HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesपूरी रात चुदाई करी पड़ोस वाली भाभी की रसदार चूत चाटकर

पूरी रात चुदाई करी पड़ोस वाली भाभी की रसदार चूत चाटकर

फ्री में पढ़ें पूरी रात चुदाई करी पड़ोस वाली भाभी की रसदार चूत चाटकर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी :- नमस्ते दोस्तों, मैं शुभम हूँ, बीस साल का जवान लड़का, जो एक छोटे से गाँव में रहता हूँ। हमारे पड़ोस में रहती हैं गुलाबो भाभी। भाभी की उम्र करीब अट्ठाईस-तीस साल रही होगी, लेकिन देखने में वो ऐसी लगती थीं मानो अभी-अभी कोई फिल्म की हीरोइन निकली हो। गोरा रंग, भरी-भरी छातियाँ, पतली कमर और मोटी-मोटी चूतड़ें। उनकी साड़ी में लहराती कमर और ब्लाउज से उभरते बोब्स देखकर मेरा दिल धक्-धक् करने लगता था।

पड़ोस वाली सेक्सी माल भाभी का पति अक्सर शहर में काम पर रहता था, इसलिए घर में वो अकेली ही ज्यादा समय बिताती थीं। मैं मेरी पड़ोसन भाभी के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी अन्तर्वासना शांत करने की फ़िराक में था इस लिए मैं उनसे बात करने का बहाना ढूँढता रहता था। कभी पानी माँगने चला जाता, कभी उनके घर का सामान उठाने। हर बार वो मुस्कुराकर मुझे देवर जी कहकर पुकारतीं और मेरी आँखों में कुछ देखतीं। वो मुस्कान मेरे अंदर आग लगा देती थी।

एक दिन दोपहर को मैं छत पर गया हुआ था। नीचे पड़ोस वाली कामुक भाभी के घर का नहाने वाला हिस्सा दिखता था। अचानक मैंने देखा कि भाभी नहा रही हैं। उनका ब्लाउज भीगा हुआ था और साड़ी नीचे सरक गई थी। उनकी चूत की हल्की काली फांकें पानी से चमक रही थीं। पानी की बूँदें उनकी जाँघों से टपक रही थीं। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैं वहीं छुपकर देखता रहा। मन में एक ही ख्याल घूम रहा था – काश मैं उनकी रसदार चूत को जीभ से चाट पाता।

पूरी रात चुदाई करी पड़ोस वाली भाभी की रसदार चूत चाटकर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

पूरी रात चुदाई करी पड़ोस वाली भाभी की रसदार चूत चाटकर अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी
Antarvasna hindi sex kahani – Puri raat chudai kari pados wali bhabhi ki rasdar chut chaatkar

उस दिन के बाद मेरी नींद उड़ गई। रात को बिस्तर पर लेटकर मैं हस्तमैथुन करते हुए भाभी की चूत की कल्पना करता। मैं धीरे-धीरे गुनगुनाता, “गुलाबो भाभी… अपनी चूत चटा दो ना…” मेरी उंगलियाँ अपने लंड पर तेजी से चलतीं और कल्पना में मैं उनकी टाइट फुद्दी को चूसता हुआ झड़ जाता। लेकिन असल जिंदगी में मैं उनसे सिर्फ शर्माते हुए बात करता था।

धीरे-धीरे हमारी मुलाकातें बढ़ने लगीं। मेरी कामुकता से भरी पड़ोसन भाभी अक्सर मेरे घर आतीं और मुझसे बातें करतीं। कभी-कभी वो मेरी तरफ ऐसे देखतीं जैसे कुछ कहना चाह रही हों। एक शाम वो हमारे घर आईं और बोलीं, “देवर जी, आजकल तुम गाना गुनगुनाते हो ना? क्या गाते हो?” मैं शर्मा गया। दिल में तो यही गाना चल रहा था – भाभी की गुलाबी रसदार चूत चाटने वाला। मैंने हँसकर टाल दिया, लेकिन उनकी आँखों में चमक देखी। वो जानती थीं कि मैं क्या सोच रहा हूँ।

फिर एक दिन मौका मिल गया। पड़ोस में रहने वाली कमसिन भाभी के पति तीन दिन के लिए बाहर गए हुए थे और वो घर में बिलकुल अकेली थी। शाम को भाभी ने मुझे इशारे से बुलाया। रात के दस बजे मैं चुपके से उनके घर पहुँचा। दरवाजा खुला था। अंदर कमरे में मंद रोशनी थी। भाभी बिस्तर पर बैठी थीं, सिर्फ हल्की साड़ी और ब्लाउज पहने। उनकी आँखें नशीली लग रही थीं।

