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माँ की चूत की आग को ठंडा करा सब्जी बेचने वाले ने

माँ की चूत की आग को ठंडा करा सब्जी बेचने वाले ने Audio Sex Stories Free Listen
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माँ की चूत की आग को ठंडा करा सब्जी बेचने वाले ने चोदकर अन्तर्वासना हिंदी MP-3 ऑडियो सेक्स स्टोरी का सारांश :- दोस्तों मुंबई की एक तंग चॉल में, जहाँ दिन की चहल-पहल और रात की उमस आपस में टकराती थी, हमारा छोटा-सा फ्लैट था। मेरी माँ, कविता, 40 साल की थीं, मगर उनका जिस्म किसी 28 साल की जवान औरत को मात देता था। उनकी टाइट साड़ी और ब्लाउज में उनके रसीले बूब्स, पतली कमर और गोल गांड हर मर्द के लंड में आग लगा देती थी। उनकी कजरारी आँखें और गुलाबी होंठ जैसे चूसने की खुली दावत देती थीं। मेरे पापा एक व्यापारी थे, जो हफ्तों बाहर रहते थे, और माँ की रातें अकेली, बेचैन और गर्म गुजरती थीं।

हर सुबह हमारे घर सब्जी बेचने आता था गोपाल चाचा, 45 साल का तगड़ा मर्द। गोपाल चाचा का साँवला, मांसल बदन और उनकी भारी आवाज माँ को हमेशा बेकरार कर देती थी। वह सब्जी की टोकरी लिए आता, और उसकी नजरें माँ के जिस्म पर अटक जाती थीं। माँ भी जानबूझकर अपनी साड़ी का पल्लू सरकने देतीं, ताकि उनके बूब्स का उभार गोपाल चाचा को दिखे। मैं, 21 साल की दीक्षा, यूनिवर्सिटी की छात्रा थी, मगर सुबह-सुबह माँ और गोपाल चाचा की वो आँखमिचौली मुझे सब समझा देती थी।


चलिए अब पूरी घटना विस्तार से सुनाती हूँ. वो अगस्त महीने की एक उमस से भरी सुबह थी। पापा अपने व्यापार के सिलसिले में पुणे गए हुए थे और घर में मैं और मेरी माँ हम दोनों बिलकुल अकेले थे। मैं यूनिवर्सिटी में पढाई करती हूँ तो सुबह यूनिवर्सिटी जाने के लिए तैयार हो रही थी। माँ रसोई में थीं, एक पतली नीली साड़ी और टाइट काले ब्लाउज में। उनका ब्लाउज पसीने से भीग गया था, और उनके रसीले बूब्स उस तंग ब्लाउज में कैद उनका ब्लाउज फाड़कर बाहर निकलने को बेताब थे।

मेरे पापा ने मेरी माँ को बहुत बार समझाया की ब्लाउज थोड़ा ढीला पहना करो मोहल्ले के सभी मर्द तुम्हारे स्तनों को गंदी नजरों से घुर घुर कर देखते रहते हैं मगर मेरी माँ पापा की एक नहीं सुनती थी और बस अपनी धुन में मस्त रहती थी। माँ की पतली सी साड़ी उनकी चूत की शक्ल को हल्के से उभार रही थी। गोपाल चाचा सब्जी की टोकरी लिए आए। माँ ने दरवाजा खोला।

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“कविता भाभी, आज बैंगन ताजे हैं, मगर तेरा ये बदन उनसे कहीं ज्यादा रसीला लग रहा है,” गोपाल चाचा ने शरारती लहजे में कहा। उनकी आँखें माँ के बूब्स पर टिकी थीं। माँ ने हँसते हुए जवाब दिया, “गोपाल जी, मेरी इस गर्मी को बुझाने के लिए कोई मसालेदार माल लाए हो?” उनकी बात सुनकर गोपाल चाचा का लंड उनकी धोती में तन गया। मैं रसोई के पास खड़ी ये सब सुन रही थी, और मेरे मन में एक अजीब सी उत्तेजना जाग रही थी।

माँ ने मुझे देखा और बोलीं, “दीक्षा बेटी, तू यूनिवर्सिटी के लिए लेट हो रही है, जल्दी निकल नहीं तो तेरी क्लास मिस हो जायगी।” मैं समझ गई कि आज घर में कुछ तो गलत काम होने वाला है तभी तो माँ मुझे घर से जल्दी जाने के लिए बोल रही है। मैंने कुछ नहीं कहा और घर से यूनिवर्सिटी जाने के लिए निकल गई। मुझे दाल में कुछ काला लग रहा था तो जिज्ञासा ने मुझे वापस घर की तरफ खींच लिया। मैं चुपके से घर की पिछली खिड़की से मेरे घर के अंदर झाँकने लगी। अब सब साफ दिख रहा था।

