चूत चुदवाने के बाद चलती ट्रेन में गांड की मांसपेशियों को ढीला छोड़ा मजदुर के लंड से चुदवाने के लिए अन्तर्वासना हिंदी गुदा सेक्स कहानी – Chut chudvane ke baad chalti train mein gand ki manspeshiyon ko dheela chhoda majdur ke land se chudvane ke liye antarvasna hindi guda sex kahani – After getting her pussy fucked, she loosened her ass muscles in a moving train to get fucked by a laborer’s dick. Antarvasna Hindi anal sex story …
मैं हमेशा से एक खामोश और सादगी भरी जिंदगी जीने वाली लड़की रही हूं, नाम है मेरा शालिनी और उम्र है 32 साल की, लेकिन अंदर ही अंदर एक ऐसा ज्वालामुखी दबा हुआ था जिसके बारे में मैं खुद भी नहीं जानती थी। मेरा पति अमित एक मल्टीनेशनल कंपनी में बड़ा अफसर है, हमारी शादी को 8 साल हो गए थे लेकिन बिस्तर पर वो मुझे कभी वो आग नहीं दे पाया जिसकी मुझे सख्त जरूरत थी। मुंबई से दिल्ली जाने वाली इस राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन (भारतीय रेलवे) की एसी 2 टियर बोगी में मैं अकेली सफर कर रही थी, और मेरी सीट के सामने वाली बर्थ पर एक मैला-कुचैला सा मजदूर बैठा था, जिसकी गहरी काली आंखों में एक अजीब सी जंगली हवस भरी थी।
ट्रेन जैसे ही सूरत रेलवे स्टेशन से आगे बढ़ी, रात का अंधेरा खिड़कियों के बाहर गहराने लगा और बोगी की बत्तियां मद्धम पड़ गईं, सिर्फ एक हल्की नीली रोशनी काफी थी एक दूसरे के चेहरे देखने के लिए। मैंने अपनी सफेद सूती साड़ी का पल्लू ठीक किया और बैग से एक मैगजीन निकालने का नाटक करने लगी, लेकिन मेरी नजरें बार-बार उस आदमी के फटे हुए कुर्ते के नीचे से झांकती उसकी चौड़ी और बालों से भरी छाती पर जा रही थीं। उसकी उम्र करीब 38-40 के बीच रही होगी, हाथ-पैर मजदूरी करने के कारण लोहे की तरह सख्त थे, और जब वो हिलता तो उसके शरीर से पसीने और बीड़ी की एक भारी महक उठती, जो अजीब तरह से मेरे अंदर एक गुदगुदी पैदा कर रही थी। मेरे दिमाग में एक ही ख्याल बार-बार आ रहा था कि इस अनजान और भद्दे आदमी को देखकर मेरी चूत में ये हलचल क्यों हो रही है।
चूत चुदवाने के बाद चलती ट्रेन में गांड की मांसपेशियों को ढीला छोड़ा मजदुर के लंड से चुदवाने के लिए अन्तर्वासना हिंदी गुदा सेक्स कहानी

मैंने अपनी जांघों को आपस में कसकर भींच लिया, वो जगह जहां मुझ असंतुष्ट विवाहिता (Unsatisfied Married Woman) की रसदार चूत गीली होने लगी थी, लेकिन ये हरकत उस मजदूर की पैनी निगाहों से बच नहीं पाई। उसका नाम रतन था, जैसा मुझे बाद में पता चला, और वो दिल्ली में किसी निर्माण साइट पर मजदूरी करने जा रहा था। उसने अपने मोटे होंठों पर एक हल्की सी कामुक मुस्कान बिखेरी और अपनी लुंगी को थोड़ा ऊपर करके बैठ गया, मैंने देखा कि उसकी जांघों के बीच एक मोटा और लम्बा लंड आधी खड़ी हालत में लुंगी के कपड़े को ताने हुए था।
