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दोस्त की माँ ने चुदवाने के लिए फोन करके उनके घर बुलाया

दोस्त की माँ ने चुदवाने के लिए फोन करके उनके घर बुलाया कामुकता भरी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- मेरा नाम विक्रम है, उम्र 22 साल, और मैं चंदनपुर, उत्तर प्रदेश के एक छोटे-से कस्बे में रहता हूँ। यह कहानी मेरी और मेरे दोस्त अर्जुन की माँ, शालिनी आंटी, के बीच की उस नाजायज़ आग की है, जो आठ महीने पहले भड़की थी। अर्जुन मेरा दोस्त है, जिससे मेरी मुलाकात हमारे मोहल्ले के मैदान में क्रिकेट खेलते वक्त हुई। शालिनी आंटी, उम्र करीब 40 साल, एक ऐसी औरत हैं जिनका हुस्न देखकर मेरे जैसे जवान लड़के का दिल धड़क उठे। उनकी फिगर, 36-30-38, मानो किसी नशीली मूर्ति की तरह तराशी गई थी। उनके पति, एक बैंक में मैनेजर, दिनभर घर से बाहर रहते हैं, और शालिनी आंटी की उदासी उनके चेहरे पर साफ दिखती थी। यह कहानी उस आकर्षण, शर्म, और बेकाबू जुनून की है, जो मुझे और शालिनी आंटी को एक-दूसरे के करीब ले आई।

मैं और अर्जुन अक्सर मैदान में क्रिकेट खेलने के बाद उसके घर चले जाते। पहली बार जब मैं उनके घर गया, शालिनी आंटी को देखकर मेरे होश उड़ गए। उनकी साड़ी उनके जिस्म को इस तरह लपेटे थी कि हर उभार मेरी आँखों को चूम रहा था। उनके बूब्स, मानो रसीले आम, साड़ी के ब्लाउज़ में कैद थे, और उनकी कमर इतनी पतली कि मेरे हाथ बेकाबू हो उठे। मैं जानता था कि अर्जुन मेरा दोस्त है, लेकिन शालिनी आंटी का जिस्म मेरे दिमाग में आग लगा रहा था। वो भी मुझे बार-बार देखतीं, उनकी आँखों में एक अजीब-सी चमक थी, जैसे वो मेरे मन की बात पढ़ रही हों।

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उस दिन अर्जुन ने मुझे अपने घर बुलाया। मैंने देखा कि शालिनी आंटी रसोई में काम कर रही थीं। उनकी साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था, और मैं उनकी गहरी नाभि और भारी बूब्स की झलक देखकर पागल हो रहा था। मैंने उनसे बात शुरू की, और पता चला कि उनके पति दिनभर बैंक में रहते हैं। अर्जुन और मैं छत पर खेलने गए, लेकिन मेरा मन वहाँ नहीं था। मैं बार-बार शालिनी आंटी के गोरे जिस्म, उनकी मटकती गांड, और उनके रसीले होंठों के बारे में सोच रहा था। उस रात, घर जाकर मैंने उनके बारे में सोचकर मुठ मारी, तब जाकर मेरे लंड को चैन मिला।

अब मैं हर रोज़ अर्जुन को उसके घर चलने के लिए उकसाता। मैं शालिनी आंटी को इम्प्रेस करने की कोशिश करता, कभी उनकी साड़ी की तारीफ करता, तो कभी उनके खाने की। उनकी नज़रें मुझे चुराकर देखतीं, लेकिन वो कुछ बोलती नहीं थीं। मैं उनकी गांड और बूब्स को घूरता, सोचता कि अगर ये कपड़े उतर जाएँ, तो उनका नंगा जिस्म कैसा होगा। मैं उनके करीब जाने की कोशिश करता, कभी गलती से उनका हाथ छू लेता, तो कभी उनके कंधे से टकरा जाता। वो हल्के से मुस्कुरातीं, लेकिन कुछ कहती नहीं। मेरी प्यास बढ़ती जा रही थी, और मैं सोचता था कि कब मैं उनकी चूत को छू पाऊँगा, कब उनकी चुदाई कर पाऊँगा।

एक गलती और अवैध सेक्स संबंध बनाने का नया मौका

एक दिन मैं मेरे दोस्त अर्जुन के घर गया, और बीच में उसे किसी दोस्त का फोन आया। वो मुझे अपनी माँ के साथ छोड़कर चला गया। मैं पहली बार मेरे दोस्त की माँ के साथ बिलकुल अकेला था और मुझे लगा की यही सही मौका है उसकी माँ की इज्जत लुटने का। मेरे दिल में आग लगी थी, लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी दोस्त की माँ की इज्जत लुटने की। मैं अर्जुन के कमरे में गया और उसके कंप्यूटर पर बैठ गया। दोस्त के कंप्यूटर में मुझे एक ब्लू फिल्म मिली। मैंने सोचा, आंटी रसोई में व्यस्त हैं, क्यों न देख लूँ। मैंने दरवाज़ा बंद किया और फिल्म चालू कर दी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैं अपनी पैंट के ऊपर से लंड सहलाने लगा। तभी अचानक शालिनी आंटी दरवाज़ा खोलकर अंदर आईं, उनके हाथ में गरमा गर्म समोसे थे। उन्होंने मुझे ब्लू फ़िल्में देखते हुए और लंड सहलाते हुए देख लिया। वो गुस्से में दिखीं, वो टेबल पर गरमा गर्म समोसे रखकर चली गईं।

