दोस्तों मेरा नाम सुमन पांडे है और मैं उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक शादी शुदा महिला हूँ. मेरी शादी हुए कई साल बीत चुके थे मगर फिर भी मैं माँ नहीं बन पा रही थी फिर माँ बनने के इलाज के चलते मैं एक पाखंडी योगी बाबा के चंगुल में फंस गयी और उस पाखंडी योगी बाबा ने मेरा शारीरिक शोषण करा. आज की इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी में मैं आप को बताउंगी की मुझे माँ बनाने के लिए कैसे सेक्स करने के दौरान पाखंडी योगी बाबा ने मेरी टाइट चूत को अपनी पूरी ताकत लगा कर चोदा था. पूरी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी निचे विस्तार से पढ़ें…
दोस्तों मेरा नाम सुमन पांडे है और मैं उत्तर प्रदेश की रहने वाली एक शादी शुदा महिला हूँ. मेरी शादी को चार साल हो गये थे हर रोज अपने पति के लंड से चुदवाने के वावजूद मैं माँ नहीं बन पा रही थी. मेरे उप्पर पति का वंश बढ़ाने का काफी ज्यादा दबाव था क्योंकि मैं परिवार की इकलौती बहू थी, पुरे खानदान में मेरे अलावा और कोई वंश बढ़ाने वाला नहीं था. मेरी सास मन ही मन मुझे कोसती थी की कैसी बाँझ लड़की को अपने घर बहू बना लायी तो हमारे खानदान को चिराज भी नहीं दे पा रही है. मेरे ससुराल वाले अक्सर अंधविश्वास के चलते एक तथाकथित पाखंडी योगी बाबा के पास जाते रहते थे। उन्होंने कई बार मेरे लिए भी कुछ प्रसाद लाकर कहा कि इसे खा लो, इससे तुम्हें संतान प्राप्ति होगी। लेकिन मुझे इन बातों पर कभी भरोसा नहीं था।
मुझे माँ बनाने के लिए पाखंडी योगी बाबा ने मेरी टाइट चूत को अपनी पूरी ताकत लगा कर चोदा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

एक दिन मेरी सास ने कहा, “तुम मेरे साथ चलो, योगी बाबा ने बुलाया है। उन्होंने कहा है कि तुम्हें उनके पास ले आऊं तो तुम्हें संतान सुख की प्राप्ति अवश्य होगी।” मैं मन ही मन इस बात से सहमत नहीं थी, लेकिन ससुराल वालों के दबाव में मुझे उनके पास जाना पड़ा। मैंने सोचा, चलो देखते हैं आखिर इस बाबा में क्या शक्ति है। अगले दिन मैं उनके दरबार में पहुंची। वहां बाबा के कुछ शिष्य हमें अंदर पाखंडी योगी बाबा के पास ले गए। बाबा एक आसन पर अपनी गांड टेक कर बैठे हुए थे। मेरी सास ने उन्हें प्रणाम किया और मुझे भी ऐसा करने को कहा। मेरा मन नहीं था, फिर भी मैंने मेरी सास के कहने पर उस पाखंडी योगी बाबा को प्रणाम किया।
मेरी सास ने बाबा से कहा, “बाबा जी, यही मेरी बहू है, जिसे संतान नहीं हो रही।” बाबा ने बड़े आत्मविश्वास से जवाब दिया, “चिंता मत करो, ये अब मेरी शरण में आई है, इसे जरूर संतान प्राप्त होगी।” कुछ देर बाद बाबा ने मुझे बुलाया और प्रसाद देने लगे। जब वे प्रसाद दे रहे थे, तो मेरे हाथों को सहलाने और कंधे पर हाथ रखने का प्रयास करने लगे। उन्होंने कहा, “तुम चिंता मत करो, तुम्हें जल्दी ही संतान होगी।” मुझे ये सब असहज और संदिग्ध लगा, लेकिन मैं चुपचाप आश्रम से लौट आई।