“मैडम जी, बड़ी गर्मी है रात की, आप भी अपना पल्लू थोड़ा ढीला कर लीजिए ना,” उसने अपनी भारी और बेहूदा आवाज में कहा, जिसमें बिहार के किसी देहात का ठेठपन झलक रहा था। मेरे गाल एकदम से लाल हो गए और मैंने नजरें झुका लीं, लेकिन मेरे निप्पल उसकी इस बेहयाई पर सख्त होकर मेरी ब्लाउज को चीरते हुए बाहर आने को बेकरार हो गए। मेरे दिमाग का एक हिस्सा मुझे ये कह रहा था कि ये आदमी नीच है, तुझसे बहुत छोटे दर्जे का है, लेकिन मेरी चूत उसकी इसी गंवार और जानवर जैसी बेरहमी पर पानी छोड़ने को तैयार बैठी थी।
“तुम्हें ऐसे बात नहीं करनी चाहिए, मैं शादीशुदा हूं,” मैंने कांपती हुई और दबी आवाज में कहा, लेकिन मेरे शब्दों में वो सख्ती नहीं थी जो होनी चाहिए थी। रतन ने मेरी इस कमजोरी को तुरंत भांप लिया और उठकर सीधे मेरी सीट के पास आ गया, उसके शरीर की बदबूदार और मर्दाना खुशबू ने मेरे नाक के रास्ते मेरी रूह में सेंध लगा दी। उसने अपना खुरदुरा हाथ मेरी गोद में रखी मैगजीन पर रख दिया और झुककर मेरे कान के पास आकर बोला, “शादीशुदा औरतें ही तो सबसे ज्यादा भूखी होती हैं मालकिन, आपकी आंखों में वो भूख मैंने स्टेशन पर ही पढ़ ली थी।”
मुझ असंतुष्ट विवाहिता की सांसें तेज हो गईं और मैंने विरोध करने के लिए अपना हाथ उठाया, लेकिन उसने मेरी कलाई पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और मेरी हथेली को सीधे अपनी लुंगी के ऊपर दबा दिया। मेरे हाथ में एक गर्म, सख्त और बहुत बड़ी सी चीज महसूस हुई, जो धड़क रही थी और जिसकी मोटाई से मेरी उंगलियां पूरी नहीं हो पा रही थीं। “महसूस करो, ये है असली मर्द का लौड़ा, तुम्हारे उस नपुंसक पति का खिलौना नहीं जो तुम्हें हर रात अकेला छोड़ देता होगा,” उसने मेरे कान में फुसफुसाया और उसकी इस बात ने मेरे अंदर बैठी सारी सामाजिक मर्यादाओं को तहस-नहस कर दिया।
मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और मेरा हाथ बिना मेरे दिमाग की इजाजत के उस मजदुर के देसी लंड को सहलाने लगा, पहले हल्के से और फिर जोर से दबाकर। मजदुर ने मेरी साड़ी का पल्लू एक झटके में हटाकर मेरे ब्लाउज के ऊपर से ही मेरे 36D के भारी भरकम बोबों को दबोच लिया और उन्हें मसलने लगा। मेरे मुंह से एक दबी हुई कराह निकली, जिसे मैंने होंठ चबाकर रोकने की कोशिश की लेकिन वो आवाज उस बंद एसी बोगी में गूंज गई। “चीख मत, वरना बाहर वाले सुन लेंगे, लेकिन तुझे चीखना है तो इस लंड पर चढ़कर चीख,” वो बोला और उसने अपनी लुंगी उतार फेंकी, उसका पूरा तना हुआ लंड अब मेरी आंखों के सामने था।
