HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesजेठ जी की हवस का शिकार हुई पति के इलाज के लिए

जेठ जी की हवस का शिकार हुई पति के इलाज के लिए

पति के इलाज के लिए जेठ जी की हवस का शिकार हुई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मेरा नाम सावित्री है, उम्र 32 साल, एक शादीशुदा औरत, जो मथुरा, उत्तर प्रदेश में रहती है। मेरे पति, रमेश, की सड़क दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी टूट गई, और उनके इलाज के लिए 5 लाख रुपये चाहिए थे। मेरे जेठ, हरदयाल, सुनार हैं और अमीर। मैंने उनसे मदद मांगी, लेकिन उन्होंने रिश्तों की मर्यादा तोड़कर मेरे जिस्म की कीमत मांगी।

मेरे जेठ जी की मर्सिडीज़ बेंज़ G-क्लास SUV कार में, जंगल के सुनसान रास्ते पर, उन्होंने मेरी चुदाई की। मेरे सफेद साड़ी और ब्लाउज को फाड़कर, उन्होंने मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी हवस मिटाई। बदले में मुझे 5 लाख रुपये मिले। पति का इलाज एक साल चला, और मैं जेठ की हवस का शिकार बनती रही। यह कहानी मेरी लाचारी, बेबसी, और हार्डकोर सेक्स की घटनाओं को बयान करती है, जिसमें गंदी गालियाँ, हास्य, और उत्तेजना का मिश्रण है।


मेरा नाम सावित्री है। 32 साल की हूँ। गोरी, 36सी की चूचियाँ, गोल-मटोल गांड, और टाइट चूत। लोग कहते हैं, मैं अभी भी 25 की लगती हूँ। मेरे पति, रमेश, 35 साल के, एक स्कूल टीचर थे। हम मथुरा के एक छोटे से मोहल्ले में रहते थे। हमारी जिंदगी साधारण थी, लेकिन खुशहाल। रमेश मुझे बहुत प्यार करते थे। उनकी एक स्माइल मेरे दिल को चैन देती थी। लेकिन चार महीने पहले एक सड़क दुर्घटना ने सबकुछ बदल दिया। रमेश की रीढ़ की हड्डी टूटी, और डॉक्टर ने कहा, “इलाज के लिए 5 लाख रुपये चाहिए। नहीं तो वो कभी चल नहीं पाएंगे।” मेरे पास सिर्फ़ 30,000 रुपये थे। मैं रात-दिन रोती थी। रमेश बिस्तर पर पड़े कराह रहे थे, और मैं कुछ नहीं कर पा रही थी।

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पति के इलाज के लिए जेठ जी की हवस का शिकार हुई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी I became a victim of brother-in-law's lust for the treatment of my husband Antarvasna Hindi sex story
I became a victim of brother-in-law’s lust for the treatment of my husband Antarvasna Hindi sex story

मैंने रिश्तेदारों से मदद मांगी, लेकिन सबने मुँह फेर लिया। आखिरकार, मुझे मेरे जेठ, हरदयाल, की याद आई। हरदयाल, 45 साल के, सुनार हैं। मथुरा में उनकी ज्वेलरी की बड़ी दुकान है। वो अमीर हैं, बड़ा बंगला, महंगी SUV कार (मर्सिडीज़-बेंज़ जी-क्लास), और रौबदार रुतबा। उनकी पत्नी, सुनीता भाभी, 40 साल की, और उनके दो बच्चे, रवि और रीना, कॉलेज में पढ़ते हैं। मैंने सोचा, जेठ जी से मदद मांगूँ। शायद वो मेरी और रमेश की हालत देखकर रहम करें।

पति के इलाज के लिए पैसे मांगने मैं उनके घर गई। सफेद साड़ी और ब्लाउज पहना था मैंने मेरे सेक्सी जिस्म पर जिसमें मैं बहुत कड़क माल लग रही थी। आँखें आँसुओं से भरी थीं। सुनीता भाभी ने दरवाजा खोला। मुझे रोता देखकर वो घबरा गईं, “सावित्री, क्या हुआ?” मैंने सब बता दिया—रमेश की दुर्घटना, 5 लाख की जरूरत, मेरी बेबसी। भाभी ने मुझे गले लगाया, “रो मत, हम कुछ करेंगे।” रवि और रीना ने भी मेरी बात सुनी। रवि बोला, “पापा से बात करो, वो मदद करेंगे।” तभी हरदयाल घर आए। वो मुझे देखकर बोले, “सावित्री, तू यहाँ? क्या बात है?” मैंने रोते हुए सब बताया। वो चुपचाप सुनते रहे। फिर बोले, “5 लाख बड़ी रकम है। घर में इतने पैसे नहीं। तू मेरे साथ बैंक चल, कुछ इंतज़ाम करते हैं।” मैंने राहत की साँस ली।

