HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesपत्नी के सामने सास की बड़ी चूचियाँ चूसकर चुदाई का आनंद लिया

पत्नी के सामने सास की बड़ी चूचियाँ चूसकर चुदाई का आनंद लिया

पत्नी के सामने सास की बड़ी चूचियाँ चूसकर चुदाई का आनंद लिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का सारांश :- यह कहानी एक युवा दामाद की है जो अपनी खूबसूरत और विधवा सास के प्रति गहरा कामुक आकर्षण महसूस करता है। उसकी पत्नी उनकी यह इच्छा समझ जाती है और अपनी माँ की अकेलेपन को देखते हुए एक अनोखा फैसला लेती है। घरेलू माहौल में धीरे-धीरे बढ़ते तनाव से शुरू होकर यह संबंध शारीरिक और भावनात्मक संतुष्टि तक पहुँचता है।

कहानी में कामुकता की गहराई, आंतरिक संघर्ष और पारिवारिक रिश्तों की नई परिभाषा दिखाई गई है। पात्रों की भावनाएँ, स्पर्श की उत्तेजना और निषिद्ध इच्छाओं की पूर्ति इसे रोचक बनाती है। अंत में सभी को एक नई खुशी और निकटता मिलती है।


Hindi Threesome Sex Story – Patni ke saamne saas ki badi chuchiyan chuskar chudai ka anand liya :- मेरा नाम विक्रम है। मैं एक साधारण नौकरीपेशा युवक हूँ, उम्र तीस वर्ष। दो साल पहले नेहा से शादी हुई थी। नेहा बहुत प्यारी और समझदार है, लेकिन उसकी माँ मालती देवी के सामने मैं हमेशा थोड़ा असहज हो जाता था। मालती जी पचपन वर्ष की हैं, विधवा हैं, लेकिन उनकी काया इतनी आकर्षक है कि कोई भी पुरुष एक बार देखे तो नजरें नहीं हटा पाए। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ, चौड़े कुल्हे और चूतड़ देखकर मेरा लंड हमेशा तन जाता था। घर में साड़ी पहनकर घूमतीं तो उनकी गांड की लहराती चाल मेरे मन में हवस जगा देती थी। मैं सोचता रहता था कि इतनी रसदार औरत अकेली कैसे रहती होगी।

फ्री पढ़ें पत्नी के सामने सास की बड़ी चूचियाँ चूसकर चुदाई का आनंद लिया अन्तर्वासना हिंदी थ्रीसम सेक्स कहानी

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Hindi Threesome Sex Story – Patni ke saamne saas ki badi chuchiyan chuskar chudai ka anand liya

नेहा और मैं मुंबई में एक छोटे से फ्लैट में रहते थे। मालती जी गाँव से कभी-कभी आया करती थीं। इस बार वे एक महीने के लिए आई थीं। नेहा ऑफिस जाती और मैं घर से काम करता। दिन भर मालती जी के साथ अकेला रहता तो मेरी नजरें बार-बार उनकी चूचियों पर ठहर जातीं। वे जब झुककर झाड़ू लगातीं तो उनकी गहरी क्लीवेज दिखती और मैं हस्तमैथुन करने चला जाता। रात में नेहा से चुदाई करता तो दिमाग में मालती जी की चूत का ख्याल आता। नेहा को शक हो गया था। एक रात उसने पूछा, “विक्रम, तुम मम्मी को इतना क्यों घूरते हो?” मैं शर्मा गया।

नेहा हँस पड़ी। उसने कहा, “मुझे पता है तुम्हें मम्मी पसंद हैं। उनकी उम्र में भी कितनी सेक्सी हैं ना?” मैं हैरान रह गया। नेहा ने आगे कहा, “मम्मी बहुत अकेली हैं। पापा के जाने के बाद किसी ने उन्हें छुआ तक नहीं। अगर तुम चाहो तो मैं कोई आपत्ति नहीं करूँगी।” मैंने सोचा मजाक कर रही है, लेकिन उसकी आँखें गंभीर थीं। उसने कहा, “मैं चाहती हूँ मम्मी भी खुश रहें। तुम उन्हें संतुष्ट कर सकते हो।” मेरे लंड में सनसनी दौड़ गई। नेहा ने योजना बनाई कि वह दो दिन के लिए अपनी सहेली के यहाँ जाएगी और हम दोनों को अकेला छोड़ देगी।

