मेरी चूत फाड़ कर भोसड़ी बना दे चोर से बोली हवेली की मालकिन अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी सारांश :- मैं, रमेश, एक छोटे से शहर, सूरजपुर का रहने वाला हूँ, जो अपनी चोरी की कला और फुर्तीले शरीर के लिए जाना जाता हूँ। यह कहानी उस रात की है जब मैं एक अमीर घर में चोरी करने गया, लेकिन उस अमीर घर की मालकिन, अंजली, ने मुझे अपनी वासना की आग में झोंक दिया। सूरजपुर के एक शांत मोहल्ले में बनी हवेली में मालकिन अंजली, उसका पति और उनकी बेटी नेहा रहते हैं। यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी मेरे चोरी के इरादे से शुरू होकर एक उत्तेजक, शर्मनाक, और बेकाबू रात की ओर बढ़ती है, जहाँ मैं अमीर घर की मालकिन अंजली की कामुकता का गुलाम बन गया। इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी में भावनाएँ, शारीरिक उत्तेजना, और गहरे संवाद हैं, जो पाठक को बाँधे रखेंगे।
The mistress of the mansion said to the thief, Tear my pussy and make it a cunt Antarvasna Hindi sex story :- मैं रमेश, सूरजपुर का वो चोर, जो रात के अंधेरे में हवेलियों की दीवारें फाँदता है और बड़ी चोरी करता है। मेरा शरीर चुस्त है, वी-शेप का, जिम और योग की मेहनत का नतीजा। मेरे कपड़े तंग, चमड़े जैसे, जो मेरे बदन से चिपके रहते हैं। आज रात, मैंने एक अमीर हवेली को निशाना बनाया। वहाँ हवेली का मालिक कमल, उसकी पत्नी अंजली, और उनकी 19 साल की बेटी नेहा रहते हैं। मुझे पूरी खबर थी की हवेली का मालिक रात की ड्यूटी पर रहता है, और हवेली में सिर्फ़ हवेली की मालकिन अंजली और उसकी बेटी नेहा हैं। अलमारी की चाबी अंजली के तकिए के नीचे होती है, और आज रात मेरा इरादा उस चाबी को चुराकर आलमारी से गहने और कैश चुराने का था।
रात के बारह बजे थे। हवेली की लाइटें बुझ चुकी थीं। मैंने चाय की दुकान पर टहलते हुए इंतज़ार किया। फिर, हवेली के पीछे की दीवार फाँदी और अंदर घुस गया। एक छलांग में मैं बालकनी पर था। खिड़की खुली थी। मैंने धीरे से कदम बढ़ाया। कमरे में सन्नाटा था। हवेली की सुन्दर सी दिखने वाली मालकिन बिस्तर पर सो रही थी। उसका गदराया बदन साड़ी में लिपटा था, साडी का पल्लू हल्का सा खिसक गया था जिस वजह से उसके ब्लाउज में उभरे हुए उसके बूब्स बड़े सेक्सी दिखाई दे रहे थे। जैसे ही मैंने चाबी के लिए तकिए की ओर हाथ बढ़ाया हवेली की मालकिन ने मेरे हाथ को पकड़ लिया। डर के मारे मेरी गांड फट कर छोड़ी हो गई…
मुफ्त में पढ़ें मेरी चूत फाड़ कर भोसड़ी बना दे चोर से बोली हवेली की मालकिन अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

“खिड़की से क्यों आए? दरवाजा तो खुला था,” हवेली की मालकिन अंजली की फुसफुसाहट ने मुझे चौंका दिया।
मेरा दिल धड़क गया। लेकिन मैंने खुद को संभाला। “बाहर से कोई देख लेता तो?” मैंने हकलाते हुए कहा।
“मैं कब से तड़प रही हूँ अपनी चूत को फड़वाकर भोसड़ी बनवाने के लिए, साले हरामी इतनी देर क्यों की?” उस कामुकता से भरी महिला ने मुझे बिस्तर पर खींच लिया।