जेठ की मर्सिडीज़ बेंज़ G-क्लास SUV कार और जंगल का सुनसान रास्ता

हरदयाल ने मुझे अपनी चमचमाती SUV में बिठाया। मैंने सफेद साड़ी और ब्लाउज पहना था। वो बोले, “सावित्री, तू चिंता मत कर। मैं सब ठीक कर दूँगा।” मैंने कहा, “जेठ जी, आपकी मदद कभी नहीं भूलूँगी।” वो मुस्कुराए, लेकिन उनकी आँखों में कुछ और था। हम शहर से बाहर निकले। मैंने पूछा, “बैंक तो शहर में है, ये रास्ता कहाँ का है?” वो हँसे, “शॉर्टकट है।” लेकिन रास्ता सुनसान होता गया। हम एक जंगल के पास रुके, जहाँ कोई नहीं था। मेरा दिल धड़कने लगा।

हरदयाल ने कार रोकी और मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में हवस थी। वो बोले, “सावित्री, 5 लाख दूँगा, लेकिन बदले में तुझे कुछ देना होगा।” मैं समझ गई। मैंने कहा, “जेठ जी, मैं आपकी छोटे भाई की बीवी हूँ! ये गलत है!” वो हँसे, “साली, रिश्ते तो पेट नहीं भरते। तू मेरी रंडी बन, पैसे ले जा!” मैं रोने लगी, “जेठ जी, रहम करो!” लेकिन वो बोले, “चुप, कुतिया! या तो चूत दे, या पैसे भूल जा!” मेरी मजबूरी थी। रमेश की जिंदगी दांव पर थी। मैं चुप हो गई।

जिस्म का सौदा: सुनसान जंगल में ठरकी जेठ की हवस और मेरी खतरनाक चुदाई

हरदयाल ने कार की पिछली सीट खोली। वो बोले, “जल्दी से साड़ी उतार, साली और बिलकुल नंगी हो जा!” मैं रो रही थी, लेकिन मजबूरी में रोते रोते अपनी साड़ी उतारी। मेरा सफेद ब्लाउज और पैंटी दिख रहे थे। मेरे ठरकी जेठ जी ने मेरे ब्लाउज के बटन खोले और मेरी ब्रा निचे करी, मेरी चूचियाँ लपक कर बाहर आ गईं। वो बोला, “क्या मस्त चूचियाँ हैं, सावित्री! मेरा छोटा भाई रमेश तो इनका मज़ा लेता होगा!” मैंने कहा, “जेठ जी, ये गलत है!” वो हँसा, “रंडी, गलत-सही बाद में देखेंगे, पहले मेरे लंड का मज़ा ले और मुझे तेरी गांड और चूत के मजे लेने दे!” फिर मेरी चुदाई करने के लिए मेरे जेठ जी ने अपनी पैंट और चड्डी उतारी। उस हरामी का 8 इंच का लंड तन गया था मेरी चूत फाड़ने के लिए।

वो साला हरामी मेरे पास आया और मेरी चूचियों को दबाने लगा। मैं चीखी, “हाय, धीरे!” उसने मेरी ब्रा फाड़ दी और मेरे निप्पलों को चूसने लगा। उसकी दाढ़ी चुभ रही थी। मैं सिसकारी भर रही थी, शर्म और उत्तेजना के मिश्रण में। उसने मेरी पैंटी उतारी। मेरी चूत गीली थी। वो बोला, “साली, तेरी चूत तो तैयार है!” उसने मेरी चूत चाटी। उसकी जीभ मेरे दाने को रगड़ रही थी। मैं चिल्लाई, “जेठ जी, ये पाप है!” वो हँसा, “पाप तो तू कर रही है, रंडी! अब मेरा लंड चूस!”

मैंने मजबूरी में ना चाहते हुए भी मेरे जेठ जी का लंड अपने मुँह में लिया और उन्हें ब्लोजॉब देने लगी। मेरे जेठ जी के लंड का स्वाद कड़वा था। वो मेरे मुँह में धक्के मारने लगा, “चूस, कुतिया! पूरा लंड ले!” मैं अपने घुटनों पर बैठी थी और अपने मुंह की चुदाई करवा रही थी। उस अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए मुझे अपनी मर्सिडीज़ बेंज़ G-क्लास कार की सीट पर लिटाया, मेरी टाँगें फैलाईं, और मेरी चूत में लंड पेल दिया। मैं चीखी, “हाय, मर गई!” उसका लंड मेरी चूत को फाड़ रहा था। वो बोला, “साली, तेरी चूत तो टाइट है! रमेश ने ठीक से चोदा नहीं क्या?” मैं रो रही थी, “जेठ जी, रहम करो!” लेकिन वो जोर-जोर से धक्के मार रहा था। मेरी चूचियाँ उछल रही थीं।