मैंने देखा की मेरी सेक्सी माल माँ ने सब्जी बेचने वाले गोपाल चाचा को रसोई में बुलाया और सीधे मुद्दे की बात पर आ गयी। “गोपाल जी मेरे पति कुछ दिनों के लिए शेहेर से बाहर गए हुए है इस वजह से कई दिनों से मेरी चुदाई नहीं हुई है इस लिए आप ही मेरी चूत की आग को ठंडा कर दो चोदकर,” माँ ने फुसफुसाते हुए बड़े ही कामुक अंदाज में सब्जी बेचने वाले चाचा से कहा और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया। उनके भरे हुए बूब्स ब्लाउज में कैद थे, और माँ के ब्लाउज में कैद बड़े बड़े स्तनों को देख सब्जी बेचने वाले गोपाल चाचा की साँसें तेज हो गईं।

रसोई में माँ का ब्लाउज फाड़ने के बाद उनकी ब्रा भी फाड़ दी

गोपाल चाचा ने समय बर्बाद करे बिगेर जल्दी से मेरी कामुकता से भरी सेक्सी माल माँ को रसोई की स्लैब पर बिठाया। उन्होंने माँ के होंठों को अपने होंठों से चूस लिया। वो चुंबन इतना गहरा और गर्म था कि माँ की चूत गीली हो गई। मैं खिड़की से सब देख रही थी, मेरी साँसें तेज हो रही थीं। शर्म और उत्तेजना का तूफान मेरे मन में उठ रहा था। गोपाल चाचा ने माँ की साड़ी को खींचकर फाड़ दिया। साड़ी का पल्लू फट गया, और उनके बूब्स ब्लाउज में और उभर आए। “कविता, तेरे ये बूब्स मुझे पागल कर रहे हैं, साली,” गोपाल चाचा ने गंदी गाली के साथ कहा।

उन्होंने माँ के ब्लाउज के बटन खोले, मगर अधीरपन में मेरी माँ के चुस्त ब्लाउज को फाड़ डाला। कपड़ा चर्र-चर्र की आवाज के साथ फट गया, और माँ की काली ब्रा में उनके रसीले बूब्स नंगे हो गए। माँ का ब्लाउज फाड़ने के बाद गोपाल चाचा ने उनकी ब्रा भी फाड़ दी। माँ के निप्पल्स सख्त और गुलाबी थे। “हाँ, गोपाल जी… मेरे बूब्स को चूसो… इन्हें मसल दो, हरामी,” माँ ने सिसकारी भरे लहजे में कहा। गोपाल चाचा ने उनके निप्पल्स को मुँह में लिया, उन्हें चूसते और काटते हुए। माँ की सिसकारियाँ रसोई में गूँज उठीं।

माँ ने गोपाल चाचा की धोती खींचकर फाड़ दी। उनका मोटा, सख्त लंड बाहर आ गया। “ये लंड तो मेरी चूत को चीर देगा, मदरचोद,” माँ ने गंदी गाली के साथ शरारत से कहा। उन्होंने गोपाल चाचा के लंड को अपने नरम हाथों में लिया और उसे सहलाया। फिर, माँ ने उसे मुँह में लिया। उनकी जीभ लंड के सिरे पर लपलपाई, और गोपाल चाचा की सिसकारियाँ तेज हो गईं। “कविता, तेरा मुँह मेरे लंड को निचोड़ रहा है, रंडी,” गोपाल चाचा ने हँसते हुए कहा। माँ ने और जोर से चूसा, उनके बाल पकड़कर उन्हें और करीब खींच लिया।

चूत की आग को ठंडा करने के लिए बेडरूम में ले गए गोद में उठाकर

सब्जी बेचने वाले गोपाल चाचा ने मेरी माँ को गोद में उठाया और उनकी चूत की आग को ठंडा करने के लिए बेडरूम में ले गए। कमरा मंद रोशनी और मखमली चादरों से सजा था, जो उनकी वासना को और भड़का रहा था। माँ का ब्लाउज और साड़ी पहले ही फट चुकी थी, और अब उन्होंने अपनी चूत की आग को ठंडा करवाने के लिए अपना पेटीकोट और पैंटी उतार दी। उनकी टाइट, गीली चूत गोपाल चाचा के सामने थी, गुलाबी और भूखी। “मुझे चोद दो, गोपाल जी,” माँ ने सिसकारी भरे लहजे में कहा और बेड पर लेट गई।