मुझे डर लगा कि कहीं वो अर्जुन को न बता दें। मैं तुरंत रसोई में गया और दोस्त की माँ से माफी माँगने लगा। “आंटी, मैंने गलती कर दी। ऐसा नहीं करना चाहिए था,” मैंने कहा। आंटी ने नरम स्वर में जवाब दिया, “कोई बात नहीं, विक्रम। इस उम्र में लड़के ऐसा करते हैं, जवानी में पोर्न फ़िल्में देखकर मुठ मारना आम बात है।” उनकी बात सुनकर मेरी हिम्मत बढ़ी। मैं अब मेरे दोस्त की माँ की गांड को गन्दी नजरों से घूरने लगा, और मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया। मैंने उनके करीब जाकर उनकी गांड दबाने की कोशिश की, लेकिन डर के मारे रुक गया। आंटी ने कहा, “यहाँ क्या कर रहे हो? हॉल में जाओ।” मैं निराश होकर हॉल में चला गया।

दोस्त की माँ की साड़ी का पल्लू सरक गया मुझे उनका सामन दिख गया

थोड़ी देर बाद आंटी चाय लेकर आईं। जब वो कप रखने के लिए झुकीं, तो उनकी साड़ी का पल्लू सरक गया। उनके बूब्स की गहरी लकीर देखकर मेरे मुँह से सिसकारी निकल गई। वो मेरी नज़रों को समझ गईं। फिर वो मेरे सामने बैठ गईं। चाय पीते वक्त उन्होंने पूछा, “विक्रम, तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है?” मैंने कहा, “नहीं, आंटी। लेकिन आप बहुत खूबसूरत हैं। अगर मैं आपका पति होता, तो…” मैं रुक गया। आंटी ने पूछा, “क्या?” मैंने हिम्मत करके कहा, “आंटी, अगर मैं आपका पति होता, तो आपको इतना प्यार करता कि आप कुछ माँगतीं ही नहीं।”

आंटी ने उदास स्वर में कहा, “मेरे पति को मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं वो मेरे साथ सेक्स संबन्ध भी नहीं बनाते। वो कभी मेरी तारीफ नहीं करते।” मैं उनके करीब गया और उनकी जाँघ पर हाथ रख दिया। आंटी ने मेरा हाथ हटाया और बोलीं, “मैं तुम्हारे दोस्त की माँ हूँ। ये गलत है।” लेकिन मैं अब रुक नहीं सका। मैंने उन्हें अपनी बाहों में ले लिया और उनके होंठों पर Kiss करने लगा। आंटी ने पहले विरोध किया, लेकिन फिर वो भी मेरे Kiss का जवाब देने लगीं। मैंने उनके कमर को सहलाया, उनके बूब्स को ब्लाउज़ के ऊपर से दबाया। तभी अर्जुन की गाड़ी की आवाज़ आई, और हमें अलग होना पड़ा। आंटी की आँखों में निराशा साफ दिख रही थी।

एक हफ्ते बाद आंटी का फोन मेरे मोबाइल फोन पर आया और उन्होंने मुझे फोन पर बताया कि उनका बीटा अर्जुन और उनके पति दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं और इन दो दिनों में मैं तुम्हसे चुदवाना चाहती हूँ। मेरे दोस्त की माँ मेरे लंड से चुदवाना चाहती है यह बात जानकर मुझे बहुत ख़ुशी हुई, अब मैं उस दिन का इंतज़ार करने लगा जब मैं मेरे दोस्त की माँ को अपनी रंडी बनाकर चोदुंगा। जिस दिन वो गए, मैं आंटी के घर पहुँचा। आंटी ने मुझे देखते ही दरवाज़ा बंद कर लिया। मैंने उन्हें बाहों में भरा और Kiss करना शुरू कर दिया। आंटी भी मेरे होंठों को चूस रही थीं, उनकी सिसकारियाँ “उम्म… आह…” कमरे में गूँज रही थीं।

