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बेटे के नाइजीरियन दोस्त का बड़ा काला लंड देखकर चूत बह निकली

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मेरा नाम शबाना है और मैं 38 साल की एक हिजाबी मुस्लिम गृहिणी हूँ, जिसकी ज़िंदगी बाहर से बहुत शरीफ और अंदर से बिल्कुल प्यासी है। मेरा एक सौतेला बेटा अरमान है, जो हमारी लखनऊ की कोठी में ही रहता है और उसका दोस्त कबीर नाइजीरिया का रहने वाला एक गहरे काले रंग का लड़का है बिलकुल वैसा ही जैसा BIG BLACK COCK वाली पोर्न फिल्मों में दिखाते हैं। कबीर जब पहली बार मेरे सामने खड़ा हुआ, तो मेरी नज़र उसकी लंबी कद-काठी और उभरी हुई मांसपेशियों पर अटक गई और मेरा हिजाब के नीचे का शरीर एक अनजानी गर्मी से भर उठा। मैंने तुरंत अपनी निगाहें झुका लीं, लेकिन मेरी रूह तक काँप गई और बुर में एक अनचाही सिहरन दौड़ गई। उस पल मुझे लगा जैसे शैतान मेरे कान में कुछ गंदी फुसफुसाहटें करने लगा है और मैं अल्लाह से माफी माँगती रही।

कबीर की काली चमड़ी, उसके घुंघराले बाल और उसके मोटे-मोटे होंठ मेरी आँखों के सामने हर वक्त नाचते रहते थे। अरमान जब भी उसे घर लाता, मैं पहले से ज़्यादा सँवरती और तंग कुर्ती पहनकर हिजाब ओढ़ लेती ताकि मेरे बोबे का उभार साफ दिखाई दे। मैं चाय का प्याला देते वक्त जान-बूझकर उसकी उँगलियों को छू लेती और उसकी आँखों में झाँककर एक गुनाह की शुरुआत करती। कबीर का शरीर किसी पहलवान की तरह सख्त था और जब वह चलता, तो उसकी जाँघों की ताकत मेरी नज़रों को चीरती हुई सीधे उसकी पैंट के उभार पर जा टिकती। मेरी साँसें तेज़ हो जातीं और मैं बाथरूम में जाकर अपनी गीली चूत को दबाकर ख़ुद को शांत करने की नाकाम कोशिश करती।

सौतेले बेटे के नाइजीरियन दोस्त का बड़ा काला लंड देखकर चूत बह निकली मुस्लिम हिजाबी अम्मी जान की अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

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Bilkul muft mein padhein Ki kaise sautele bete ke Nigerian dost ka bada kaala lund dekhkar chut bah nikli Muslim hijabi ammi jaan ki antarvasna Hindi sex kahani.

एक दिन मेरा शौहर इरफ़ान किसी बिज़नेस ट्रिप पर गया हुआ था और अरमान को कॉलेज से एक प्रोजेक्ट मिला, जिसके लिए कबीर को हमारे घर पर ही रुकना पड़ा। शाम ढलते ही बारिश शुरू हो गई और बिजली की तेज़ कड़क के साथ पूरे मोहल्ले की लाइट गुल हो गई। मैंने कबीर को मोमबत्तियाँ जलाकर हॉल में बिठा दिया और ख़ुद उसके सामने वाले सोफे पर बैठकर अपने हिजाब को हल्का सा सरकाते हुए बातें करने लगी। अँधेरे में उसकी काली आँखें और चमक रही थीं और मेरे सीने में एक तूफ़ान उमड़ रहा था।

