HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesदादाजी के मोटे लंड से थ्रीसम चुदाई करवाई कुंवारी पोतियों ने

दादाजी के मोटे लंड से थ्रीसम चुदाई करवाई कुंवारी पोतियों ने

बुजुर्ग दादाजी के मोटे लंड से थ्रीसम चुदाई करवाई कुंवारी पोतियों ने अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मैं, अठारह साल की कुंवारी लड़की प्रिया, अपनी सहेली नेहा के साथ दिल्ली के एक पुराने बंगले में रहती हूँ जहाँ मेरे सत्तर साल के दादाजी रामस्वरूप अकेले रहते हैं। हम दोनों की चूतें हर रात गर्म होकर पानी छोड़ती हैं, पर कोई लौड़ा नहीं जो हमारी सील तोड़े। एक दोपहर हम गंदी-गंदी बातें करते हुए दादाजी की मोटी जाँघों और सोते हुए लंड को घूरती हैं, और एक शैतानी योजना बनती है कि हम उन्हें बहकाकर अपनी कुंवारी बुर में उनका पुराना लंड घुसवाएँगी।

हम उन्हें फर्श पर पटकती हैं, मदद का नाटक करते हुए उनके बदन को सहलाती हैं, होंठ चूसती हैं, कपड़े उतारकर नंगी हो जाती हैं, फिर घुटनों के बल बैठकर उनका कड़क लौड़ा चूसती हैं। दादाजी की आँखें लालच से चमकती हैं, और वे हमारी जवान चूतों को चाटते हैं, उँगलियाँ घुसेड़ते हैं, फिर विभिन्न मुद्राओं में हमें चोदते हैं। थ्रीसम में डबल ब्लोजॉब, डीपथ्रोट, कमशॉट, चूत चटाई, गांठ तोड़ना, सब कुछ होता है। पुराना लंड दो जवान बुरों को एक साथ ठोकता है, चुदाई इतनी जोरदार कि हम चीखती रहती हैं, वीर्य की बौछारें हमारे मुँह-चेहरे पर गिरती हैं। कहानी में भरपूर फोरप्ले, गाली-गलौज, झड़ना, और नाटकीय परिणाम हैं।


मैं प्रिया हूँ, अठारह बरस की कुंवारी लड़की, जिसकी सील पैक वर्जिन चूत और गांड हर रात सपनों में सेक्स करने के लिए गठीले लंड की तलाश करती है। उस दोपहर दिल्ली के पुराने बंगले में, जहाँ दीवारें पीली पड़ी हैं और हवा में चंदन की महक घुली रहती है, मैं और मेरी सहेली नेहा फर्श पर लेटीं थीं। हमारी स्कर्टें घुटनों तक चढ़ी हुई थीं, और हमारी उँगलियाँ अपनी-अपनी चूत पर फिसल रही थीं। “साली, कितना पानी निकल रहा है मेरी बुर से, कोई मोटा लौड़ा चाहिए जो इसे फाड़ दे,” मैंने सिसकारी भरी, और नेहा हँस पड़ी, “हाँ रंडी, मेरी गांड भी खुजली कर रही है, कोई बहनचोद चाहिए जो हमें एक साथ चोदे।” हमारी साँसें तेज थीं, चूचियाँ उछल रही थीं, और तभी हमारी नजर पड़ी सोफे पर सोते दादाजी रामस्वरूप पर। उनकी सफेद धोती में उभार साफ दिख रहा था, और हमारी आँखें चमक उठीं। मन में विचार आया कि यही पुराना लंड हमारी कुंवारी चूतों की भूख मिटा सकता है। हमने एक-दूसरे को देखा, मुस्कुराईं, और योजना बन गई।