“लाइट जल रही थी… मैंने सोचा कोई जाग रहा है,” मैंने बहाना बनाया।
“तू जिगोलो कमल का दोस्त है ना? नाम क्या है तेरा?” हवेली की मालकिन ने पूछा।
“जी… रमेश,” मैंने झट से कहा।
“कमल ने तो सुनील को भेजा था मेरी चूत को फाड़कर भोसड़ी बनाने के लिए… तू रमेश कैसे आ गया मेरी चूत को फाड़कर भोसड़ी बनाने के लिए?” उसकी आँखें चमकीं।
“वही… सुनील मेरा घर का नाम है,” मैंने बात संभाली।
“सुनील हो या रमेश, बस शुरू हो जा और मेरी चूत को फाड़ कर भोसड़ी बना दे,” हवेली की मालकिन ने मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया।
हवेली की मालकिन का बदन नंगा था, सिर्फ़ एक पतली चादर ओढ़ी थी। हवेली की मालकिन की चुदाई करने को मिलेगे यह बात सोचने मात्र से मेरे शरीर में गर्मी दौड़ गई। मैं चोरी भूल चुका था और अब मेरे दिमाग में कामसूत्र की सेक्स पोजीशन घूम रही थी। उसने दरवाजा बंद किया और मेरे कपड़े उतार दिए। मैं भी नंगा हो गया। उसका गदराया बदन मेरे सामने था। उस हवेली की मालकिन के बूब्स भारी थे, जैसे रस से भरे आम। उसकी चूत की गर्मी मैं महसूस कर रहा था।
“नाम क्या है तुम्हारा?” मैंने पूछा। “अंजली… कमल ने नहीं बताया?” उसने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए। मेरे लंड में उत्तेजना दौड़ गई। हवेली की मालकिन ने मेरे लंड को पकड़ लिया और मसलने लगी। “आह…” मेरे मुँह से सिसकारी निकली। मैंने उसके बूब्स दबाए। वे नरम थे, जैसे रुई के गोले। “हरामी, मेरी चूंचियाँ मसल दे,” उसने गाली दी। मैं और जोश में आ गया। जोश जोश में मैं उसे सब सच बता दिया की मैं कोई जिगोलो नहीं हूँ बल्कि एक चोर हूँ और उनकी हवेली में चोरी करने के इरादे से दाखिल हुआ था।
हवेली की मालकिन ने बोला की तू आज मुझे चोदकर खुश कर दे तुझे जीवन भर इतना पैसा दूंगी की तुझे चोरी करने की जरुरत नहीं पड़ेगी “अंजली, तेरी चूत को आज चोद कर भोसड़ा बना दूँगा,” मैंने अपना लंड सहलाते हुए कहा। “हाय रे, मेरी गांड भी मसल दे, बहनचोद,” उसने वासना में डूबकर कहा। मैंने उसके चूतड़ों को दबाया। वे गोल और भारी थे। उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं। मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसकी चूत गीली थी, जैसे बारिश में भीगा फूल। मैंने उसकी गांड के नीचे तकिया रखा और उसका छेद ऊँचा किया। मेरा लंड उसकी गांड पर टिका। मैंने धीरे से धक्का मारा। मेरा लंड उसकी टाइट गांड में घुस गया।
“हाय रे… तूने तो मेरी गांड फाड़ दी,” उसने सिसकारी भरी। “साली चुद्दकड़ रांड, तेरी गांड तो बड़ी मस्त है,” मैंने कहा और धक्के मारने लगा। गांड चुदाई के दौरान मेरे हाथ हवेली की मालकिन के मोटे मोटे बूब्स को जोर जोर से मसल रहे थे। फिर मैंने अपनी एक उंगली उस कामुकता से भरी महिला की टाइट चूत में डाल दी। वह चीख पड़ी। “हरामी, ये स्टाइल कहाँ से सीखा? मेरी चूत में आग लग रही है!”
