HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesमाँ बेटा सेक्स स्टोरी: विधवा माँ की चूत में बेटे का लंड घुसा

माँ बेटा सेक्स स्टोरी: विधवा माँ की चूत में बेटे का लंड घुसा

विधवा माँ की चूत में बेटे का लंड घुसा माँ बेटा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश :- यह एक गर्मागर्म माँ बेटा चुदाई की कहानी है जिसमें 20 साल का बेटा राहुल अपनी 42 साल की सेक्सी विधवा माँ सुनीता की प्यास बुझाता है। पापा की मौत के बाद अकेली माँ की वासना जगती है और बेटा छुपकर उसे मुठ मारते देखता है। एक रात सब कुछ बदल जाता है जब माँ उसे बुलाती है और दोनों taboo incest सेक्स में डूब जाते हैं। बड़े मम्मे दबाना, चूत चाटना, लंड चूसना और जोरदार चुदाई से भरी यह अन्तर्वासना स्टोरी आपको गरम कर देगी।


Vidhva maa ki chut mein bete ka lund ghusa maa beta antarvasna hindi sex story :- मैं राहुल हूं, 20 साल का जवान लड़का। मेरी माँ सुनीता 42 साल की हैं, लेकिन उनका जिस्म ऐसा कि कोई 35 की लगे। पापा की मौत हो गई थी 2 साल पहले, तब से हम दोनों अकेले रहते हैं। माँ के बड़े-बड़े मम्मे, पतली कमर और गोल-गोल गांड देखकर मेरा लंड हमेशा खड़ा हो जाता था। क्योंकि मैं उन्हें वासना की नजर से देखता था, इसलिए मन में गंदे ख्याल आते थे। माँ भी अकेली थीं, रात को कभी-कभी खुद को सहलातीं। मैं छुपकर देखता और मुठ मारता। यह taboo था, इसलिए रोमांच दोगुना हो जाता था। हमारा रिश्ता सामान्य था, लेकिन अंदर से दोनों की प्यास बढ़ रही थी।

विधवा माँ की चूत में बेटे का लंड घुसा माँ बेटा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी

विधवा माँ की चूत में बेटे का लंड घुसा माँ बेटा अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी The son inserted his penis into his widowed mother's vagina. Mother and son incest Hindi sex story Vidhva maa ki chut mein bete ka lund ghusa maa beta antarvasna hindi sex story
Vidhva maa ki chut mein bete ka lund ghusa maa beta antarvasna hindi sex story

एक शाम मैं घर लौटा तो माँ किचन में थीं। उनकी साड़ी कमर तक सिमटी हुई थी, गांड की शक्ल साफ दिख रही थी। मैंने चुपके से देखा और मन ही मन सोचा, कितनी रसीली है माँ की गांड। रात को खाना खाकर मैं अपने कमरे में चला गया। लेकिन नींद नहीं आ रही थी। अचानक माँ के कमरे से हल्की सिसकारियां आईं। मैं उठा और दरवाजे के पास गया। दरवाजा थोड़ा खुला था, इसलिए मैंने झांका। माँ बिस्तर पर नंगी लेटी थीं, एक हाथ से अपने बड़े मम्मे दबा रही थीं और दूसरी उंगली चूत में डाल रही थीं। उनकी आंखें बंद थीं, मुंह से कराहट निकल रही थी। क्योंकि सालों से चुदाई नहीं हुई थी, इसलिए उनकी प्यास साफ झलक रही थी। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।

मैं वहीं खड़ा देखता रहा। माँ की चूत गीली हो रही थी, उंगली तेजी से अंदर-बाहर हो रही थी। उनका जिस्म पसीने से चमक रहा था, मम्मे उछल रहे थे। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और मुठ मारने लगा। क्योंकि यह दृश्य इतना गरम था, इसलिए मेरा मन कर रहा था कि अंदर जाकर माँ को चोद डालूं। लेकिन डर था। तभी माँ की कराहट तेज हुई, वो झड़ने वाली थीं। मैं भी तेजी से मुठ मार रहा था। अचानक माँ की नजर दरवाजे पर पड़ी। उन्होंने मुझे देख लिया। मैं डर गया, लेकिन माँ रुकी नहीं। बल्कि मुस्कुराईं और बोलीं, “आ जा बेटा, अंदर आ।”