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हम धीरे-धीरे दादाजी के पास पहुँचीं, उनके कंधों को सहलाते हुए बोलीं, “दादाजी, आप थक गए लगते हैं, हम मालिश कर दें।” वे आँखें मलते उठे, पर हमने उन्हें हल्के से धक्का देकर फर्श पर लिटा दिया। “अरे बेटियाँ, क्या कर रही हो?” वे हँसे, पर हमारी हथेलियाँ उनकी छाती पर फिसलने लगीं। मैंने उनकी धोती का नाड़ा खींचा, और नेहा ने उनकी कमीज के बटन खोल दिए। उनकी झुर्रियों भरी त्वचा गर्म थी, और जैसे ही मेरी उँगलियाँ उनके बुजुर्ग लंड के पास पहुँचीं, वह सख्त होने लगा। “दादाजी, आपका बुजुर्ग लौड़ा तो अभी भी जवान लगता है,” मैंने फुसफुसाया, और नेहा ने हँसते हुए कहा, “हाँ, अब हम बुजुर्ग दादा जी के लंड की सेक्स दासी बनकर उसकी सेवा करेंगी।” हमारी साँसें उनके गले पर गिर रही थीं, और हमारी चूतें पानी से तर थीं। दादाजी की आँखें चौड़ी हो गईं, पर विरोध की बजाय उनकी हथेलियाँ हमारी कमर पर आ गईं।

मैंने झुककर दादाजी के होंठ अपने होंठों से दबा लिए, जीभ अंदर घुसेड़ते हुए उनकी जीभ को चूसा। स्वाद नमकीन था, अनुभव का, और मेरी चूत में सनसनी दौड़ गई। नेहा ने मेरे बगल में घुटने टेकते हुए दादाजी की जाँघें सहलाईं, और बोली, “दादाजी, हमारी कुंवारी बुर देखना चाहते हो?” हमने एक-दूसरे की नजरों में देखा, और फिर अपने कपड़े उतार फेंके। मेरी गुलाबी चूचियाँ उछलीं, निप्पल कड़े हो गए, और नेहा की गांठ वाली चूत चमकने लगी। दादाजी का लंड धोती से बाहर निकल आया, मोटा, नसों वाला, सिर पर पानी की बूँद। “बहनचोद, ये तो राक्षस है,” मैंने चीखकर कहा, और नेहा ने हँसते हुए बूढ़े दादा जी का बुजुर्ग लंड पकड़ लिया। हम दोनों घुटनों पर बैठ गईं, और अपना पहला डबल ब्लोजॉब शुरू किया। मेरे होंठ लंड के सिरे पर, नेहा की जीभ अंडकोष पर, और दादाजी की सिसकारी कमरे में गूँजने लगी।

हमने दादाजी को नंगा कर दिया, उनकी झुर्रियों भरी छाती पर अपनी चूचियाँ रगड़ीं, और उनकी उँगलियाँ हमारी चूत में घुसने लगीं। “आह री छिनाल, कितनी टाइट हो तुम,” दादाजी ने गुर्राया, और मैंने उनकी उँगली को अपनी बुर में और गहरा धकेला। नेहा मेरी चूचियाँ चूस रही थी, और मैं दादाजी के लंड को मुँह में लेकर गला तक उतार रही थी। लार टपक रही थी, चूत का पानी फर्श पर गिर रहा था, और कमरे में चुदाई की गंध फैल गई। “दादाजी, हमारी कुंवारी सील तोड़ दो,” मैंने विनती की, और नेहा ने अपनी गांड उनके मुँह पर रख दी। दादाजी की जीभ नेहा की भोसड़े में घुस गई, और नेहा चीख उठी, “चाटो रे बूढ़े, अपनी पोती की चूत चाटो!” मैंने दादाजी के लंड को सहलाते हुए उनकी गांठ चाटी, और हमारा फोरप्ले इतना तीव्र हो गया कि हमारी टाँगें काँपने लगीं।

