बी.एड की परीक्षा दिलवाने के बाद होटल में दोनों सालीयों की सील पैक वर्जिन चूत फाड़ी चोद चोदकर और भोसड़ा बनाया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मैं, रमेश, एक 30 साल का शादीशुदा आदमी, अपनी ससुराल गया, जहाँ मेरी बीवी राधा अपने पहले बच्चे के साथ थी। ससुराल में मेरी दो सालियाँ, किरण (24) और निशा (22), अपनी बी.एड परीक्षा के लिए मेरे साथ शहर गईं।
शहर में OYO होटल में ठहरने के दौरान, अनपेक्षित रूप से कामुक माहौल बन गया। यह कहानी मेरे और दोनों सालियों के बीच हुए बेहद उत्तेजक, नंगे, और बेशर्म यौन अनुभवों की है, जिसमें गंदी गालियाँ, हास्य, और भावनात्मक उथल-पुथल शामिल है। स्थान एक छोटा-सा शहर, मुरादनगर, और होटल का कमरा है, जहाँ शर्म और हया को ताक पर रखकर हमने अपनी इच्छाओं को खुलकर जिया।
मेरा नाम रमेश है, दोस्त मुझे “बुल्ला” कहते हैं, क्योंकि मेरा लंड 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा है बिलकुल गधे के लंड के जैसा। जब ये खड़ा होता है, तो लगता है जैसे कोई लोहे का डंडा चूत फाड़ने को तैयार हो। मेरी बीवी राधा, 28 साल की, गोरी-चिट्टी, मस्त फिगर वाली औरत है। उसकी चूचियाँ 34डी हैं, और गांड ऐसी कि देखकर लंड तुरंत सलामी दे। लेकिन इस बार वो अपने मायके में थी, बच्चे के साथ। ससुराल में मेरे ससुर रामलाल, सास सुशीला, और दो सालियाँ थीं—किरण और निशा। किरण 24 की, गदराया बदन, 36सी चूचियाँ, और नशीली आँखें। निशा 22 की, पतली-दुबली, लेकिन चूचियाँ 34बी और गांड इतनी टाइट कि देखकर मुठ मारने का मन करे। दोनों बहनें मस्तमौला, हँसती-खिलखिलाती, और मेरे साथ खुलकर मज़ाक करती थीं।
मैं दिसंबर की ठंड में ससुराल गया। ससुर बीमार, सास उनकी सेवा में, और साला दिल्ली में नौकरी करता था। किरण और निशा की बी.एड की परीक्षा थी, लेकिन कोई साथ जाने वाला नहीं था। ससुर ने मुझसे कहा, “रमेश, तू इनके साथ चल दे।” मैंने सोचा, 15 दिन की छुट्टी है, बोरियत से अच्छा है शहर घूम आऊँ। मैंने हाँ कर दी। हम तीनों ट्रेन से मुरादनगर पहुँचे और एक होटल में रुके। मैंने दो कमरे बुक किए—एक डबल किरण और निशा के लिए, एक सिंगल मेरे लिए।
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पहले दिन दोनों सालीयों ने बी.एड परीक्षा दी और दोपहर को होटल लौट आए। मैंने पूछा, “पेपर कैसा हुआ?” किरण बोली, “जीजू, मस्त गया। अब तो मज़े करेंगे!” उसकी बात में कुछ शरारत थी। मैं अपने कमरे में आराम करने गया। शाम को सोचा, इनसे पूछूँ, कहीं घूमने चलें? मैं उनके कमरे गया। किरण ने दरवाजा खोला। वो एक पतली-सी नाइटी में थी, जिसमें उसकी चूचियाँ साफ दिख रही थीं। निप्पल तक उभरे हुए थे। मैं बिस्तर पर बैठ गया। “निशा कहाँ है?” मैंने पूछा। “बाथरूम में,” किरण ने हँसते हुए कहा।
मैंने मज़ाक में कहा, “क्या बात है, किरण, ब्रा नहीं पहनी?” वो हँसी, “जीजू, यहाँ बूब्स छुपाने की क्या जरुरत है यहाँ हमारे अलावा है ही कौन ? तुम तो अपने हो!” मैंने कहा, “अपने? फिर भी तू तो छूने नहीं देती, साली!” वो मेरी गोद में आ बैठी और बोली, “छूकर देखो, मैं मना थोड़े करूँगी!” मेरा लंड तन गया। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ा। उफ्फ, क्या मुलायम थे! मैंने नाइटी के अंदर हाथ डाला, उसकी चूचियाँ मसलीं। वो सिसकारियाँ भरने लगी। मैंने कहा, “नाइटी उतार, साली आज तेरा कोमार्ये भंग कर देता हूँ!” उसने कहा, “यदि आपको मेरा कोमार्ये भंग करना है तो खुद ही उतार लो, जीजू मेरी नाइटी को!” मैंने एक झटके में उसकी नाइटी उतारी। वो सिर्फ पैंटी में थी। उसकी चूचियाँ गोरी, गोल, और निप्पल गुलाबी। मैंने उन्हें चूसना शुरू किया। वो बोली, “जीजू, और चूसो, मज़ा आ रहा है!”