मैं हकलाते हुए अंदर गया। माँ ने मुझे बिस्तर पर खींच लिया। उनकी आंखों में वासना थी। क्योंकि दोनों की प्यास सालों से दबी थी, इसलिए अब बहकाव आने वाला था। माँ ने मुझे गले लगाया, उनके नंगे मम्मे मेरी छाती से दबे। मैंने भी उन्हें कसकर पकड़ा। विधवा माँ की सांसें तेज थीं, उनका सेक्सी जिस्म गरम। उन्होंने मेरे होंठों पर किस किया। मैंने भी जवाब दिया। हमारी जीभें आपस में लिपट गईं। क्योंकि यह माँ-बेटा का taboo किस था, इसलिए रोमांच अलग स्तर पर था। मेरा लंड माँ की जांघों से टकरा रहा था।

माँ ने मेरे कपड़े उतार दिए। मेरा लंड देखकर बोलीं, “वाह बेटा, कितना बड़ा और मोटा है तेरा लंड। तेरे पापा से भी बड़ा।” मैं शर्मा गया, लेकिन खुश भी हुआ। माँ ने लंड पकड़ा और सहलाने लगीं। मैंने उनके मम्मे दबाए, वो कराहीं। क्योंकि मम्मे सालों से नहीं दबे थे, इसलिए बहुत संवेदनशील थे। मैंने निप्पल चूसे, माँ सिसकारीं। फिर माँ ने लंड मुंह में लिया और चूसने लगीं। उनका मुंह गरम और गीला था, मैं मदहोश हो गया।

बेटे ने विधवा माँ की टांगें फैलाईं और चूत चाटकर स्वाद चखा

अब मैंने माँ को लिटाया और उनकी टांगें फैलाईं। माँ की चूत साफ और गुलाबी थी, झांटें ट्रिम की हुईं। मैंने चूत पर किस किया, माँ उछलीं। क्योंकि कोई सालों से नहीं चाटा था, इसलिए वो बहुत उत्तेजित थीं। मैंने जीभ से चूत चाटी, नमकीन स्वाद आया। माँ की चूत से रस बह रहा था। मैंने क्लिट चूसी, उंगली अंदर डाली। माँ कमर उछाल रही थीं, बोलीं, “आह बेटा, कितना अच्छा लग रहा है। चाट अपनी माँ की चूत।”

मैं तेजी से चाटता रहा। माँ की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। क्योंकि भावनाएं जुड़ी थीं, इसलिए यह सिर्फ सेक्स नहीं, प्यार भी था। माँ झड़ गईं, उनका रस मेरे मुंह में आया। मैंने सब पी लिया। माँ खुश थीं, मुझे गले लगाया। अब बारी मेरी थी। माँ ने फिर लंड चूसा, गले तक लिया। मैं कराह रहा था। क्योंकि माँ का मुंह जादू कर रहा था, इसलिए मैं जल्दी झड़ने वाला था। लेकिन माँ रुकीं और बोलीं, “अब घुसा बेटा, माँ की चूत में अपना लंड।”

मैं ऊपर आया, लंड चूत पर रखा। माँ बोलीं, “धीरे बेटा, माँ की चूत तंग हो गई है सालों से।” मैंने धीरे दबाया, सुपारा अंदर गया। माँ दर्द से कराहीं, लेकिन बोलीं, “और डाल।” मैंने जोर लगाया, आधा गया। माँ की चूत बहुत टाइट थी। फिर एक झटका, पूरा लंड अंदर। माँ चीखीं, “आह्ह… मार डाला बेटा।” लेकिन खुशी से। हम रुके, किस किए। क्योंकि अब हम एक हो चुके थे, इसलिए भावनाएं उफान पर थीं।

फिर चुदाई शुरू हुई। पहले धीरे-धीरे, माँ कमर हिला रही थीं। मैं उनके मम्मे दबा रहा था। माँ बोलीं, “चोद मुझे बेटा, अपनी माँ को रंडी बनाकर बहुत बुरी तरह चोद।” मैं तेज हुआ। अब चुदाई के दौरान मेरा लंड मेरी नंगी माँ की चूत में जोर-जोर से धक्के मार रहा था। माँ की कराहटें, “आह… ओह… चोद… और तेज…” कमरे में आवाजें गूंज रही थीं। क्योंकि taboo था, इसलिए मजा दोगुना। हम माँ बेटे किसी प्रेमी जोड़े के जैसे जंगली किस कर रहे थे, पसीना बह रहा था।

