मुफ्त में पढ़ें मोटे ठेकेदार ने ऐसे चोदा मुझे रंडी बनाकर बिहार के एक बदनाम गेस्ट हाउस में कामुकता भरी अन्तर्वासना हिंदी XXX चुदाई कहानी – Muft mein padhein Mote thekedaar ne aise choda mujhe randi banakar Bihar ke ek badnaam guest house mein kaamukta bhari antarvasna Hindi XXX chudai kahani – Read for free The fat contractor fucked me like a whore in a notorious guest house in Bihar. Erotic Hindi XXX fucking story full of lust …
वो 15 अगस्त की शाम थी जब पहली बार मैंने राजवाड़ा गेस्ट हाउस के रिसेप्शन पर कदम रखा था। मेरे हाथ में एक छोटा सा बैग था और आँखों में बेबसी का सैलाब। मेरा नाम रागिनी है, उम्र 32 साल, और पटना से 80 किलोमीटर दूर एक कस्बे में मेरा घर था जहाँ गरीबी घर का चूल्हा बुझा चुकी थी। मेरे मियाँ सुशांत मिश्रा, जो कभी प्राइवेट कंपनी में क्लर्क थे, 2 साल से बेरोज़गार घर में बैठे थे और हमारी 6 साल की बेटी की स्कूल की फीस का बोझ मुझ पर आ गया था। घर की जिम्मेदारी निभाने के लिए मैं ही एक गेस्ट हाउस में काम करने लगी.
गेस्ट हाउस का मैनेजर रंजीत बाबू एक चिकना-चुपड़ा 45 साल का चरित्रहीन आदमी था जिसकी नज़रों में औरत सिर्फ एक खिलौना थी। उसने मुझे क्लीनर की नौकरी का झांसा देकर बुलाया था गेस्ट हाउस में। लेकिन पहले ही दिन जब वो मुझे कमरा नंबर 3 में ले गया, तो उसकी नीयत का भोसड़ा मैं भांप गयी। उसने मेरे कंधे पर हाथ रखकर कहा, “रागिनी जी, यहाँ सैलरी तो 5 हजार है, लेकिन अगर एक्स्ट्रा काम करोगी तो रोज़ 2-3 हजार अलग से कमा सकती हो।”
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मेरे पेट में तितलियाँ उड़ने लगीं और माथे पर पसीना आ गया। मैं समझ गयी कि एक्स्ट्रा काम का मतलब सिर्फ झाड़ू-पोछा नहीं है बल्कि रंडी बनकर चुदवाने से है। फिर भी भूखी बेटी का चेहरा याद करके मैंने रंजीत की तरफ देखा और धीरे से पूछा, “कैसा काम?” उसने एक गंदी सी मुस्कान बिखेरते हुए कहा, “शरीर का धंधा, बिल्कुल प्राइवेट, कोई नहीं जानेगा।”
रंजीत ने बताया कि गेस्ट हाउस के पिछले कमरे रात में हाई-प्रोफाइल ग्राहकों के लिए खुलते हैं जहाँ लड़कियाँ अपनी जिस्मानी गर्मी बेचती हैं। उस रात मैं बिना कुछ तय किये वापस लौट आई, लेकिन मन में एक तूफान उमड़ रहा था। पूरी रात सुशांत के बेरोज़गार हाथ और बेटी की फटी ड्रेस मुझे कोसती रही। अगली सुबह मैंने खुद को आईने में नंगा खड़ा किया और अपने 36D के उभरे हुए बोबों को देखा जो अब भी मर्दों की भूख जगा सकते थे।