इसके बाद पाखंडी योगी बाबा ने मेरी सास को बुलाकर कहा, “कल अपनी बहू को फिर लेकर आश्रम आना और साथ में कुछ पैसे भी लाना। कल यहां हवन होगा। अगर तुम चाहो, तो यह हवन तुम्हारे घर पर भी करवा सकता हूं।” यह अनुभव मेरे लिए बहुत असुविधाजनक और चिंताजनक था। अंधविश्वास में फंसे लोग अपनी चाहत को पूरी करने के लिए ऐसे ढोंगी बाबाओं के जाल में फंस जाते हैं, जो उनकी भावनाओं और परेशानियों का गलत फायदा उठाते हैं।
मेरी अन्धविश्वास से भरी सास ने पाखंडी योगी बाबा से कहा, “ठीक है बाबा जी, आप आश्रम की जगह हमारे घर आकर ही हवन करवा लीजिए, यह ज्यादा सही रहेगा।” पाखंडी योगी बाबा ने सहमति जताई और कहा, “ठीक है, मैं खुद ही आ जाऊंगा।” घर लौटते समय सास ने मुझे यह बात बताई। अगले दिन मेरी सास ने हवन की सारी तैयारियां कर लीं। लेकिन बाबा जी बहुत देर तक नहीं आए। जब मेरे पति और ससुर घर से बाहर गए, तभी कुछ समय बाद बाबा जी अपने दो शिष्यों के साथ पहुंचे। उस वक्त घर में सिर्फ मैं और मेरी सास ही मौजूद थे।
बाबा जी ने हमारे घर पर आते ही कहा, “मेरे पास ज्यादा समय नहीं है, जल्दी करो क्योंकि हवन में बहुत समय लग जाएगा।” फिर उन्होंने कहा कि यह हवन एक कमरे में अकेले होगा, और इसमें केवल मेरी मौजूदगी जरूरी है। उनके अनुसार, मेरी सास और परिवार के दुसरे सभी सदस्य कमरे के बाहर बैठकर भगवान से प्रार्थना करेंगे कि हवन सफल हो और इस दौरान बाबा जी के शिष्य मंत्र जाप करेंगे। मेरी अंधविश्वास से भरी सास ने बिना सवाल किए उनकी बात मान ली, लेकिन मुझे कुछ गड़बड़ महसूस हो रही थी। हालांकि, मेरी सास का बाबा जी पर पूरा विश्वास था वो तो दादी बनने की लालसा में बिलकुल अंधी हो चुकी थी।
पाखंडी योगी बाबा ने मुझ शादी शुदा बाँझ महिला को एक कमरे में ले जाकर बंद कर दिया। उनके शिष्य हवन सामग्री लेकर अंदर आए और हवन शुरू करने की तैयारी करने लगे। बाबा जी ने मुझे कुछ जड़ी-बूटी दी और कहा, “बेटी, इस जड़ी-बूटी को खा लो इससे तुम्हें गर्भवती होने व मां बनने में मदद मिलेगी।” मुझे उनकी दी गयी जड़ी-बूटी पर संदेह हुआ कि हो सकता है ये जड़ी-बूटी ना होकर कुछ और हो इस डर के कारण मैंने थोड़ा सा खा लिया, लेकिन अच्छा नहीं लगा, इसलिए मैंने उनके सामने झूठमूठ खाने का नाटक किया और मौका देखकर बाकि की फैंक दी। अब उनके शिष्यों ने जोर-जोर से मंत्र पढ़ते हुए हवन शुरू कर दिया। थोड़ी देर बाद, मुझे हल्का नशा सा महसूस होने लगा, और मेरा सिर भारी होने लगा। उसी समय मुझे समझ आ गया कि उन्होंने जड़ी-बूटी के नाम पर मुझे कोई मादक पदार्थ खिला दिया है। मुझे यकीन हो गया कि अब मेरे साथ कुछ अनहोनी होने वाली है।
बाबा जी ने मुझे पकड कर निचे फर्श पर बैठ दिया, कुछ देर में मै फर्श पर ही लेट गई लेकिन मुझे हल्का हल्का होश था। कुछ देर बाद पाखंडी योगी बाबा जी ने मेरे कपड़ो को निकलने लगे, उन्होंने मेरे ब्लाउस को निलकल दिया और मेरे मोटे मोटे स्तनों को पूरी ताकत लगा कर दबाते हुए मेरे बड़े बड़े स्तनों को मुंह में लेकर किसी छोटे बच्चे की तरह चूसने लगे। मै कुछ कुछ होश में थी जिस वजह से मै पाखंडी योगी बाबा के ये सब अश्लील हरकतें अपने आँखों से देख रही थी। जब बाब जी मेरे बड़े व मोटे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूस रहे थे तो मेरे जिस्म के अंदर भी कामवासना की ज्वाला भड़कने लगी. मैंने बाबा जी की दी गयी जड़ीबूटी पूरी नहीं खाई थी इस वजह से अब उस जड़ीबूटी का नशा उतरने लगा और देखते ही देखते कुछ ही देर में मै अपने पूरे होश में आ गई।