मैंने मेरे दोस्त की कामुकता से भरी माँ को चोदने के लिए किचन के पास डाइनिंग टेबल पर लिटाया और उनकी कुर्ती उतार दी। उनके बूब्स ब्रा में कैद थे, मैंने ब्रा के ऊपर से उन्हें दबाया, फिर उनकी नाभि को चूमा। मैंने उनकी सलवार उतारी और उनकी जाँघों को चाटने लगा। उनकी पैंटी गीली थी। मैंने पैंटी उतारी और उनकी चूत को देखा—हल्के बालों वाली, गुलाबी चूत मेरे सामने थी। मैं घुटनों पर बैठा और मेरे दोस्त की माँ की चूत को जीभ से चाटने लगा। आंटी बेकाबू हो रही थीं, बोलीं, “विक्रम, ये गंदी जगह है, तुम इतने मज़े से क्यों चाट रहे हो?” मैंने कहा, “आंटी, मुझे आपकी चूत बहुत पसंद है।” मैंने जीभ उनकी चूत के अंदर डाली, और वो ज़ोर से सिसकारने लगीं। “मेरे पति ने कभी ऐसा नहीं किया। आज पहली बार मेरी चूत को इतना मज़ा मिल रहा है,” उन्होंने कहा।

दोस्त की कमुटका से भरी माँ के साथ चुदाई की शुरुआत

मैंने अपनी पैंट उतारी और अब मेरा 7 इंच लम्बा लंड मेरे दोस्त की माँ के सामने था। उन्होंने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगीं। मैंने कहा, “आंटी, इसे मुँह में लो।” वो हिचकिचाईं, बोलीं, “मैं ऐसा नहीं कर सकती।” मेरे बार-बार कहने पर उन्होंने मेरा लंड दो मिनट तक चूसा, फिर बाहर निकाल लिया। मैंने उनकी जाँघें पकड़ीं, उनकी चूत पर लंड रखा, और एक धक्का मारा। आंटी की सिसकारी निकली, “आह… विक्रम!” मैंने उनकी चूत में लंड डालकर चुदाई शुरू कर दी। उनकी चूत गीली और गरम थी, मेरा लंड उसे चीर रहा था। आंटी की सिसकारियाँ “उम्म… आह… हाय… ओह…” गूँज रही थीं। उनके बूब्स मेरे हर धक्के के साथ हिल रहे थे।

मुझसे मेरे दोस्त की माँ बोलीं, “कई साल बाद आज मेरी बैचेन चूत में इतना मस्त लंड गया है बड़ा मजा आ रहा है चुदवाने में।” मैंने उनकी चुदाई तेज़ कर दी। दस मिनट तक उनकी चूत चोदने के बाद मेरा पानी निकलने वाला था। मैंने पूछा, “आंटी, पानी कहाँ निकालूँ?” उन्होंने कहा, “मेरी चूत में ही डाल दो। मैं तुम्हारा पानी अपनी चूत में चाहती हूँ।” मैंने दो ज़ोरदार धक्के मारे, और मेरा लंड उनकी चूत में पानी छोड़ने लगा। मैंने उनकी चूत को अपने माल से भर दिया। फिर मैं उनके ऊपर लेट गया, हम दोनों की साँसें तेज़ थीं।

आंटी ने मुझे प्यार से उठाया, और हम दोनों बाथरूम गए। वहाँ हमने एक-दूसरे को नहलाया। मैंने उनकी चूत को अपने हाथों से साफ किया, और उन्होंने मेरा लंड सहलाकर धोया। उस दिन आंटी ने मुझे खाना खिलाया और रात को फिर बुलाया। दो दिन तक हमने जमकर चुदाई की। आंटी ने कहा, “विक्रम बेटा, आज से मैं तेरी रंडी हूँ ठीक है??? और अब जब भी सेक्स करने का मन हो, आ जाना मुझे चोदने के लिए। मेरी चूत तुम्हारी है।” दोस्तों उस दिन के बाद से अब जब भी मौका मिलता है, हम दोनों चुदाई का मज़ा लेते हैं।


दोस्त की माँ ने चुदवाने के लिए फोन करके उनके घर बुलाया कामुकता भरी अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष:

Friend’s mother called me to her house to have sex lustful antarvasna Hindi sex story :- इस अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी में मैंने अपनी और शालिनी आंटी की उस नाजायज़ आग को बयाँ किया, जो दोस्ती की सीमाओं को तोड़कर जुनून की हद तक जा पहुँची। यह कहानी मेरे दिल की गहराइयों से निकली है, जिसमें शर्म, प्यास, और बेकाबू इच्छाओं का मिश्रण है। आंटी और मेरे बीच का रिश्ता अब भी चोरी-छिपे चल रहा है, लेकिन हर मुलाकात में वही आग भड़कती है। मुझे बताइए, आपको यह कहानी कैसी लगी? किरदारों, कहानी के मूड, और इसकी तीव्रता के बारे में आपकी राय क्या है? आपका जवाब मेरे लिए बहुत मायने रखता है।

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