मेरी गोरी त्वचा, काले घने झांट के बालों वाली चूत, और पीछे से उठे हुए मांसल चूतड़ ये बता रहे थे कि मेरा जिस्म अभी अच्छी कीमत में बिकने लायक है। मैंने अपने निप्पल को उंगली से दबाया तो एक सिहरन सी दौड़ गयी मेरे कामुक जिस्म में और मैंने मन ही मन रंडी बनकर एक्स्ट्रा पैसे कमाने का फैसला कर लिया। उसी शाम मैं रंजीत के सामने खड़ी थी और बोली, “मुझे कमरा दिखाओ, मैं रंडी बनकर ग्राहक को एक्स्ट्रा सर्विस देने के लिए तैयार हूँ।”
मुझ नयी नयी रंडी बनी महिला का पहला ग्राहक लालू बाबू नाम का एक 50 साल का मोटा सा ठेकेदार था जिसके पेट पर बालों का जंगल था। वो कमरे में घुसते ही मेरे चेहरे को ऐसे देखने लगा जैसे कोई भूखा शेर हिरनी को ताक रहा हो। उसने दरवाज़ा बंद किया और मेरी कमर पर हाथ रखकर बोला, “तुम तो बिल्कुल माल लग रही हो रंडी, आज तो तुझे खूब चोदूंगा।” मेरी सांसें तेज़ हो गयीं और चूत में एक अजीब सी गर्मी दौड़ गयी।
मैंने डरते हुए अपनी साड़ी का पल्लू ठीक किया तो लालू ने झटके से मेरा हाथ पकड़ लिया। उसने मुझे बिस्तर पर धकेल दिया और अपना मोटा पेट मेरी जाँघों पर रख दिया। मेरे सेक्सी कुल्हे काँप रहे थे लेकिन अंदर से एक जानवर जाग चुका था। उसने मेरे ब्लाउज के बटन एक-एक करके खोले और मेरी 36D की ब्रा के अंदर से उछलते हुए चुचों को बाहर निकाला। उसकी मोटी उँगलियाँ मेरे भूरे निप्पलों पर घूमने लगीं और मैंने होंठ काटकर कराह रोकी।
“कितनी टाइट चूचियाँ हैं तेरी साली रांड, एकदम मस्त,” मोटा ठेकेदार लालू बड़बड़ाया और अपना चेहरा मेरे बोबों के बीच गड़ा दिया। उसकी गीली जीभ ने पहले बायाँ निप्पल चूसा और फिर दायाँ, ऐसे जैसे कोई बच्चा माँ का दूध पी रहा हो। मेरे तन बदन में आग सी लग गयी और मेरी चूत का रस पेटीकोट को भिगोने लगा। मैंने उसके सिर को अपने स्तनों पर दबाते हुए पहली बार गंदी गाली दी, “अच्छा चूस रहा है मेरी जान, थोड़ा और ज़ोर से।”
लालू ने मेरा पेटीकोट उतार फेंका और मेरी मोटी गांड के नीचे तकिये रख दिए। मेरी बालों वाली रसदार चूत उसके सामने खुल कर फैल गयी थी और उसके गुलाबी अंदरूनी होंठ चमक रहे थे। उस हरामी ठेकेदार ने अपनी 2 उँगलियाँ मेरे फुद्दी के छेद में डाल दीं और अंदर बाहर करते हुए बोला, “तेरी बुर तो एकदम कसी हुई है छिनाल, लगता है बहुत दिनों से लंड नहीं पड़ा।” ये सुनकर मेरे अंदर की रंडी जाग गयी और मैंने अपने कूल्हे उस मोटे ठेकेदार की उँगलियों पर मटकाने शुरू कर दिए।
मैंने खुद उस मोटे ठेकेदार की पैंट की ज़िप खोली और उसका मोटा लौड़ा बाहर निकाला। वो कम से कम 7 इंच का तना हुआ लंड था जिसकी नसें उभरी हुई थीं और सुपारी जैसा लाल मुंह चमक रहा था। मैंने अपने मुँह में पानी भरते हुए उस खड़े लंड को पकड़ा और धीरे से सहलाने लगी। फिर बिना देर किये मैंने उसके लंड को अपने होंठों के बीच लिया और जोरदार ब्लोजॉब देना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उसके सुपारी के चारों ओर घूमी और मैंने उसके लंड के गोटे भी मुँह में भर लिए।
