दोस्तों इस आन्तार्वसना हिंदी गे सेक्स और ग्रुप सेक्स स्टोरी में आप पढेंगे की कैसे मैंने बिहारी मजदूरों से चलती बस में अपनी गांड मरवाने के बाद अपनी आकर्षक बेटी की भी गैंगबैंग चुदाई करवाई और खुदने भी अपनी बेटी के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाये और ग्रुप सेक्स करा :- दोस्तों मेरा नाम पंकज शर्मा हैं और मैं दिल्ली का रहने वाला एक शादी शुदा मर्द हूँ. मेरी पत्नी की मौत पांच साल पहले हो गयी थी. हमारे घर में मैं और मेरी एक 18 साल की बेटी है जिसका नाम भर्खा मित्तल था. मेरी बेटी दिखने में बहुत खुबसूरत और सेक्सी माल है. मेरा बहुत मन था कि मैं अपनी बेटी के साथ अवैध शारीरिक संबंध बनाकर अपनी हवस शांत करूँ और उसकी जवानी का रस चखूँ.
मैं खुद सबसे पहले मेरी बेटी की वर्जिन चूत को चोदकर उसकी सील खोलना चाहता था. दोस्तों मैं खूब भी मेरी बेटी के साथ हार्डकोर सेक्स करना चाहता था और वो भी ऐसा हार्डकोर सेक्स जैसा आज तक किसी बेटी के साथ उसके पिता ने ना करा हो. इस तम्मना के आलावा मेरी एक और तमन्ना थी की मैं कई सारे मर्दों के साथ मिलकर मेरी बेटी की गैंगबैंग चुदाई करूँ. दोस्तों जैसे जैसे मेरी बेटी जवान होती जा रही थी वैसे वैसे उसका जिस्म और भी ज्यादा नशीला होता जा रहा था और मुझे उसकी इज्जत लुटने के लिए आमंत्रित करने लगा था. फिर भी मैं कभी कभार मेरी बेटी के हाथों में मेरा लंड चूसने के लिए थमा ही देता था और वो भी बड़े शौक से मुझे ब्लोजॉब दे दिया करती थी मगर मैंने कभी उसकी इज्जत पर हाथ नहीं डाला. मैं तो मेरी बेटी को चोदकर उसके कौमार्य को भंग करना चाहता था मगर हम बाप बेटी के पवित्र रिश्ते की दीवार ने मुझे रोके हुए था अपनी 18 वर्ष की वर्जिन बेटी की इज्जत पर हाथ डालने से.
चलती बस में अपनी गांड मरवाने के बाद वर्जिन बेटी की गैंगबैंग चुदाई अन्तर्वासना हिंदी ग्रुप सेक्स स्टोरी

दोस्तों मेरी बेटी अब जवानी की दहलीज लाँघ चुकी थी और अपने कंप्यूटर पर ब्लू फ़िल्में देख कर हस्तमैथुन करने लगी थी ऐसे करते हुए मैं उसे कई बार देखा था मगर लाज शर्म की वजह से उससे कुछ बोल नहीं पाया. मैं भी जनता था की अब वो भी सेक्स करने के लिए तड़पने लगी है मगर मैं उसके साथ सेक्स करने की पहल करूँ तो कैसे करूँ ये मुझे समझ नहीं आ रहा था. मैंने हमारे घर के बाथरूम में हिडन कैमरा लगा दिया था और मैं मेरी बेटी की नंगी होकर नहाते हुए पोर्न विडियो रिकॉर्ड करने लगा. रात के समय मैं मेरी बहन की हिडन कैमरा में रिकॉर्ड पोर्न विडियो देखकर मुठ मारता था और अपनी अन्तर्वासना शांत करता था. मगर कुछ दिनों बाद मेरी कामवासना बहुत ज्यादा भड़क उठी और अब मुझे अपनी कामवासना शांत करने के लिए मेरी वर्जिन बेटी की सील पैक बुर की तलब लगने लगी.
