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बेटे ने देखा अधेड़ माँ को डॉगी स्टाइल में चुदाई करवाते खंडहर में

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माँ का नाम सुधा था, उम्र 55 साल, चेहरे पर हल्की झुर्रियाँ और शरीर पर उम्र से लड़ता हुआ भारीपन। मुझे हमेशा से शक था कि वो रोज़ शाम को पूजा के बहाने कहीं और जाती है, मेरी दोस्तों की नज़रें भी उनके पीछे अजीब सी रहती थीं। मैं 26 साल का बेटा, दिनभर नौकरी करता, मगर मन में चल रही खटक ने मुझे एक दिन पीछा करने पर मजबूर कर दिया। उस शाम मैंने देखा कि माँ ने अपनी साड़ी के पल्लू से चेहरा ढका और कॉलोनी के पीछे बने सुनसान खंडहर की तरफ मुड़ गयीं।

मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था, मैंने 20 कदम की दूरी बनाए रखी और साँस रोककर उनका पीछा किया। खंडहर में घुसते ही माँ ने चारों तरफ नज़र दौड़ाई और सीधे एक टूटी दीवार के पीछे चली गयीं। मैंने एक बड़े से पत्थर की ओट ली और अपनी आँखों को यकीन दिलाने की कोशिश की कि मैं गलत हूँ। तभी वहाँ एक 21 साल का जवान लड़का दिखा, हाथ में मोबाइल और कमर पर पैंट का बटन खुला हुआ था।

बेटे ने देखा अपनी अधेड़ माँ को बिगड़ैल और आवारा लड़के से पैसे लेकर डॉगी स्टाइल में चुदाई करवाते खंडहर में
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उस जवान लड़के का नाम रोहन गुप्ता था, पूरी कॉलोनी उसे बिगड़ैल और आवारा समझती थी। उसने माँ को देखते ही मुस्कान दी और बोला, “आज तो 20 मिनट लेट हो सुधा आंटी, पैसे काटूंगा आज तुम्हारे।” यह सुनकर मेरी रूह काँप गयी, क्योंकि उस बिगड़ैल और आवारा लड़के की आवाज़ में ग्राहक वाला रौब था। माँ ने पल्लू सरकाकर हल्की शर्मीली हँसी के साथ कहा, “बस जरा रास्ते में भीड़ थी, आज तो तू मेरी पूरी रात ले ले बेटा।” मैंने अपनी उंगलियाँ मुट्ठी में भींच लीं और कलेजे पर पत्थर रखकर आगे देखता रहा।

रोहन ने झट से अपनी पैंट उतारी और उसका 7 इंच का तना हुआ लंड बाहर उछल पड़ा, जिसे देख माँ की आँखें चमक उठीं। मेरी माँ, जिन्हें मैंने कभी सिर झुकाए पूजा करते देखा था, वो उस लंड को पकड़ने के लिए आगे बढ़ीं। उसने तुरंत अपना हाथ पीछे किया और बोला, “पहले मेरे कपड़े उतार, फिर अपने भी, मुझे तेरी वो मोटी गांड देखनी है।” माँ बिना किसी झिझक के घुटनों पर बैठ गयीं और अपने सूट का सलवार खोलकर नीचे सरका दिया।

मैंने अपनी आँखें मसलीं, मगर वो कामुक दृश्य और साफ होता गया। माँ ने पहले रोहन की जांघों को चूमा, फिर उसके लंड के गोटे अपनी जीभ से सहलाने लगीं। रोहन ने एक हाथ से उनके जूड़े को पकड़ लिया और दूसरे से अपना लौड़ा माँ के होंठों पर रगड़ता हुआ बोला, “चूस इसे, जैसे पिछली बार चूसा था।” माँ ने तुरंत अपना मुँह खोलकर उसके पूरे खड़े लंड को अन्दर खींच लिया और मेरे सामने मेरी ही माँ एक रंडी की तरह ब्लोजॉब करने लगीं।