दो वर्जिन लड़कियों की कुंवारी चूतों में पुराना लंड घुसने की तैयारी और पहली चुदाई

मैं दादाजी के ऊपर चढ़ गई, मेरी चूत उनके लंड के सिरे पर रगड़ रही थी, पानी दोनों को चिकना कर रहा था। “दादाजी, धीरे से घुसाओ, कुंवारी हूँ,” मैंने सिसकारी, पर अंदर से उतावली थी। नेहा मेरी चूचियाँ दबा रही थी, और दादाजी ने मेरी कमर पकड़कर नीचे खींचा। लंड का सिरा मेरी बुर में घुसा, दर्द की लहर दौड़ी, पर फिर आनंद फैल गया। “आह भोसड़ीके, फाड़ दिया!” मैं चीखी, पर हिलना नहीं रुकी। नेहा दादाजी के मुँह पर सवार थी, अपनी चूत रगड़ रही थी, और दादाजी की जीभ उसकी गांठ चाट रही थी। मैं ऊपर-नीचे हो रही थी, मेरी चूचियाँ उछल रही थीं, और दादाजी का लंड मेरी दीवारों को रगड़ रहा था। नेहा उतरकर मेरे बगल में आई, और हम दोनों ने दादाजी के लंड को बारी-बारी चूसा, मेरी कुंवारी खून और पानी से सना हुआ।

दादाजी ने मुझे पीठ के बल लिटाया, मेरी टाँगें कंधों पर रखीं, और जोरदार धक्के शुरू किए। “ले रंडी, अपनी पोती की चूत मार!” मैं चीख रही थी, और नेहा मेरी चूचियाँ चूस रही थी। दादाजी का पसीना मेरे बदन पर गिर रहा था, उनकी साँसें तेज थीं, और मेरी बुर चुदाई की लय में सिकुड़ रही थी। नेहा ने दादाजी का लंड मेरी चूत से निकालकर अपने मुँह में लिया, और फिर मुझे चाटने लगी। “तेरी चूत का स्वाद लाजवाब है प्रिया,” नेहा बोली, और मैंने उसकी गांड में मेरी उँगली घुसेड़ दी। दादाजी ने नेहा को घोड़ी मुद्रा में किया, उसकी गांड थपथपाई, और लंड एक झटके में गांड के अंदर घुसा दिया। नेहा की चीख गूँजी, “मादरचोद, फाड़ डाला!” पर उसकी कमर अपने आप हिलने लगी। हम तीनों की जंगली थ्रीसम चुदाई का तांडव शुरू हो चुका था।

मैं नेहा की टाइट चूत अपनी जीभ से चाट रही थी, दादाजी नेहा को पीछे से ठोक रहे थे, और नेहा मेरी चूचियाँ मसल रही थी। “दोनों रंडियों को एक साथ चोदूँगा,” दादाजी गरजे, और हमें साइड में लिटाकर एक के बाद एक लंड घुसाने लगे। मेरी चूत में झनझनाहट थी, जंगली थ्रीसम सेक्स के दौरान नंगी नेहा की सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं, और दादाजी का लंड दोनों की बुर में बारी-बारी से धंस रहा था। थ्रीसम सेक्स के दौरान मैंने दादाजी के अंडकोष चाटे, नेहा ने उनके निप्पल काटे, और हमारा पसीना आपस में मिल गया। “कमशॉट चाहिए दादाजी, हमारे मुँह में,” मैंने विनती की, और दादाजी ने हमें घुटनों पर बिठाया। हमने डबल ब्लोजॉब शुरू किया, जीभें लंड पर नाच रही थीं, और दादाजी की साँसें रुक-रुक हो रही थीं। कमरे में सिर्फ चूसने की आवाज और हमारी गालियाँ थीं।

