HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesविधवा की प्यास बुझी बेटी दामाद के साथ थ्रीसम सेक्स करके

विधवा की प्यास बुझी बेटी दामाद के साथ थ्रीसम सेक्स करके

विधवा सास की प्यास बुझी नवविवाहित बेटी दामाद के साथ थ्रीसम सेक्स करके अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का सारांश :- एक नवविवाहित दंपति की साधारण जिंदगी में जब सास की कामुकता सामने आती है, तो सब कुछ बदल जाता है। राहुल और नेहा की शादीशुदा जिंदगी में जहां प्यार और चुदाई का मजा था, वहां सुनीता जी की विधवा जवानी ने नई आग लगा दी। यह कहानी तीन लोगों की गहरी अंतरंगता की है, जहां बंधन के खेल से शुरू होकर सामूहिक चुदाई तक का सफर भावनाओं और वासना से भरा है। पाठक को लस्ट की लहरों में डुबो देने वाली यह स्टोरी पारिवारिक रिश्तों की नई परिभाषा रचती है।

इसमें कामुक औरतों की भूख, तने हुए लंड की धड़कन, रसदार चूत की सिसकारियां और गरम वीर्य की बौछारें सब कुछ है। बिना किसी को ठेस पहुंचाए, सिर्फ वासना की आजादी का जश्न मनाती यह कहानी आपको अंत तक बांधे रखेगी और बार-बार पढ़ने को मजबूर कर देगी।


Vidhwa saas ki pyaas bujhi navvivahit beti damad ke saath threesome sex karke – Antarvasna Hindi Sex Story :- मैं राहुल हूं, अट्ठाईस साल का जवान मर्द। दो साल पहले नेहा से शादी हुई थी। नेहा मेरी जान है – गोरी, छरहरी कमर, बड़े-बड़े रसीले चुचे और ऐसी टाइट चूत कि लंड डालते ही जीभ बाहर निकल आए। हमारी चुदाई रोजाना की आदत थी, लेकिन विधवा सास सुनीता जी के घर में आने के बाद सब बदल गया। सुनीता जी उनचास की हैं, विधवा, लेकिन शरीर ऐसा कि लगती हैं पैंतीस की।

उनके बोबे तो इतने भारी और उभरे हुए कि साड़ी में भी लहराते रहते हैं, गांड इतनी मोटी और गोल कि चलते वक्त कुल्हे डोलते हैं तो लंड अपने आप खड़ा हो जाए। नेहा उनकी इकलौती बेटी है, इसलिए शादी के बाद वे हमारे साथ ही रहने लगी थीं। शुरू में सब सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे मैंने नोटिस किया कि सुनीता जी मुझे देखते वक्त आंखों में कुछ अलग ही चमक आ जाती है।

विधवा सास की प्यास बुझी नवविवाहित बेटी दामाद के साथ थ्रीसम सेक्स करके अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

विधवा सास की प्यास बुझी नवविवाहित बेटी दामाद के साथ थ्रीसम सेक्स करके हिंदी सेक्स कहानी Vidhwa saas ki pyaas bujhi navvivahit beti damad ke saath threesome sex karke
Antarvasna Hindi Sex Story – Vidhwa saas ki pyaas bujhi navvivahit beti damad ke saath threesome sex karke

रातें हमारी गर्म होती थीं। नेहा को चोदते वक्त मैं जोर-जोर से धक्के मारता, उसके मुंह से सिसकारियां निकलतीं – “आह राहुल… और जोर से चोदो मुझे… अपनी रंडी बना लो…” और मैं उसकी चूत में लंड पेलता रहता। लेकिन एक रात चुदाई के बीच में हमें एहसास हुआ कि दरवाजे की झिरी से कोई देख रहा है। नेहा ने घबराकर मुझे रोका, लेकिन मैंने देखा तो सुनीता जी खड़ी थीं, साड़ी का पल्लू सरका हुआ, एक हाथ अपने बोबों पर और दूसरा पेटीकोट के अंदर। उनकी सांसें तेज थीं, आंखें लाल। मैं चौंक गया, लेकिन मेरा लंड और तन गया। नेहा ने बाद में कहा कि मम्मी जी बहुत अकेली हैं, पापा के जाने के बाद किसी मर्द का स्पर्श नहीं मिला।