फिर एक दिन मेरे ससुराल से मेरी छोटी साली की शादी का न्योता आ गया. दोस्तों मेरा ससुराल जयपुर, राजस्थान में है. मेरी छोटी साली की शादी में शामिल होने के लिए हम बाप बेटी बस से निकल पड़े. जब हम बाप और बेटी दिल्ली से राजस्थान के लिए बस में यात्रा कर रहे थे, तो बस में बहुत ज्यादा भीड़ थी। पूरी बस बिहारी मजदूरों से भरी थी और साँस लेने तक की जगह नहीं थी। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार की आधी से ज्यादा आबादी बहुआयामी गरीबी झेल रही है इस कारण वह अपने घर और परिवार से दूर रहकर कम पैसों में भी मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं. इन लोगों को कई बार अपने परिवार से दूर रहने के कारण व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। ये बिचारे कई कई दिनों तक अपनी पत्नी को चोद नहीं पाते हैं और हस्तमैथुन कर करके अपनी कामवासना को शांत करते हैं. चलती बस के अंदर ज़्यादातार बिहारी मज़दूर दारू पिये हुए थे. गर्मी का मौसम था इस लिए बस में मोजूद सभी बिहारी मजदूरों ने केवल धोती और बनियान पहनी हुई थी.
जिस बस में हम बाप बेटी सफर कर रहे थे उस बस में सभी मर्द थे बस एक मेरी बेटी ही थी जो महिला थी. बस में सफ़र कर रहे सभी बिहारी मजदूर मेरी बेटी को गन्दी नजरों से घूर घूरकर देख रहे थे. मैं उन बिहारी मजदूरों की नजरों को देखकर समझ चूका था की ये सब मेरी बेटी की चुदाई करने अपनी अन्तर्वासना शांत करने की फिराक में है. मैं मन ही मन सोचने लगा की यदि ये सब बिहारी मजदूर मिलकर मेरी आँखों के सामने दरिंदों की तरह मेरी बेटी की गैंगबैंग चुदाई करे और मुझे भी इस ग्रुप सेक्स में शामिल कर ले तो मुझे भी मेरी बेटी की जवानी का रस चखने का मौका मिल सकता है. मैं मन ही मन ऐसा जुगाड़ बैठाने लगा जिससे आज मेरी बेटी के साथ इस चलती बस में मैं अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी अन्तर्वासना शांत कर सकूँ. सभी बिहारी मजदूरों को धोती और बनियान में देख मैंने भी गर्मी के कारण अपनी पैंट निकल दी और सिर्फ चड्डी और बनियान में आ गया। उस पूरी बस में सब लंड ही लंड थे और अकेली चूत मेरी बेटी की थी इस वजह से आज उसकी इज्जत लूटना करीब करीब तय था।
थोड़ी देर बाद एक बस स्टॉप आया और वहां से बस में 30-40 ठरकी मर्द और घुस आए इस वजह से अब बस के अंदर ज़बरदस्त भीड़ हो चुकी थी। इसी बीच बस के ड्राइवर ने रात ज्यादा हो जाने की वजह से बस की लाइट बंद कर दी। अब बस में बिलकुल अँधेरा हो चूका था और कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था. मुझे किसी का हाथ मेरी गांड पर महसूस हुआ। मैं जमाझ गया की कोई साला बहन का लौड़ा अँधेरे का फायदा उठाने की सोच रहा है और अब मेरी गांड के साथ जरुर कुछ कांड होने वाला है. दोस्तों मैं आप को मेरी गांड के बारे में तो बताना ही भूल गया. मेरी गांड दिखने में बहुत मस्त है बहुत मोटी और बिलकुल गद्देदार। जब मैं कॉलेज में था तब काई गे लड़के मेरी गांड मारा करते थे और मैं पैसे के लालच में अपनी गांड उन गे लड़कों से मारवा लेता था. मगर जैसे ही कॉलेज ख़त्म हुआ मेरी शादी हो गयी और फिर गांड चुदाई का सिलसिला समाप्त हो गया.