“आ गए देवर जी?” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा। उनकी आवाज में मिठास थी लेकिन छिनालपन भी बिलकुल साफ़ साफ़ झलक रहा था। मैं पास गया और उनके हाथ पकड़ लिए। “भाभी… मैं बहुत दिनों से…” मेरे शब्द रुक गए। भाभी ने मेरे होंठों पर उंगली रख दी और बोलीं, “जानती हूँ क्या चाहते हो। आज पूरी रात मेरी चूत चाट सकते हो। लेकिन पहले मुझे अच्छे से चूमो।”

मैंने उन्हें गले से लगा लिया। कामुकता से भरी सेक्सी माल भाभी की गर्मा गरम साँसें मेरे गाल पर पड़ रही थीं। मैंने उनके बिलकुल चुस्त ब्लाउज के हुक खोले और भारी-भारी बोब्स बाहर निकाल दिए। सेक्सी माल भाभी के ब्राउन निप्पल पहले से ही तने हुए थे। मेरा मन भाभी के बूब्स चूसने का करने लगा तो मैंने तुरंत एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा। भाभी आहें भरने लगीं, “आह… देवर जी… धीरे… मेरा दूध निकाल दोगे क्या?” उनकी उंगलियाँ मेरे बालों में फँस गईं और उन्होंने मुझे और जोर से अपनी छातियों से दबाया।

मैं नीचे झुका। उनकी साड़ी ऊपर सरकाई और पेटीकोट खोल दिया। उनकी चूत बिल्कुल नंगी थी, सिर्फ हल्के झाँट के बाल थे। रसदार फुद्दी पहले से ही गीली हो चुकी थी। चूत की खुशबू कमरे में फैल गई थी – मीठी और कामुक। मैंने अपनी नाक उनकी चूत से सटाई और गहरी साँस ली। “भाभी… आपकी चूत कितनी सुंदर है…”

नंगी पड़ोसन भाभी ने चूत चटवाने (Pussy Licking) के लिए अपनी जाँघें फैला दीं और बोलीं, “चाटो देवर जी… पूरी रसदार चूत चाट लो और भुजा लो अपनी प्यास। मैं बहुत दिनों से तरस रही हूँ अपनी चूत चटवाने के लिए।” मैंने जीभ निकाली और उनकी रसदार चूत की गुलाबी फांकों को धीरे-धीरे चाटना शुरू किया। ऊपर से नीचे तक। उनका चूत का रस मेरी जीभ पर चिपचिपा लग रहा था। स्वाद मीठा-खट्टा था। मैंने उनकी छोटी-सी चूत की गांठ को होंठों से पकड़ा और चूसने लगा। भाभी की कमर उछलने लगी।

“हाय रे… आह… मर गई मैं… जीभ अंदर डालो ना…” उन्होंने कराहते हुए कहा। मैंने अपनी जीभ उनकी टाइट चूत में घुसेड़ दी। अंदर-बाहर करने लगा। उनकी रसदार चूत की दीवारें मेरी जीभ को चूस रही थीं। भाभी की आँखें बंद थीं और वो सीत्कार रही थीं। उनका एक हाथ मेरे सिर पर था और दूसरे से वो अपनी चूतड़ दबा रही थीं।

मैं लगातार उनकी रसीली चूत चाटता रहा। कभी जीभ से चूत की गुलाबी फांकों को कुरेदता, कभी निप्पल चूसता। चूत चटवाते चटवाते नंगी भाभी का शरीर तड़प रहा था। अचानक उनकी जाँघें काँपने लगीं। “देवर जी… मैं झड़ रही हूँ… आह… चूत चाटते रहो…” उन्होंने चीखते हुए कहा और एक जोरदार झटके के साथ उनका चूत का रस मेरे मुँह में भर गया। मैंने सारा रस चाट लिया। उनका शरीर ढीला पड़ गया लेकिन आँखों में अभी भी भूख थी।

अब मेरी बारी थी मेरे कोबरा जैसे लंड का कमाल दिखने की। मैंने अपनी पैंट उतारी। मेरा तना हुआ लंड बाहर निकला – मोटा और लंबा, सिरा चमक रहा था। भाभी ने उसे देखा और मुस्कुराईं, “वाह देवर जी… इतना बड़ा लंड… आज मेरी भोसड़ी फाड़ दोगे क्या?” उन्होंने आगे बढ़कर मेरे लंड को हाथ में लिया और धीरे-धीरे मसलने लगीं। फिर झुककर उन्होंने मुँह में ले लिया। गर्म और गीला मुँह। उनकी जीभ मेरे लंड के सिरे पर घूम रही थी।