मजदुर का लम्बा देसी लंड देखकर मुझ असंतुष्ट विवाहिता की चूत एकदम से रस से तरबतर हो गई, वो किसी भी पोर्न फिल्म के एक्टर से कहीं ज्यादा मोटा और लम्बा था, उसके ऊपर उभरी हुई नीली नसें एक अजगर की तरह लग रही थीं और उसका सिरा किसी जंगली मशरूम की तरह गहरे बैंगनी रंग का था। उसके अंडकोष (Testicles) लटके हुए और भारी थे, जिनमें ढेर सारा चिपचिपा माल भरा हुआ लग रहा था। मैं सोच रही थी कि इतना बड़ा लण्ड अगर मेरी टाइट चूत में घुसा तो मुझे कितना दर्द होगा, लेकिन उस दर्द की कल्पना मात्र से ही मेरी योनि की मांसपेशियां ऐंठ गईं और चूत का रस मेरी जांघों तक बह आया।
रतन ने मेरे सिर को अपने लंड की तरफ धकेला और मैं एक प्रशिक्षित वेश्या (Trained prostitute) की तरह अपने आप झुक गई, मेरी नाक उसके लंड के सिरे से टकराई और मैंने उसकी तेज मर्दाना गंध को अपने अंदर खींच लिया। “चूस, रांड की तरह चूस इसे, तेरी पूरी भोसड़ी इसी लायक है,” उसने मेरे बाल पकड़कर मेरा मुंह अपने लौड़े पर दबा दिया। मैंने अपना मुंह जितना खुल सकता था खोला और उसके लंड का ऊपरी हिस्सा अपने गर्म मुंह में ले लिया, मेरे जबड़े में तेज खिंचाव होने लगा लेकिन उसके मोटे लण्ड का स्वाद मेरे मुंह में भर गया।
मैंने अपने होंठों से उसके सिरे को कसकर दबाया और अपनी जीभ से उसके मूत्र मार्ग के छेद पर गुदगुदी करने लगी, वो मेरी इस हरकत से पागल होकर मेरे बाल और जोर से खींचने लगा। “हां, इसी तरह, पूरा अंदर ले, मेरी भोसड़ी साली,” वो गुर्राया और मैंने उसके पूरे 8 इंच के लंड को अपने गले के नीचे तक उतारने की कोशिश की, जिससे मेरी आंखों से आंसू निकल गए और मेरे गले से उल्टी जैसी आवाजें आने लगीं। मैं बिना रुके उसका ब्लोजॉब करती रही, अपनी लार उसके लंड पर टपकाती रही और उसे हाथ से भी सहलाती रही, मेरे दिमाग में बस एक ही चीज गूंज रही थी कि मैं इस गंदे मजदूर की रखैल हूं और मेरी जिंदगी का यही असली मकसद है।
करीब 10 मिनट तक मुखमैथुन (Oral Sex) के दौरान मेरे मुंह का बड़े अच्छे से इस्तेमाल करने के बाद उसने मुझे बाल से उठाकर बर्थ पर पटक दिया और मेरी साड़ी को पूरी तरह खोलकर फेंक दिया। मेरी सफेद कमर और भारी भरकम शरीर अब सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में उसके सामने नंगा था। रतन ने मेरे पेटीकोट को मेरी कमर तक उठा दिया और मेरी मोटी गांड और घने झांट के बालों वाली चूत पर जोर से एक चांटा मारा। “कितनी गर्म और टाइट चूत है तेरी, साली रंडी,” वो चिल्लाया और उसने बिना किसी चेतावनी के अपनी दो उंगलियां मेरी टाइट चूत के अंदर घुसा दी, जिससे मेरी चीख निकल गई।
