HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesविधवा माँ की अधूरी शारीरिक जरूरतें बहन के ससुर ने पूरी करी

विधवा माँ की अधूरी शारीरिक जरूरतें बहन के ससुर ने पूरी करी

यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी विधवा माँ की अधूरी शारीरिक जरूरतें बहन के ससुर ने चोद चोदकर पूरी करी” एक 19 वर्षीय लड़की मधु की है, जो मुरादाबाद में अपनी माँ रेखा और बड़ी बहन राधिका के साथ रहती है। रेखा, एक विधवा, अपनी शारीरिक इच्छाओं को दबाए हुए जीवन जी रही है। राधिका की शादी के बाद, मधु और रेखा को राधिका के ससुराल बुलाया जाता है। वहाँ रेखा की मुलाकात राधिका के ससुर, 45 वर्षीय बलदेव से होती है, जो एक आकर्षक और विधुर पुरुष है। कहानी में कामुकता और पारिवारिक रिश्तों का मिश्रण है, जहाँ रेखा और बलदेव के बीच अनपेक्षित शारीरिक संबंध बनते हैं। यह कहानी इच्छाओं, सामाजिक बंधनों और नए रिश्तों की खोज को दर्शाती है।

मुरादाबाद की एक छोटी-सी गली में मेरा घर है। मेरा नाम मधु है, उम्र 19 साल, और मैं एक साधारण-सी लड़की हूँ, जो कॉलेज में पढ़ाई करती है। मेरी माँ रेखा, 41 साल की हैं, और उनकी खूबसूरती आज भी जवानी की मिसाल है। उनके लंबे काले बाल, भरे हुए जिस्म और गहरी आँखें किसी का भी ध्यान खींच लेती हैं। मेरी बड़ी बहन राधिका, 23 साल की, की शादी पिछले साल हुई थी। पापा का देहांत पाँच साल पहले एक सड़क हादसे में हो गया था, जिसके बाद माँ ने सरकारी नौकरी शुरू की। फिर भी, घर में एक खालीपन सा रहता था।

पापा के जाने के बाद माँ ने कभी किसी पुरुष की ओर आँख नहीं उठाई। उनकी जिंदगी बस हम दोनों बहनों और नौकरी के इर्द-गिर्द घूमती थी। हालांकि, राधिका की शादी के बाद घर और सूना हो गया। राधिका अपने पति विशाल से हर रात फोन पर बात करती थी। एक रात, आधी नींद में, मैंने राधिका को फुसफुसाते सुना। उनकी साँसें तेज थीं, और वो फोन पर कह रही थीं, “हाँ, विशाल, ऐसे ही… और जोर से!” मैंने चुपके से देखा तो उनकी उंगलियाँ उनकी सलवार के नीचे थीं, और वो आँखें बंद किए आहें भर रही थीं। मेरी साँसें थम गईं, लेकिन मैं चुप रही।

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कुछ हफ्तों बाद, मेरी बड़ी बहन राधिका की शादी हो गई। शादी के बाद वो अपने ससुराल चली गई, और मैं माँ के साथ अकेली रह गई। एक दिन राधिका घर आई। उसकी चाल में एक अलग-सी चमक थी, जैसे विशाल ने उसे पूरी तरह खुश कर दिया हो। उसने माँ से कहा, “मम्मी, आप और मधु मेरे ससुराल चलो। ससुर जी ने भी बुलाया है।” माँ ने पहले तो मना किया, किंतु राधिका के जिद करने पर मान गईं। कुछ दिन बाद, हम राधिका के ससुराल पहुँचे।

वहाँ मेरी बड़ी बहन राधिका के ठरकी ससुर, बलदेव, से मुलाकात हुई। 45 साल की उम्र में भी वो बेहद आकर्षक थे। उनकी चौड़ी छाती, गहरी आवाज और मजाकिया अंदाज ने माहौल को हल्का कर दिया। उनकी पत्नी का देहांत हो चुका था, और घर में सिर्फ पुरुष थे—बलदेव, विशाल और उनका छोटा भाई। रात को खाना खाने के बाद, जब हम सोने की तैयारी कर रहे थे, बलदेव ने माँ से मजाक में कहा, “रेखा जी, मेरे पास ही लेट जाइए न!” माँ ने हँसकर बात टाल दी, लेकिन उनकी आँखों में एक चमक थी।

