HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesएक तरफ अम्मी चुद रही थी अपहरणकर्ताओं से दुसरी तरफ में

एक तरफ अम्मी चुद रही थी अपहरणकर्ताओं से दुसरी तरफ में

एक तरफ अम्मी चुद रही थी अपहरणकर्ताओं से दुसरी तरफ में अन्तर्वासना हिंदी XXX गैंग बैंग हार्डकोर ग्रुप सेक्स स्टोरीका सारांश :- यह अन्तर्वासना हिंदी ग्रुप सेक्स स्टोरी शबनम और उसकी माँ के रफ सेक्स की है, एक 22 साल की सेक्सी, बिंदास लड़की, और उसकी 42 साल की हॉट माँ रुखसार की, जिन्हें चार हवसी मर्द—जमाल, सलीम, नासिर, और रफीक—अपहरण कर एक सुनसान फार्महाउस में ले जाते हैं। अपहरणकर्ताओं ने जबरदस्ती दारू पिलाकर माँ-बेटी की हवस जगाई, और फिर जंगली, दर्दनाक गैंगबैंग और हार्डकोर ग्रुप सेक्स का तूफान मचाया। शबनम, कहानी की नैरेटर, अपनी और माँ की नंगी शर्म, उत्तेजना, दर्द, और मज़े को विस्तार से बयान करती है। गंदी गालियाँ, अश्लील संवाद, कामुक मेटाफॉर्स, और बेहद उत्तेजक दृश्य पाठकों की अंतर्वासना को जगाने के लिए हैं। यह 100% मूल हिंदी सेक्सी कहानी मिर्जापुर गाँव के परिवेश में सेट है, जो हास्य, हवस, और गहरे यौन अनुभवों से भरी है। इस गैंग बैंग रफ सेक्स सेक्स कहानी में हर घटना को गहराई से लिखा गया है, ताकि पाठक की सेक्स करने की इच्छा जाग उठे।


अन्तर्वासना हिंदी गैंग बैंग ग्रुप सेक्स स्टोरी की शुरुआत :- मेरा नाम शबनम है। मैं 22 साल की हूँ, और खुद को एकदम माल मानती हूँ। मेरी गोरी-चिट्टी त्वचा, 5 फुट 4 इंच की हाइट, गोल-मटोल चेहरा, और बड़ी-बड़ी काली आँखें मर्दों को पागल कर देती हैं। मेरी चूँचियाँ 36D साइज की हैं, इतनी टाइट और उछाल वाली कि जब मैं चलती हूँ, तो वो हिल-हिलकर मर्दों के लंड में आग लगा देती हैं। मेरी कमर पतली है, जैसे किसी घड़ी की सुई, और चूतड़ इतने उभरे और गोल कि मेरी गांड मटकते हुए देखकर कोई भी साला अपना लंड सहलाने लगता है। मैं बिंदास हूँ, गालियाँ देना मेरी आदत है—प्यार में भी, गुस्से में भी। मैं किसी से नहीं डरती, जो माँगता है, उसे दे देती हूँ—चाहे वो पैसा हो या मेरी चूत। मेरी चूत हमेशा गीली रहती है, जैसे कोई झरना, और मैं चुदाई के लिए हमेशा तैयार रहती हूँ।

मेरी अम्मी रुखसार 42 साल की हैं, लेकिन देखकर कोई कह नहीं सकता कि वो मेरी माँ हैं। वो एकदम जवान माल लगती हैं, उनकी चूँचियाँ 38DD साइज की हैं, मेरी से दोगुनी बड़ी और इतनी मस्त कि मर्दों की आँखें उन पर अटक जाती हैं। उनके चूतड़ बड़े-बड़े, गोल और मांसल हैं, और उनकी कमर बलखाती हुई चलती है, जैसे कोई नागिन। अम्मी का भोसड़ा गाँव में मशहूर है—मर्द आज भी उसके बारे में बातें करते हैं। अम्मी भी मेरी तरह बिंदास हैं, गालियाँ देती हैं, मर्दों से खुलकर बात करती हैं, और उनकी तिरछी निगाहें किसी को भी लंड खड़ा कर देती हैं। हम माँ-बेटी एक-दूसरे की साया हैं, साथ में हँसती हैं, गंदी बातें करती हैं, और कभी-कभी एक-दूसरे की चूत की चर्चा भी।

