HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesचुदाई करने का न्योता दिया मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी ने

चुदाई करने का न्योता दिया मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी ने

चुदाई करने का न्योता दिया मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी ने अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश: यह हिंदी सेक्स कहानी एक 19 साल के कुँवारे लड़के, रोहन, की है, जो दिल्ली के एक मध्यमवर्गीय मोहल्ले में रहता है। उसका पड़ोस में रहने वाली एक कामुक औरत, कविता आंटी, के साथ अनजाने में शुरू हुआ रिश्ता, धीरे-धीरे चुदाई और वासना की आग में बदल जाता है। रोहन, जो अपनी उम्र के हिसाब से कामवासना से भरा है, कविता आंटी के बड़े बूब्स और भारी गांड को देखकर उत्तेजित हो जाता है। एक दिन, कविता आंटी की मदद करने के बहाने वह उनके घर जाता है, और वहां से एक ऐसी कहानी शुरू होती है, जो शर्म, उत्तेजना, और हास्य से भरी है। कहानी में गंदे गाली-गलौज, खुले शब्दों जैसे “लंड,” “चूत,” “चुदाई,” और “बूब्स” का इस्तेमाल है, जो इसे और भी उत्तेजक बनाते हैं। यह कहानी पूरी तरह से काल्पनिक और मूल है, जो दिल्ली के एक सामान्य मोहल्ले की पृष्ठभूमि में सेट है, और इसमें हर घटना को विस्तार से वर्णन किया गया है।


Mote boobs wali padosan aunty ne chudai karne ka invitation diya अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी की शुरुआत :- मेरा नाम रोहन है, उम्र 19 साल, और मैं दिल्ली के करोल बाग में एक पुराने से मकान में रहता हूँ। हमारा मोहल्ला वही टिपिकल दिल्ली वाला है—तंग गलियां, बाहर टंगे कपड़े, और हर घर से आती खाने की खुशबू। मैं कॉलेज में पढ़ता हूँ, लेकिन मेरा दिमाग पढ़ाई से ज्यादा औरतों के जिस्म पर रहता है। खासकर, हमारी पड़ोसन, कविता आंटी, जो अपने बड़े बूब्स और भारी गांड के लिए पूरे मोहल्ले में मशहूर थी।

पड़ोसन कविता आंटी, उम्र होगी कोई 35-36 साल, लेकिन उनका जिस्म ऐसा था कि बीस साल की लड़की भी फेल। उनके पति, राजेश अंकल, एक ट्रैवलिंग सेल्समैन थे, जो महीने में बीस दिन बाहर रहते थे। आंटी अकेली रहती थीं, और उनका घर हमेशा खुला रहता था। वो साड़ी में घर की सफाई करती थीं, और उनका बिलकुल चुस्त ब्लाउज उनके मोटे मोटे बूब्स को मुश्किल से समेट पाता था। उनके गहरे गले का ब्लाउज, जिसमें से उनके बूब्स का ऊपरी हिस्सा साफ दिखता था, मुझे पागल कर देता था। जब वो झाड़ू लगाती थीं, तो उनके बूब्स हिलते थे, और मैं अपनी नजरें हटा नहीं पाता था। उनकी गांड तो इतनी भारी थी कि साड़ी में भी उसका आकार साफ दिखता था। मैं कई बार उनके बारे में सोचकर मुठ मार चुका था, लेकिन शर्म और डर की वजह से कभी उनसे बात नहीं की।

मुफ्त में पढ़ें चुदाई करने का न्योता दिया मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी ने अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

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हमारे मोहल्ले में एक और किरदार था—मेरा दोस्त, अजय, जो मेरे साथ कॉलेज जाता था। अजय थोड़ा बेशर्म था, और उसे औरतों के बारे में गंदी बातें करने में मजा आता था। वो हमेशा कहता, “रोहन, तू कविता आंटी की चूत में डाल दे अपना लंड और उनकी चुदाई करके अपनी अन्तर्वासना शांत कर ले, तेरा लंड तो चूत के लिए तरस रहा है!” मैं हंसकर उसकी बातों को टाल देता था, लेकिन अंदर ही अंदर मेरी वासना भड़क उठती थी। एक और किरदार थी मेरी माँ, सुनीता, जो एक सख्त और धार्मिक औरत थी। वो हमेशा मुझे पढ़ाई पर ध्यान देने को कहती थी, और अगर उसे पता चलता कि मैं कविता आंटी की तरफ देख रहा हूँ, तो मेरी खैर नहीं थी। फिर भी, मेरी आँखें बार-बार कविता आंटी के घर की तरफ चली जाती थीं।