नेहा चली गई। घर में सिर्फ मैं और मालती जी थे। शाम को मैंने खाना बनाया। मालती जी साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थीं। खाना खाते वक्त मेरी नजरें उनकी चूचियों पर थीं। वे शर्मा रही थीं। खाना खत्म होने के बाद वे बर्तन धोने लगीं। मैं पीछे से गया और धीरे से उनकी कमर पर हाथ रख दिया। वे चौंक गईं, लेकिन रुकी नहीं। मैंने कान में फुसफुसाया, “मालती जी, आप बहुत खूबसूरत हैं।” वे हल्के से मुस्कुराईं। मैंने उन्हें पीछे से गले लगा लिया। मेरी तनी हुई लंड उनकी गांड से टकरा रही थी। वे सिसकारीं, “विक्रम… ये क्या कर रहे हो…”

सास की गांड से लंड रगड़कर पहली हवस जगाना

मैंने मालती जी को घुमाया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। वे पहले तो हिचकिचाईं, लेकिन फिर जोश में आ गईं। उनका मुंह गरम था। मैंने उनकी जीभ चूसी। मेरे हाथ उनकी चूचियों पर गए। इतनी बड़ी और मुलायम चूचियाँ मैंने पहले कभी नहीं छुई थीं। मैंने ब्लाउज के ऊपर से ही दबाया। वे कराह रही थीं, “आह… विक्रम… कितने दिन बाद किसी ने छुआ है…” मैंने उनकी साड़ी खोल दी। पेटीकोट के अंदर हाथ डाला तो उनकी चूत गीली हो चुकी थी। झांटों वाली रसदार चूत थी। मैंने उंगली डाली तो वे काँप उठीं।

हम बेडरूम में पहुँचे। मैंने मालती जी को बिस्तर पर लिटाया और उनके ब्लाउज के बटन खोले। ब्रा में कैद बड़ी-बड़ी चूचियाँ बाहर आईं। गुलाबी निप्पल तने हुए थे। मैंने एक निप्पल मुंह में लिया और चूसने लगा। वे चीख रही थीं, “चूसो… जोर से चूसो मेरे बोबे…” मैं दूसरी चूची मसल रहा था। मेरी लंड पैंट में फँसी थी। मालती जी ने मेरी पैंट उतारी और मोटा लौड़ा देखकर हैरान हो गईं। “इतना बड़ा लंड… नेहा खुशकिस्मत है।” उन्होंने लंड पकड़ा और सहलाने लगीं।

मैंने मालती जी का पेटीकोट उतारा। वे पूरी नंगी थीं। उनकी बालों वाली चूत से रस टपक रहा था। मैं नीचे झुका और चूत चाटने लगा। जीभ से भगनासा को रगड़ा। वे पागल हो रही थीं, “चाटो… मेरी चूत चाटो… कितने साल बाद कोई चाट रहा है…” मैंने जीभ अंदर डाली और रस पीता रहा। वे मेरे सिर को दबा रही थीं। उनकी सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं। मैंने दो उंगलियाँ चूत में डालीं और चोदने लगा। वे झड़ने वाली थीं। अचानक उनका शरीर काँपा और चूत से रस की बौछार निकली।

मालती जी अब मेरे लंड की बारी थी। उन्होंने मुझे लिटाया और लंड मुंह में लिया। गर्म मुंह में लंड घुसा तो मजा आ गया। वे लंड चूसने में माहिर थीं। सुपाड़े को जीभ से चाट रही थीं, गोटों को मसल रही थीं। मैं कराह रहा था, “चूसो मालती जी… मेरा लंड चूसो…” वे गले तक लंड ले रही थीं। मुंह चुदाई का मजा कुछ और था। मैंने उनके मुंह में ही झड़ने का मन बनाया, लेकिन रुक गया। मैं चाहता था उनकी चूत और गांड दोनों मारूँ।