मेरा लंड पैंट में तंबू बना रहा था। मैंने उसकी पैंटी में हाथ डाला। उसकी चूत गीली थी, बालों से भरी। मैंने उंगली अंदर डाली, वो मछली की तरह तड़पने लगी। तभी बाथरूम से फ्लश की आवाज आई। निशा बाहर आने वाली थी। मैंने झट से अंडरवियर पहना, किरण ने चादर ओढ़ ली। निशा बाहर आई, सिर्फ पैंटी में। उसकी चूचियाँ छोटी लेकिन मस्त थीं। वो मुझे देखकर शरमाई, फिर हँसी, “जीजू, कब आए?” मैंने कहा, “अभी। लेकिन तू तो जवान हो गई, साली!” वो बोली, “हाँ, जीजू, अब नींबू नहीं, संतरे हो गए!” मैंने हँसते हुए कहा, “संतरे? ये तो खरबूजे हैं!”
दोनों सालीयों को अपना गधे के लंड जैसा लंड दिखाया OYO होटल में
मैंने मज़ाक में कहा, “किरण की चूचियाँ बड़ी या तेरी?” निशा बोली, “मेरी छोटी हैं!” मैंने कहा, “लगी शर्त? 500 रुपये की!” दोनों हँसने लगीं। किरण ने चादर हटाई, वो तो पहले से नंगी थी। निशा ने भी पैंटी उतारी। दोनों मेरे सामने नंगी खड़ी थीं। मैंने दोनों की चूचियाँ पकड़ी, मसलीं। किरण की मुलायम, निशा की टाइट। मैंने कहा, “मुँह से चूसकर साइज़ पता करूँ?” दोनों बिस्तर पर लेट गईं। मैंने बारी-बारी उनकी चूचियाँ चूसीं। दोनों सिसकारियाँ भर रही थीं।
मैंने पूछा, “चूत पर बाल किसके ज़्यादा?” किरण बोली, “जीजू, देख लो!” मैंने दोनों की पैंटियाँ उतारीं। दोनों की चूत घने बालों से भरी थी। मैंने सहलाया, दोनों गीली थीं। मैंने कहा, “शेव नहीं करतीं क्या तुम दोनों अपनी बुर को?” निशा बोली, “कभी-कभी। लेकिन जीजू, तुम मुठ मारते हो क्या जब दीदी को माहवारी होती है?” मैं हँसा, “तू मारती है?” किरण बोली, “हाँ, मैं तो बैंगन से मारती हूँ!” निशा ने कहा, “मैं मोमबत्ती से!” मैंने पूछा, “चूत चुसवाती हो?” दोनों बोलीं, “हाँ, एक-दूसरे की चूसते हैं!” मैं दंग रह गया।
निशा ने कहा, “जीजू, तुम्हारा लंड दिखाओ हम भी तो देखें हमारी बहन को कितना लम्बा और मोटा लंड लेने की आदत है चुदाई करवाते वक्त!” मैंने अंडरवियर उतारा। मेरा लंड देखकर निशा बोली, “हाय राम, ये तो गधे का लंड है!” किरण ने लंड पकड़ा और चूसने लगी। मैंने कहा, “साली, तू तो मस्त चूसती है!” वो बोली, “दीदी ने सिखाया!” मैंने कहा, “तो प्रैक्टिकल करूँ?” दोनों चिल्लाईं, “हाँ, जीजू!”
साली बोली जीजा जी आपका लंड तो बैंगन से भी ज्यादा मोटा है और खीरे से भी ज्यादा लम्बा भी
मैंने मेरी वर्जिन साली किरण को बिस्तर पर लिटाया उसकी चूत को फाड़कर भोसड़ा बनाने के लिए। उसका नंगा बदन देखकर मेरा लंड फटने को था, मेरे लंड की नसें फूलकर लाल हो चुकी थी। मैंने उसकी चूत चाटी। उसका रस मीठा था, जैसे शहद। वो सिसकारी भर रही थी, “जीजू, चूसो!” मैंने उसकी टाँगें फैलाईं, चूत का छेद देखा। मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और धीरे-धीरे डाला।
वो चीखी, “आह, जीजू, फट गई रे मेरी वर्जिन चूत तो आज!” मैंने कहा, “साली रंडी, बैंगन डालती है हस्तमैथुन करने के लिए पोर्न फ़िल्में देखते हुए जब दर्द नहीं होता है, मेरे लंड से दर्द हो रहा है?” वो बोली, “हाय, जीजा जी आपका लंड तो बैंगन से भी ज्यादा मोटा है और खीरे से भी ज्यादा लम्बा भी!” मैंने धक्के मारे, उसकी सील पैक वर्जिन चूत की झिल्ली फटी, खून निकला। वो चिल्लाई, “हाय, मर गई!” लेकिन थोड़ी देर में मज़ा लेने लगी, “जीजू, चोदो और फाड़ दो मेरी चूत!”