एक दिन, मैं कॉलेज के लिए निकला। हमारा मकान तीसरी मंजिल पर था, और कविता आंटी का घर नीचे की मंजिल पर। मैं सीढ़ियाँ उतर रहा था, जब आंटी ने मुझे आवाज दी, “रोहन, इधर आ जरा!” उनकी आवाज सुनकर मेरा दिल धक-धक करने लगा। मैंने नीचे देखा, तो वो लाल साड़ी में थीं, और उनका ब्लाउज इतना तंग था कि उनके बूब्स बाहर निकलने को बेताब थे। मैंने शर्माते हुए कहा, “जी, आंटी?”

वो बोलीं, “बेटा, ये सोफा थोड़ा हटाने में मदद कर दे। मुझे सफाई करनी है।” मैंने हाँ में सिर हिलाया और उनके घर में घुस गया मदक करने के लिए। अंदर का नजारा देखकर मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। आंटी झुकी हुई थीं, और उनके दोनों बड़े बड़े बूब्स के बीच की गहरी लाइन साफ दिख रही थी। मैंने सोफा पकड़ा, और वो दूसरी तरफ से उसे खींचने लगीं। उनके बूब्स हिल रहे थे, और मेरा लंड मेरी जींस की पेंट में उछल रहा था। उस वक्त जींस इतनी टाइट हुआ करती थी कि मेरा उभार साफ दिख रहा था। मैंने सोफा हटाया और जल्दी से उसे पीछे छिपाने की कोशिश की।

आंटी ने मुझे देखा और मुस्कुराईं। “थैंक यू, रोहन बेटा। अब जा सकता है।” मैंने कहा, “रुकिए, आंटी, मैं सोफा वापस रख देता हूँ।” तभी अजय ऊपर से गुजरा। मैंने उसे बुलाया, “अजय, इधर आ, सोफा हटाने में मदद कर!” अजय ने हंसते हुए सोफा रखवाया और चला गया। मैं भी जाने लगा, लेकिन आंटी ने फिर आवाज दी, “रोहन, रुक जा। शरबत पीकर जा।”

पड़ोसन आंटी के मोटे मोटे बूब्स पर नजर पड़ी और लंड हरकत में आ गया

मैं शर्म से लाल हो गया। “नहीं, आंटी, क्लास छूट जाएगी।” लेकिन वो नहीं मानीं। “ऊपर देखकर बात कर, जमीन में क्या देख रहा है?” जैसे ही मैंने ऊपर देखा, मेरी नजर उनके बूब्स पर पड़ी, और मेरा लंड फिर से हरकत में आ गया। आंटी ने मेरी जींस की तरफ देखा और हल्के से हँसी। “कांप मत, रोहन। रिलैक्स हो जा। ये मर्दों की फितरत है। तू मर्द बन रहा है।” मैं शर्म से मर रहा था। मेरे मुँह से आवाज नहीं निकल रही थी।

आंटी ने कहा, “तुझे उत्तेजना कंट्रोल करनी है, ना? मैं तेरी मदद कर सकती हूँ।” मैंने पूछा, “कैसी मदद?” वो बोलीं, “संडे को थोड़ा वक्त निकालकर आ। मैं तुझे समझाऊँगी।” मैं कुछ समझ नहीं पाया, लेकिन मेरे दिमाग में गंदी-गंदी बातें घूमने लगीं।

उसके बाद, मैं कई रातें सो नहीं पाया। कविता आंटी के बूब्स मेरे दिमाग में घूम रहे थे। मैंने कई बार मुठ मारी, लेकिन हर बार शर्मिंदगी भी महसूस होती थी। मैं सोचता था, “ये गलत है। वो शादीशुदा हैं।” लेकिन मेरी वासना मुझे बार-बार आंटी के घर की तरफ खींच रही थी।