अगले दिन सुनीता जी ने नेहा से बात की। नेहा ने मुझे बताया कि मम्मी जी ने पूछा था कि क्या हमारी सेक्स लाइफ अच्छी है। नेहा ने हंसकर कहा हां, तो सुनीता जी ने कहा कि शादी के बाद चुदाई में नयापन लाना चाहिए, नहीं तो बोरियत आ जाती है। उन्होंने कुछ टिप्स दिए – जैसे हाथ बांधकर चुदाई करना, आंखों पर पट्टी बांधना, इससे मजा दोगुना हो जाता है। नेहा उत्सुक हो गई। उस रात हमने ट्राई किया। मैंने नेहा के हाथ दुपट्टे से बांध दिए, उसकी आंखों पर कपड़ा बांधा और फिर उसकी चूत चाटने लगा। नेहा पागल हो गई – “आह… राहुल… कितना मजा आ रहा है… मैं तुम्हारी गुलाम हूं…” मैंने अपना मोटा लौड़ा उसकी रसदार चूत में पेल दिया और जोर-जोर से ठोका।

नेहा की चीखें पूरे घर में गूंज रही थीं। अचानक दरवाजा खुला और सुनीता जी अंदर आ गईं। वे सिर्फ नाइटी में थीं, बोबे लगभग बाहर झांक रहे थे। वे बोलीं, “मैंने सुना तो देखने चली आई… बहुत अच्छा कर रहे हो बेटा…” नेहा शर्मा गई, लेकिन हाथ बंधे थे, हिल नहीं पा रही थी। मैं रुक गया, लंड अभी भी नेहा की चूत में था। सुनीता जी पास आईं, मेरे लंड को देखकर मुस्कुराईं – “वाह राहुल… कितना मोटा और तना हुआ लंड है तेरा… नेहा खुशकिस्मत है।” उनका हाथ मेरे अंडकोष पर चला गया, धीरे से सहलाने लगीं। मेरा दिमाग घूम गया। नेहा ने कुछ नहीं कहा, बस सिसकारी ली।

सास की विधवा चूत की प्यास पहली बार मिटी नवविवाहित दामाद के लंड से

मेरी विधवा सास सुनीता जी ने अपनी नंगी बेटी नेहा के बंधे हाथों को देखा और बोलीं, “इसे और मजा दो बेटा… मैं भी मदद करूं?” मैं हक्का-बक्का रह गया, लेकिन लंड और खड़ा हो गया। सुनीता जी ने अपनी नाइटी उतार दी। उनके बड़े-बड़े बोबे बाहर आ गए, गुलाबी निप्पल तने हुए। उनकी चूत पर हल्के बाल थे, भगनासा गुलाबी और रस से भीगा हुआ। वे बिस्तर पर चढ़ गईं, नेहा के पास लेट गईं और अपने बोबों को नेहा के मुंह के पास ले जाकर बोलीं, “चूस बेटी… मम्मी के चुचे चूस…” नेहा ने पहले हिचकिचाया, लेकिन फिर मुंह खोल दिया और निप्पल चूसने लगी। सुनीता जी की सिसकारी निकली – “आह… कितने साल बाद किसी ने चूसे हैं…”