“आप बहुत खूबसूरत हैं, आंटी जी,” कबीर ने धीरे से कहा, उसकी आवाज़ से मेरे पेट के निचले हिस्से में एक गुदगुदी सी भर गई। मैंने हिचकी हुई साँस ली और मेरा दुपट्टा पूरी तरह से कंधे से फिसल गया, जिससे मेरी गोरी गर्दन और मोटे चूचों का ऊपरी हिस्सा साफ दिखने लगा। “कबीर, बेटा, आज तुम्हारे बिना अकेलापन बहुत खलता,” मैंने काँपते होठों से कहा और उसकी तरफ सरकते हुए अपना पैर उसकी जाँघ से सटा दिया। उसकी साँसें तेज़ हो गईं और उसने मेरे हाथ को पकड़कर अपने सीने से लगा लिया, जहाँ दिल बेतहाशा धड़क रहा था।

मैंने उसके सीने पर हाथ फेरते हुए अपना चेहरा उसके करीब लाया और हमारे होंठ एक भूखी लपलपाहट के साथ जुड़ गए। मेरे हिजाब को उसने पूरी तरह हटा दिया और मेरे खुले बालों में उँगलियाँ फँसाकर मेरी जीभ को चूसने लगा। मेरी चूत से रस की एक धार बह निकली और मैंने उसकी मोटी बाँहों को खरोंचते हुए अपने पूरे शरीर को उसके हवाले कर दिया। उसके हाथ जब मेरे कुर्ते के अंदर आए और मेरी ब्रा उतारकर मेरे 36D के बोबों को मसलने लगे, तो मेरे मुँह से एक दबी हुई चीख निकल गई। “कितने मोटे और मुलायम हैं, अम्मी जान,” उसने मेरे कान में गर्म साँस छोड़ते हुए कहा और मेरे तने हुए निप्पल को अपने मोटे होंठों में खींच लिया।

मैंने उसके सिर को दबाकर अपने स्तनों से चिपटा लिया और मेरी पूरी देह काँपने लगी। वह बारी-बारी से मेरे दोनों निप्पल चूसता रहा और मेरी गोद में उसका तना हुआ लंड मेरी जाँघों पर पत्थर की तरह दब रहा था। मैंने उसकी पैंट की ज़िप खोली और जैसे ही उसका मोटा काला लंड बाहर आया, मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। वह कम से कम 9 इंच का चमकदार, मोटा और नसों से भरा हुआ खड़ा लंड था, जिसकी सूजी हुई सुपारी जैसी टोपी से चिपचिपा रस चमक रहा था। उसके लंड के गोटे भारी और लटके हुए थे और पूरे इलाके में काली घनी झांट के बाल फैले हुए थे, जिनसे मर्दाना पसीने और माँस की एक कच्ची महक आ रही थी।

मैं तुरंत सोफे से फर्श पर गिर गई और घुटनों के बल सरककर उसके लंड के ठीक सामने पहुँच गई। “इतना बड़ा और काला लौड़ा… मैं तो सोच भी नहीं सकती थी कि तेरे पास ऐसा माल है,” मैंने प्यासी आवाज़ में कहा और अपनी जीभ बाहर निकालकर उसके सुपारी को सहलाने लगी। मैंने पहले उसके लंड के पूरे तने को ऊपर से नीचे तक चाटा, उसकी नसों का एक-एक करके स्वाद लिया और फिर पूरा सूपा मुँह में भरकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। कबीर कराह उठा और उसने मेरे बालों को मुट्ठी में भींचते हुए मेरे मुँह को और गहराई तक धकेल दिया। मेरी गंदगी भरी लार उसके लंड पर से बहकर उसके भारी अंडकोष तक पहुँच गई और मैंने बारी-बारी से दोनों गोटे मुँह में भरकर चूसे।

“हाँ, ऐसे ही चूसो, रंडी की तरह पूरा माल निगल जाओ,” उसने मेरी ठुड्डी पकड़कर मुँह में और ज़ोर से ठूँसते हुए कहा और मुझे अपनी गाली से एक अजीब सी चरम शांति मिली। मैं उसकी पूरी झांट की उलझी हुई बालों को सूँघते हुए, उन्हें जीभ से साफ करते हुए, उसके मोटे लंड का एक-एक इंच मुँह के अंदर महसूस कर रही थी। मेरा गला उस विशाल काले लौड़े को पूरी तरह निगलने की कोशिश में बार-बार अकड़ रहा था और मेरी आँखों से आँसू बह रहे थे, लेकिन मुझे इस कुकर्म में एक भयंकर मज़ा आ रहा था। मैंने कभी किसी मर्द का लंड नहीं चूसा था, लेकिन कबीर के सामने मैं पूरी वेश्या की तरह पेश आ रही थी और ख़ुद को रोक नहीं पा रही थी।