आखिरकार, संडे आया। मैंने माँ से कहा, “माँ, मैं क्रिकेट खेलने जा रहा हूँ।” माँ ने शक की नजर से देखा, लेकिन कुछ बोली नहीं। पड़ोसन आंटी ने मुझे उनकी चुदाई का न्योता दिया था तो मैं छुपते छुपाते उनके घर पहुँचा। दरवाजा खुला था। मैंने हल्के से आवाज दी, “आंटी?” वो अंदर से निकलीं, नीली साड़ी में, और उनका ब्लाउज इतना तंग था कि उनके निप्पल का उभार साफ दिख रहा था। वो बोलीं, “मुझे पता था, तू आएगा।”

मैंने शर्माते हुए कहा, “आंटी, मैंने क्रिकेट का बहाना बनाया है। मेरे पास 3-4 घंटे हैं।” वो हँसीं और बोलीं, “बता, तू क्या जानता है चुदाई के बारे में? कभी किसी लड़की या औरत को नंगा देखा है?” मैंने शर्म से सिर झुका लिया। “नहीं, आंटी। बस कुछ पोर्न फिल्में देखी हैं, जिसमें बिकिनी और किसिंग होती है।” वो हँसीं, “तो तू बिल्कुल कच्चा है। मुठ मारता है क्या अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए?” मैंने हाँ में सिर हिलाया। “तो बेटा तुझे कंट्रोल करना सिखाना पड़ेगा।”

पहली बार किसी महिला का नंगा जिस्म देखा

आंटी ने अपने बिलकुल चुस्त ब्लाउज के ऊपरी बटन खोले। उनके मोटे मोटे बूब्स का आधा हिस्सा अब बिलकुल साफ दिख रहा था। मैं पड़ोसन आंटी के मोटे मोटे बूब्स का ऊपरी भाग देखकर पागल हो रहा था। मेरी जींस में लंड उछल रहा था। वो बोलीं, “देख, रोहन। इसे नॉर्मल समझ। मर्दों को औरत का जिस्म देखना पसंद है।” फिर उन्होंने अपनी साड़ी उतारी। नीचे सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज था। मैंने कहा, “आंटी, ये गलत है। आपके पति…” वो हँसीं, “मेरे पति बाहर दूसरी औरतों के साथ मजे लेते हैं। मैं तुझे सिर्फ सिखा रही हूँ की चुदाई कैसे करी जाती है, बेटा कल को तेरी शादी हो जायगी और तुझे चुदाई करना नहीं आयगा तो तेरी होने वाली दुल्हन तुझे नामर्द समझेगी।”

मुझे समझाने के बाद, उन्होंने पेटीकोट खोल दिया। जैसे ही उन्होंने पेटीकोट खोला वैसे ही मेरी नजर उनकी सेक्सी पैंटी पर पड़ी, उनकी सेक्सी पैंटी चूत की जहग से पूरी गीली हो रखी थी। मैंने पूछा, “आंटी, आपका भी वीर्य निकलता है?” वो हँसीं, “हाँ, बेटा औरतों की चूत भी गीली होती है।” फिर उन्होंने अपना ब्लाउज उतार दिया। उनके बड़े-बड़े बूब्स मेरे सामने थे, निप्पल सख्त और गहरे भूरे रंग के। मैंने कहा, “आंटी, मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा। मेरा लंड गीला हो गया।”

वो बोलीं, “रोहन, अपने कपड़े उतार।” मैंने शर्माते हुए जींस और शर्ट उतारी। मेरा लंड तनकर खड़ा था। आंटी ने उसे देखा और कहा, “बेटा बड़ा मस्त लंड है तेरा।” फिर उन्होंने मेरे पास आकर मेरे लंड को हाथ में लिया। उनकी उंगलियों का स्पर्श ऐसा था मानो मेरे पूरे बदन में बिजली दौड़ गई। वो धीरे-धीरे मेरी मुठ मारने लगीं। मैं उनके बूब्स को देख रहा था, और मेरा वीर्य कुछ ही पलों में पिचकारी की तरह निकल गया जो सीधे आंटी के सुंदर से चेहरे पर गया।