मैंने 15 मिनट तक उसकी चुदाई की। उसकी चूत से पानी निकला। मेरा लंड भी झड़ने को था। मैंने पूछा, “माल कहाँ गिराऊँ?” वो बोली, “मुँह में!” मैंने लंड निकाला, लेकिन माल उसके मुँह, गाल, और चूचियों पर गिर गया उसके मुंह में जाने के वजाए। वो मेरे वीर्य को कुतिया की तरह चाटने लगी। निशा ने उसकी चूचियाँ चाटीं, मेरा माल खा लिया।
पहली चुदाई के दौरान वर्जिन साली की चूत की झिल्ली फटी, खून निकला
मेरी दूसरी वर्जिन साली निशा भी चुदवाने के लिए तड़प रही थी मगर उसे थोड़ा डर भी लग रहा था क्योंकि आज से पहले उसने कभी सेक्स नहीं करा था। मैंने कहा, “अब तेरी सील पैक वर्जिन चूत को फाड़कर भोसड़ा बनाने की बारी!” वो बोली, “जीजू, दर्द होगा!” किरण ने कहा, “पगली, मज़ा भी तो आएगा दर्द के बाद मुझे देख जीजा जी ने चोद चोदकर कितने मजे दिए हैं!” मैंने निशा को लिटाया, उसकी चूचियाँ दबाईं।
उसकी चूत गीली थी। मैंने लंड डाला, वो दर्द के मारे जोर से चीखी। उसकी चूत काफी ज्यादा टाइट थी। किरण ने वेसलीन पेट्रोलियम जेली दी, “लगा दो, जीजू!” मैंने मेरे लंड पर और साली की चूत पर वेसलीन पेट्रोलियम जेली लगाई, फिर लंड डाला। इस बार निशा ने दर्द सहा। वर्जिन साली की चूत की झिल्ली फटी, खून निकला। मैंने धीरे-धीरे चोदा। वो बोली, “जीजू, मज़ा आ रहा है चुदवाने में !” मैंने 20 मिनट तक उसकी चुदाई की। माल उसके मुँह में डाला, वो चटखारे लेकर पी गई।
उसके बाद मैंने फिर किरण को चोदा। वो चिल्लाई, “मादरचोद, धीरे डाल मैं तेरी साली हूँ कोई रंडी नहीं!” मैंने हँसकर कहा, “साली, तेरी चूत तो दस लंड झेल लेगी!” वो बोली, “हिजडे, फाड़ दे मेरी चूत!” मैंने 20 मिनट तक मेरी कुंवारी साली की चूत फाड़ी। फिर मेरा माल उसकी चूत में गिरा और वो थककर सो गई। निशा फिर बोली, “जीजू, मेरी चूत चूसो!” मैंने उसकी चूत चाटी, फिर 69 वाली मुखमैथुन पोजीशन में हम दोनों ने एक-दूसरे को चूसा। मेरा माल फिर उसके मुँह में गया।
रात को मैं खाना और बियर लाया। दोनों ने बियर पी, दर्द भूल गईं। हम तीनों नंगे होकर रात भर चुदाई करते रहे। मैंने दोनों की गांड भी मारी। किरण बोली, “जीजू, तेरे लंड ने तो मेरी गांड का भोसड़ा बना दिया!” निशा हँसी, “मेरी भी फाड़ दो!” सात दिन तक हमने होटल में चुदाई का खेल खेला। कभी मैं किरण को, कभी निशा को अपने कमरे में ले जाकर चोदा।
बी.एड की परीक्षा दिलवाने के बाद OYO होटल में दोनों सालीयों की सील पैक वर्जिन चूत फाड़ी चोद चोदकर और भोसड़ा बनाया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
बी.एड की परीक्षा दिलवाकर घर लौटने के बाद भी हम तीनो जीजा साली चुपके-चुपके चुदाई करके अपनी कामवासना शांत करते रहे। मेरी कुंवारी साली किरण और निशा दोनों ही मेरे गधे जैसे लंड की दीवानी हो गईं। इस जीजा साली अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी में हास्य, शर्म, और बेशर्मी का मिश्रण था। मुझे बताइए, आपको हम जीजा साली की पहली चुदाई की सेक्स कहानी कैसी लगी? किरण और निशा का किरदार कैसा रहा? क्या टोन ठीक था? आपका फीडबैक ज़रूर दीजिए!