अनपेक्षित रात की शुरुआत

उसी रात, मैं मेरी बड़ी बहन राधिका के कमरे में नाइटी लेने गई। दरवाजे के पास रुकी तो विशाल की आवाज सुनाई दी, “राधिका, एक बार मधु को मेरे साथ…” मैं सन्न रह गई। राधिका ने गुस्से में कहा, “मम्मी बाहर हैं, चुप रहो!” विशाल हँसते हुए बोले, “तुम्हारी मम्मी को आज मेरे पिताजी चोद ही डालेंगे। वो कब से उनके पीछे पड़े हैं।” मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। मैंने जल्दी से दरवाजा खटखटाया और नाइटी माँगी। राधिका ने मुझे एक काली नाइटी थमा दी।

माँ को नाइटी देकर मैं सोफे पर लेट गई। माँ अपने ठरकी समधी बलदेव के पास अपनी गांड टेक कर बैठी थीं। मैंने हल्की नींद का नाटक किया तो देखा कि माँ की नाइटी का गला ढीला था, और उनकी आधी छातियाँ बाहर झाँक रही थीं। बलदेव ने माँ से कहा, “रेखा, तुम अपनी बेटी को क्यों परेशान करती हो? कोई काम हो तो मैं हूँ न!” माँ ने हँसकर जवाब दिया, “अच्छा? तो मेरी बेटी अभी क्या कर रही होगी?” बलदेव ने बेशर्मी से कहा, “चुद रही होगी अपने पति से।” माँ ने गुस्से में कहा, “शर्म नहीं आती ऐसी बातें करते हुए?”

मेरी बड़ी बहन के ससुर बलदेव ने माँ की ओर झुकते हुए उनकी छातियों को गन्दी नजर से घूरा और बोले, “शर्म कैसी? मौका मिले तो मैं भी…” माँ ने गुस्से में कहा, “तुम बहुत कमीने हो!” तभी बलदेव ने माँ को पकड़ लिया और उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। माँ तड़पने लगीं, “छोड़ो मुझे, कमीने!” लेकिन बलदेव ने उनकी छातियों को जोर से दबाया। तभी राधिका और विशाल बाहर आए। राधिका ने माँ को संभाला और मुझे कमरे में भेज दिया।

रात भर बहस की आवाजें आती रहीं। सुबह मेरी बड़ी बहन राधिका माँ के बिस्तर पर आई और हँसते हुए पूछा, “मम्मी, मेरे ससुर जी ने क्या किया तुम्हारे साथ… ?” माँ ने शर्माते हुए कहा, “ समधी जी ने मेरी छातियाँ दबाईं, किस करने लगे।” राधिका ने मजाक में कहा, “तो आप गर्म हो गई होंगी मेरे ससुर जी के लंड से अपनी चूत चुदवाने के लिए और गांड मरवाने के लिए!” माँ ने गुस्से में कहा, “ये क्या बकवास है?” लेकिन राधिका ने माँ की छातियों को सहलाते हुए कहा, “मम्मी, इस घर में दो मर्द और दो औरतें हैं। क्यों न अपनी गर्मी मिटाएँ?” माँ ने उसे डाँटा, लेकिन राधिका के बहुत जोर देने पर माँ एक दिन और रुक गईं।

कामुक इच्छाओं का उफान

दिन के समय रसोई में मेरी बड़ी बहन के ससुर बलदेव ने राधिका को पीछे से पकड़ लिया। वो उसे जोर जबरदस्ती किस करने लगे। मैं समझ गई कि ठरकी बलदेव ने मेरी बड़ी बहन राधिका को पहले ही चोद लिया है, और अब वो माँ को भी उसी राह पर ले जाना चाहती थी। रात को राधिका ने माँ को एक सेक्सी नाइटी दी। मैं कमरे में चली गई। राधिका ने बलदेव के पास बैठकर उनके हाथ अपनी छातियों पर रखे और माँ से बोली, “मम्मी, सुहागरात के बाद ससुर जी ने मुझे बहुत बुरी तरह चोदा। वो आपको भी अपनी रंडी बनाकर चोदना चाहते हैं। इसलिए मैंने आपको यहाँ बुलाया।” मेरी विधवा माँ हैरान थीं, लेकिन हँसते हुए बोलीं, “यहीं मेरी बुर चोदोगे या रूम में ले जाकर सुहागरात मनाएँगे?”