15 मिनट तक उसने मुझे मर्सिडीज़ बेंज़ G-क्लास में बहुत खतरनाक तरीके से चोदा। जब उनका वीर्य निकलने को हुआ तो फिर बोला, “कहाँ माल गिराऊँ, रंडी?” मैंने कहा, “बाहर!” लेकिन उसने मेरी चूत में ही माल छोड़ दिया। चुदने के बाद मैं थककर लेट गई। उसने मेरे कपड़े फेंके और बोला, “ये ले 5 लाख। रमेश का इलाज कर। और पैसे चाहिए, तो फिर चुदवाने आ जाना!” मैंने पैसे लिए और रोते हुए घर लौटी।

जंगल में जेठ जी की हवस शांत करने के बाद घर लौटकर बीमार पते का इलाज

रमेश को अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टर ने कहा, “इलाज लंबा चलेगा। हर महीने 50,000 चाहिए।” मैंने जेठ के पैसे से पहला किश्त भरा। रमेश ने पूछा, “सावित्री, इतने पैसे कहाँ से?” मैंने कहा, “रिश्तेदारों से उधार लिया।” लेकिन मेरे दिल में शर्म और अपराधबोध था। मैंने सोचा, “सावित्री, तूने अपनी इज्ज़त बेच दी, लेकिन रमेश की जिंदगी बच जाएगी।”

हरदयाल ने मुझे फिर बुलाया। वो बोला, “सावित्री, और पैसे चाहिए? मेरे पास आ!” मैंने मना किया, लेकिन रमेश की दवाइयों का खर्च बढ़ रहा था। मैं फिर उसके घर गई। इस बार सुनीता भाभी और बच्चे घर पर नहीं थे। हरदयाल ने मुझे बेडरूम में ले जाया। वो बोला, “साली, आज तुझे रानी बनाकर चोदूँगा!” उसने मेरी साड़ी उतारी। मैंने गुलाबी ब्लाउज और पैंटी पहनी थी। उसने मेरी चूचियों को दबाया, “क्या मस्त माल है, सावित्री!” मैंने कहा, “जेठ जी, जल्दी करो, मुझे शर्म आ रही है।”

जेठ की हवस का दूसरा दौर पहले चूत चाटी फिर चूत चोदने के बाद गांड भी मारी

उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी चूत चाटने लगे अपनी जीभ से। मैं चूत चटवाते चटवाते जोर जोर से सिसकारी भर रही थी, “हाय, जेठ जी, ये क्या कर रहे हो!” वो बोला, “चुप, रंडी! तेरी चूत का रस पीना है!” उसने मेरी पैंटी उतारी और मेरी चूत में उंगली डाली। मैं तड़प रही थी। फिर उसने अपना लंड निकाला और मेरे मुँह में डाला। मैं चूस रही थी, और वो गालियाँ दे रहा था, “चूस, कुतिया! तेरी चूत से ज़्यादा मज़ा तेरे मुँह में है!” मेरे जेठ जी ने अपनी हवस मिटाने के लिए मुझे घोड़ी बनाकर डॉगी स्टाइल में चोदा।

उस हरामी का लंबा मोटा लंड मेरी चूत में गहरे तक गया। मैं चीख रही थी, “हाय, जेठ जी, धीरे!” वो हँसा, “साली, धीरे से मज़ा थोड़े आता है!” उसने मेरी गांड पर थप्पड़ मारे। फिर मेरी गांड में तेल लगाया और लंड डाला। मैं चिल्लाई, “हाय, फट गई!” वो बोला, “रंडी, तेरी गांड तो स्वर्ग है!” 20 मिनट तक उसने मेरी चूत और गांड मारी। अंत में उसने मेरी चूचियों पर अपना गरमा गर्म माल छोड़ा। इस बार मेरे जिस्म से अपनी हवस शांत करने के बदले उन्होंने मुझे 50,000 रुपये दिए। मैं घर लौटी, शर्मिंदगी और पैसे लेकर। पैसों की मजबूरी में मुझे मेरे जेठ जी की रंडी बनाकर रख दिया था, जब भी पति के इलाज के लिए पैसे चाहिये होते मैं उनके पास चुदने के लिए पहुँच जाती…

कई महीनों की चुदाई और पति के इलाज का सिलसिला

रमेश का इलाज एक साल तक चला। हर महीने मुझे हरदयाल के पास जाना पड़ता। कभी वो मुझे अपने बंगले में चोदता, कभी जंगल में अपनी SUV में। एक बार उसने मुझे अपने दुकान के गोदाम में ले जाया। वहाँ उसने मुझे रस्सियों से बाँधा और बोला, “सावित्री, आज तुझे Hardcore BDSM Sex का मज़ा दूँगा!” उसने मेरी चूचियों पर चाबुक मारा। मैं चीखी, “जेठ जी, रहम करो!” लेकिन मेरी चूत गीली हो रही थी। वो हँसा, “रंडी, तुझे दर्द में मज़ा आता है!” उसने मेरी चूत में वाइब्रेटर डाला और मेरे मुँह में लंड पेला। 30 मिनट तक उसने मुझे रगड़ा। उसका माल मेरे चेहरे पर गिरा। उसने 60,000 रुपये दिए।