मैंने मेरी नंगी पत्नी नेहा की चूत से लंड निकाला और मेरी सास की ओर देखा। वे पैर फैलाकर लेट गईं, चूत का छेद खुला हुआ। “चोद मुझे राहुल… अपनी सास की चूत में अपना मोटा लौड़ा पेल दे…” मैं आगे बढ़ा, लंड का सुपारा उनकी चूत पर रगड़ा। चूत इतनी रसदार थी कि फिसल गया। फिर एक जोरदार धक्का मारा और आधा लंड अंदर चला गया। सुनीता जी चीखीं – “आह मादरचोद… कितना मोटा है… फाड़ देगा मेरी भोसड़ी…” मैंने और जोर से पेला, पूरा लंड अंदर। उनकी चूत गर्म और टाइट थी, जैसे सालों से चुदाई न हुई हो। मैं धक्के मारने लगा, उनके बोबे उछल रहे थे।

नेहा बंधी हुई देख रही थी, उसकी चिकनी चूत से रस टपक रहा था। सुनीता जी ने कहा, “नेहा को भी मजा दो बेटा…” मैंने लंड निकाला, सुनीता जी की चूत से चिपचिपा रस लगा हुआ था, और नेहा की चूत में पेल दिया। नेहा चीखी – “आह… मम्मी के रस वाला लंड… कितना अच्छा लग रहा है…” मैं बारी-बारी से दोनों की चूत चोदने लगा। सुनीता जी ने नेहा के निप्पल चूसने शुरू कर दिए, नेहा उनके। कमरे में सिर्फ चुदाई की आवाजें थीं – चपाक-चपाक, सिसकारियां और गालियां। सुनीता जी बोलीं, “चोद मुझे हरामी… अपनी सास को रंडी बना दे…”

कुछ देर बाद मैंने सुनीता जी को घोड़ी बनाया। उनकी मोटी गांड ऊपर थी, गांड का छेद साफ दिख रहा था। मैंने लंड उनकी चूत में पेला और जोर-जोर से ठोका। नेहा नीचे से उनकी चूत चाटने लगी। सुनीता जी पागल हो गईं – “आह बेटी… चाट मम्मी की चूत… राहुल और जोर से चोद… फाड़ दे मेरी भोसड़ी…” मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे, लाल हो गई। फिर मैंने उंगली उनकी गांड के छेद में डाली। वे चीखीं, लेकिन मजा ले रही थीं। मेरा लंड तेजी से चल रहा था, अंडकी थैली उनके कुल्हों से टकरा रही थी।

बंधन सेक्स (BDSM) के खेल में बहू बनी गुलाम रंडी

अगली रात मेरी विधवा सास सुनीता जी ने बंधन सेक्स (BDSM) का नया खेल सुझाया। उन्होंने अपना पुराना दुपट्टा और रस्सी निकाली। नेहा को बांधने का इरादा था। नेहा उत्साहित थी। हमने नेहा के हाथ-पैर बांध दिए, उसे बिस्तर पर फैला दिया। उसकी चूत और गांड दोनों खुली हुई थीं। सुनीता जी ने कहा, “अब इसे सजा दो बेटा… ये तुम्हारी रंडी है।” मैंने अपना तना हुआ लंड नेहा के मुंह में पेल दिया। नेहा लंड चूसने लगी – गहराई तक, गोटे तक मुंह में ले रही थी। सुनीता जी ने नेहा की चूत में उंगली डालकर चुतड़ सहलाने लगीं।

फिर विधवा सुनीता जी ने नेहा के बोबों की मालिश शुरू की, निप्पल खींचे। नेहा सिसकार रही थी – “आह मम्मी… राहुल… चोदो मुझे…” मैंने लंड मुंह से निकाला और मेरी पत्नी नेहा की चूत में पेल दिया। बंधी हुई होने की वजह से वह हिल नहीं पा रही थी, सिर्फ चीख रही थी। सुनीता जी मेरे पीछे आ गईं, मेरे अंडकोष चाटने लगीं जबकि मैं नेहा को चोद रहा था। उनकी जीभ मेरी गांड के छेद तक पहुंच गई। मैं पागल हो गया – “आह सासू मां… कितनी रंडी हो तुम…” सुनीता जी हंसीं और बोलीं, “तेरी सास तेरी वेश्या है बेटा… चोद जितना चोदना है।”