लालू की आँखें बंद हो गयीं और उसके मुँह से भसक्कड़ गालियाँ निकलने लगीं, “साली छिनाल, तू तो पूरी रंडीबाज है।” मैंने उसके लंड को गले तक उतारा और उल्टी करने की हद तक चूसती रही। मेरा गला बैठ गया लेकिन ये सोचकर कि 3 हजार रुपये मिलेंगे, मैंने और ज़ोर से मुखमैथुन किया। लालू मेरे बाल पकड़कर मेरा मुँह अपने लंड पर जोर-जोर से चलवाने लगा और मेरी आँखों से आँसू निकल गए। फिर भी मैंने चिपचिपा पानी निगल लिया और आगे बढ़ने का इशारा किया।
फिर मोटे ठेकेदार ने मुझे उल्टा लिटाकर मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और अपना गरम लंड मेरी चूत के मुहाने पर रखा। उस मोटे ठेकेदार ने एक झटके में पूरा मोटा लंड मेरी टाइट चूत के अंदर घुसा दिया और मैं दर्द से चीख पड़ी। मेरी भोसड़ी में एक साथ इतना खिंचाव हुआ कि लगा फट जाऊंगी, लेकिन 2-4 धक्कों के बाद वही दर्द एक मीठी टीस में बदल गया। मेरे भीतर एक बिजली सी दौड़ गयी जब उसके लंड ने मेरी ग-स्पॉट को छुआ और मैं ज़ोर से चिल्लाई, “अब और जोर से मार, मेरी बुर फाड़ दे साले।”
लालू ने मेरे दोनों बोबों को ज़ोर से दबोचा और कुत्ते की तरह हांफते हुए चुदाई करने लगा। बिस्तर की चरमराहट, हमारी साँसों की आवाज़ और चूत से आने वाली चप-चप की गंदी आवाज़ पूरे कमरे में गूंज रही थी। मैंने अपने कुल्हे उसकी ताल पर मटकाये और हर धक्के के साथ उसके अंडकोष मेरी सेक्सी गांड पर ज़ोर से टकराने लगे। मेरे मुँह से बदतमीज़ भद्दी गालियाँ अपने आप निकलने लगीं, “चोद मुझे रांड की तरह, मेरी चूत में अपना सारा माल भर दे।”
करीब 20 मिनट तक जबरदस्त चुदाई के बाद लालू ने मुझे घोड़ी बना दिया यानी मेरी कमर पकड़कर पीछे से लंड डाल दिया। इस सेक्स पोजीशन में उसका हर धक्का मेरी फुद्दी के अंदर तक जा रहा था। मैं खुद अपने रसीले चूचों को हिला रही थी और पीछे मुड़कर उसे देखते हुए बोली, “मेरी गांड में भी उंगली डाल दे, मुझे पूरा भर दे भोसड़ी के।” उसने तुरंत अपनी उंगली मेरे गांड के छेद में डाल दी और डबल पेनीट्रेशन का एहसास मुझे पागल बना रहा था।
लालू ने मेरे झांट के बालों को उंगलियों में उलझाया और मेरी चूत का रस उन बालों पर लगाकर अपनी नाक से सूंघा। उसकी गंदी बातें और मेरी जिस्मानी भूख ने मेरे दिमाग का ताला खोल दिया था। फिर अचानक लालू ने मेरी कमर को और कसकर पकड़ा और एक लंबी सिसकारी के साथ अपना गाढ़ा चिपचिपा माल मेरी चूत के अंदर गिरा दिया। मैंने उसके गरम वीर्य को अपनी भोसड़ी में हर तरफ फैलता महसूस किया और मेरी भी चरम सीमा आ गयी।
