ठरकी अब्बू जान के वीर्य का स्वाद माँ-बेटी ने मिलकर चखा अन्तर्वासना हिंदी थ्रीसम सेक्स कहानी का सारांश :- यह एक पारिवारिक कामुक कहानी है जिसमें अठारह साल की कुंवारी बेटी अपने पचपन साल के ठरकी पिता के साथ सहमति से पहली बार शारीरिक सुख लेती है। दोनों नंगे होकर बेडरूम के फर्श पर बिछे मोटे गद्दे पर मिशनरी पोजीशन में घंटों चुदाई करते हैं। बेटी खुशी-खुशी टांगें ऊपर उठाकर पिता का मोटा लंड अपनी टाइट चूत में लेती है और चीखती-सिसकारती चुदवाती है।
बाद में बेटी अपनी अम्मी जान को बुलाती है और तीनों मिलकर थ्रीसम सेक्स का मजा लेते हैं। अम्मी जान-बेटी दोनों एक ही मर्द के लंड की विभिन्न पोजीशन में चुदाई करवाती हैं और अंत में चेहरे-मुँह पर गरम वीर्य लेती हैं। दो घंटे की चुदाई के बाद तीनों बाथरूम में जाते हैं जहाँ नहाने से पहले दोनों औरतें उस ठरकी मर्द को अपना पेशाब पिलाती हैं। पूरी कहानी सहमति, कामुकता और पारिवारिक नजदीकियों से भरी है।
Free Read Tharki Abbu Jaan ke veerya ka swaad maa-beti ne milkar chakha Antarvasna Hindi Threesome Sex Story :- मेरा नाम प्रिया है। मैं अठारह साल की हूँ, अभी-अभी कॉलेज शुरू किया है और शरीर से पूरी तरह जवान हो चुकी हूँ। मेरे चुचे गोल-गोल और तने हुए हैं, कमर पतली है और गांड भरी-भरी, चूतड़ गुदाज। मेरी चूत पर हल्के बाल हैं और अंदर से हमेशा रसदार रहती है।
मेरे प्यारे अब्बू जान राजेश, पचपन साल के हैं, लेकिन उनका शरीर अभी भी जवान जैसा मजबूत है – चौड़ी छाती, मोटी बाहें और सबसे बड़ी बात उनका मोटा, लंबा लौड़ा जो पैंट में भी उभरा हुआ दिखता है। अम्मी जान सुनीता जी पैंतालीस की हैं, उनके बोबे बड़े-बड़े और गांड भारी है। हम तीनों एक छोटे शहर में रहते हैं, घर में दो बेडरूम हैं और मुख्य बेडरूम के फर्श पर एक मोटा स्लीपवेल गद्दा हमेशा बिछा रहता है, जहाँ हम आराम करते हैं।
मुफ्त में पढ़ें ठरकी अब्बू जान के वीर्य का स्वाद माँ-बेटी ने मिलकर चखा अन्तर्वासना हिंदी थ्रीसम सेक्स कहानी

पिछले कई महीनों से मैं अब्बू जान को अलग नजरों से देखने लगी थी। जब वे घर में बनियान और पायजामा में घूमते, तो उनकी मोटी जांघें और लंड का उभार देखकर मेरी चूत अपने आप गीली हो जाती। रात में मैं अपनी चूत में उंगली डालकर अब्बू जान के मोटे लंड की कल्पना करती, सोचती कि वो मेरी कुंवारी चूत को कैसे फाड़ेगा। मैं मुठ मारती और झड़ जाती, लेकिन मन नहीं भरता था। अब्बू जान भी मुझे छिपकर घूरते थे – मेरे चुचों पर, मेरी गांड पर नजरें टिकती थीं। कभी-कभी वे मुझे गले लगाते तो उनका खड़ा लंड मेरी जांघों से टकराता और मैं सिहर उठती।
एक शाम अम्मी जान किसी रिश्तेदार के घर गई थीं और देर रात लौटने वाली थीं। मैं और अब्बू जान अकेले थे। अब्बू जान बेडरूम में गद्दे पर लेटे टीवी देख रहे थे। मैं उनके पास जाकर लेट गई। बातें शुरू हुईं – कॉलेज की, मौसम की, फिर धीरे-धीरे निजी बातें। अब्बू जान ने कहा, “प्रिया, तू बहुत सुंदर हो गई है, कोई बॉयफ्रेंड है क्या?” मैं शर्मा कर बोली, “नहीं अब्बू जान, मुझे तो कोई पसंद नहीं आता।” अब्बू जान मुस्कुराए और बोले, “सच बता, कभी कुछ महसूस होता है नीचे?” मैं लाल हो गई, लेकिन हिम्मत करके बोली, “हाँ अब्बू जान… आपके बारे में सोचती हूँ।”