दोस्तों मुझे जैसे ही मेरी गांड पर किसी मर्द के हाथ का स्पर्श महसूस हुआ मुझे कॉलेज के दिनों वाली मेरी गांड चुदाई याद आ गयी और अब मेरी गांड में लंड लेने की खुजली होने लगी. अब मेरा बहुत मन होने लगा कि कोई बिहारी मजदूर मेरी गांड मारे और मेरे साथ करके मेरी गांड की खुजली शांत कर दे. दोस्तों कहाँ तो मैं इस चलती बस में बिहारी मजदूरों के साथ मिलकर मेरी वर्जिन बेटी की बेटी की गैंगबैंग चुदाई करने की सपने देख रहा था और कहाँ अब मैं अपनी की गांड मरवाने के लिए वैचेन हो उठा। चलती बस में हम बाप बेटी खड़े खड़े ही सफर कर रहे थे क्योंकि बस में भीड़ ज्यादा होने की वजह से हमें सीट नहीं मिल पाई थी. सफर के दौरान बार बार धक्के लग रहे थे और कोई मर्द बार बार मेरे गद्देदार कूल्हों को बड़े प्यार से सहला रहा था और जोर जो से दबा भी रहा था मगर मैंने कुछ नहीं कहा, क्योंकि अब मैं तो खुद ही चाहता था की कोई मर्द मेरी गद्देदार गांड के अंदर अपना लंड पेल दे और मेरी गांड मारे।
कुछ देर के बाद मुझे महसूर हुआ कि किसी मर्द ने मेरी गद्देदार गांड पर अपना मोटा सा लंड घीसा, पर मैंने सोचा की शायद यह मेरा वेहम हो, क्योंकि कोई भी मर्द इस चलती बस में अपना कच्चा क्यू उतारेगा। मगर कुछ देर बाद जब दोबारा से ऐसा हुआ तो मुझे पक्का यकीन हो गया कि कुछ बिहारियों ने अपनी धोती भी उतार दि हैं। अब मुझे एक साथ काई हाथ अपनी गांड पर महसूस हुए। किसी ने मेरी गांड को सहलाते हुए मुठ मारना भी चालू किया हुआ था। क्योंकि सब शराब पिए हुए थे तो सब इंतज़ार कर रहे थे सेक्स का नंगा नाच शुरू करने का। किसी आदमी ने बोला कि अपनी बेटी को मेरी गोद में बिठा दो बेचारी बच्ची कब तक ऐसे खड़े खड़े बस में सफर करेगी. मेरी बेटी खड़े खड़े काफी थक चुकी थी तो वो मुझसे पूछने लगी की क्या पापा मैं अंकल की गोदी में बैठ जाऊ, मैं खड़े खड़े बहुत थक गयी हूँ और अब मुझसे खड़ा नहीं रहा जा रहा. तो फिर मैंने मेरी बेटी को पास में बेठे एक मजदुर की गोदी में बैठने की हाँ बोल थी.
बिहारी मजदूरों में देसी शराब की बोतलें खोल रखी थी और वो खूब जमकर शराब पी रहे थे. पूरी बस में सिर्फ पसीने और देसी दारू की महक थी। इसी बीच चलती बस के अन्दर अँधेरे का फायदा उठाते हुए किसी बिहारी मजदूर ने मेरी चड्डी खोल दी और मेरी गांड में ऊँगली करने लग गया. कुछ देर बाद अचानक से मेरी गांड के अंदर 10-12 लोगो ने उंगली देनी शुरू कर दी मैं समझ गया की बिहारी मजदूरों की हिम्मत अब बहुत ज्यादा बढ़ चुकी है और ये सब मुझे अकेला पाकर मेरे साथ गे सेक्स करेंगे। शुरू में जब एक आदमी मेरी गांड में ऊँगली कर रहा था तब तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा था मगर जब बाद में 10-12 लोग मेरी गांड के अंदर एक साथ ऊँगली करने लगे तो मुझे बहुत तेज दर्द होना शुरू हो गया। मैं उन्हें मेरी गांड में ऊँगली करने से मना करता इतने में मेरी गांड के अंदर एक लंड घुस गया और मेरी गांड को चोदने लग गया।
बिहारी मजदूरों की औकात आज मुझे पता चल चुकी थी, ये सेल मर्दों की गांड नहीं छोड़ते तो महिलाओं के साथ तो ना जाने कैसा काण्ड करते होंगे. चलती बस के अंदर एक लम्बे मोटे लंड से अपनी गांड चुदवाते चुदवाते अब मेरी मुरझाई हुई लुल्ली भी खड़ी होकर लंड बन चुकी थी। कॉलेज ख़त्म होने के कई सालों बाद आज कोई गे पुरुष मेरी गांड मार रहा था. अपनी गांड मरवाने में मुझे काफी ज्यादा दर्द हो रहा था मगर आनंद भी बहुत आ रहा था. चलती बस में मेरी गांड चुदाई चल रही थी और मेरी 18 साल की बेटी इन सब से अंजन एक अनजान मर्द की गोदी में बैठी सफर का आनंद ले रही थी. दोस्तों गांड चुदाई के दौरान बार बार मुझे लंड का आकर और प्रकार बदलता हुआ महसूस हो रहा था जो की इस बात की तरफ इशारा कर रहा था की मेरी गांड को एक से ज्यादा बिहारी मजदूर एक एक करके चोद रहे हैं.