सब हँस पड़े। राधिका ने आज अपनी विधवा माँ को लाल साड़ी पहनाई और बलदेव को मंगलसूत्र और सिन्दूर दिया। बलदेव ने माँ की माँग भरी और बोले, “मैं अपनी बीवी को आँगन में चोदूँगा।” माँ शर्म से लाल हो गईं, लेकिन उनकी आँखों में वासना साफ दिख रही थी। बलदेव ने माँ का पल्लू हटाया और उनकी छातियों को ब्लाउज के ऊपर से दबाने लगे। माँ आहें भरने लगीं, “आह… बलदेव!” राधिका और विशाल पास ही थे। राधिका ने अपनी साड़ी उतारी और विशाल उसके निप्पलों को चूसने लगा।

मैं आँगन में निकल आई। माँ की साड़ी अब जमीन पर थी, और बड़ी बहन के ससुर बलदेव उनकी चूत को किसी कुत्ते की तरह से चाट रहे थे। माँ चिल्ला रही थीं, “आह… अब चोदो ना समधी जी, आज अपनी इस विधवा समधन की अधूरी शारीरिक जरूरतें पूरी करो पुरे जोश के साथ!” बलदेव ने अपना लंड माँ की चूत में एक धक्के में पेल दिया। माँ चीखीं, “ उई माँ फाड़ दी… आह.. आह…!” दूसरी तरफ राधिका भी विशाल के साथ सेक्स कर रही थी। दोनों माँ-बेटी चुदते-चुदते कामुक आहें भर रही थीं। कुछ देर बाद बलदेव और विशाल झड़ गए। माँ और राधिका कमरे में चली गईं, और मैं भी सोने चली गई।

नया रिश्ता, नई शुरुआत

सुबह माँ और बलदेव सोफे पर बैठे थे। माँ ने अपनी बड़ी बेटी राधिका से कहा, “जाने का मन नहीं, पर नौकरी भी जरूरी है।” बलदेव बोले, “तो मैं तुम्हारे साथ चलता हूँ।” माँ मुस्कुराईं और मान गईं। घर लौटने के बाद, रात को मैंने देखा कि माँ और बलदेव फिर से किस कर रहे थे। माँ ने मेरी पुरानी स्कूल शर्ट और हॉट पैंट पहनी थी, जिसमें उनकी छातियाँ साफ दिख रही थीं। बलदेव ने माँ को गोद में बिठाया और उनकी शर्ट के बटन खोल दिए। माँ बिना ब्रा के थीं, और उनकी नंगी छातियाँ बलदेव के सामने थीं।

बड़ी बहन के ससुर बलदेव ने माँ की चूत सहलाई और बोले, “समधन जी , तुमने कितनों से चुदवाया है अपनी बुर को सच सच बता…?” माँ ने शरारत से कहा, “सिर्फ अपने पति और अब तुम्हारे लंड से चुदवाया है समधी जी।” बलदेव ने माँ के निप्पल चूसने शुरू किए। माँ अपने समधी को स्तनपान करवाते हुए कामुक आहें भरने लगीं, “आह… राजा, चाटो!” बड़ी बहन के ठरकी ससुर ने मेरी विधवा माँ की चूत चाटी, और फिर अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया चुदाई करने के लिए। माँ चिल्लाईं, “फाड़ दो आज मेरी बुर को, समधी जी!” कमरे में माँ और उनके समधी की चुदाई की पट-पट की आवाज गूँज रही थी। कुछ देर बाद माँ बोलीं, “मैं गयी!” और बलदेव ने अपना माल मेरी विधवा माँ की चूत में डाल दिया।

मेरी विधवा माँ की अधूरी शारीरिक जरूरतें बड़ी बहन के ससुर ने चोद चोदकर पूरी करी – सेक्स कहानी का समापन

कहानी घर की छोटी बेटी मधु के नजरिए से उसकी माँ रेखा और बड़ी बहन राधिका के ससुराल में घटित कामुक घटनाओं को दर्शाती है। रेखा, जो सालों से अपनी इच्छाओं को दबाए थीं, बलदेव के साथ एक नए रिश्ते की शुरुआत करती हैं। राधिका और विशाल भी अपनी वासना को खुलकर जीते हैं। मधु, जो इन सबकी गवाह है, अपनी उभरती इच्छाओं को महसूस करती है। बलदेव माँ के साथ मुरादाबाद आते हैं, और दोनों एक-दूसरे के साथ नया जीवन शुरू करते हैं। यह कहानी सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच संतुलन को दर्शाती है।

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