“चुप कर साली छिनाल, वरना सब सुन लेंगे,” उसने मेरे मुंह पर हाथ रख दिया और अपनी उंगलियों से मेरी गीली और गर्म चूत को तेजी से चोदना शुरू कर दिया। मेरे अंदर से गीली चूची की आवाजें आ रही थीं और मेरा पूरा शरीर उसकी उंगलियों की रफ्तार से झटके खा रहा था। मेरी चूत की दीवारें उसकी खुरदरी उंगलियों को जकड़ रही थीं और मेरी गांड का छेद अपने आप फड़कने लगा था। उसने मेरी ब्लाउज को फाड़कर अलग कर दिया और मेरे 36D के बोबे बाहर कूद पड़े, उनके उभरे हुए निप्पल को उसने तुरंत अपने मुंह में ले लिया और किसी भूखे शिशु की तरह चूसने लगा।
“तुम्हारी चूचियों का दूध पीना है मुझे, पूरी रात इन्हें चूसूंगा,” वो गुर्राया और उसने मेरे दोनों निप्पल को बारी-बारी से काटने और चूसने लगा, जिससे मेरी चूत में बिजली की तरह झनझनाहट दौड़ रही थी। मेरे बोबे उसकी लार से भीग चुके थे और उन पर लाल-लाल दांतों के निशान पड़ गए थे। मैंने खुद अपने हाथ उसके सिर पर रख दिए और उसे अपनी छाती से और जोर से दबा लिया, मैं चाहती थी कि वो मुझे पूरी तरह निगल जाए।
फिर उस मजदुर ने पूसी फिंगरिंग करने के बाद अपनी उंगलियां मुझ असंतुष्ट विवाहिता की रसदार चूत से निकालीं और मेरे सामने लाकर मेरे ही रस से सनी हुई उंगलियां मेरे मुंह में डाल दीं। “चख अपनी चूत का रस, कितना मीठा है तेरी रंडी चूत का पानी,” उसने कहा और मैंने अपनी ही चूत का नमकीन और चिपचिपा रस अपनी जीभ से साफ कर दिया। अब मेरे अंदर कोई शर्म नहीं बची थी, मैं पूरी तरह से एक कामुक औरत बन चुकी थी, जो बस इस जंगली मर्द के मोटे लंड से अपनी चूत की खुजली मिटाना चाहती थी।
रतन ने मुझे घुमाकर कुत्ते की पोजीशन (Doggy Sex Position) में कर दिया, मेरा चेहरा खिड़की की तरफ था और मेरी मोटी गांड उसकी तरफ उठी हुई थी। उसने मेरी गांड के दोनों चूतड़ों को फैलाकर मेरी चूत और गांड के छेद को एक साथ देखा और एक जानवर की तरह दहाड़ा। “दोनों छेद एक साथ चोदूंगा आज, तेरी भोसड़ी और गांड दोनों फाड़ दूंगा,” उसने कहा और अपने लंड का सिरा मेरी चूत के मुहाने पर रगड़ने लगा। मेरे शरीर में एक जबरदस्त कंपकंपी दौड़ गई और मैंने अपने कुल्हे पीछे की तरफ धकेल दिए, उसे अंदर बुलाने के लिए।
“अभी नहीं, पहले तेरी गांड की सलवटों को सूंघने दे,” वो बोला और उसने अपनी नाक मेरी गांड के छेद पर रख दी और गहरी सांस ली, उसकी ये हरकत मुझे बेहद गंदी और अश्लील लगी लेकिन इसी गंदगी ने मेरी चूत की नसों को और तनाव से भर दिया। फिर उसने मेरे गांड के छेद पर अपनी लार टपकाई और अपना अंगूठा धीरे-धीरे मेरी गांड के सख्त छेद में डालने लगा। मेरी गांड में असहनीय जलन और खिंचाव होने लगा लेकिन मैंने अपने दांत भींच लिए और अपनी सांस रोक ली।
