मुफ्त में पढ़ें मैंने अपना खड़ा लंड दोस्त की माँ के हवाले कर दिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी :- मेरा नाम अर्जुन है, उम्र बाइस साल, और मैं लखनऊ के गोमती नगर के पास एक मध्यमवर्गीय मोहल्ले में रहता हूँ। कॉलेज का छात्र हूँ, और खाली समय में क्रिकेट खेलने का शौक रखता हूँ। हमारी कॉलोनी में एक छोटा-सा मैदान है, जहाँ मैं और आसपास के लड़के अक्सर क्रिकेट खेलने इकट्ठा होते हैं। यहीं मेरी दोस्ती विक्रम से हुई, एक हँसमुख और ज़िंदादिल लड़का, जो मेरी ही उम्र का है। लेकिन ये कहानी विक्रम की नहीं, उसकी माँ सुनिता और मेरे अवैध सेक्स संबंध की है। सुनिता आंटी, उम्र करीब चालीस साल, लेकिन उनकी खूबसूरती ऐसी कि कोई भी उन्हें देखकर तीस-पैंतीस की भाभी समझ ले। उनका फिगर, जैसा कि बाद में मुझे पता चला, 34-30-38 का था। उनकी गोरी त्वचा, भरे हुए स्तन, और गोल-मटोल नितंब मेरे दिलो-दिमाग पर छा गए।
ये अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी तब शुरू हुई जब मेरे दोस्त विक्रम ने मुझे अपने घर बुलाया। मैं जब उनके घर पहुँचा, तो मेरे दोस्त की माँ को देखकर मेरे होश उड़ गए। वो एक हल्के गुलाबी रंग की साड़ी में थीं, जिसका पल्लू बार-बार उनके कंधे से सरक रहा था। उनकी कमर का उभार और गहरी नाभि मेरी नज़रों को चुरा रही थी। मैंने कोशिश की कि अपनी नज़रें हटाऊँ, क्योंकि वो मेरे दोस्त की माँ थीं और मेरी माँ के उम्र की भी थी, लेकिन उनकी अदाएँ मुझे बार-बार अपनी ओर खींच रही थीं। मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने भी मेरी घूरती नज़रों को देख लिया था, पर वो मुस्कुराकर बात को टाल देती थीं। उस दिन मैंने उनके साथ थोड़ी बात की। पता चला कि उनके पति एक सरकारी दफ्तर में काम करते हैं और दिन में घर पर नहीं रहते। विक्रम और मैं छत पर खेलने चले गए, लेकिन मेरा मन तो बस आंटी के गोरे बदन और उनकी भरी-भराई चूचियों में अटक गया था।
मुफ्त में पढ़ें मैंने अपना खड़ा लंड दोस्त की माँ के हवाले कर दिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

उस रात घर लौटकर मैंने सुनिता आंटी को सोचते हुए मुठ मारी। मेरे लंड को तभी चैन आया। इसके बाद मैं हर दिन विक्रम को उसके घर चलने के लिए उकसाता। मेरी नीयत सिर्फ़ सुनिता आंटी को देखने की थी। मैं उनकी एक झलक के लिए तरसता था। उनकी चूचियाँ, उनकी गांड, उनकी कमर—सब कुछ मुझे पागल कर रहा था। मैं सोचता, अगर वो इतनी सेक्सी बाहर से दिखती हैं, तो नंगी कितनी हसीन होंगी? लेकिन मुझे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था कि मैं उनके करीब जाऊँ।
मैं जब भी विक्रम के घर जाता, मेरी गन्दी नज़रें सुनिता आंटी के सेक्सी जिस्म को पूरा ऊपर से नीचे तक नापतीं। कभी उनकी बड़ी बड़ी चूचियों पर अटकतीं, तो कभी उनकी मटकती गांड पर। वो भी मुझे देखती थीं, लेकिन मुझे समझ नहीं आता था कि उनके दिल में क्या चल रहा है। मैं उनकी हरकतों से ये जानने की कोशिश करता कि क्या वो भी मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाना चाहती हैं या नहीं। मैं जानबूझकर उनके आस पास घूमता, कभी उनके हाथ छू लेता, तो कभी उनकी कमर से टकरा जाता। हर बार मैं ऐसा जताता जैसे ये गलती से हुआ। वो हल्के से मुस्कुरातीं और बात को टाल देतीं। दोस्त की माँ को चोदने की मेरी प्यास दिन-ब-दिन बढ़ रही थी। मैं सोचता, कब वो दिन आएगा जब मैं सुनिता आंटी को नंगा करके उनकी चुदाई करूँगा।
एक दिन मैं विक्रम के घर गया। बीच में उसे अपने किसी दोस्त का फोन आया, और वो मुझे आंटी के साथ घर पर छोड़कर चला गया। पहली बार मैं सुनिता आंटी के साथ अकेला था। मेरे दिल में आग लगी थी। मैं उनकी चूचियों को दबाने की सोच रहा था, लेकिन डर के मारे हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था। फिर मैं विक्रम के कमरे में गया और उसके कंप्यूटर पर बैठ गया। वहाँ मुझे एक ब्लू फिल्म मिली। सोचा, आंटी किचन में व्यस्त हैं, क्यों न थोड़ा मज़ा लिया जाए? मैंने दरवाज़ा बंद किया और फिल्म चला दी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने अपने लोअर के ऊपर से लंड को सहलाना शुरू किया।