बड़े बूब्स वाली पड़ोसन आंटी की चूत का पहला दीदार

मेरी मुठ मारने के बाद आंटी ने कहा, “बेटा अब तुझे असली चीज दिखाती हूँ।” उन्होंने अपनी पैंटी उतारी। उनकी चूत पर घने बाल थे, और वो गीली चमक रही थी। मैंने पहली बार किसी औरत की नंगी चूत देखी थी। मुझे उत्तेजना के साथ-साथ घिन भी आई। मैंने कहा, “आंटी, प्लीज कपड़े पहन लो मुझे आपकी झांट के बालों से ढकी चूत देखकर बहुत सूग आ रही है।” वो हँसीं, “रोहन, तुझे आदत डालनी होगी।” फिर उन्होंने एक वीसीआर में कैसेट डाली। स्क्रीन पर एक औरत एक मर्द का लंड मुँह में लेकर चूस रही थी। उस सेक्स फिल्म को देखकर मुझे घिन आई, और मैंने उल्टी कर दी।

मोटे मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी जोर से हँस पड़ीं, “अरे, बेटा इतना डर गया? चल, मेरे मोटे मोटे नंगे बूब्स देख और मुठ मार कार अपनी अन्तर्वासना शांत कर।” उन्होंने मेरा लंड फिर से पकड़ा और खुद ही लंड हिला हिलाकर मेरा मुठ मारने लगीं। इस बार उन्होंने कहा, “आँखें बंद कर और हस्तमैथुन का आनंद ले।” मैंने वैसा ही किया। अचानक मुझे अपने लंड पर कुछ गीला और गर्म महसूस हुआ। मैं समझ गया कि मोटे मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूस रही थीं। मैंने आँखें नहीं खोलीं, क्योंकि मुझे डर था कि देखने से फिर घिन होगी। लेकिन मजा इतना था कि खड़े लंड से मेरा वीर्य फिर से निकल गया और आंटी ने मेरा सारा का सारा वीर्य पी लिया।

आंटी ने मुझे सोफे पर लेटाया। उन्होंने एक कंडोम निकाला और मेरे लंड पर चढ़ाया। फिर वो मेरे ऊपर बैठ गईं। उनकी चूत मेरे लंड पर रगड़ रही थी। मैंने उनके मोटे मोटे बूब्स को जोर-जोर से दबाया। वो ऊपर-नीचे होने लगीं। उनकी चूत इतनी गीली थी कि मेरा लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था। मैं चिल्ला रहा था, “आंटी, क्या मस्त चुदाई है!” वो हँस रही थीं और कह रही थीं, “चोद, रोहन, और जोर से चोद!”

मेरा वीर्य फिर से निकल गया, लेकिन आंटी नहीं रुकीं। वो मेरे लंड पर और जोर-जोर से उछल रही थीं। मोटे मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी की टाइट चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी। मुझे चुदाई करने में बहुत तेज दर्द होने लगा। मैंने कहा, “आंटी, बस करो, मेरा लंड दुख रहा है।” वो हँसीं, “अरे, अभी तो शुरूआत है।” फिर वो धीरे-धीरे रुकीं और मेरे लंड से कंडोम उतारा। उन्होंने मुझे बाथरूम ले जाकर मेरा लंड साफ किया।

हर संडे मोटे मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी की चुदाई का न्योता

उसके बाद, मैं हर संडे क्रिकेट का बहाना बनाकर आंटी के घर जाने लगा उनकी चुदाई करने के लिए। वो मुझे हर बार कुछ नया सिखाती थीं। एक दिन उन्होंने मुझे अपनी चूत चाटने को कहा। मैंने मना किया, “आंटी, मुझे घिन आती है।” वो हँसीं, “ठीक है, धीरे-धीरे सीख जाएगा।” फिर मोटे मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी ने मुखमैथुन करने के लिए मुझे 69 पोजीशन में लेटाया। मैं उनके बूब्स चूस रहा था, और वो मेरा लंड चूस रही थीं। उनकी चूत मेरे मुँह के पास थी, और उसकी गंध मुझे पागल कर रही थी। मैंने हिम्मत करके उनकी चूत को चाटा। पहले तो घिन आई, लेकिन फिर मजा आने लगा। उनकी चूत का स्वाद नमकीन और गर्म था।