अब्बू जान की आँखें चमक उठीं। उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी छाती पर रखा। मैंने महसूस किया उनका दिल तेज धड़क रहा है। फिर अब्बू जान ने मुझे अपनी बाहों में खींच लिया और मेरे शरबती होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उनका किस गहरा था, उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस रही थी। मैं अपनी सील पैक वर्जिन चूत की सील तुड़वाने के लिए पूरी तरह गरम हो गई। अब्बू जान ने मेरी टी-शर्ट ऊपर की और मेरे चुचों को दबाने लगे। मेरे निप्पल तने हुए थे, अब्बू जान ने उन्हें मुँह में लेकर चूसने शुरू किए। मैं सिसकार रही थी, “आह… अब्बू जान… बहुत मजा आ रहा है…”
अब्बू जान के साथ बेटी की पहली गरमागरम चुदाई की शुरुआत
अब्बू जान ने मेरी शॉर्ट्स और पैंटी उतार दी। मैं पूरी नंगी उनके सामने थी। मेरी रसदार चूत चमक रही थी। अब्बू जान ने भी मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने के लिए अपने सभी कपड़े उतारे। उनका मोटा लौड़ा तना हुआ खड़ा था – कम से कम आठ इंच लंबा, लंड के निचे लटके दोनों गोटे गुलाब जामुन के जैसे फूले हुए। मैं डर और उत्साह दोनों महसूस कर रही थी। अब्बू जान ने मुझे गद्दे पर लिटाया और मेरी टांगें चौड़ी कीं। उन्होंने अपना मुँह मेरी चूत पर रखा और चाटने लगे। उनकी जीभ मेरे भगनासे पर, चूत के छेद में घुस रही थी। मैं चीख रही थी, “आह… अब्बू जान… चूत चाटो… बहुत अच्छा लग रहा है…”
फिर अब्बू जान मेरे ऊपर आए। उन्होंने अपना मोटा सुपारा मेरी चूत के मुँह पर रगड़ा। चूत का रस बह रहा था। धीरे-धीरे उन्होंने झटका दिया और सुपारा अंदर घुस गया। मुझे तेज दर्द हुआ, मैं चीखी, “आह… अब्बू जान… धीरे…” लेकिन अब्बू जान रुके नहीं। उन्होंने एक और जोरदार झटका दिया और आधा लंड अंदर कर दिया। मेरी कुंवारी चूत फट गई थी, खून की कुछ बूंदें निकलीं। अब्बू जान बोले, “बेटी, अब मजा आएगा।” उन्होंने मेरी दोनों टांगें कंधों पर उठाईं और पूरी ताकत से चोदना शुरू कर दिया।
पच-पच-पच की आवाजें पूरे कमरे में गूँज रही थीं। अब्बू जान का मोटा लंड मेरी टाइट चूत को चोद रहा था, हर धक्के में उनके गोटे मेरी गांड से टकरा रहे थे। मैं सिसकार रही थी, “आह… अब्बू जान… चोदो… अपनी रंडी बेटी को चोदो… बहुत मजा आ रहा है…” दर्द अब खुशी में बदल चुका था। अब्बू जान पसीने से तर थे, उनके बोबों की तरह मेरे चुचे उछल रहे थे। हम दोनों पूरी तरह खो चुके थे।
लगभग एक घंटा चुदाई चलती रही। अब्बू जान कई बार रुके, फिर शुरू किए। मैं तीन बार झड़ चुकी थी, मेरी चूत से रस की बाढ़ आ रही थी। अब्बू जान अभी भी नहीं झड़े थे। मैंने कहा, “अब्बू जान… अब अम्मी जान को बुलाऊँ? वो भी मजा लें।” अब्बू जान मुस्कुराए और बोले, “बुला बेटी, आज परिवार थ्रीसम सेक्स करके चुदाई का पूरा मजा लेगा।”
अम्मी जान का थ्रीसम में शामिल होना और गरम थ्रीसम सेक्स
मैंने मेरी माँ को जोर से आवाज लगाई, “अम्मी… जल्दी आओ…” अम्मी जान दौड़कर आईं, दरवाजा खोला और हमें नंगे देखकर चौंक गईं। लेकिन उनकी आँखों में हैरानी के साथ-साथ चमक भी थी। मैंने कहा, “अम्मी जान, अब्बू जान बहुत अच्छा चोदते हैं, आप भी आ जाओ, हम तीनों मिलकर थ्रीसम चुदाई करते हैं।” अम्मी जान पहले तो हिचकिचाईं, फिर मुस्कुराईं और अपने कपड़े उतारने लगीं। उनके बड़े-बड़े बोबे, भारी गांड देखकर अब्बू जान का लंड और तन गया।