हवेली की मालकिन की गांड से लंड निकालकर टाइट चूत में घुसा दिया
मेरा 7 इंच लम्बा और 4 इंच मोटा लंड उस कामुकता से भरी हवेली की मालकिन की टाइट गांड में तेजी से चल रहा था। चुदाई के दौरान उस कामुक महिला की सिसकारियाँ चीखों में बदल गईं। “चोद दे मेरी टाइट चूत को अपने तगड़े लंड से, मादरचोद और इसे फाड़ के भोसड़ी में तबदील कर दाल!” हवेली की मालकिन ने मुझे गाली दी। मैंने मेरा लंड हवेली की मालकिन की गांड से बाहर निकाला और उसकी चूत में घुसा दिया। मेरा सुपाड़ा उसकी गीली चूत में फिट हो गया।
“हाय रे… चोर का लंड गया मेरी टाइट चूत के अंदर… चुद गई मैं, मेरी टाइट चूत फट कर भोसड़ा बन गयी रे !” हवेली की मालकिन जोर से चिल्लाई। मैंने धक्के तेज किए। उस हवेली की मालकिन की टाइट चूत की गर्मी मेरे लंड को पागल कर रही थी। मैं चुदाई करने के दौरान मिशनरी सेक्स पोजीशन में उसके ऊपर लेट गया, अपने हाथों से शरीर उठाकर। मेरे धक्के तेज थे, और वह कामुकता से भरी महिला सेक्स करने के दौरान अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर साथ दे रही थी।
“तू तो कमाल का चोदता है, रमेश… ये चोरी करना छोड़ और हर रोज चोद मुझे अपनी रंडी बनाकर, मैं मेरी गांड और चूत की चुदाई करने के बदले मुझसे पैसे ले लिया कर !” उस हवेली की मालकिन ने कहा। “चुप रह, रंडी… बस चुद ले मेरे तगड़े लंड से और अपनी कामवासना शांत करवा ले,” मैंने जवाब दिया। चुदाई करवाने के दौरान उस हवेली की मालकिन की गन्दी गन्दी गालियाँ बढ़ रही थीं। “हरामी, मेरी टाइट चूत फाड़ कर भोसड़ी बना दे… मेरी चूत का सारा पानी निकाल!” वह चरम पर थी। मैंने भी अब झड़ने वाला था, चुदाई करते करते मेरे लंड ने वीर्य की पिचकारी छोड़ी और उसकी चूत में मेरा रस भर गया। उसने मुझे अपनी टाँगों में जकड़ लिया। सेक्स करने के दौरान हम दोनों का रस एक साथ निकला।
सेक्स ख़त्म करने के बाद भी हम दोनों नंगे ही चिपके रहे। फिर चुदाई करने के बाद मैं बिस्तर से उतरा। “तूने तो मेरा सारा रस निकाल दिया,” मैंने हाँफते हुए हवेली की मालकिन से कहा। “तू बहुत मस्त चोदता है साले हरामी चोरी करना छोड़ दे और जिगोलो बन जा। फिर वो बोली की अब मुझे मेरी अन्तर्वासना शांत करवाने के लिए और किसी मर्द की जरूरत नहीं अब से मैं तेरे लंड से ही अपनी कामवासना शांत करा करूँगा अब तू हर रोज मेरी चुदाई करने हवेली आ जाया करना।” “ये ले… कल दरवाजे से आना,” हवेली की मालकिन ने मुझे 500 का नोट थमाया, मैंने रुपये लिए और चुपचाप हेवेली से बाहर निकल गया।
मेरी चूत फाड़ कर भोसड़ी बना दे चोर से बोली हवेली की मालकिन अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
उस रात हवेली के अंदर मैं बड़ी चोरी करने गया था, लेकिन अंजली की काम वासना ने मुझे अपने जाल में फँसा लिया। मेरे मन में शर्म थी, उत्तेजना थी, और हवेली की मालकिन की चूत चुदाई करने के दौरान एक अजीब सा बेकाबूपन था। मैंने अब चोरी छोड़ दी, लेकिन जिगोलो बनकर अंजली की चूत और गांड की चुदाई करके उसकी कामवासना शांत करता रहा। क्या आपको यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी पसंद आई? अंजली और रमेश के किरदार कैसे लगे? सेक्स कहानी का लहजा और घटनाएँ कैसी थीं? इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी के बारे में आपका फीडबैक मेरे लिए जरूरी है।