दादाजी ने हमें फिर से फर्श पर पटक दिया, मेरी टाँगें चौड़ी कीं, और लंड एक झटके में मेरी चूत के अंदर घुसा दिया। “ले छिनाल, तेरी कुंवारी चूत को फिर से चोदता हूँ अपने बूढ़े लंड से,” वे बोले, और मैंने उनकी पीठ नाखूनों से खुरची। मेरी सहेली नेहा मेरे मुँह पर सवार हो गई, वह साली कुतिया अपनी चूत के होंठ मेरे शरबती होंठों पर रगड़ रही थी, और मैं उसका पानी पी रही थी। दादाजी की चुदाई की गति बढ़ी, मेरी बुर में आग लगी हुई थी, और मैं चरम की ओर बढ़ रही थी। “झड़ रही हूँ दादाजी!” मैं चीखी, और मेरी चूत ने लंड को कस लिया। नेहा भी मेरे मुँह पर झड़ गई, उसका पानी मेरे गले में उतर गया। दादाजी ने लंड निकालकर नेहा की चूत में घुसाया, और उसे भी झड़ने पर मजबूर कर दिया। हम तीनों थककर लेट गए, पर लंड अभी भी कड़क था।

दादाजी के मोटे लंड से दो सील पैक वर्जिन चूत की थ्रीसम चुदाई की चरमसीमा और वीर्य की बौछारें

दादाजी ने हमें उठाया, दीवार से सटाकर खड़ा किया, और मेरी एक टाँग उठाकर लंड घुसा दिया। “ले रंडी, दीवार से टेककर चुदाई झेल,” वे बोले, और मैंने नेहा का हाथ पकड़ लिया। नेहा मेरी चूचियाँ चूस रही थी, और दादाजी मेरी बुर ठोक रहे थे। फिर नेहा की चुदाई करवाने की बारी आई, उसकी दोनों नंगी टाँगें ऊपर, और बूढ़े दादा जी का बुजुर्ग लंड उसकी गांड के पास रगड़ा। “गांड भी मारोगे दादाजी?” नेहा ने शरमाते हुए पूछा, पर दादाजी ने सिर्फ मुस्कुराकर उसकी चूत में धक्का मारा। मैं दादाजी के पीछे से उनकी गांठ चाट रही थी, और हमारा त्रिमूर्ति चुदाई का नया दौर शुरू हो गया। कमरे में पसीने की गंध, चूत के पानी की चिकनाहट, और लंड की धड़कन सब मिलकर एक संगीत बना रहे थे। मेरी चूत फिर से झड़ने को थी, और मैंने दादाजी से विनती की, “अंदर झड़ो दादा जी, हमारी कोख भर दो आज।”

दादाजी ने हमें फर्श पर लिटाया, मेरे ऊपर नेहा, और लंड बारी-बारी से दोनों की टाइट चूत में घुसाने लगे। “मैं कितनी किस्मत वाला बुजुर्ग हूँ जो दोनों पोतियों की कुंवारी बुर एक साथ मार रहा हूँ,” वे गरजे, और हम दोनों थ्रीसम चुदाई का आनंद लेते लेते चीख रही थीं। मेरी चूत में बूढ़े दादा जी का बुजुर्ग लंड, नेहा की गांड मेरी उँगलियों में, और नेहा की जीभ मेरे मुँह में। चुदाई की लय इतनी तेज थी कि फर्श हिल रहा था। “कमशॉट आने वाला है रंडियों,” दादाजी चीखे, और लंड निकालकर हमारे मुँह के पास लाए। हमने जीभें बाहर निकालीं, और गर्म वीर्य की बौछारें हमारे चेहरे, होंठ, चूचियों पर गिरीं। मैंने नेहा के चेहरे से वीर्य चाटा, और हम दोनों ने दादाजी के लंड को फिर से चूसकर साफ किया। हमारी साँसें थम नहीं रही थीं, और बदन वीर्य से चिपचिपा हो गया था।