सास की रसदार चूत में पहली बार लंड घुसाना

मैंने मालती जी को घोड़ी बनने को कहा। वे घुटनों के बल हो गईं। उनकी बड़ी गांड ऊपर थी। गांड का छेद साफ दिख रहा था। मैंने पहले गांड चाटी। जीभ से छेद को चाटा तो वे सिहर उठीं। फिर थूक लगाकर उंगली डाली। वे चिल्लाईं, “आह… गांड में उंगली… मजा आ रहा है…” मैंने दो उंगलियाँ डालीं और गांड चौड़ा करने लगा। फिर लंड गांड के छेद पर रखा। धीरे-धीरे घुसाया। टाइट गांड थी, लेकिन गीली होने से फिसला। आधा लंड अंदर गया तो वे चीखीं, “मार दो… गांड मारो मेरी…”

मैंने मेरी घोड़ी बनी हुई सास की कमर पकड़ी और पूरा लंड गांड में उतार दिया। फच-फच आवाज शुरू हो गई। मैं जोर-जोर से मेरा मोटा लंड मेरी सास की टाइट गांड के अंदर ठोक रहा था। उनकी गांड की चुदाई करते हुए चूचियाँ मसल रहा था। वे रंडी की तरह चिल्ला रही थीं, “चोदो… गांड फाड़ दो… मैं तुम्हारी रंडी हूँ…” मैंने गांड मारने की स्पीड बढ़ाई। मेरे लंड के निचे लटकी अंडकोष की थैली उनकी चूत से टकरा रही थी। दस मिनट गांड मारने के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने लंड निकाला और उनकी गांड पर गरम वीर्य गिरा दिया। चिपचिपा माल उनकी गांड पर फैल गया।

मालती जी पलटीं और मुझे चूमने लगीं। वे बोलीं, “अब मेरी चूत की बारी है।” मैंने उन्हें लिटाया और टाँगें फैलाईं। उनकी बालों वाली चूत पूरी गीली थी। मैंने लंड सुपाड़े से चूत के होंठों पर रगड़ा। वे बेसब्री से कह रही थीं, “डालो… लंड डालो मेरी भोसड़ी में…” मैंने एक झटके में पूरा लंड चूत में घुसा दिया। टाइट चूत थी, लेकिन रसदार होने से आसानी से घुस गया। मैं चोदने लगा। लंबे-लंबे धक्के मार रहा था। उनकी चूचियाँ उछल रही थीं।

चुदाई की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं। फच-फच… थप-थप… मैं उनकी निप्पल चूस रहा था और चोद रहा था। वे चीख रही थीं, “चोदो… जोर से चोदो… मैं सेक्स की दीवानी हूँ…” मैंने स्पीड बढ़ाई। उनकी चूत लंड को निचोड़ रही थी। वे दो बार झड़ चुकी थीं। मैं भी अब नहीं रुक सका। मैंने चूत में ही माल छोड़ दिया। गरम वीर्य उनकी कोख में भर गया। हम दोनों पसीने से तर थे। मालती जी मेरे सीने पर सिर रखकर लेट गईं।

पत्नी की वापसी और तीन लोगों की सामूहिक चुदाई

अगले दिन सुबह मेरी विधवा सास मालती जी ने मुझे ब्लोजॉब देकर जगाया। उनका मुंह लंड पर था। मैंने फिर उनकी चूत और गांड मारी। दो दिन तक हम लगातार चुदाई करते रहे। नेहा जब वापस आई तो हम दोनों शर्मा रहे थे। लेकिन नेहा मुस्कुरा रही थी। उसने कहा, “मम्मी, तुम्हारी चेहरे की चमक बता रही है कि तुम खुश हो।” मालती जी शर्मा गईं। नेहा ने कहा, “अब मुझे भी शामिल करो। मैं भी मजा लेना चाहती हूँ।”

रात को हम तीनों बेड पर थे। नेहा और मालती जी दोनों नंगी थीं। मैं बीच में था। मैंने पहले नेहा की चूत चाटी फिर मालती जी की। दोनों की सिसकारियाँ एक साथ गूँज रही थीं। नेहा ने मालती जी की चूचियाँ चूसीं। मालती जी ने नेहा की चूत में उंगली डाली। फिर मैंने नेहा को चोदा और मालती जी मेरा लंड चूस रही थीं। इसके बाद मैंने मालती जी को घोड़ी बनाया और नेहा उनकी गांड चाट रही थी। सामूहिक चुदाई का मजा अलग था।