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हमारा गाँव मिर्जापुर है, एक छोटा-सा कस्बा जहाँ दिन में बाजार की रौनक रहती है, लेकिन रात को सड़कें सुनसान हो जाती हैं। उस काली रात, मैं और अम्मी बाजार से सामान लेकर लौट रहे थे। मैं कार चला रही थी, पुरानी मारुति, जो थोड़ी खटारा थी लेकिन काम चलाती थी। रात के 10 बज चुके थे, सड़क पर कोई नहीं था, सिर्फ जंगली झाड़ियाँ और दूर-दूर तक अंधेरा। अचानक, एक जीप ने हमें ओवरटेक किया और आगे रुक गई। दिल धड़क उठा। चार मर्द उतरे—जमाल, सलीम, नासिर, और रफीक। सब तगड़े जवान, गोरे-चिट्टे, मसल्स वाले, और आँखों में हवस की चमक। जमाल के हाथ में पिस्तौल थी, जो चमक रही थी। सलीम ने दरवाजा खोला और चिल्लाया, “निकल बाहर, माँ की लौड़ी! चुपचाप आ, नहीं तो गोली मार दूँगा तेरी चूत में!” मेरे शरीर में सिहरन दौड़ गई, डर के साथ एक अजीब-सी गर्मी। अम्मी ने मुझे देखा, उनकी आँखों में भी वही मिश्रित भाव थे—डर और कुछ अनजानी उत्तेजना।

हम बाहर निकले। नासिर ने हमारे हाथ पीछे बाँध दिए, रस्सी इतनी टाइट कि कलाईयों में दर्द होने लगा। रफीक ने हमारे मुँह पर काला टेप चिपका दिया, ताकि हम चिल्ला न सकें। वे हमें जीप में ठूँसकर चले। जीप तेजी से दौड़ रही थी, हर झटके में मेरी चूँचियाँ उछल रही थीं। मैं अम्मी को देख रही थी, वो मुझे। मेरे मन में ख्यालों का तूफान था—कभी सोचती कि ये साले हमें मार डालेंगे, कभी लगता कि काश ये हमारी चूत फाड़ दें। मैं मन ही मन दुआ माँग रही थी, “अल्लाह, बस चुदाई हो, मौत नहीं!”

अपहरण की रात: जबरदस्ती दारू और अपहरणकर्ताओं की हवस की शुरुआत

जीप एक पुराने, सुनसान फार्महाउस के सामने रुकी। चारों अपहरणकर्ता हमें बालों से खींचकर अंदर ले गए। कमरा अंधेरा था, सिर्फ एक धुंधला बल्ब जल रहा था, दीवारें टूटी-फूटी, और हवा में सड़ांध की महक। हमें दो कुर्सियों पर बिठाया गया, हाथ अभी भी बंधे थे। जमाल ने पिस्तौल लहराते हुए हँसा, “अब मज़ा आएगा, कुतियाओं! तुम दोनों माल तो एकदम कटीली हो!” सलीम ने मेरी चूँचियाँ घूरते हुए कहा, “यार, छोटी वाली की चूत तो टाइट होगी, चोदने में दर्द होगा लेकिन मज़ा दोगुना!” नासिर ने अम्मी की तरफ देखा, “बड़ी वाली का भोसड़ा देखो, कितना मस्त! उसकी चूँचियाँ तो लंड पेलने के लिए बनी हैं!” रफीक ने हँसकर कहा, “सबकी गांड और चूत चोदेंगे, यार! पहले दारू पिलाते हैं, ताकि ये रंडियाँ गर्म हो जाएँ!”

वे चारों अपहरणकर्ता दारू की बोतलें लेकर आए। जमाल ने अम्मी के मुँह से टेप हटाया और बोला, “दारू पी, साली रंडी! मेरी अम्मी ने शराब का सेवन करने से मना कर दिया तो वह अपहरणकर्ता बोला नहीं पीयेगी तो पिस्तौल से गोली मार दूँगा!” अम्मी ने इनकार किया, लेकिन सलीम ने उनकी चूँचियाँ दबाकर कहा, “पी, भोसड़ी की, वरना तेरी बेटी की चूत में ये दारू की बोतल घुसा दूँगा अभी!” अम्मी ने डर से मुँह खोला, और जमाल ने दारू बोतल उनके मुँह में उंडेल दी। दारू की धार उनके गले से उतर रही थी, कुछ छलककर उनकी चूँचियों पर गिर रही थी। अम्मी खाँसने लगीं, लेकिन वे नहीं रुके। “पूरी पी, कुतिया!” नासिर चिल्लाया। अम्मी की आँखें लाल हो गईं, शरीर में गर्मी दौड़ने लगी।