मैंने नेहा को जोर-जोर से चोदा, उसकी चूत से रस की बौछारें निकल रही थीं। फिर सुनीता जी ने कहा, “अब मेरी बारी।” हमने नेहा को साइड किया और सुनीता जी को बांध दिया। उनके हाथ बंधे, पैर फैले। उनके बड़े बोबे ऊपर-नीचे हो रहे थे। मैंने उनकी चूत चाटी – रसदार, नमकीन स्वाद। सुनीता जी चीख रही थीं – “चाट बेटा… अपनी सास की भोसड़ी चाट… लंड डाल…” नेहा ने उनके निप्पल चूसने शुरू कर दिए। मैंने लंड उनकी चूत में एक झटके में पेल दिया। चुदाई इतनी तेज थी कि बिस्तर हिल रहा था।

सुनीता जी की चीखें पूरे घर में गूंज रही थीं – “चोद बहनचोद… फाड़ दे मेरी चूत… रंडी बना दे मुझे…” मैंने उनकी गांड में उंगली डाली, दो उंगलियां। वे और जोर से चीखीं। नेहा मेरे लंड को चाट रही थी जब मैं सुनीता जी को चोद रहा था। फिर मैंने सुनीता जी की गांड मारने का फैसला किया। लंड पर थूक लगाया और गांड के छेद पर रखा। धीरे-धीरे अंदर किया। सुनीता जी दर्द और मजें में चीखीं – “आह… गांड मार रहा है दामाद… कितना अच्छा लग रहा है…” मैंने पूरा लंड गांड में पेल दिया और ठोकने लगा।

थ्रीसम चुदाई में विधवा और नवविवाहित दंपति तीनों की वासना चरम पर

अब हम तीनों पूरी तरह खुल चुके थे। रोजाना नया खेल। एक रात हमने दोनों औरतों को साथ-साथ बांधा। नेहा और सुनीता जी बगल में लेटीं, हाथ-पैर बंधे। मैं बारी-बारी से उनकी चूत और गांड चोदता। पहले नेहा की चूत, फिर सुनीता जी की गांड। दोनों की सिसकारियां मिलकर संगीत बना रही थीं। सुनीता जी बोलीं, “नेहा, अब तू भी अपनी विधवा मम्मी की चूत चाट।” नेहा ने झुककर अपनी विधवा मम्मी की चूत चाटी जबकि मैं नेहा की गांड मार रहा था। कमरे में चुदाई की बदबू, पसीना और रस की चिपचिपाहट।

मैंने अपना लंड दोनों के मुंह में दिया। दोनों मिलकर लंड चूस रही थीं – एक गोटे चाटती, दूसरी सुपारा। उनकी जीभें आपस में टकरा रही थीं। मैंने उनके बोबों को दबाया, निप्पल खींचे। फिर मैंने दोनों को घोड़ी बनाया, एक के ऊपर एक। नेहा नीचे, सुनीता जी ऊपर। मैं बारी-बारी से दोनों की चूत में लंड पेलता। कभी नेहा की टाइट चूत, कभी सुनीता जी की ढीली लेकिन रसदार भोसड़ी। दोनों चीख रही थीं – “चोदो… और जोर से… हम तुम्हारी रंडियां हैं…”

एक बार मैंने सुनीता जी को बांधकर नेहा से उनकी चूत चटवाई। नेहा झुककर मम्मी की चूत चाट रही थी, मैं नेहा की गांड में लंड पेल रहा था। सुनीता जी की चीखें – “आह बेटी… कितनी अच्छी लंडचूस है तू… चाट मम्मी की फुद्दी…” मैंने तेज धक्के मारे और नेहा की गांड में माल छोड़ दिया। गरम वीर्य की बौछार। फिर मैंने लंड निकाला और सुनीता जी की चूत में डाल दिया, बाकी माल वहां छोड़ा। दोनों औरतें संतुष्ट होकर लेटी थीं।