जब मेरे जबड़े दुखने लगे, तो कबीर ने मुझे उठाकर सोफे पर पटक दिया और मेरी सलवार खींचकर फाड़ दी। मेरी मोटी गोरी जाँघों के बीच बालों वाली चूत पूरी गीली और सूजी हुई थी, जिसकी गंध ने पूरे कमरे को भर दिया। उसने अपना मुँह मेरी फुद्दी पर रख दिया और मेरी बुर को बिल्कुल पागलों की तरह चाटने लगा, मेरा चूत का रस उसके होंठों पर चमकने लगा। मैं ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रही थी और अपने दोनों पैर उसके कंधों पर रखकर अपनी योनि को उसके मुँह पर रगड़ रही थी।

वह मेरी फुद्दी के छेद में अपनी मोटी जीभ घुसेड़ता और साथ ही मेरे मस्सों पर उँगली से तेज़ी से हरकत करता, जिससे मेरी जाँघें काँपने लगतीं और पूरा बदन पसीने से भीग गया। “कबीर, और चोद, मेरी भोसड़ी को पूरा चाट डाल,” मैंने बेकाबू होकर कहा और उसके सिर को अपनी जाँघों से दबोच लिया। मेरे शब्द सुनकर उसने अपनी 2 उँगलियाँ मेरी चूत में डालकर अंदर तक गड़ा दीं और ज़ोर से ऊपर की तरफ मरोड़ा, जिससे मैं एक ज़ोरदार झटके के साथ पहली बार पानी छोड़ बैठी। मेरी चूत का गरम रस उसके मुँह पर फूट पड़ा और मैं हाँफती हुई तड़प रही थी।

जैसे ही मेरी साँस थोड़ी सामान्य हुई, कबीर ने मुझे पलटकर कुत्ते की तरह सोफे पर झुका दिया और मेरे चूतड़ पीछे से फैला दिए। उसने अपने खड़े हुए मोटे लंड को मेरी चूत के द्वार पर रगड़ा और मेरी कमर पकड़कर एक ही ज़ोरदार धक्के में पूरा अंदर तक घुसा दिया। इतना बड़ा लंड मेरी टाइट चूत में पहली बार जा रहा था और उसके घुसते ही मेरे शरीर में बिजली सी दौड़ गई तथा मेरी चीख कमरे में गूँज उठी। “अम्मी जान, तुम्हारी फुद्दी इतनी टाइट है जैसे कुँवारी हो,” उसने मेरे कान में गुर्राते हुए कहा और मेरे कूल्हों को जकड़कर अपना लंड पूरी ताकत से अंदर-बाहर करने लगा।

मेरे मुँह से बस अश्लील शब्द ही निकल रहे थे और मैं अपने हाथों से अपने लटकते बोबों को मसल रही थी। हर धक्के के साथ मेरी गांड के चारों तरफ का माँस लहराता था और कबीर ज़ोर-ज़ोर से मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ मारता था। वह मेरी बुर को पूरी तरह फाड़ रहा था और मैं हर आहट पर सच्चे मज़े से कराहती हुई उसे और ज़ोर लगाने के लिए उकसाती थी। मेरे झांट के बाल हमारे रस से पूरी तरह सन गए थे और जब भी वह लंड बाहर निकालता, मेरी चूत की गुलाबी अंदरूनी परतें बाहर आ जातीं।