मेरी पिंडलियाँ काँपने लगीं और आँखों के आगे अंधेरा छा गया जब मैं झड़ते हुए बिस्तर पर पूरी तरह लुट गयी। चुदाई करते करते लालू मेरे ऊपर ही ढह गया और 2 मिनट तक हम दोनों की साँसें एक-दूसरे के गले में मिलती रहीं। फिर वो उठा, मेरे माथे को चूमा और 3 हजार के 5 नोट मेरे सीने पर रखकर बोला, “अगली बार गुदा सेक्स करूंगा, तैयार रहना वेश्या।” मैंने पसीने से तर होंठों से धीरे से मुस्कुरा दिया और पैसे गिनने लगी।
उस मोटे ठेकेदार के जाने के बाद मैं बाथरूम में गयी और अपनी लाल हुई चूत को पानी से सहलाने लगी। आईने में मेरी आँखें एक कामुक औरत की तरह चमक रही थीं और मुझे खुद पर घिन आने की बजाय एक अजीब सी संतुष्टि हुई। मैंने सोचा कि सुशांत बेचारा तो आज भी बेरोज़गार घर पड़ा होगा, लेकिन मेरी चूत ने इतने पैसे कमा लिए जितने उसने पूरे महीने नहीं कमाए। फिर मैंने अपने गले में पड़ी मंगलसूत्र को छुआ और एक गहरी साँस छोड़ दी।
अगले 2 महीने बीतते-बीतते मैं राजवाड़ा गेस्ट हाउस की सबसे मशहूर कॉलगर्ल बन गयी। मेरे पास हर रोज़ 3-4 ग्राहक आते जिनमें नेता, बिजनेसमैन और कॉलेज के लड़के तक शामिल थे। कभी किसी के साथ मिशनरी पोज़ में चोदती तो कभी काउगर्ल बनकर खुद उनके लंड पर कूदती थी। मेरे शरीर से अब शराब और अलग-अलग मर्दों के चिपचिपे माल की गंध हमेशा आती थी, लेकिन यही मेरी पहचान बन गयी थी।
एक रात एक पत्रकार ने जब मेरे कमरे में छुपा कैमरा (Hidden Camera) रख दिया और अगले दिन पूरे बिहार में “गेस्ट हाउस में रंडी खाना चलने का भंडाफोड़” जैसी हेडलाइंस छप गयीं, तो सब कुछ तबाह हो गया। पुलिस ने छापा मारा, रंजीत भाग गया और मुझे रंडी कहकर हवालात में डाल दिया। सुशांत ने मेरी फोटो अखबार में देखी तो मुझे चरित्रहीन बताकर त्याग दिया और बेटी मुझसे छीन ली गयी। मेरे आँसू पूरी रात सूख नहीं रहे थे।
जमानत पर बाहर आने के बाद मैंने फैसला किया कि अब इसी धंधे को नये सिरे से अपनाऊंगी, लेकिन इस बार किसी और के लिए नहीं, सिर्फ अपने लिए। आज मैं पटना के एक होटल में बैठकर मेरी रंडी बन्ने के ये अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी लिख रही हूँ, जहाँ मेरी चूत ने मुझे मकान और गाड़ी दिला दी है। बेटी को बोर्डिंग स्कूल भेज रही हूँ ताकि वो कभी मेरी तरह न बने। लेकिन मन का एक कोना रोज़ यही सवाल करता है कि क्या बेबस औरत की कोई अलग राह होती है?
अब मैं आप सब पाठकों से, जिन्होंने मेरी आपबीती इतने ध्यान से पढ़ी, दिल से पूछना चाहती हूँ। क्या मैंने गलत किया या ये मजबूरी थी जिसमें सही-गलत का कोई मोल नहीं होता? कृपया नीचे कमेंट करके अपनी राय ज़रूर दें, मुझे बेसब्री से आपकी ईमानदार प्रतिक्रिया का इंतज़ार रहेगा।