माँ ने कमर उछालकर चुदाई के दौरान बेटे का साथ दिया

माँ अब पूरी तरह बहक चुकी थीं। वो कमर उछालकर मेरा साथ दे रही थीं। उनकी चूत लंड को जकड़ रही थी। मैं जोर-जोर से पेल रहा था। माँ बोलीं, “हां बेटा, ऐसे ही चोद अपनी रंडी माँ को।” उनकी गंदी बातें सुनकर मैं और उत्तेजित हुआ। क्योंकि हम माँ-बेटा थे, इसलिए इमोशन बहुत गहरे थे। यह सिर्फ चुदाई नहीं, सालों की प्यास बुझाना था।

हम पोजीशन बदली। माँ ऊपर आईं, लंड पर बैठ गईं। उनके मम्मे उछल रहे थे। वो खुद ऊपर-नीचे हो रही थीं। मैं नीचे से धक्के मार रहा था। माँ की गांड मेरे हाथ में थी, मैं दबा रहा था। फिर डॉगी स्टाइल। माँ घोड़ी बनीं, मैं पीछे से पेला। उनकी गांड हिल रही थी, आवाजें पच-पच हो रही थीं। माँ कराह रही थीं, “चोद… गांड मार… नहीं चूत ही ठीक है।”

हम दोनों झड़ने वाले थे। मैंने स्पीड बढ़ाई। माँ बोलीं, “अंदर झाड़ बेटा, माँ की चूत भर दे।” मैंने जोर का झटका दिया और झड़ गया। माँ भी साथ में झड़ीं। हम लिपटकर गिर पड़े। पसीने से तर, सांसें तेज। माँ ने मुझे किस किया, बोलीं, “थैंक यू बेटा, कितने साल बाद सुकून मिला।”

हम नहाए, फिर लिपटकर सो गए। सुबह उठे तो माँ शर्मा रही थीं, लेकिन खुश। हमने फिर किस किया। क्योंकि अब हमारा रिश्ता बदल चुका था, इसलिए दिन में भी मौका मिलता तो छूते-छेड़ते। माँ की वासना जग चुकी थी, मेरा लंड हमेशा तैयार।

रात भर माँ को रंडी बनाकर चोदा, सुबह फिर से चुदाई शुरू

अगली रात फिर वही। माँ ने खुद मुझे बुलाया। इस बार वो और बिंदास थीं। हमने 69 सेक्स पोजीशन में मुखमैथुन किया। मैं चूत चाट रहा था, माँ किसी रंडी के जैसे लंड चूस रही थीं। उनका रस मीठा लग रहा था। क्योंकि प्यार था, इसलिए मजा अलग। फिर माँ ने लंड पर क्रीम लगाकर चूसा। मैंने उनके मम्मों पर तेल मला और मसला। माँ कराह रही थीं।

फिर चुदाई। इस बार माँ ने कहा, “आज गांड मार बेटा।” लेकिन मैंने मना किया, बोला पहले चूत की आदत डालो। माँ हंसीं। हमने मिशनरी में शुरू किया। लंड आसानी से घुस गया। माँ की चूत अब ढीली हो रही थी। मैं तेज पेल रहा था। माँ की टांगें मेरे कंधे पर। गहराई तक जा रहा था।

माँ बोलीं, “तेरा लंड कमाल का है बेटा। रोज चोदना पड़ेगा अब तुझे मेरी चूत और गांड को।” मैंने हां कहा। फिर सेक्स करते करते हम माँ और बेटे दोनों ही एक साथ झड़े, फिर चुदाई ख़त्म करने के बाद हम दोनों नंगे ही लिपट कर सो गए। दिन में भी जब चुदाई करने का सही मौका मिलता, किचन में माँ को पीछे से पकड़ता, मम्मे दबाता। माँ मुस्कुरातीं। क्योंकि हमारा सीक्रेट था, इसलिए रोमांच बना रहता।