“ढीली छोड़, साली छिनाल अपनी गांड की मांसपेशियों को, नहीं तो तेरी गांड फट जाएगी और तुझे लेट्रींग करने में तेज दर्द होगा,” उसने मेरी गांड पर एक और जोरदार चांटा मारा और मैंने अपनी गांड की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दिया, जिससे उसका अंगूठा पूरा अंदर घुस गया। मेरी गांड़ में कुछ सेकंड की तेज जलन के बाद एक अजीब सी भरावट और मजा आने लगा। उसने अपना अंगूठा निकाला और बिना बताए अपने पूरे मोटे लंड को एक ही जोरदार धक्के से मेरी तरबतर चूत में पूरी तरह घुसा दिया किस्से मेरी चूत की मांसपेशियों को गहरा आघात लगा । मेरी चीख सुनकर उसने मेरे मुंह पर मेरा ही पल्लू ठूंस दिया और मुझे बुरी तरह चोदना शुरू कर दिया।
हर धक्के के साथ मेरा पूरा शरीर आगे की तरफ खिसक रहा था और बोगी में मेरे चूतड़ों पर उसके पेट के टकराने की आवाज गूंज रही थी। वो इतनी ताकत से चोद रहा था कि मेरी चूत के अंदर उसका मोटा लौड़ा एक यंत्र की तरह आगे-पीछे हो रहा था, मेरी टाइट चूत की दीवारें जल रही थीं और उसका हर धक्का मेरे दिमाग की नसों को तोड़ रहा था। “ले, मेरी रांड, ले मेरा माल पी जा,” वो चिल्लाता रहा और मैं बस अपनी गांड हिलाती रही, उसे और अंदर बुलाने के लिए।
उसने मेरी कमर पकड़ रखी थी और मेरी चूत को एकदम बेरहमी से चोदे जा रहा था, मेरी चूत से चिपचिपा रस निकलकर मेरी जांघों और उसके अंडकोष की थैली (Scrotal Sac) को भिगो रहा था। मेरे दिमाग में बस एक ही ख्याल था कि यही तो चाहिए था मुझे, एक ऐसा मर्द जो मुझे प्यार से नहीं, बल्कि एक सड़क छाप रंडी की तरह चोदे, मेरी पूरी भोसड़ी फाड़ दे। उसने अचानक अपना लंड मेरी चूत से बाहर निकाला और मेरे गांड के छेद पर लगा दिया, और इस बार बिना किसी चेतावनी के अपना पूरा लण्ड मेरी गांड में घुसाने की कोशिश करने लगा।
मजदुर के देसी लंड से बेरहम चुदाई करवाने के दौरान दर्द इतना तेज था कि मेरी आंखों के आगे अंधेरा छा गया और मैंने उसे पीछे हटाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वो एक भैंसे की तरह ताकतवर था और उसने मुझे बुरी तरह दबोच रखा था। “अभी तो तेरी गांड की बारी है, इसे भी तो मेरे लंड की आदत डालनी है रंडी,” वो कहता रहा और धीरे-धीरे मेरी गांड का छेद उसके लंड के सिरे को निगलने लगा। उस गुदा सेक्स के दौरान मुझे ऐसा लगा जैसे मेरी आत्मा निकल जाएगी, लेकिन उसी बीच मेरी चूत से रस की धार बह निकली और मेरा पहला ऑर्गेज्म मेरे अंदर किसी बम की तरह फूटा।
मेरा पूरा शरीर जोर-जोर से कांपने लगा और मेरी चूत की मांसपेशियां हवा में ही सिकुड़ और फैल रही थी, जिसे देखकर रतन और भी पागल हो गया। उसने मेरी गांड से अपना लण्ड बाहर खींचा और मुझे पलटकर मिशनरी पोजीशन में ले आया, मेरी दोनों टांगें उसने अपने कंधों पर डाल लीं और मेरी पूरी खुली और लाल चूत में अपना चिपचिपा लण्ड फिर से घुसा दिया। अब वो मेरी आंखों में आंखें डालकर मुझे चोद रहा था, और मैं उसकी पसीने से भीगी और धूल से सनी काली छाती को सहला रही थी।