पाखंडी योगी बाबा मुझे होश में देख केर डर गये और भागने का प्रयास करने लगे लेकिन मै इतने जोश में आ गई थी की मैंने बाबा जी को कस कर पकड लिया और उनके मूछों के बीच में उनको होठो को पीने लगी। पाखंडी योगी बाबा जी ने भी जब देखा की मैंने उनके होठो को पीने लगी हूँ तो उन्होंने भी अपनी पूरी ताकत लगा कर मुझे और भी जबरदस्त तरीके से पकड लिया और मेरे शरबती होठो को पीने लगे। वो मेरे होठो को अपने दांतों से नोचने लगे थे और साथ में मेरे मम्मो को भी अपनी पूरी ताकत लगा कर बहुत ही ज्यादा जोर जोर से दबा रहे थे। अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए अब मै भी बाबा जी के होठो को काटने लगी और उनके पूरे बदन को बड़े प्यार से सहलाते हुए उनको अपनी बाँहों में कस कर जकड़ लिया। मैं शादी शुदा महिला किसी रंडी की तरह उस पाखंडी योगी बाबा के होठो को लगातार चूस रही थी। कुछ ही देर में हम दोनों की कामवासना काफी ज्यादा जोरों से भड़क उठी.
मेरे साथ अश्लील हरकतें करते करते अब पाखंडी योगी बाबा का लंड बिल्कुल खड़ा और टाइट हो गया था जो की मुझे उनकी सफेद धोती में उभरा हुआ बिलकुल साफ साफ दिखाई दे रहा था। बहुत देर तक मेरे रसीले आम जैसे बूब्स को पीने के बाद बाबा जी की कामवासना और भी बढ़ गयी. अब उस पाखंडी योगी बाबा ने मुझसे मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने की सहमती मांगी जो की मैं ख़ुशी ख़ुशी उन्हें दे दी क्योंकि मुझे भी हर हाल में गर्भवती होना था. वो पाखंडी योगी बाबा मुझे चोदने के लिए पहले मेरी साडी को उठा कर उप्पर कर दिया और साड़ी के साथ में मेरे पेटीकोट को भी भी उप्पर उठा दिया। साड़ी और पेटीकोट को उप्पर उठाने के बाद पाखंडी योगी बाबा जी ने मेरी पैंटी को अपने हाथो से खीच कर निकल दिया
पैंटी उतरते ही अब मेरी टाइट चूत पाखंडी योगी बाबा के सामने थी और उनके लंड को चुदाई करने का न्योता देने लगी. पाखंडी योगी बाबा मेरी चूत को अपनी उँगलियों से सहलाते हुए मेरी टाइट चूत के दाने रगड़ने लगे जिससे मै तो चुदने के लिए पागल सी हुई जा रही थी। मेरी चूत की चुदाई करने के लिए अब उस पाखंडी योगी बाबा ने अपनी धोती में से 9 इंच लम्बे और 3 इंच मोटे लंड को बाहर निकाला. उस पाखंडी योगी बाबा का लंड देखकर तो मैं बहुत ज्यादा डर गयी क्योंकि उनका लंड तो काफी ज्यादा लम्बा और मोटा था मेरे पति का लंड तो इसके मुकाबले आधा भी नहीं था। अपना लंड धोती से बाहर निकालने के बाद उस पाखंडी योगी बाबा ने मेरी टाइट चूत के दोनों होठों के बीच में अपने लंड को रख दिया और धीरे धीरे अपने खड़े लंड को मेरी बुर के होठों में रगड़ने लगे।