हम तीनों थककर लेट गए, दादाजी की बाहों में हमारी नग्न देहें, और कमरे में संतुष्टि की गंध। “दादाजी, आपने हमारी कुंवारी चूतें फाड़ दीं,” मैंने हँसते हुए कहा, और नेहा ने सहमति में सिर हिलाया। दादाजी ने हमारी चूचियाँ सहलाते हुए बोले, “मेरी रंडी पोतियाँ, अब रोज चुदाई होगी।” हमने एक-दूसरे को देखा, और मुस्कुरा दिए। पर अचानक दरवाजे पर खटका हुआ, और हमारी दादी की आवाज आई, “रामस्वरूप, क्या कर रहे हो?” हमारा दिल धक से रह गया। दादाजी ने जल्दी से चादर ओढ़ी, हमने कपड़े समेटे, और भागकर अपने कमरे में छिप गए। दादी अंदर आईं, कुछ समझ नहीं पाईं, पर हमारी धड़कनें तेज थीं। रात को हम फिर मिले, और चुपके से फिर चुदाई शुरू हो गई, पर अब सावधानी से।

हमारी चुदाई का सिलसिला चल पड़ा, हर रात दादाजी हमारे कमरे में आते, और हम उनकी सेवा करतीं। मेरी कुंवारी चूत अब ढीली पड़ने लगी थी, पर आनंद बढ़ता जा रहा था। नेहा की गांड भी दादाजी ने मार ली, और हम थ्रीसम में नई-नई मुद्राएँ आजमाने लगे। एक दिन दादी को शक हुआ, और उन्होंने हमें पकड़ लिया। “तुम लोग क्या कर रहे हो?” दादी चीखीं, पर दादाजी ने समझा दिया कि हम सिर्फ मालिश कर रहे थे। दादी चली गईं, पर हमारा डर बढ़ गया। फिर भी रुक नहीं सके। एक शाम दादाजी की तबीयत बिगड़ी, और डॉक्टर ने कहा कि ज्यादा जोश न करें। हम रो पड़े, पर दादाजी ने मुस्कुराकर कहा, “मेरी रंडियाँ, मैं ठीक हो जाऊँगा।” हमने उनकी सेवा की, और धीरे-धीरे वे स्वस्थ हुए।


बुजुर्ग दादाजी के मोटे लंड से थ्रीसम चुदाई करवाई कुंवारी पोतियों ने अन्तर्वासना हिंदी 18+ XXX सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

यह बुजुर्ग और जवान की थ्रीसम सेक्स कहानी मेरी, प्रिया की, और मेरी सहेली नेहा की है, जिसमें हमने अपने सत्तर साल के दादाजी रामस्वरूप के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी कुंवारी चूतों की सील तुड़वाई और एक अविस्मरणीय थ्रीसम का आनंद लिया। शुरू में सिर्फ भूख थी, पर चुदाई के बाद हमें न केवल शारीरिक सुख मिला, बल्कि एक गहरा रिश्ता भी बना। दादाजी पहले चुपचाप रहते थे, पर अब हँसमुख हो गए, उनकी आँखों में चमक लौट आई। हमारी दोस्ती और गहरी हुई, और हमने एक-दूसरे के बदन को जाना, उसकी हर खुशबू, हर सिकुड़न को। दादी के शक और दादाजी की बीमारी ने हमें सिखाया कि चुदाई भले ही आनंद दे, पर सावधानी जरूरी है। हम अब भी मिलते हैं, पर चुपके से, और हर बार नई मुद्राएँ, नई गालियाँ, नया वीर्य।

पाठकों, बताइए कि आपको कहानी का कथानक कैसा लगा? क्या फोरप्ले और थ्रीसम चुदाई (Threesome Sex) के दृश्य काफी विस्तृत थे? क्या गालियों और भावनाओं का संतुलन ठीक रहा, या और तीव्रता चाहिए? आपकी प्रतिक्रिया से हमारी अगली कहानी और बेहतर बनेगी। क्या आप चाहते हैं कि दादी भी इसमें शामिल हों, या कोई नया किरदार आए? कमेंट करें, और अपनी कुंवारी या चुदाई की कल्पनाएँ साझा करें। यह अन्तर्वासना की दुनिया है, जहाँ हर भूख मिटती है।

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