एक बार आंटी ने मुझे मेरा लंड उनकी गांड में डालने को कहा। मैंने कहा, “आंटी, ये कैसे होगा?” वो बोलीं, “तेल लगा अपने लंड पर और धीरे-धीरे गांड के छेद में लंड डाल।” मैंने मेरे लंड पर तेल लगाने के बाद उनकी गांड में भी तेल लगाया और धीरे-धीरे अपना लंड डाला। पड़ोसन आंटी की गांड इतनी टाइट थी कि मेरा लंड फंस गया और वो दर्द के मारे जोर से चिल्लाईं, “रोहन, धीरे, भोसड़ी के मेरी गांड फट जायगी!” मैं हँस पड़ा, लेकिन धीरे-धीरे चोदने लगा। उनकी गांड का मजा कुछ और ही था।

एक दिन, जब मैं आंटी के घर गया, तो वो नंगी बाथरूम से निकली थीं। उनके बाल गीले थे, और पानी की बूँदें उनके बूब्स से टपक रही थीं। मैंने कहा, “आंटी, आप तो पूरी पोर्न स्टार लग रही हो!” वो हँस पड़ीं और बोलीं, “चल, भोसड़ीके, आज तुझे पोर्न स्टार की चुदाई का मजा देती हूँ।” उस दिन हमने तीन बार चुदाई की—पहले मिशनरी, फिर डॉगी, और आखिर में वो मेरे मुँह पर बैठ गईं। उनकी चूत मेरे मुँह पर रगड़ रही थी, और मैं उनकी गांड को सहला रहा था।

लेकिन एक बार मजेदार वाकया हुआ। मैं आंटी के घर था, और हम चुदाई में मस्त थे। तभी अजय ने दरवाजा खटखटाया। मैं घबरा गया। आंटी ने जल्दी से साड़ी लपेटी और मुझे अलमारी में छिपा दिया। अजय अंदर आया और बोला, “आंटी, रोहन यहाँ है क्या?” आंटी ने कहा, “नहीं, वो तो क्रिकेट खेलने गया।” अजय चला गया, और मैं अलमारी से निकला। आंटी हँसते हुए बोलीं, “तेरे दोस्त को शक हो गया। अगली बार दरवाजा बंद करना।” मैंने कहा, “आंटी, आप तो मुझसे चुदवाकर मेरी जान ले लोगी!” वो हँसीं और बोलीं, “जान लेने में ही तो मजा है।”


चुदाई करने का न्योता दिया मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी ने अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

मोटे मोटे बूब्स वाली पड़ोसन कविता आंटी के साथ मेरे अवैध सेक्स संबंध कई महीनों तक चले। मैंने उनके साथ हर तरह की चुदाई सीखी—चूत चाटना, गांड मारना, 69 सेक्स पोजीशन में मुखमैथुन, और क्या-क्या नहीं। लेकिन मेरे अंदर हमेशा थोड़ी शर्मिंदगी रही। मैं सोचता था कि वह मेरी माँ की उम्र की महिला है और उनके साथ सेक्स करना सरासर गलत है, लेकिन मेरी वासना मुझे बार-बार आंटी के पास ले जाती थी उनकी चुदाई करने के लिए। धीरे-धीरे, मैंने अपनी उत्तेजना को कंट्रोल करना सीख लिया। अब मैं जब चाहे अपनी वासना को दबा सकता हूँ, लेकिन कविता आंटी के साथ बिताए वो कामुक पल मेरी जिंदगी का सबसे उत्तेजक हिस्सा हैं।

आज मैं कॉलेज में कई लड़कियों के साथ सेक्स करके मजे ले चुका हूँ, मैंने कई वर्जिन लड़कियों की सील तोड़ी है लेकिन कविता आंटी के साथ करी गयी मेरे जीवन की पहली चुदाई का मजा कुछ और ही था। वो मेरी पहली सेक्स टीचर थीं, जिन्होंने मुझे एक नासमझ बच्चे से मर्द बनाया। लेकिन लड़कियों की चूत चाटना मुझे आज भी नहीं भाता। मैं और आंटी आज भी दोस्त हैं, और कभी-कभी हम पुराने दिनों को याद करके हँसते हैं। दोस्तों अब मैं अपने शब्दों को विराम देता हूँ… मुझे बताइए, आपको मेरी कहानी “चुदाई करने का न्योता दिया मोटे बूब्स वाली पड़ोसन आंटी ने” कैसी लगी? क्या आपको रोहन और कविता आंटी का रिश्ता उत्तेजक लगा? या आपको इसमें और क्या चाहिए था? आपकी राय मेरे लिए जरूरी है।

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