फिर मेरी बारी आई। रफीक ने मेरा टेप हटाया और बोला, “अब तू पी, छोटी रंडी! तेरी माँ ने पी ली, तू भी पी!” मैंने सिर हिलाया, लेकिन जमाल ने पिस्तौल मेरी कनपटी पर रख दी। “दारू पी, नहीं तो गोली मार दूँगा!” सलीम ने मेरी चूँचियाँ मसलते हुए बोतल मेरे मुँह में ठूँस दी। दारू कड़वी थी, जलन वाली, लेकिन मैं निगलती गई। मेरे गले में आग लग रही थी, पेट में गर्मी फैल रही थी। दारू की कुछ बूँदें मेरी गर्दन से बहकर मेरी चूँचियों के बीच जा गिरीं। मेरी साँसें तेज हो गईं, चूत में एक अजीब-सी खुजली शुरू हो गई। अम्मी और मैं दोनों नशे में चूर हो रही थीं, शरीर सुन्न, लेकिन हवस जाग रही थी।

दारू पिलाने के बाद, वे अपहरणकर्ता हम माँ बेटी को नंगी करने लगे। जमाल ने मेरी सलवार खींचकर फाड़ दी, कमीज़ चिथड़े कर दी। मेरी ब्रा को एक तेज धार वाले कोलापूरी चाकू से काटा, और मेरी चूँचियाँ आजाद हो गईं। वो उछल-उछलकर हिल रही थीं, निप्पल्स सख्त हो चुके थे। रफीक ने मेरी पैंटी फाड़ी, और मेरी चूत नंगी हो गई—गीली, फूली हुई, जैसे कोई फूल जो पानी माँग रहा हो। सलीम ने अम्मी के कपड़े उतारे—उनकी साड़ी खींची, ब्लाउज फाड़ा। उनकी बड़ी चूँचियाँ बाहर आ गईं, गुरुत्वाकर्षण से थोड़ी लटकी हुई लेकिन मस्त। नासिर ने अम्मी की पेटीकोट और पैंटी फाड़ी, उनका भोसड़ा नंगी—बालों वाली, गीली, और हवस से थरथराती। हम दोनों माँ-बेटी पहली बार एक-दूसरे को पूरी नंगी देख रही थीं, शर्म से चेहरे लाल, लेकिन दारू के नशे में मज़ा भी आ रहा था।

जंगली गैंगबैंग करा अपहरणकर्ताओं ने हम माँ बेटी के साथ

हम माँ बेटी को बिलकुल नंगी करने के बाद उन चारों अपहरणकर्ताओं ने भी अपने अपने कपड़े उतारे। उन अपहरणकर्ताओं के लंड एक से बढ़कर एक—जमाल का 8 इंच लंबा, मोटा जैसे कोई लोहे की रॉड। सलीम का घुमावदार, 7 इंच, लेकिन इतना मोटा कि चूत फाड़ दे। नासिर का सीधा, 9 इंच, जैसे कोई भाला। रफीक का काला, 8 इंच, लेकिन नसों से भरा। सब खड़े थे, लार टपकाते हुए। जमाल ने कहा, “अब शुरू होती है माँ-बेटी की चुदाई! पहले छोटी वाली को चोदते हैं!” उन्होंने हमें फर्श पर पटक दिया, जैसे कोई जानवर शिकार पर झपटता है।

सलीम ने मुझे पकड़ा, मेरी टाँगें फैलाईं। मेरी चूत नंगी थी, गीली लेकिन टाइट। वो बोला, “साली, तेरी बुर तो कुंवारी लगती है!” उसने अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ा, मैं सिहर उठी। दारू के नशे में दर्द कम लग रहा था, लेकिन उत्तेजना ज्यादा। फिर उसने एक झटके में लंड अंदर पेल दिया। “आह्ह!” मैं चिल्लाई, दर्द हुआ जैसे कोई चाकू घुस रहा हो। मेरी चूत फट रही थी, लेकिन वो नहीं रुका। तेज-तेज धक्के मारने लगा, मेरी चूँचियाँ उछल रही थीं। “साले, धीरे!” मैं चिल्लाई, लेकिन वो हँसा, “चुप, कुतिया! चुदाई का मज़ा ले!” नासिर ने मेरा मुँह पकड़ा और अपना लंड ठूँस दिया। मैं गपागप चूसने लगी, लंड मेरे गले तक जा रहा था, उबकाई आ रही थी लेकिन दारू ने मुझे जंगली बना दिया।