हमारी चुदाई अब सिर्फ चुदाई नहीं रही थी। इसमें प्यार था, विश्वास था। सुनीता जी कहतीं, “बेटा, तुमने मेरी जिंदगी फिर से जीवित कर दी।” नेहा कहती, “मम्मी के साथ चुदाई का मजा अलग ही है।” मैं दोनों की चूत और गांड का गुलाम बन गया था। कभी मैं दोनों को एक साथ चोदता, कभी वे मुझे लंड चूसकर थका देतीं। बंधन का खेल हमारा फेवरेट बन गया – हाथ बांधना, आंखें बंद करना, सरप्राइज चुदाई।

चरम सुख की रात जब डबल पेनीट्रेशान के दौरान सब सीमाएं टूट गईं

एक रात हमने सबसे खतरनाक खेल खेला डबल पेनीट्रेशान का। सुनीता जी ने कहा कि दोनों मर्द बनकर औरत को चोदें। हमने नेहा को अच्छे से बांधा, उसकी आंखों पर पट्टी। फिर मैं और सुनीता जी ने स्ट्रैप-ऑन लिया (ऑनलाइन मंगवाया था)। लेकिन पहले मैंने नेहा को चोदा, फिर सुनीता जी ने फिंगर्स और जीभ से। डबल पेनीट्रेशान के दौरान नेहा पागल हो रही थी। फिर मैंने सुनीता जी को बांधा और नेहा को कहा कि अब तू मम्मी को चोद। नेहा ने झिझकते हुए सुनीता जी की चूत में उंगलियां डाली, चाटा। सुनीता जी चीख रही थीं। मैं पीछे से नेहा को चोद रहा था। तीनों का चेन बन गया।

अंत में मैंने मेरी पत्नी और उसकी विधवा माँ को साथ में चोदा। दोनों घोड़ी बनीं, गांड ऊपर। मैं एक की चूत में लंड, दूसरी की गांड में उंगली। फिर लंड बदल-बदल कर। दोनों की चीखें – “झड़ने वाली हूं… माल छोड़ दो…” मैंने पहले नेहा की चूत में झड़ा, फिर सुनीता जी की गांड में। गरम चिपचिपा वीर्य दोनों के छेदों से बह रहा था। हम तीनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटकर सो गए।

इसके बाद हमारी जिंदगी बदल गई। सुनीता जी अब खुश रहती हैं, नेहा और मजबूत हो गई। हमारा रिश्ता सिर्फ पारिवारिक नहीं, कामुक भी बन गया। चुदाई अब सिर्फ शारीरिक नहीं, भावनात्मक भी थी।


विधवा सास की प्यास बुझी नवविवाहित बेटी दामाद के साथ थ्रीसम सेक्स करके अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Vidhwa saas ki pyaas bujhi navvivahit beti damad ke saath threesome sex karke – Antarvasna Hindi Sex Story :- यह थ्रीसम सेक्स कहानी बताती है कि वासना जब प्यार और विश्वास के साथ मिलती है, तो रिश्ते और गहरे हो जाते हैं। राहुल, नेहा और सुनीता जी ने सीमाओं को पार किया, लेकिन कभी किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाई।

विधवा और नवविवाहित दंपति तीनों ने एक-दूसरे में नया सुख, नई आजादी पाई। पाठक अगर इस स्टोरी से जुड़ पाए, तो कमेंट करके बताएं कि आपको सबसे ज्यादा कौन सा पल पसंद आया। क्या आप भी ऐसे बंधन और सामूहिक चुदाई के खेल ट्राई करना चाहेंगे? यह स्टोरी सिर्फ वासना नहीं, भावनात्मक मुक्ति की भी है। बार-बार पढ़ें, मजा लें।

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