अचानक दरवाज़ा खुला और सुनिता आंटी अंदर आईं, उनके हाथ में चाय का कप था। उन्होंने मुझे लंड सहलाते हुए देख लिया। वो पल भर को मुझे घूरती रहीं, फिर गुस्से का नाटक करते हुए चाय रखकर चली गईं। मुझे डर लगा कि कहीं वो विक्रम को ये सब न बता दें। मैं तुरंत किचन में उनके पास गया और माफी माँगने लगा। “आंटी, मैंने गलती कर दी। मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था।”
मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने शांत लहजे में कहा, “कोई बात नहीं, अर्जुन। इस उम्र में लड़के ऐसा करते हैं।” उनकी बात सुनकर मेरी हिम्मत बढ़ी। मैंने उनकी गांड को घूरना शुरू किया, और मेरा लंड फिर से खड़ा होने लगा। मैंने हिम्मत करके उनके करीब जाने की सोची, लेकिन डर के मारे रुक गया। मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मेरे लंड की ओर देखा और बोलीं, “यहाँ क्या कर रहे हो? हॉल में जाओ।”
मैं निराश होकर हॉल में चला गया। थोड़ी देर बाद आंटी चाय लेकर आईं। जब वो चाय का कप रखने के लिए झुकीं, तो उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया। उनकी गहरी दरार और भरी-भराई चूचियाँ मेरे सामने थीं। मेरी साँस रुक गई। मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मुझे देख लिया, लेकिन कुछ बोलीं नहीं। फिर वो मेरे सामने बैठ गईं।
दोस्त की कामुकता से भरी माँ को चुदाई के लिए गर्म करा
चाय पीते हुए मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने पूछा, “अर्जुन, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?” मैंने कहा, “नहीं, आंटी।” फिर हिम्मत करके बोला, “आंटी, आप बहुत खूबसूरत हैं। अगर मैं आपका पति होता, तो…” मैं रुक गया। मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने पूछा, “तो क्या?” मैंने कहा, “आपको बहुत प्यार करता, कभी उदास नहीं रहने देता।”
मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “तुझे मैं इतनी अच्छी लगती हूँ?” मैंने हाँ में सिर हिलाया और उनके पास जा बैठा। मैंने धीरे से उनकी जाँघ पर हाथ रखा। मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मेरा हाथ हटाते हुए कहा, “अर्जुन बेटा, मैं तुम्हारे दोस्त की माँ हूँ और तुम्हारी माँ की उम्र की हूँ। ये गलत है।” लेकिन मेरे अंदर की आग अब बेकाबू हो चुकी थी। मैंने उन्हें अपनी बाहों में खींच लिया और उनके लाल लाल होंठों पर किस करने लगा।
पहले तो मेरे दोस्त की कामुक माँ मेरी पकड़ से छुटने के लिए छटपटाईं, लेकिन फिर धीरे-धीरे वो भी मेरे चुंबन का जवाब देने लगीं। मैंने उस कामुकता से भरी औरत की सेक्सी कमर पर हाथ फेरा, उनकी बड़ी बड़ी चूचियों को ब्लाउज़ के ऊपर से ही जोर जोर से दबाया। उनकी साँसें तेज़ हो रही थीं। तभी बाहर विक्रम की गाड़ी की आवाज़ आई। हम दोनों तुरंत अलग हुए। आंटी की आँखों में निराशा साफ दिख रही थी। मुझे भी मजबूरन घर लौटना पड़ा।
एक हफ्ते बाद मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मुझे फोन पर बताया कि विक्रम और उनके पति दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं। मैं उस दिन का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा। आखिरकार वो दिन आया। मैं आंटी के घर पहुँचा। मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मुझे देखते ही दरवाज़ा बंद किया और मुझे अपनी बाहों में भर लिया। हम दोनों बेकाबू होकर एक-दूसरे को चूमने लगे। उनकी साँसें गर्म थीं, और वो हल्के-हल्के सिसक रही थीं, “उम्म… अह… अर्जुन…”
मैंने आंटी को पास के डाइनिंग टेबल पर लिटाया और उनकी कुर्ती उतार दी। उनकी काली ब्रा में कैद चूचियाँ मेरे सामने थीं। मैंने ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियों को ज़ोर-ज़ोर से दबाया। फिर मैंने उनके पेट को चूमा, उनकी नाभि में जीभ डालकर चाटने लगा। आंटी की सिसकियाँ तेज़ हो गईं, “हाय… अर्जुन… ये क्या कर रहे हो…”
मैंने जल्दी से अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड तनकर खड़ा था। मैंने आंटी की सलवार खींचकर उतार दी और उनकी पैंटी के ऊपर से उनकी चूत को चूमा। फिर उनकी पैंटी भी उतार दी। उनकी चूत पर हल्के-हल्के बाल थे, जो गीले हो चुके थे। मैं घुटनों के बल बैठा और उनकी चूत को जीभ से चाटने लगा। आंटी बेकाबू हो रही थीं, “अर्जुन… ये गंदी जगह… तू इतने मज़े से क्यों चाट रहा है?”