उधर, एक तरफ माँ चुद रही थी अपहरणकर्ताओं से दुसरी तरफ में चुद रही थी रंडी बनकर शराब के नशे में। जमाल ने मेरी अम्मी को घोड़ी बनाया, उनकी गांड ऊपर की। “साली, तेरी गांड तो मस्त है!” उसने अपना लंड अम्मी की चूत में भक्क से घुसा दिया। अम्मी चिल्लाईं, “हाय अल्लाह, दर्द हो रहा है!” लेकिन रफीक ने उनकी चूँचियाँ मसलते हुए कहा, “चुप, भोसड़ी की! मज़ा ले!” जमाल तेज धक्के मार रहा था, अम्मी के भोसड़े से काफी ज्यादा पानी बह रहा था, लेकिन दर्द से उनकी आँखों में आँसू थे। रफीक ने अम्मी के मुँह में गधे जैसा लंड डाला, वो चूस रही थीं, गले तक लेकर। अम्मी की चूँचियाँ झूल रही थीं, जैसे दो बड़े तरबूज। मैं देख रही थी, मेरी माँ को चुदते हुए, और मेरी चूत में और आग लग गई।

गैंगबैंग सेक्स अब बहुत ही ज्यादा जंगली हो गया। सलीम मेरी चूत चोद रहा था, इतने ज़ोर से कि दर्द के मारे मेरे कूल्हे दुखने लगे। नासिर मेरे मुँह को चोद रहा था, लंड से थप्पड़ मारते हुए। फिर वे बदल गए। जमाल मेरे पास आया, मेरी गांड में लंड रगड़ा। “नहीं, साले, गांड में नहीं!” मैं चिल्लाई, लेकिन वो नहीं माना। दारू के नशे में मैं कमजोर थी। उसने थूक लगाया और भक्क से घुसा दिया। दर्द असहनीय था, जैसे कोई जलता हुआ सरिया अंदर जा रहा हो। मैं रोने लगी, “हाय, फट गई मेरी गांड!” लेकिन वो हँसा, “अभी तो शुरू है, रंडी!” तेज धक्के, मेरी गांड से खून की बूँदें निकल रही थीं, लेकिन हवस में दर्द मज़ा बन गया। रफीक मेरी चूँचियाँ चूस रहा था, निप्पल्स काटते हुए, दर्द से मैं तड़प रही थी।

अम्मी की तरफ, सलीम उनकी चूत में लंड पेल रहा था, नासिर उनकी गांड मार रहा था। अम्मी चिल्ला रही थीं, “साले, दर्द हो रहा है, रुको!” लेकिन वे नहीं रुके। डबल पेनिट्रेशन, अम्मी की चूत और गांड दोनों फट रही थीं। रफीक उनकी चूँचियाँ मसल रहा था, इतने ज़ोर से कि निशान पड़ गए। दारू ने हमें चुदासी बना दिया था, दर्द के साथ मज़ा आ रहा था। अम्मी बोलीं, “शबनम, ये साले जंगली हैं, लेकिन लंड मस्त!” मैं हाँफते हुए बोली, “हाँ अम्मी, चुदवाओ, मज़ा ले!”

अपहरणकर्ताओं ने हार्डकोर ग्रुप सेक्स करा हम माँ बेटी के साथ: दर्दनाक चुदाई का मज़ा

रातभर हम माँ बेटी का गैंगबैंग रफ सेक्स चला। वे सभी अपहरणकर्ता हम माँ बेटी को रंडी की तरह बारी-बारी चोदते, कभी दो लंड एक छेद में। जमाल और सलीम ने मेरी चूत में एक साथ लंड घुसाया—दर्द इतना कि मैं चुदाई के दर्द की वजह से बेहोश होने लगी। मेरी चूत फैल रही थी, जैसे कोई दरार बन रही हो। “आह्ह, साले, फाड़ दो मेरी बुर!” मैं चिल्लाई, आंसू बह रहे थे। लेकिन दारू के नशे में मैं भी किसी रंडी की तरह कूद-कूदकर चुदवा रही थी। नासिर और रफीक अम्मी की गांड में एक साथ पेल रहे थे, अम्मी तड़प रही थीं, “हाय, मेरी गांड फट गई!” उनका भोसड़ा लाल हो चुका था, लेकिन वो मस्ती में चिल्ला रही थीं, “और ज़ोर से, मादरचोदो!”