दोस्तों मुझे मेरी बेटी की फ़िक्र होने लगी की जिस चलती बस में एक आदमी की गांड चुदाई हो रही हो उस बस के अन्दर भला एक महिला कैसी सुरक्षित होगी. जैसे ही मैंने मेरी बेटी की तरफ देखा तो मुझे अँधेरे में दो आदमी हिलते हुए दिखाई दिए. अब मुझे समझ में आ गया की आज तो मेरी बेटी की सील पैक वर्जिन चूत और गांड की सील टूट चुकी है और हो ना हो ये दो दो आदमी मुझे हिलते हुए दिखाई दे रहे हैं ये मेरी सेक्सी माल बेटी की गांड और चूत का ही काम लगा रहे हैं. चलती बस में मेरी आँखों के सामने दो बिहारी मजदूरों द्वारा मेरी कुंवारी बेटी की गैंगबैंग चुदाई करी जा रही थी और मैं उसकी इज्जत लूटन से बचने में नाकाम था. मेरी वर्जिन बेटी की सील पैक चूत को सबसे पहले मैं चोदना चाहता था मगर शायद मेरे नसीब में ये सुख लिखा ही नहीं था.
चलती बस में एक तरफ मेरी बेटी कि टाइट चूत में 2 अंजन मर्दों के लंड जा चुके थे और उसके साथ गैंगबैंग सेक्स कर रहे थे तो यहाँ दूसरी तरफ मेरी गांड को कई सारे मर्दों के द्वारा एक एक करके चोदा जा रहा था. चलती बस में मैं चुपचाप अपनी गांड मरवाता रहा और मेरी बेटी भी बिना विरोध करे चुदती रही और इसी में हमारी भलाई थी यदि हम ज्यादा नाटक करते तो वो सभी लोग हम बाप बेटी को खूब बुरी तरह मारते पिटते और चलती बस से निचे फैक देते.
अचानक से बस ड्राइवर ने बस का ब्रेक लगा दिया और इस वजह से मैं निचे बस के फर्श पर गिर गया. मैंने कैसे जैसे अपने आप को संभाला और उठकर खड़े होने की कोशिक करने लगा. जैसे ही मैंने मेरी गर्दन उप्पर उठाई मेरे पैरों तले जमीन खिसक गयी. मैंने देखा की जादातार बिहारी मजदूरों ने अपनी धोती खोल ली थी और उन सभी के लंड तनकर खड़े थे. मैं समझ गया की या तो इन सभी बिहारी मजदूरों द्वारा मेरी गांड मारी जायगी या फिर ये सब मिलकर मेरी बेटी का रफ सेक्स करेंगे। अचानक से किसी बिहारी मजदूर ने मेरे बाल पकडे और अपना खड़ा लंड मेरे मुँह में घुसा कर मेरे मुंह को चोदने लग गया.
उस चलती बस में अब सबको खबर लग चुकी थी कि मैं एक गांडू मर्द हूँ और किसी भी मर्द को मेरी गांड मारने से नहीं रोक रहा हूँ. सब बिहारी मजदूर मेरे साथ गे सेक्स करने के लिए मेरे उप्पर जंगली भेड़िये की तरह टूट पड़े और मेरे साथ सामूहिक गे सेक्स करने लगे। सामूहिक रूप से मेरी गांड चोदने के लिए मुझे चलती बस में घोड़ी बना दिया गया और अब एक साथ 4 लंड मेरी गांड के अंदर खंजर की तरह घुंप गए और मेरी गैंगबैंग गांड चुदाई करने लगे. दो लंड एक साथ मेरे मुंह की चुदाई करने लगे. स्कूल और कॉलेज के दिनों में मैंने कई बार गे सेक्स तो करा था मगर आज पहली बार हार्डकोर ग्रुप सेक्स कर रहा था. ये मेरे जीवन का पहला गैंगबैंग सेक्स था इस वजह से ये मेरे लिए बहुत ही ज्यादा पीड़ा दायक था.