फिर उसने मेरी कमर पकड़कर ख़ुद सोफे पर लेट गया और मुझे अपने ऊपर सवार कर लिया। मैं उसकी गोद में बैठकर अपनी रसदार चूत से उसके विशाल काले लंड को पूरी तरह निगलती हुई उछल-उछलकर चुदाई करने लगी। अब मैं पूरी तरह से एक कामुक औरत बन चुकी थी, अपने भीतर की रांड को पूरी तरह खोल चुकी थी और सब कुछ भूलकर अपने मोटे चूचों को उसके मुँह में ठूँसने लगी। “चोदो मुझे, मेरी छिनाल चूत को फोड़ डालो, मैं तुम्हारी रंडी हूँ,” मैं चीख रही थी और वह मेरे कूल्हों को ऊपर उठाकर अपनी पूरी ताकत से मेरी गांड के नीचे से धक्के मार रहा था।

इसके बाद उसने मुझे उठाकर बेड पर लिटा दिया और मेरी दोनों टाँगें कंधों पर उठाकर मुझे मिशनरी चुदाई पोज़िशन में चोदना शुरू कर दिया। अब हर वार के साथ मेरा पूरा शरीर झटके खा रहा था और उसके लंड का फायदा सीधे मेरी बच्चेदानी के मुँह तक हो रहा था। उसने मेरी बगलों का पसीना चाटते हुए मेरी गर्दन पर गहरे निशान छोड़ दिए और मेरे कान में धीमी गंदी गालियाँ देता रहा। “तेरी भोसड़ी अब मेरी है, समझी? हर रात ऐसे ही चोदूँगा,” उसकी दबी हुई दहाड़ मेरे रोम-रोम में बस गई और मैंने अपने नाखून उसकी पीठ में गड़ा दिए।

मेरी योनि में भयंकर जलन और खिंचाव के बावजूद मज़ा इतना था कि मैं 45 मिनट तक उसके नीचे पड़ी हर वार को गिनती रही। जब उसे लगा कि वह झड़ने वाला है, तो उसने मेरे साथ गुदा सेक्स की कोशिश शुरू की और अपनी एक उँगली मेरे गांड के छेद में पिघले मक्खन की तरह सरका दी। मैंने तुरंत अपनी गांड ढीली की और उससे गिड़गिड़ाई कि वह अपना काला लंड मेरे पिछवाड़े में न डाले, क्योंकि मैं उतना सहन नहीं कर पाऊँगी। वह हँसा और मेरी चूत में ही अपनी गति और तेज़ कर दी, उसके अंडकोष बार-बार मेरी गांड के निचले हिस्से से टकरा रहे थे।

अचानक उसके शरीर में एक ज़बरदस्त तनाव आया और उसने मेरे अंदर ही अपना गाढ़ा चिपचिपा माल भर दिया। मुझे उसके गरम वीर्य का फुहारा साफ़ अपनी भोसड़ी की दीवारों पर पड़ता महसूस हुआ और मैं उसी पल दूसरी बार सिहर उठी। हम दोनों पसीने में लथपथ एक-दूसरे से लिपटे हुए 10 मिनट तक हाँफते रहे और मेरा शरीर सुकून के एक अजीब सैलाब में डूब गया।

जब सब शांत हुआ, तो कबीर ने मेरा हिजाब उठाकर मेरे बालों को चूमा और बोला, “अम्मी जान, आप असली औरत हैं।” मैंने शर्म से उसके सीने में मुँह छुपा लिया और सोचने लगी कि इस मोटे काले लंड ने तो मेरी सारी शरीफ़गी और शर्मिंदगी को पूरी तरह चूर-चूर कर दिया। अब मैं हर रात इसी तरह चुदवाने के लिए बेताब रहने वाली छिनाल बन चुकी थी और इस बात का मुझे ज़रा भी अफ़सोस नहीं था। मेरी कहानी का असली अंत तो शायद यहीं से शुरू होता है, दोस्तों, मुझे बताइए कि आपको नाइजीरियन लंड से मेरी इंडियन चूत की चुदाई का यह सफ़र कैसा लगा और नीचे कमेंट में अपनी राय ज़रूर लिखें।

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