हमने कई पोजिशन बदली। कभी मैं नेहा की चूत मारता तो मालती जी लंड चूसतीं। कभी मालती जी की गांड मारता तो नेहा उनकी चूत चाटती। दोनों एक साथ मेरे लंड पर झुकीं और चूसने लगीं। दो मुंह से लंड चूसने का मजा मैं बयाँ नहीं कर सकता। अंत में मैंने दोनों की चूत और मुंह में बारी-बारी से माल छोड़ा। हम तीनों थककर सो गए। अब हमारा रिश्ता और गहरा हो गया था।

इसके बाद भी जब भी मौका मिलता, हम तीनों या मैं और मेरी विधवा सास मालती जी अकेले चुदाई करके अपनी अन्तर्वासना शांत किया करते थे। मेरी विधवा सास मालती जी अब पहले से ज्यादा खुश और चुदासी रहने लगी थीं। नेहा भी संतुष्ट थी कि उसकी माँ को सुख मिल रहा है। मैं तो स्वर्ग में था। दो रसदार चूत और गांड मेरे लिए हमेशा उपलब्ध थीं।

विधवा सास और पत्नी दोनों की चूत-गांड की रोजाना चुदाई

समय बीतता गया। मालती जी अब हमारे साथ ही रहने लगी थीं। रोजाना सुबह-शाम थ्रीसम चुदाई होती। कभी किचन में मालती जी झुककर बर्तन धो रही होतीं तो मैं पीछे से लंड घुसा देता। नेहा ऑफिस से आते ही नहाने जाती और मैं उसके साथ नहाने चला जाता। बाथरूम में नेहा की चूत मारते हुए मालती जी दरवाजे पर देखती रहतीं। फिर हम तीनों मिलकर थ्रीसम सेक्स करते।

एक बार हमने रोल प्ले किया। मालती जी कॉलगर्ल बनीं और मैंने उन्हें पैसे देकर चोदा। नेहा वेट्रेस बनी। दोनों रंडी की तरह चिल्ला रही थीं। मैंने मेरी विधवा सास और पत्नी दोनों की गांड एक साथ मेरी दो उंगली से चोदी। फिर दोनों को लिटाकर बारी-बारी से चूत और गांड मारी। दोनों के मुंह में लंड डालकर मुंह की चुदाई भी की। रात भर हम तीनो की थ्रीसम चुदाई चली। सुबह तक हम तीनों थक चुके थे, लेकिन खुश थे।

मेरी विधवा सास मालती जी की चूत अब पहले की तुलना में ज्यादा ढीली हो गई थी, लेकिन फिर भी रसदार थी। नेहा की टाइट चूत और मालती जी की अनुभवी भोसड़ी दोनों का अलग मजा था। मैं दोनों को कुत्तिया बना कर चोदता। दोनों चीखतीं, “चोदो… हम तुम्हारी रंडियाँ हैं…” मैं माल दोनों की चूत में छोड़ता। कभी गांड में। कभी चूचियों पर। हमारा सेक्स जीवन स्वर्ग बन गया था।

कभी हम बाहर घूमने जाते तो होटल में तीनों चुदाई करते। होटल के बेड पर दोनों माँ-बेटी मेरे लंड की सेवा करतीं। मैं दोनों की चूत चाटता, गांड चाटता। दोनों एक-दूसरे की चूचियाँ चूसतीं। हमारा रिश्ता सिर्फ सेक्स नहीं, गहरा प्यार बन गया था।


पत्नी के सामने सास की बड़ी चूचियाँ चूसकर चुदाई का आनंद लिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

Hindi Threesome Sex Story – Patni ke saamne saas ki badi chuchiyan chuskar chudai ka anand liya :- इस अन्तर्वासना हिंदी थ्रीसम सेक्स कहानी में हमने देखा कि निषिद्ध इच्छाएँ भी अगर आपसी सहमति से पूरी हों तो रिश्तों को और मजबूत बना सकती हैं। विक्रम को अपनी सास और पत्नी दोनों से शारीरिक और भावनात्मक संतुष्टि मिली।

मालती जी का अकेलापन दूर हुआ और नेहा ने अपने परिवार को नई खुशी दी। यह यात्रा हवस से शुरू हुई लेकिन प्यार और समझ में खत्म हुई। आप पाठकों को भी अपनी इच्छाओं को समझने और सम्मान के साथ जीने की प्रेरणा मिले। अगर कहानी पसंद आई तो अपने विचार जरूर साझा करें।

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