उन बिहारी मजदूरों में बड़ी एकता थी वह सभी मुझे बड़ी बेरहमी से मार मार के चोद रहे थे. कोई बिहारी मजदूर मेरी गांड के छेद को अपने लम्बे मोटे लौड़े से चोद रहा था तो कोई मेरी खोपड़ी के बाल पकड़कर मेरे मुंह की चुदाई करने में मग्न था. उस चलती बस में करीब दो घंटे तक मेरे साथ सामूहिक रफ सेक्स होता रहा और मैं अपनी और अपनी बेटी की इज्जत बचाने में नाकाम रहा. सफर के दौरान बस में लगभाग 2 घाटे में मुझे 70 मर्दो ने चोदा होगा और इतने लोगों ने ही मेरी बेटी की भी इज्जत लुटी होगी। मेरे मुंह की चुदाई करने के बाद उन सभी बिहारी मजदूरों ने मेरे मुँह में पेशाब करना प्रारंभ कर दिया। मेरा मुंह अब उन बिहारी मजदूरों के लिए शौचालय बन चूका था साला जिसे देखो वो मेरे मुंह में पेशब कर रहा था. खैर दो घंटे की नॉन स्टॉप गांड और मुंह चुदाई के दौरान अब तो मैं भी बहुत ज्यादा गरम हो चूका था और अब उन सभी के साथ गे सेक्स एन्जॉय करने लगा था.
मैंने उन सभी बिहारी मजदूरों का मूत पी लिया मुझे इनका पेशाब पिने में बड़ा आनंद आया। किसी ने मेरी गांड में अपना पूरा हाथ दे दिया और अंदर बाहर करते हुए अपने हाथ से मेरी गांड को चोदने लगा। मजा आ गया मुझे. फिर वो बिहारी मजदूर लोग मेरी गांड में देसी दारू की बोतल घुसा-घूसा के उन बोतलों से मेरी गांड को चोदने लगे। इन सब से भी उन बिहारी मजदूरों का मन नहीं भरा तो वो मुझसे बोलने लगे की चल साले गांडू अब तू अपनी ही बेटी का रफ सेक्स कर और उसे ऐसा चोद की ये तेरे लंड की दीवानी हो जाये।मेरी बेटी को जैसे ही पता चला की अब उसकी खून से लथपत चूत में अगला लंड उसके पिता का जाने वाला है तो वह रोने लगी और उसकी आँखों से नदी की तरह आंसू की धारा बहने लगी. आज मैं मेरी ही बेटी की चूत मारने वाला था इस वजह से मुझे बहुत शरम आ रही थी. मैंने मेरी बेटी को चोदने से पहले उससे माफी मांगी और बोला की बेटी मुझे शमा कर देना मैं तेरा पिता होकर आज तेरी इज्जत लूटने वाला हूँ यदि मैं तेरा रफ सेक्स नहीं करूँगा तो यह बिहारी मजदूर हम दोनों को जान से मार डालेंगे.