अम्मी जान गद्दे पर आईं और अब्बू जान को किस करने लगीं। मैं अब्बू जान के लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। मुझसे मेरी माँ बोलीं, “वाह बेटी, तू तो अपने पापा की रंडी बन गई।” हम दोनों माँ-बेटी मिलकर अब्बू जान का लंड चूस रही थीं – कभी मैं गोटे चाटती, कभी अम्मी जान सुपारा मुँह में लेतीं। अब्बू जान कराह रहे थे, “आह… दोनों रंडियाँ… बहुत मजा आ रहा है…” फिर अब्बू जान ने अम्मी जान को लिटाया और उनकी ढीली लेकिन रसदार भोसड़ी में अपना लंड घुसेड़ दिया। अम्मी जान चीखीं, “आह… राजेश… चोदो मुझे…”
मैं अम्मी जान के दूध से भरे बड़े बड़े बोबों को चूस रही थी जबकि अब्बू जान उन्हें चोद रहे थे। फिर एनल सेक्स करने के लिए पोजीशन बदली – अम्मी जान गांड चुदवाने के लिए डॉगी स्टाइल में हो गईं, अब्बू जान पीछे से उनकी गांड मार रहे थे और मैं नीचे लेटकर उनके गोटे चाट रही थी। अम्मी जान की चीखें और मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। फिर मैं अब्बू जान के ऊपर सवार हो गई, काउगर्ल स्टाइल में उनका लंड अपनी चूत में लेकर उछलने लगी। अम्मी जान मेरे चुचों को दबा रही थीं और अब्बू जान की गांड में उंगली डाल रही थीं।
हम तीनों पसीने से तर थे। अब्बू जान ने हम माँ बेटी को अपनी रंडी बनाकर एक के बाद एक चोदा – कभी अम्मी जान को, कभी मुझे। हम दोनों एक-दूसरे की चूत चाटतीं, अब्बू जान के लंड को बारी-बारी से मुँह में लेतीं। करीब दो घंटे तक चुदाई चलती रही। अंत में अब्बू जान ने कहा, “अब माल छोड़ने वाला हूँ।” हम दोनों घुटनों पर बैठ गईं। अब्बू जान ने जोर-जोर से मुठ मारी और उनका गरम, चिपचिपा वीर्य हमारे चेहरे और मुँह पर छूटने लगा। हमने जीभ से चाट-चाट कर साफ किया और कुछ निगल भी लिया।
बाथरूम में नहाने से पहले का अंतिम कामुक खेल
थ्रीसम चुदाई ख़त्म करने के बाद हम तीनों नंगे ही बाथरूम में चले गए। पसीना और वीर्य से लथपथ थे। नहाने से पहले मैं और अम्मी जान ने अब्बू जान को घुटनों पर बिठाया। मैंने कहा, “अब्बू जान, अब हमारा पेशाब पियो।” अब्बू जान मुस्कुराए और मुँह खोल लिया। पहले मैंने अपनी चूत उनके मुँह पर रखी और गरम पेशाब की धार छोड़ी। अब्बू जान ने एक बूंद नहीं गिरने दी, सब पी गए। फिर अम्मी जान ने भी अपना पेशाब पिलाया। अब्बू जान खुश थे, बोले, “मेरी दोनों रंडियाँ… सब कुछ देती हो।”
फिर हम तीनों नंगे ही शावर के नीचे आए। एक-दूसरे के नंगे शरीर को साबुन से मला, चुचे दबाए, लंड रगड़ा, चूत में उंगलियाँ कीं। हँसी-मजाक चलता रहा। नहाकर जब बाहर आए तो हम और करीब हो चुके थे।
ठरकी अब्बू जान के वीर्य का स्वाद माँ-बेटी ने मिलकर चखा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
Free Read Tharki Abbu Jaan ke veerya ka swaad maa-beti ne milkar chakha Antarvasna Hindi Threesome Sex Story :- यह थ्रीसम सेक्स अनुभव हमारे परिवार को और मजबूत बना गया। पहले जहाँ सिर्फ प्यार था, अब उसमें कामुकता का रंग भी जुड़ गया। हम तीनों अब खुले मन से एक-दूसरे के साथ सोते हैं, चुदाई करते हैं और हर पल का मजा लेते हैं। प्रिया के रूप में मैंने जाना कि सहमति और प्यार से कोई भी रिश्ता सुंदर हो सकता है।
मेरे अब्बू जान और अम्मी जान भी अब पहले से ज्यादा खुश रहते हैं। यह हमारा निजी राज है जो हमें एक-दूसरे से जोड़े रखता है। अगर आपको यह कहानी पसंद आई तो अपने विचार जरूर बताएं – क्या आप भी ऐसी पारिवारिक नजदीकियाँ चाहते हैं?