एक रात वो शराब पीकर आया। उसने मुझे नंगा किया और बोला, “साली, आज तेरी गांड का भोसड़ा बनाऊँगा!” उसने मेरी गांड में इतनी जोर से लंड डाला कि मैं बेहोश-सी हो गई। वो चिल्ला रहा था, “ले, रंडी, मेरा लंड संभाल!” मैं दर्द में कराह रही थी, लेकिन मज़ा भी आ रहा था। उसने मेरी चूत और गांड बारी-बारी चोदी। अंत में उसने मेरे मुँह में माल छोड़ा। मैंने गटक लिया, क्योंकि पैसे चाहिए थे। उसने 70,000 रुपये दिए।

सेक्स के दौरान हास्य और शर्मिंदगी का मिश्रण

कभी-कभी हास्य भी आता था। एक बार मेरे जेठ जी का फोन चुदाई के दौरान निचे गिर गया। वो चिल्लाया, “भेनचोद, मेरा फोन गिर गया!” मैं हँसी, लेकिन दिल में दर्द था। एक बार मेरे जेठ जी ने मुझे अपनी दुकान में घोड़ी बनाकर चोदा, और उसका कर्मचारी बाहर से चिल्लाया, “साहब, ग्राहक आया है!” हरदयाल ने गुस्से में कहा, “साले, इधर मैं ग्राहक संभाल रहा हूँ उधर तू संभाल ले!” मैं शर्म से मर गई, लेकिन हँसी भी आई।

हर बार चुदाई के बाद मैं रोती। मैंने मेरे पति रमेश से झूठ बोला, “पैसे उधार लिए हैं।” मेरे सेक्सी जिस्म पर मेरे ठरकी जेठ हरदयाल के थप्पड़ों के निशान थे। मैंने खुद को कोसा, “सावित्री, तू तो अपना सुहाग बचाने के खातिर रंडी बन गई!” लेकिन मेरा सुहाग रमेश की साँसें मेरे लिए सबकुछ थीं।

मेरे बीमार पति का इलाज और मेरी बेबसी

एक साल बाद रमेश ठीक होने लगा। डॉक्टर ने कहा, “वो जल्दी चल सकेंगे।” मैंने हरदयाल के पैसे से सारा खर्च उठाया। आखिरी बार जब मैं हरदयाल से मिली, उसने मुझे अपने बंगले में बुलाया। वो बोला, “सावित्री, तूने मेरी हवस मिटाई, मैंने तेरा खर्च उठाया। अब रमेश ठीक है, तो ये सिलसिला खत्म?” मैंने कहा, “हाँ, जेठ जी।” उसने मुझे आखिरी बार चोदा। इस बार उसने प्यार से चोदा, मेरी चूत चाटी, मेरी चूचियाँ चूसीं। वो बोला, “सावित्री, तू सच्ची रानी है।” उसने मुझे 1 लाख रुपये दिए।

मेरा पति रमेश अब अपने दोनों पैरों पर चलने लगा है। वो स्कूल वापस गया। उसने मुझसे पूछा, “सावित्री, तुमने इतने पैसे कैसे जुटाए?” मैंने कहा, “रिश्तेदारों से।” लेकिन मेरे दिल में शर्म थी। मैंने अपनी इज्ज़त बेचकर अपने सुहाग की जिंदगी बचाई थी।

पति के इलाज के लिए जेठ जी की हवस का शिकार हुई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

मेरा सुहाग रमेश अब बिलकुल ठीक है, लेकिन मेरे सेक्सी जिस्म पर अभी भी मेरे जेठ हरदयाल की क्रूरता के निशान हैं। जंगल की मर्सिडीज़ बेंज़ G-क्लास SUV कार में जिस्म का सौदा, गोदाम की रस्सियाँ, और बंगले का बिस्तर—सब मेरी बेबसी की कहानी कहते हैं। गंदी गालियाँ, चुदाई, और हास्य ने मेरी लाचारी को छुपाया। मैंने पैसों के खातिर अपनी इज्ज़त बेची, लेकिन मेरे पति मेरे सुहाग रमेश को नई जिंदगी दी। आपको जेठ जी और मेरी यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी कैसी लगी? सावित्री की मजबूरी और हिम्मत ने क्या छुआ? हास्य और उत्तेजना का मिश्रण कैसा रहा? आपका फीडबैक ज़रूर दीजिए!

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