गोपाल चाचा ने अपने मोटे लंड को माँ की चूत पर रगड़ा। माँ सिहर उठी। “डालो अंदर, साले,” माँ ने गाली दी। गोपाल चाचा ने एक जोरदार धक्का मारा, और उनका लंड माँ की चूत में गहराई तक घुस गया। माँ ने चीख मारी, “हाँ, गोपाल जी… और जोर से… मेरी चूत को फाड़ दो!” गोपाल चाचा ने रफ्तार बढ़ाई। हर धक्के से माँ के बूब्स उछल रहे थे। उन्होंने माँ के निप्पल्स को मुँह में लिया, उन्हें चूसते और काटते हुए। माँ की चीखें और तेज हो गईं।

गोपाल चाचा ने माँ को पलट दिया और उसे डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। उनका मोटा लंड माँ की टाइट चूत में इतनी गहराई तक जा रहा था कि दोनों के जिस्म एक-दूसरे में घुल गए। “तेरी गांड कितनी मस्त है, साली,” गोपाल चाचा ने कहा और माँ की गांड पर थप्पड़ मारा। माँ ने हँसकर जवाब दिया, “चोदो मुझे, हरामी… और गहरा!” गोपाल चाचा ने माँ की कमर पकड़ी और धक्के तेज कर दिए। माँ की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।

उसके बाद, माँ ने गोपाल चाचा को धक्का देकर नीचे लिटाया। अब माँ ऊपर थीं। उन्होंने गोपाल चाचा के लंड पर बैठकर कमर हिलानी शुरू की। “तेरा लंड मेरी चूत को भर रहा है, गोपाल,” माँ बोलीं। उनकी कमर लय में हिल रही थी। गोपाल चाचा ने माँ के बूब्स को मसला, उनके निप्पल्स को चुटकी में दबाया। माँ की सिसकारियाँ और तेज हो गईं। दोनों पसीने से तर थे, मगर उनकी वासना की आग ठंडी नहीं हुई।

चूत की आग को ठंडा करने के लिए चूत को उँगलियों से सहलाया

पूरी सुबह दोनों एक-दूसरे के जिस्म को चखते रहे। गोपाल चाचा ने माँ की चूत को उँगलियों से सहलाया। “उँगली डालो, साले,” माँ ने गाली दी। गोपाल चाचा ने दो उँगलियाँ उनकी चूत में डालीं। माँ की चूत गीली हो गई। गोपाल चाचा ने उनकी चूत को चाटा। उनकी जीभ चूत के गुलाबी होंठों पर घूमी। माँ पागल हो गईं। “हाँ, चाटो मेरी चूत, हरामी,” माँ चिल्लाईं।

माँ ने गोपाल चाचा के लंड को फिर मुँह में लिया। “तेरा लंड कितना स्वादिष्ट है, मादरचोद,” माँ ने गंदी बात करते हुए कहा। गोपाल चाचा हँसे और माँ के मुँह में धक्का मारा। माँ ने उनका लंड गला तक लिया। फिर, दोनों 69 की पोजीशन में आ गए। गोपाल चाचा माँ की चूत चाट रहे थे, और माँ उनका लंड चूस रही थीं। कमरे में सिर्फ सिसकारियाँ और बेड की चरमराहट गूँज रही थी। माँ के नाखून गोपाल चाचा की पीठ पर गहरे निशान छोड़ रहे थे।

उसके बाद, गोपाल चाचा ने माँ को दीवार से सटाया। माँ की टाँगें उनकी कमर पर थीं। गोपाल चाचा ने खड़े-खड़े चोदना शुरू किया। “और गहरा, गोपाल जी… मेरी चूत को रौंद दो,” माँ चिल्लाईं। गोपाल चाचा ने जोर लगाया। दोनों के बदन एक हो गए। दोपहर हो गई, और वे थककर बेड पर लेट गए।

शाम तक चोद चोदकर मेरी माँ की चूत की आग को ठंडा कर दिया सब्जी बेचने वाले ने

दोपहर की धूप कमरे में फैली। मेरी बदचलन माँ नंगी ही सब्जी बेचने वाले गोपाल चाचा की बाहों में लेटी हुई थी। माँ ने गोपाल चाचा के सीने पर सिर रखा और फुसफुसाया, “गोपाल जी, तुमने आज चोद चोदकर मेरी चूत की आग को ठंडा कर दिया आज मैं तुम्हारी कर्जदार बन गयी हूँ।” गोपाल चाचा ने उनकी आँखों में देखा और कहा, “कविता, मेरा ये फौलादी लंड अब तेरी टाइट चूत का गुलाम बन चूका है मैं जब भी तुझे चोदने के लिए आऊ मना मत करना।” माँ ने हँसकर सब्जी बेचने वाले के लंड को फिर से सहलाया और देखते ही देखते वो फिर तन गया।