एक दिन मेरी विधवा माँ ने अपने सेक्सी जिस्म पर एक बिलकुल नई लिंगरी पहनी। लाल रंग वाली, बिलकुल नेट की जैसे ट्रांसपेरेंट। मैं मेरी माँ का यह सेक्सी रूप एक टक देखता रह गया। माँ ने स्ट्रिपटीज किया। फिर हम बिस्तर पर चुदाई करने के लिए पहुँच गए। इस बार हम माँ और बेटे की लंबी चुदाई चली। चुदाई के करीब 3 जंगली राउंड। माँ चुदते चुदते बुरी तरह थक गईं, लेकिन वो मेरे लंड से अपनी अन्तर्वासना शांत करवाकर बहुत खुश थी। हम बातें करते, प्यार करते।

चूत की चुदाई करने के बाद विधवा माँ की गांड मारने की बारी आई

कई दिनों बाद माँ ने कहा, “बेटा, अब गांड ट्राई कर।” विधवा माँ की गांड चुदाई का ऑफर प्राप्त करके मैं बहुत ही ज्यादा खुश हुआ। हमने तेल लगाया। माँ घोड़ी बनीं। मैंने धीरे सुपारा डाला। माँ दर्द से चीखीं। लेकिन बोलीं, “रुक मत।” आधा गया, फिर पूरा। माँ की गांड टाइट थी। मैं धीरे चोदा। माँ को दर्द के साथ मजा आने लगा।

फिर स्पीड बढ़ी। गांड मारने का मजा अलग था। माँ कराह रही थीं, “आह… मार डाला… लेकिन अच्छा लग रहा।” मैं झड़ा अंदर। माँ भी उंगली से चूत रगड़कर झड़ीं। हम खुश थे। अब हम हर तरह सेक्स करते। ओरल, एनल, सब। माँ की सेहत अच्छी हुई, चेहरे पर निखार आया। क्योंकि सेक्स रेगुलर था, इसलिए दोनों संतुष्ट। हमारा रिश्ता गहरा हो गया। बाहर सामान्य, घर में lovers। एक बार हमने रोल प्ले किया। माँ रंडी बनीं, मैं ग्राहक। माँ ने गंदी बातें की, मजा आया। फिर नॉर्मल। हमारी जिंदगी सेक्स से भर गई।

महीनों बीत गए। हम रोज चुदाई करते। कभी सुबह, कभी रात। माँ ने नई-नई पोजीशन सीखी। हम वीडियो देखते और ट्राई करते। मेरी विधवा माँ माँ का जिस्म और भी ज्यादा सेक्सी हो गया है मेरे साथ अवैध सेक्स संबंध बनाने के बाद से। मैं उनका दीवाना। हर बार चुदवाने के बाद मेरी विधवा माँ बच्चा नहीं ठहरने की पिल्स लेतीं। इस वजह से हम बच्चा पैदा हो जाने के डर से बिलकुल फ्री थे। कभी बाहर घूमने जाते, होटल में चुदाई करते । अब हम माँ बेटे के जीवन में रोमांच कूट कूट कर भर चूका था। माँ बोलीं, “बेटा, तूने मुझ विधवा औरत को एक नहीं जिंदगी दी।” मैंने कहा, “माँ, तू तो अब मेरी रंडी है।” हम लिपटते। हम माँ और बेटे का अवैध सेक्स संबंध आज भी जारी है। रोज नया मजा। taboo लेकिन प्यार भरा।


अन्तर्वासना हिंदी 18+ XXX सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Vidhva maa ki chut mein bete ka lund ghusa maa beta antarvasna hindi sex story :- इस माँ बेटा सेक्स स्टोरी में हमने देखा कि कैसे अकेलापन और वासना दो लोगों को करीब लाती है। राहुल और सुनीता का रिश्ता taboo था, लेकिन दोनों ने प्यार और संतुष्टि पाई। नैतिक रूप से गलत लग सकता है, लेकिन उनकी जिंदगी खुशहाल हो गई। भावनात्मक और शारीरिक प्यास बुझी। क्या आपको यह माँ बेटे की अन्तर्वासना हिंदी चुदाई स्टोरी पसंद आई? कमेंट करके बताएं, अपनी राय दें या अपनी फैंटसी शेयर करें। अगली स्टोरी के लिए सुझाव भी दें!

RELATED ARTICLES

You Must Watch