“बोल, कौन चोद रहा है तुझे,” वो गुर्राया और उसने मेरा गला दबोच लिया। “साले भडवे, तू मेरा असली मालिक, तेरा इंडियन मोटा लंड मेरी चूत की प्यास बुझा रहा है,” मैंने घुटती हुई आवाज में कहा और मेरी इस बात पर उसने अपने धक्कों की रफ्तार और तेज कर दी। वो अब मुझे प्यार से नहीं, नफरत और हवस से चोद रहा था, लेकिन उसकी यही नफरत मेरे लिए सबसे बड़े इश्क से कम नहीं थी। पूरी बोगी में सिर्फ हमारी सांसों की आवाजें, बिस्तर की चरमराहट और मेरी चूची से उठने वाली गीली आवाजें गूंज रही थीं।
करीब 45 मिनट तक चली इस बेरहम चुदाई के बाद आखिरकार रतन की सांसें तेज होने लगीं और उसके लंड के गोटे (Testicles) मेरे चूतड़ों पर जोर से टकराने लगे। “अब माल गिराने वाला हूं, तेरी कोख के अंदर, तुझे मां बनाने वाला हूं,” वो दहाड़ा और मैंने अपनी टांगें उसकी कमर से कसकर लपेट दीं और अपनी चूत को ऊपर उठाकर उसके हर धक्के का स्वागत करने लगी। मैं चाहती थी कि इस गंदे मजदूर का वीर्य मेरे गर्भाशय के हर कोने को भर दे, मेरी पूरी बालों वाली चूत को अंदर तक सींच दे।
आखिरकार उसने एक जोरदार धक्का मारा और अपने पूरे लण्ड को मेरी चूत के सबसे अंदर तक पहुंचाकर रोक दिया, मैंने महसूस किया कि उसके लंड की नलिका जोर से फड़क रही है और गर्म शुक्राणु की मोटी-मोटी धारें सीधे मेरी बच्चेदानी की गर्दन पर पड़ रही हैं। उसके माल की गर्मी ने मेरे अंदर एक और तूफान ला दिया और मैं भी उसके लंड पर टंगी हुई हालत में जोर-जोर से चीखते हुए फिर से झड़ गई। हम दोनों एक दूसरे से लिपटे हुए बुरी तरह हांफ रहे थे, हमारे शरीर पसीने और जिस्मानी रसों से चिपचिपे होकर आपस में जुड़ गए थे।
बेरहम चुदाई का सुख भोगने के बाद करीब 5 मिनट तक हम ऐसे ही पड़े रहे, उसका लण्ड अब भी मेरी चूत के अंदर धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था और मेरी चूत से उसका चिपचिपा माल रिसकर सीट की चादर पर गिर रहा था और मेरी चूत व गांड की मांसपेशियों में जकड़न सी होने लगी थी। जब सुबह की हल्की रोशनी खिड़कियों से झांकने लगी, तब रतन ने मुझसे कहा, “कल रात तू सिर्फ एक रांड थी और मैं तेरा रंडीबाज, अब इस सफर के खत्म होने तक हम अजनबी हैं।” उसकी ये बात सुनकर मेरा दिल एक अजीब सी टीस से भर गया, लेकिन मैं जानती थी कि मेरे अंदर की वो कामुक औरत अब जाग चुकी है और उसकी ये चुदाई मेरे जीवन की सबसे बड़ी तलब बनकर हमेशा मेरी चूत में गूंजती रहेगी।
तो पाठकों, इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी को पढ़ने के बाद क्या आपको लगता है कि शालिनी का ये फैसला सही था या उसे अपनी इस छुपी हुई भूख को हमेशा के लिए दबा देना चाहिए था? क्या आपने कभी अपने जीवन में ऐसी किसी बेकाबू और जंगली हवस को महसूस किया है जिसने आपको पूरी तरह से नियंत्रित कर लिया हो? कृपया अपनी बेबाक राय और अनुभव नीचे कमेंट में जरूर बताएं।