माँ ने उसे मुँह में लिया और ब्लोजॉब करने लगी। “तेरा लंड अभी भी भूखा है, साले,” माँ ने शरारत से कहा। गोपाल चाचा ने माँ को फिर बेड पर लिटाया। इस बार, उन्होंने माँ की गांड पर ध्यान दिया। “तेरी गांड को भी चोदूंगा, रंडी,” गोपाल चाचा ने कहा। माँ ने हँसकर जवाब दिया, “डाल दे, हरामी… फाड़ दे मेरी गांड।” गोपाल चाचा ने माँ की गांड में उँगली डाली, फिर धीरे-धीरे अपना लंड घुसाया। माँ ने दर्द और मजा दोनों की सिसकारी ली। “हाँ, गोपाल… और गहरा,” माँ चिल्लाईं।

गोपाल चाचा ने माँ की गांड को चोदा, करीब दस मिनट तक माँ की गांड मारने के बाद वहा वापस उनकी चूत में आए। दोनों ने हर पोजीशन में चुदाई की—मिशनरी, डॉगी, काउगर्ल सेक्स पोजीशन। माँ की सिसकारियाँ और गोपाल चाचा की गालियाँ कमरे में गूँज रही थीं। “तेरी चूत मेरे लंड की रानी है,” गोपाल चाचा ने कहा। माँ ने जवाब दिया, “और तेरा लंड मेरी चूत का बादशाह, साले।”

माँ की तड़पती चूत को चोद चोदकर स्वर्ग दिखा दिया सब्जी बेचने वाले ने

जब दोपहर ढली, माँ और सब्जी बेचने वाले गोपाल चाचा थककर लेट गए। माँ ने गोपाल चाचा के होंठों को चूमा और बोलीं, “गोपाल जी, तुमने मेरी इस तड़पती चूत को चोद चोदकर स्वर्ग दिखा दिया।” गोपाल चाचा ने उनकी कमर पकड़ी और कहा, “कविता भाभी, ये तो बस शुरुआत है। तेरी चूत मेरे लंड की भूखी रहेगी।” माँ ने एक मादक मुस्कान दी। “मेरे पति अगले हफ्ते फिर बाहर जाएँगे। मेरी चूत तुम्हारा इंतज़ार करेगी,” माँ ने कहा।

गोपाल चाचा ने हँसकर जवाब दिया, “तो मेरा मोटा लंड हाजिर रहेगा, रंडी।” माँ ने अपनी फटी साड़ी उठाई, उसे लपेटा, और एक शरारती नजर से गोपाल चाचा को देखा। “ये सुबह हमारी थी, गोपाल जी। मगर ये खेल अभी खत्म नहीं हुआ,” माँ ने कहा। मैं खिड़की से सब देख रही थी। मेरे मन में शर्म, उत्तेजना और हैरानी का मिश्रण था। मैं चुपके से वहाँ से हट गई, मगर माँ और गोपाल चाचा की वो चुदाई मेरे दिमाग में बार-बार घूम रही थी।


माँ की चूत की आग को ठंडा करा सब्जी बेचने वाले ने चोदकर अन्तर्वासना हिंदी MP-3 ऑडियो सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

ये अन्तर्वासना हिंदी ऑडियो सेक्स कहानी माँ और गोपाल चाचा की काम वासना की आग का एक ज्वलंत चित्रण है। मेरी कामवासना से भरी माँ की बेचैनी और सब्जी बेचने वाले गोपाल चाचा की सेक्स करने की भूख ने उस सुबह को एक जंगली, नंगे खेल में बदल दिया। अवैध सेक्स संबंध बनाने के दौरान उनकी गंदी गंदी गालियाँ, मादक सिसकारियाँ और फटे कपड़ों की चरचराहट उस शानदार चुदाई की तीव्रता को बयान करती थी।

इस अन्तर्वासना हिंदी ऑडियो सेक्स स्टोरी में हर पल को विस्तार से दिखाया गया, ताकि सेक्स स्टोरी पाठक मेरी बदचलन माँ और सब्जी बेचने वाले चाचा की वासना, शर्म और मजा को महसूस कर सके। माँ की टाइट चूत और गोपाल चाचा के मोटे लंड की जंग एक गुप्त वादे के साथ खत्म हुई, जो अगली मुलाकात का इंतज़ार करवा रही थी।

मुझे बताइए, इस अन्तर्वासना हिंदी MP-3 ऑडियो सेक्स स्टोरी का कौन सा हिस्सा आपको सबसे ज्यादा उत्तेजक लगा? क्या पात्रों की भावनाएँ और उनके बीच की गंदी बातें आपको पसंद आईं? या फिर आपको कहानी का टोन और वर्णन कैसा लगा? आपकी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण है।

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