मैंने कहा, “आंटी, मुझे आपकी चूत बहुत पसंद है और अब मैं आपकी चूत की चुदाई मेरी जीभ से करने वाला हूँ..।” मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर डाल दी। आंटी चिल्ला उठीं, “हाय… मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं किया… आज पहली बार चूत चटवाने में इतना मज़ा आ रहा है…”
अवैध सेक्स संबंध के दौरान निषिद्ध सुख का चरम
मैंने अपना खड़ा लंड दोस्त की कामुक माँ के हवाले कर दिया। वो साली रांड मेरे खड़े लंड को अपने हाथों में लेकर बड़े प्यार से सहलाने लगीं और मेरी मुठ मारने लगी। मेरा ब्लोजॉब करवाने का मन होने लगा तो फिर मैंने उनसे मेरा खड़ा लंड अपने मुंह में लेकर चूसने को कहा, लेकिन वो लंड मुंह में लेकर चूसने से मना करने लगीं। मेरे बहुत ज़िद करने पर उन्होंने मेरे लंड को मुँह में लिया, लेकिन दो मिनट बाद बाहर निकाल लिया। “बस, अर्जुन, इससे ज़्यादा ब्लोजॉब नहीं कर पाऊँगी,” उन्होंने कहा। मैं समझ गया कि मेरे दोस्त की कामुक माँ ब्लोजॉब की आदी नहीं है इस लिए उन्हें इसमें आनंद प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
फिर मैंने उनकी जाँघें पकड़कर फैलाईं और अपने लंड को उनकी चूत के मुँह पर रखा। एक ज़ोरदार धक्के के साथ मेरा लंड उनकी चूत के अंदर उनकी बच्चेदानी तक चला गया। दर्द के मारे आंटी की चीख निकल गई, “उई माँ आह… अर्जुन बेटा…” मैंने पुरे जोश के साथ मेरे दोस्त की माँ को चोदना शुरू कर दिया। उनकी मोटी मोटी चूचियाँ मेरे हर धक्के के साथ उछल रही थीं। आंटी चुदते चुदते सिसक रही थीं, “हाय… एक साल बाद चूत में इतने कमाल के लंड का मज़ा मिला है…”
मैंने अपनी चुदाई करने की रफ्तार बढ़ा दी। दस मिनट तक उनकी चूत की चुदाई करने के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “आंटी, माल कहाँ निकालूँ?” उन्होंने कहा, “मेरी चूत में ही डाल दे… मुझे तेरा माल अपनी चूत में चाहिए…” मैंने दो ज़ोरदार धक्के मारे, और मेरे लंड से गरम-गरम माल उनकी चूत में गिरने लगा। मैंने उनकी चूत को अपने माल से भर दिया। फिर चुदाई करने के बाद मैं आंटी के ऊपर ही लेट गया।
थोड़ी देर बाद मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मुझे प्यार से उठाया और हम दोनों बाथरूम में स्नान करने के लिए चले गए। वहाँ हमने एक साथ नहाया। मैंने अपनी उंगलियों से उनकी चूत को साफ किया, और मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मेरे लंड को अपने हाथों से धोया। उस दिन मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने मुझे खाना खिलाया और रात को फिर उनकी चुदाई करने आने को कहा। अगले दो दिन तक मैंने अपना खड़ा लंड दोस्त की माँ के हवाले कर दिया और हमने जमकर चुदाई की। मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ ने खुशी-खुशी कहा, “अर्जुन, अब जब चाहे मेरे घर आकर मेरी चूत चोद सकता है।” अब जब भी मौका मिलता है, हम दोनों चुदाई का मज़ा लेते हैं। मेरे लिए ये एक नाजायज़ आकर्षण था, जो अब मेरी ज़िंदगी का हिस्सा बन गया है और मेरे लंड की जरुरत।
मैंने अपना खड़ा लंड दोस्त की माँ के हवाले कर दिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी में अर्जुन और सुनिता के बीच का निषिद्ध रिश्ता उनकी वासना, शर्म, और बेकाबू इच्छाओं के इर्द-गिर्द घूमता है। आखिरकार, दोनों अपनी इच्छाओं को पूरा करते हैं, और उनकी गुप्त मुलाकातें एक नई शुरुआत बन जाती हैं। मुझे उम्मीद है कि आपको ये कहानी पसंद आई। कृपया मुझे बताएँ कि आपको कहानी का कथानक, किरदार, और लहजा कैसा लगा। आपकी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण है।