हमारी चूँचियाँ लाल हो गईं मसलने से, गांड पर थप्पड़ों के निशान। वे हमें लंड चुसवाते, वीर्य हमारे मुँह में उंडेलते। मैंने जमाल का वीर्य पिया, गाढ़ा और नमकीन। अम्मी ने सलीम का चाटा। दर्दनाक लेकिन उत्तेजक। रात के 3 बजे तक चुदाई चली, हमारी चूत और गांड सूज गईं, लेकिन हवस नहीं बुझी। सुबह फिर शुरू। सलीम ने मुझे लिटाया, लंड मेरी चूत में। “साली, रातभर चुदवाई, अभी भी टाइट है!” वो ज़ोर-ज़ोर से पेल रहा था, मेरी कमर दुख रही थी। नासिर मेरा मुँह चोद रहा था। अम्मी को रफीक और जमाल चोद रहे थे—एक चूत में, एक गांड में। अम्मी चिल्ला रही थीं, दर्द से लेकिन मज़े में। दिनभर ग्रुप सेक्स, हमारी अंतर्वासना जाग चुकी थी।

चुदाई का चरम अपहरणकर्ताओं के साथ गैंग बैंग ग्रुप सेक्स के दौरान

शाम को वे हमें बिस्तर पर लिटाकर चोदने लगे। जमाल ने मुझे गोद में उठाया और अपने गधे जैसा लंड मेरी तंग चूत में घुसाया, और उछाल-उछालकर चोदा। मेरी चूँचियाँ उसके मुँह में थीं, वो काट रहा था। दर्द की लहरें, लेकिन चूत में खुजली मिट रही थी। सलीम पीछे से मेरी गांड में लंड पेल रहा था, डबल पेनिट्रेशन का दर्द असहनीय लेकिन मज़ेदार। “साले, फाड़ दो मुझे!” मैं हाँफ रही थी।

अम्मी को नासिर और रफीक चोद रहे थे—नासिर की गोद में, रफीक पीछे से। अम्मी की चूँचियाँ उछल रही थीं, जैसे कोई लहरें। “हाय, मेरे भोसड़े को मत छोड़ो!” वो चिल्ला रही थीं। हम दोनों एक-दूसरे को देख रही थीं, चुदते हुए, और हँस पड़ीं। दारू का नशा, दर्द, और हवस का मिश्रण हमें रंडी बना चुका था। वे झड़े, वीर्य हमारी चूत, गांड, और मुँह में। हम थककर लेट गईं, लेकिन मज़ा आया। शाम को हमें छोड़ दिया।


एक तरफ अम्मी चुद रही थी अपहरणकर्ताओं से दुसरी तरफ में अन्तर्वासना हिंदी XXX गैंग बैंग हार्डकोर ग्रुप सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

यह माँ बेटी गैंग रफ सेक्स अन्तर्वासना हिंदी हार्डकोर ग्रुप सेक्स स्टोरी उस जंगली रात की है, जब एक तरफ माँ चुद रही थी अपहरणकर्ताओं से, दूसरी तरफ मैं। चार हवसी मर्दों ने जबरदस्ती दारू पिलाकर हमारी हवस जगाई, और दर्दनाक गैंगबैंग और हार्डकोर ग्रुप सेक्स से हमारी चूत-गांड फाड़ दी। डर, शर्म, दर्द, और उत्तेजना का मिश्रण इस सेक्सी कहानी को अविस्मरणीय बनाता है। हास्य तब आया जब हम माँ-बेटी ने एक-दूसरे को चुदते देख हँसे। शर्म टूट गई, और हमने जंगली चुदाई का मज़ा लिया। गाँव लौटकर हम और चुदासी हो गईं। अब हम अपनी इच्छाएँ खुलकर पूरी करती हैं। पाठकों, यह माँ-बेटी की चुदाई की कहानी आपकी अंतर्वासना जगाती है? क्या शबनम और रुखसार की हवस ने आपको सेक्स करने को मजबूर किया? कृपया राय बताएँ। और ऐसी मसालेदार कहानियाँ चाहिए? फीडबैक दीजिए!

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