उस खंडहर में गूँजने वाली चूसने की गीली आवाज़ें मेरे कानों में सीसा भर रही थीं। माँ का गला बार-बार उस लंड की मोटाई से भर जाता और रोहन उनके बाल पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से मुखमैथुन (Oral Sex or Mouth Fucking) करवा रहा था। मेरी माँ की आँखों से पानी बह रहा था, मगर चेहरे पर एक अजीब सी खुशी और तृप्ति साफ नज़र आ रही थी। इसके बाद रोहन ने उन्हें ऊपर खींचा और एक झटके में उनका ब्लाउज फाड़ दिया, जिससे माँ के 38D साइज़ के भारी बोबे बाहर गिर पड़े।

रोहन ने दोनों हाथों से मेरी अधेड़ माँ की चूचियाँ दबोच लीं और उनके निप्पल नोचने लगा। माँ कराह उठीं और उसकी गर्दन पकड़कर बोलीं, “हाँ बेटा, और ज़ोर से काट, मुझे दर्द में ही मज़ा आता है।” उस जवान लड़के ने मेरी 55 साल की माँ को झुकाकर एक पुरानी चारपाई पर खड़ा कर दिया और पीछे से उनकी चूतड़ों को दबाने लगा। मैंने देखा कि उसने अपनी तीन उंगलियाँ माँ की भोसड़ी में एक साथ घुसा दीं और बोला, “आज तो तेरी चूत का रस पहले ही बह रहा है, बहुत प्यासी है क्या रंडी?”

मेरा खून खौल उठा, लेकिन पैर वहीं जमे रहे। रोहन ने माँ को घुटनों के बल झुका दिया और उनकी कमर पकड़कर कुत्ते जैसी पोजीशन (Doggy Sex Position) में खड़ा कर दिया। मेरी माँ ने खुद अपनी गांड ऊपर उठाई और एक हाथ पीछे ले जाकर अपनी रसदार चूत का छेद खोलकर दिखाया। रोहन ने कहा, “2 हज़ार रुपये दिए हैं, तो अब बिना हिचकिचाए अपनी बुर को मेरे लंड पर सरका।” माँ ने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर उसका मोटा लौड़ा पकड़ा और धीरे-धीरे अपनी टाइट चूत के अन्दर खिसकाने लगीं।

जैसे ही रोहन का लंड पूरी तरह माँ की फुद्दी में घुसा दोनों ने एक साथ गहरी आह भरी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी माँ इतनी ज़ोर से कराह सकती हैं, उनकी आवाज़ सुनसान खंडहर में गूँज रही थी। रोहन ने तुरंत अपनी रफ्तार पकड़ ली और माँ को डॉगी स्टाइल में बेरहमी से चोदना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ माँ की ढीली चूतड़ें हिलतीं और उनके बोबे आगे-पीछे झूलते, मानो पूरा मंज़र किसी वेश्या के कोठे का हो।

मेरी अधेड़ उम्र की माँ का चेहरा मेरी तरफ था और उनकी आँखें मज़े से बंद थीं, होंठों से बस अश्लील आवाज़ें निकल रही थीं। रोहन ने एक हाथ से माँ की कमर दबाई और दूसरे से उनकी गांड के छेद में अंगूठा घुसा दिया। मेरी माँ चीखीं, “हाँ, ऐसे ही चोद मुझे, मेरी भोसड़ी फाड़ दे बेटा।” यह सुनकर मेरे शरीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गयी, क्योंकि यह वही औरत थी जो मुझे संस्कार सिखाती थी। उसने अपनी कमर को और झुकाते हुए उसके हर धक्के को अपनी चूत में समेटना शुरू कर दिया।

रोहन ने तीन अलग-अलग डॉगी स्टाइल पोजीशन में माँ की चूत मारी, कभी खड़े-खड़े तो कभी एक पैर पत्थर पर रखवाकर। मेरी आँखों के सामने माँ के चूत का रस उनकी जाँघों तक बह आया और रोहन के अंडकोष उस रस से भीगते रहे। उस जवान लड़के ने मेरी नंगी माँ को घोड़ी बनाकर पीछे से इतना ज़ोर से धक्का दिया कि वो चारपाई से लगभग गिरते-गिरते बचीं। मगर फिर भी मेरी माँ ने अपनी गांड को और ऊपर उठाया और बोलीं, “मेरी गुदा में भी डाल, आज तुझे पूरी छूट है।”