कुछ देर बाद बाबा जी ने मेरी चुदाई करने के लिए अपने लंड को मेरी चूत के अंदर डाल दिया। जब पहली बार बाबा जी का लंड मेरी चूत में गया ऐसा लगा की मेरी पहली बार चुदाई होने जा रही है। बाबा जी का मोटा लंड मेरी चूत को बहुत दर्द दे रहा था। जब बाबा जी ने मुझे चोदना शुरु किया तो उनके शिष्यों ने और भी तेज तेज से मन्त्र पढना शुरु कर दिया। उन लोगों ने भी अपना हवन खत्म कर लिया और मेरे पास में आकर मन्त्र पढने लगे और साथ में वो दोनों मेरी चूचियो को दबाने लगे। और बाबा जी ने लगातार मेरी चूत को चोदना शुरु कर दिया। आप ये कहानी नॉन वेज सेक्स स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है। वो मेरे बुर में अपने मोटे लौड़े को जब डालते तो ऐसा लगता की जैसे कोई मेरी चूत में बहुत मोटी चीज घुस गई हो।
पाखंडी योगी बाबा का लंड काफी ज्यादा लम्बा और मोटा था जिस वजह से मेरी चूत की दीवर फट रही थी और बाबा जी मेरी चूत को अपनी पूरी ताकत लगा कर चोद रहे थे. चुदाई करवाते करवाते मै शादी शुदा महिला दर्द के मारे जोर जोर से चीख रही थी मगर मेरी दर्द भरी चीखें उस कमरे से बाहर नहीं जा सकती थी क्योंकि कमरे के बाहर बैठे पाखंडी योगी बाबा के शिष्य जोर जोर से मंत्रों का जाप कर रहे थे। मेरी चूत दर्द से फटी जा रही थी, लेकिन कुछ देर बाद मेरी चूत गीली हो गई मेरी चूत का चिपचिपा पदार्थ बाबा जी के लौड़े में लग गया और उनका लंड अब मेरी चूत को पलते हुए अंदर तक जा रहा था, और मुझे भी मज़ा आ रहा था। कुछ देर के बाद बाबा जी झड़ने वाले थे। इसलिए वो अपने लम्बे और मोटे लंड से मेरी टाइट चूत को और भी तेज तेज चोदने लगे थे।
करीब एक घंटे की चुदाई के बाद उस पाखंडी योगी बाबा के लंड से वीर्य की पिचकारी चल पड़ी और मेरी बुर उनके लौड़े से निकले वीर्य से भर गयी. पाखंडी योगी बाबा ने मुझे बोला की बेटी थोड़ी देर तक अपनी दोनों टांगे उप्पर करके ही लेटी रहो ऐसा करने से तुम्हारे गर्भवती होने की सम्भावना ज्यादा है. करीब दस मिनट तक मैं अपनी दोनों तांगे उप्पर करके लेटी रही ताकि पाखंडी योगी बाबा के लंड से निकला वीर्य मेरी योनी में ज्यादा से ज्यादा अंदर जा सके और मैं उनके बच्चे की माँ बन सकूँ. मेरी चुदाई करने के बाद बाबा जी ने मुझे हल्दी का टीका लगाया और मुझे खाने के लिए कुछ फुल भी दे दिए। और फिर दरवाजा खोला। जब दरवाजा खुला तो मेरी सास बाहर ही बैठी थी।
पाखंडी योगी बाबा ने मेरी सास के कहा की “आगे क्या करना है ये सब मैंने तुम्हारी बहू को बता दिया है”। इस बात पर मेरी सास ने पाखंडी योगी बाबा से अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए पूछा की “बाबा जी मेरी बहू को बच्चा तो हो जायेगा ना उए हमारा वंश तो चला पायगी ना”। तो पाखंडी योगी बाबा ने मेरी सास से कहा – “बस आज से लगभग 9 महीने बाद आप दादी बन चुकी होगी और आप के हाथ में एक सुन्दर सा बच्चा होगा ये मेरा आशीर्वाद है”। मेरी सास ने बाबा जी को कुछ पैसे दिए हवन करने के लिए। उनको क्या पता था कि वहां हवन के साथ में चुदाई भी चल रही थी। उसके 9 महीने बाद मै एक बच्चे की माँ बन गई। दोस्तों मेरे ससुराल वाले तो समझते हैं की ये बच्चा उनके खानदान का अंश है मगर वास्तव में वो बच्चा पाखंडी योगी बाबा का है. पाखंडी योगी बाबा ने ही मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाये और मुझे गर्भवती करा था. मुझे समझ आ गया था की मैं बाँझ नहीं थी वल्कि मेरा पति ही साला नामर्द था…