“मम्म… कितना स्वादिष्ट लंड है देवर जी आपका…” उन्होंने ब्लोजॉब देते हुए कहा। मैं उनके बाल पकड़कर उनके मुँह में धीरे-धीरे हिलाने लगा। उनकी गले तक लंड जाता और वो बिना हिचकिचाहट चूसतीं। थूक और लार से मेरा लंड चमक रहा था।

फिर मैंने उन्हें बिस्तर पर लिटाया। उनकी जाँघें फैलाईं और अपना तगड़ा मोटा लंड उनकी चूत के छेद पर रखा। धीरे-धीरे दबाव डाला। उनकी टाइट चूत मेरे लंड को निगलने लगी। “आह… देवर जी… धीरे… फाड़ दोगे मेरी चूत…” लेकिन मैं रुका नहीं। एक जोरदार झटके के साथ पूरा लंड उनकी भोसड़ी में घुस गया।

अंदर बहुत गर्मी और चिपचिपाहट थी। मैं धीरे-धीरे चोदने लगा। हर थप्पड़ के साथ उनकी चूतड़ हिल रही थीं। भाभी की आँखें आनंद से बंद थीं। “जोर से चोदो… अपनी इस बेकरार भाभी को रंडी समझकर चोदो… हाँ… इसी तरह… देवर जी” उनकी गंदी बातें सुनकर मेरा जोश बढ़ गया। मैंने रफ्तार तेज की। कमरे में चुट-चुट की आवाजें गूँज रही थीं।

हमने पोजीशन बदली। मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी। मैंने उनके चूतड़ों को थप्पड़ मारा और फिर से लंड अंदर डाला। गांड पकड़कर जोर-जोर से पेलने लगा। भाभी की चूत से रस निकल-निकलकर मेरे लंड पर चिपक रहा था। “हाय माँ… कितना मोटा लंड है… मेरी चूत फट जाएगी…” वो कराह रही थीं।

फिर 69 पोजीशन में हम लेट गए मुखमैथुन करने के लिए। भाभी मेरे लंड को चूस रही थीं और मैं उनकी चूत चाट रहा था। दोनों एक-दूसरे का रस चख रहे थे। उनकी जीभ मेरे अंडकोष को चाट रही थी। मैं उनकी गांड में उंगली डालने लगा। भाभी और ज्यादा उत्तेजित हो गईं।

आखिरकार मैंने उन्हें अपनी गोद में उठाया। उनका पूरा वजन मेरे लंड पर था। वो मेरे खड़े लौड़े पर किसी रंडी के जैसे पुरे जोश में ऊपर-नीचे उछल रही थीं। उनके बोब्स मेरे चेहरे पर उछल रहे थे। मैं निप्पल चूसता रहा और वो पड़ोसन जंगली चुदाई का पूरा आनंद लेती रहीं। “देवर जी… मैं फिर झड़ रही हूँ… अंदर भर दो अपना माल…”

मेरा लंड अब बहुत ही ज्यादा जोर जोर से फड़कने लगा। मैंने उन्हें तेजी से चोदा और आखिर में जोर से धक्का दिया। गर्म-गर्म वीर्य उनकी चूत के अंदर फूट पड़ा। भाभी भी साथ ही झड़ गईं। हम दोनों पसीने से तर-बतर होकर एक-दूसरे से बिलकुल नंगे ही लिपटे रहे। चुदाई ख़त्म होने के बाद पड़ोस वाली भाभी की रसदार चूत से मेरा चिपचिपा माल बाहर निकल रहा था।

अपनी अन्तर्वासना को अच्छी तरह से शांत करने के लिए रात भर हमने कई बार चुदाई की वो भी बिलकुल जंगली होकर। कभी मिशनरी में, कभी साइड से, कभी वो ऊपर चढ़कर। हर बार नई ऊर्जा के साथ। उनकी चूत मेरे लंड को बार-बार निचोड़ती रही। सुबह होने तक हम थक चुके थे लेकिन खुश थे। सुबह मैं चुपके से घर लौट आया। भाभी ने मुस्कुराकर कहा, “कल फिर आना देवर जी… तुम्हारी भाभी की रसदार चूत फिर तरस रही होगी।”

उस दिन के बाद हमारी मुलाकातें गुप्त रूप से जारी रहीं। भाभी अब पूरी तरह से मेरी कामुक औरत बन चुकी थीं। हर मौके पर हम एक-दूसरे को चोदते और चूत चाटते। वो रंडीबाज भाभी अब मेरी थी। यह थी मेरी हॉट भाभी के साथ की वाइल्ड चुदाई की सच्ची कहानी। अगर आपको ये desi bhabhi ki chudai kahani पसंद आई हो तो जरूर बताना। Hindi me explicit sex story पढ़ने का मजा ही कुछ और है।

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