बिगड़ैल और आवारा रोहन ने अपने इंडियन देसी लंड को मेरी अधेड़ माँ की चूत से निकाला और उसके चिपचिपे माल को उनकी गांड के छेद पर रगड़ दिया। मेरी माँ ने अपनी साँस रोकी और जैसे ही उस जवान लड़के ने अपना लौड़ा मेरी माँ की गांड में घुसाया वो दर्द से कराह उठीं। मगर एक पल में ही उन्होंने खुद को ढीला किया और वो भी इस कदर हिलने लगीं जैसे गुदा सेक्स उनका रोज़ का काम हो। मैंने अपनी मुट्ठियाँ इतनी कस लीं कि नाखून हथेलियों में धँस गए, मगर आँखें हटाने की हिम्मत नहीं हुई।

करीब 45 मिनट तक चली इस बेहिसाब चुदाई में रोहन ने मेरी कामुकता से भरी रंडी माँ को हर संभव तरीके से चोदा। उसने माँ को लिटाकर उनकी टाँगें कंधों पर रखीं और आखिरी बार उनकी टाइट चूत में अपना लंड पेलना शुरू किया। मेरी माँ की साँसें तेज़ हो गयीं और उनके चेहरे पर एक अनियंत्रित मस्ती छा गयी। अचानक रोहन ने दहाड़ मारी और अपना पूरा वीर्य माँ की चूत के अन्दर उड़ेल दिया। मैंने देखा कि माँ ने अपनी टाँगें रोहन की कमर पर कस लीं ताकि उसका एक-एक बूँद शुक्राणु उनकी कोख में समा जाए।

उसके बाद रोहन ने मेरी अधेड़ उम्र की माँ के चेहरे पर 2 हज़ार रुपये के नोट फेंके और बोला, “कल फिर आना, मुझे तेरी बूढ़ी चूत का रस बहुत पसंद है।” मेरी माँ ने वो नोट उठाकर अपनी ब्लाउज में छिपाए और उसके गाल पर हाथ फेरते हुए बोलीं, “जरूर आऊँगी, अब तो तू ही मेरा असली मर्द है।” मैं जड़ होकर वहीं खड़ा रहा, उस रंडीबाज लड़के और अपनी रंडी माँ को जाते हुए देखता रहा। मेरे आँसू सूख चुके थे और मन में बस एक ही सवाल था कि क्या मुझे अपनी माँ से नफरत करनी चाहिए या इस सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए।

उस रात के बाद मैंने मेरी रंडी माँ से नज़रें नहीं मिलाईं, मगर उनके चेहरे पर कभी कोई अपराधबोध नहीं दिखा। वो सुबह उठकर मेरे लिए खाना बनाती रहीं और शाम को फिर उसी खंडहर की तरफ निकल जातीं। मैं चुप रहा, क्योंकि यह सच मेरी हिम्मत से बाहर था कि मेरी 55 साल की माँ एक 21 साल के लौंडे की धंधेवाली बन चुकी थी। आज भी जब बारिश की रातों में खंडहर से आवाज़ें आती हैं, तो मेरा दिल बैठ जाता है और मैं अपनी ही माँ की असली औकात के बारे में सोचकर काँप उठता हूँ।

अब मैं बस आप सभी पाठकों से यही पूछना चाहता हूँ कि आप मेरी जगह होते तो क्या करते? क्या मुझे मेरी रंडी माँ को पैसे लेकर चुदाई करवाने से रोकना चाहिए था या उनकी इस छिनाल ज़िन्दगी को अनदेखा कर देना सही था? कृपया अपनी राय और टिप्पणियाँ ज़रूर दें, ताकि मैं समझ सकूँ कि इस गंदी सच्चाई के साथ अब मुझे जीना कैसे है।

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