मैंने अपनी नजरें झुका ली और अपने लंड पर थूक लगाकर उसे मेरी बेटी की खून से लथपत चूत के अंदर एक जोरदार धक्के के साथ पूरा का पूरा अंदर पेल दिया. जैसे ही मेरा लंड मेरी बेटी की चूत में घुसा तो वो जोर जोर से रोने लगी की पापा आज हम दोनों के बिच जो हो रहा है वो सही नहीं है मगर इन सब में आपका कोई दोष नहीं है आप मजबूरी में मुझे चोद रहे हो इस लिए आप को पछताने की को जरुरत नहीं है आप वैसा वैसा करते जाओ जैसा ये बिहारी मजदूर करने की बोल रहे हैं. मैं मेरी बेटी की चुदाई कर ही रहा था की इस दौरान किसी बिहारी मजदूर ने मेरे मुँह पर अपनी गांड लगा दी और मेरे मुँह में टट्टी कर दी। बहुत सारी टट्टी तो मेरे मुंह में चली गयी मगर थोड़ी बहुत टट्टी मेरी बेटी के मुंह पर घी गिर गयी. सेक्स करते करते हम दोनों बाप बेटी ने वो टट्टी खाई खूब मजे से।
करीब आधे घंटे की चुदाई के बाद मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी चल गयी और मेरी बेटी की खून से संदी चूत के अंदर मेरा वीर्य भर गया. फिर उन बिहारी मजदूरों ने बोला की अब हम सब मिलकर तेरी बेटी के साथ सामूहिक दुष्कर्म करेंगे और तुझे भी हमारे साथ मिलकर अपनी बेटी की गैंगबैंग चुदाई करनी पड़ेगी. दोस्तों ये बात सुनते ही मैं मन ही मन बहुत खुश हो गया मुझे जिस मौके की तलाश थी आज वह मौका मुझे मिल चूका था. फिर उन बिहारी मजदूरों के साथ मिलकर मैंने मेरी कुंवारी बेटी की गैंगबैंग चुदाई करी. दोस्तों आज पहली बार मैं किसी लड़की को ग्रुप में चोद रहा था और इस ग्रुप सेक्स में मुझे बड़ा आनंद आ रहा था. करीब एक घंटे तक हम सभी ने मिलकर मेरी बेटी को कामसूत्र की अलग अलग सेक्स पोजीशन में चोदा और अपनी अन्तर्वासना शांत करी.
दोस्तों अब बस स्टॉप आने ही वाला था तो जल्दी से सभी ने सेक्स करने के बाद अपने अपने कपड़े पहन लिए थे. अब बस ड्राइवर ने भी बस की लाइट जला दी थी. बस काफी ज्यादा गन्दी हो चुकी थी पूरी बस में जगह जगह वीर्य ही वीर्य पड़ा था और कई जगह मेरी बेटी की चूत से निकले खून के छींटे भी बिलकुल साफ साफ़ दिखाई दे रहे थे. पूरी बस में टट्टी, पेशाब, वीर्य और खून बिखरा पड़ा था और इतनी गंदगी देखकर साफ़ साफ़ प्रतीत हो रहा था की इस बस में खूब जमकर चुदाई चली है. फिर दस मिनट बाद बस स्टॉप आ गया और हम बाप बेटी बस से उतर गए. दोस्तों बस से उतरने के बाद हम बाप बेटी होटल में स्नाना करने के लिए चले गए. दोस्तों हम बाप बेटी दोनों ही बहुत शर्मिंदा हे इस वजह से एक दुसरे से नजरें नहीं मिला पा रहे थे.
सभी बिहारी मजदूरों ने मेरी गांड चोदकर मुझे अपने लंड से निकला माल पिलाया था और मेरे मुंह में टट्टी करके मुझे अपनी टट्टी खिलाई थी. दोस्तों ऐसा खतरनाक ग्रुप सेक्स ना तो मैंने मेरे जीवन में आज तक देखा था और ना ही भविष्य में ऐसा कुछ होने की सम्भावना थी. मुझे मेरी बेटी के साथ चलती बस में अवैध सेक्स संबंध बनाने का मौका उन बिहारी मजदूरों की वजह से ही मिल पाया था नहीं तो मैं कभी अपनी बेटी को नहीं चोद पता और बस बेटी के साथ सेक्स करने के सपने देखते देखते एक दिन इस दुनिया को अलविदा कह जाता. दोस्तों अब मैं जिगोलो बनने की सोचर रहा हूँ और अपनी सुन्दर और सुशिल बेटी को कॉल गर्ल अर्थात रंडी बनाने के बारे में सोच रहा हूँ. मैंने मेरी बेटी से भी इस बारे में बात करी है तो वो भी रंडी बनने के लिए राजी है. दोस्तों आप सभी को मेरी ये अन्तर्वासना हिंदी ग्रुप सेक्स स्टोरी पसंद आयी हो तो इस सामूहिक चुदाई की कहानी को ज्यादा से जायदा शेयर करना. यदि आप इस हिंदी सेक्स स्टोरी का अगला भाग पढ़ना चाहते हो तो हमें ईमेल करके जरुर बताना…


