ से उसकी गांड पर एक के बाद एक तमाचे मारे। हर तमाचे पर उसकी चूत की भीतर की दीवारें सिकुड़तीं और मेरा लंड और कस के जकड़ा जाता।
मैंने अपनी रफ़्तार थोड़ी कम की और बड़े ही सुस्त अंदाज़ में अपना पूरा लम्बा लंड बाहर खींच लाया, ताकि वह हर एक इंच को महसूस करे। फिर अचानक से एक ज़बरदस्त झटके में वापस घुसाते हुए मैंने उसकी गांड के छेद पर अपना अंगूठा रख दिया। “तूने तो कमाल की छिनालपन दिखाया है, अब अपनी गांड भी खुलवा,” मैंने उसके कान के पास मुँह ले जाकर गुर्राया। नेहा ने अपने होंठ चबाए और गर्दन हिलाकर हाँ की, तो मैंने अपनी लार से अंगूठे को गीला करके धीरे-धीरे उसके गुदा के छेद में डालना शुरू किया।
पहले तो उसकी गांड का सुराख बहुत टाइट था, लेकिन जैसे ही मैंने उँगली का एक पोर मेरी सौतेली माँ की तंग गांड के अंदर डाला, मेरी नंगी माँ ने बिलखती हुई आवाज़ में कहा, “उंगली मत कर बेटा मेरी गांड में, अपना लंड डाल मेरी भोसड़ी में वापस।” मैंने तुरंत आज्ञा का पालन किया और उसी क्षण हमने पोज़ीशन बदली। अब मैं सोफ़े पर बैठा था और नेहा मेरी गोद में मुँह-से-मुँह मिलाकर बैठी हुई मेरे लंड को अपनी चूत में धीरे-धीरे बैठा रही थी। यह आमने-सामने की चुदाई का दृश्य सबसे भयानक और सबसे ख़ूबसूरत था, उसके चेहरे पर लाली, आँखों में हरामी चमक और होंठों पर मेरे नाम की लार टपक रही थी।
मेरी बेहया माँ अब ऊपर-नीचे हो रही थी और उसके भारी बोबे मेरे सीने से रगड़ खाकर चिपक रहे थे। मैंने मेरी सौतेली माँ के दोनों नंगे कुल्हों को पकड़कर अपनी तरफ़ घसीटा और अपने लंड को उसकी चूत में घड़ी की सुई की तरह घुमाने लगा। “तेरी चूत का रस पूरी रान पर बहकर मेरे लंड के गोटों को भिगो रहा है, नेहा,” मैंने साँस फूलते हुए कहा। उसने बदले में अपने निप्पल को मेरे मुँह में ठूँस दिया और बोली, “चूस, इस चूचियों का दूध तो है नहीं, लेकिन मेरी चूत की रानी तू ही है।”
यह सुनकर मेरे अंड की थैली में एक तूफ़ानी लहर उठी और मैं जान गया कि अब बहुत देर नहीं हो सकती। मैंने उसे अपनी बाँहों में कस लिया और दोनों हाथों से उसकी गांड के चूतड़ों को फैलाकर उसे पूरी ताक़त से अपनी तरफ़ उतारा। “नेहा, मैं झड़ने वाला हूँ… तेरी भोसड़ी में अपना गाढ़ा चिपचिपा माल भरने वाला हूँ,” तूफ़ानी चुदाई करते करते मैंने एक नशीली पुकार में कहा। उसने अपने नाखून मेरी पीठ की त्वचा में गड़ा दिए और चिल्लाई, “हाँ बेटा ऐसे ही तूफ़ानी चुदाई कर अपनी इस छिनाल सौतेली माँ की, भर दे मेरी कोख में अपना सारा शुक्राणु, मुझे सच्ची रंडी बना दे।”
और फिर आख़िरी बार मैंने झटका दिया और मेरे लंड ने जैसे पूरा ब्रह्मांड हिलाकर रख दिया। मेरा वीर्य गरम-गरम धाराओं में उसकी योनि की गहराइयों को भरता चला गया, एक ऐसा विस्फोट जिसने मेरी आँखों के सामने अंधेरा कर दिया। हर फटकार के साथ मेरा लौड़ा उसकी चूत में फड़फड़ाता रहा और नेहा बस मेरे कंधे पर मुँह दबाकर सिसकियाँ भरती रही। उस वक्त हमारी साँसें, पसीने और चूत के रस की मिली-जुली गंध ने कमरे को एक अलग ही दुनिया बना दिया था।
तूफ़ानी चुदाई के दौरान धीरे-धीरे जब हमारी साँसें सामान्य हुईं, तो नेहा अपनी उँगली से मेरी छाती पर गोल-गोल घुमाते हुए बोली, “पता है रोहन, तेरा तो पूरा खानदान ही चरित्रहीन है, और इस चरित्रहीनता में ही मेरी जान बसती है।” मैंने उसके माथे पर एक हल्की चुम्मी ली और बारिश की आवाज़ के साथ-साथ उसके दिल की धड़कनें गिनने लगा। बाहर आसमान साफ़ होने लगा था और अंदर हम दोनों की बदन की आग बस राख की एक गरम चादर में बदल चुकी थी।
बाद में, जब हम माँ-बेटे दोनों नहा-धोकर फिर से सामान्य इंसान बनने की कोशिश कर रहे थे, तो मुझे एहसास हुआ कि इस एक रात ने हमारे रिश्ते की सारी परिभाषाएँ हमेशा के लिए बदल दी हैं। नेहा ने मेरी प्लेट में गरम-गरम चाय और पकौड़े रखते हुए मुझसे पूछा कि क्या मुझे अपने किए पर कोई पछतावा है। मैंने अपनी आँखों में उसके लिए सिर्फ़ अपार हवस और उससे भी बड़ी एक गहरी अपनीपन की चमक के साथ उसे देखा और कहा, “पापा के लौटने से पहले मुझे एक बार और तेरी गांड पर तमाचा मारना है।”
मेरी इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी के अंत में अब, मैं आप सब पाठकों से सीधे मुखातिब होकर पूछना चाहता हूँ कि आपको रोहन और नेहा की बारिश में भीगती यह माँ बेटे की बेहिचक चुदाई की दास्तान कैसी लगी। कृपया मुझे बताइए कि इस कहानी के किस मोड़ ने आपकी साँसें सबसे ज़्यादा रोकीं, और क्या आपको लगता है कि उनका यह अंधेरा रिश्ता और आगे बढ़ना चाहिए। आपके ईमानदार विचार और सुझाव मेरे लिए बेहद मायने रखते हैं, इसलिए नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें।

