मेरी वर्जिन चूत की सील तोड़ी दादा जी के पहलवान दोस्त ने शराब के नशे में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का सारांश:- मैं, राधिका, 18 साल की एक कुंवारी लड़की, अपने गाँव सूरजपुर में रहती हूँ। यह कहानी मेरे पहले सेक्स अनुभव की है, जब मेरे दादा जी के पहलवान दोस्त, गोपाल अंकल, ने मेरी कुंवारी चूत की सील तोड़ी। हमारा परिवार समृद्ध है, जिसमें मेरे माता-पिता, दादा जी, और बड़ा भाई हैं। मेरी सहेलियों की चुदाई की कहानियाँ सुनकर मेरा मन भी लंड लेने को बेताब था। यह कहानी उस रात की है, जब गोपाल अंकल ने शराब के नशे में मेरे साथ ताबड़तोड़ चुदाई की। कहानी में शर्म, उत्तेजना, और असहायता के भाव हैं, जो आपको मेरी उस रात की सैर कराएंगे।
Read for free My virgin pussy’s seal was broken by grandfather’s wrestler friend under the influence of alcohol Antarvasna Hindi sex story :- मैं राधिका, 18 साल की, सूरजपुर गाँव की रहने वाली। मेरा रंग गोरा, फिगर 34-26-34, और शरीर भरा हुआ। कोई भी मर्द मुझे देखे, उसका लंड तुरंत खड़ा हो जाए। मेरे परिवार में माँ, पिताजी, दादा जी, और बड़ा भाई रवि हैं। पिताजी और भाई खेती और व्यापार संभालते हैं। दादा जी, 60 साल के, शराब के शौकीन, अक्सर अपने दोस्तों के साथ दारू पार्टी करते हैं। उनका दोस्त गोपाल अंकल, 55 साल का पहलवान, चौड़ा सीना, मोटे बाजू, और तगड़ा शरीर। उस रात, दादा जी ने गोपाल अंकल को घर बुलाया। माँ नींद की गोली खाकर सो गई थीं। मैं अपनी छत पर टहल रही थी।
जून का महिना था, उस रात गर्मी बहुत तेज थी। मैंने टाइट कुरती और लेगिंग्स पहनी थी जिसमें मेरे बड़े बड़े बूब्स काफी ज्यादा उभरे हुए दिखाई दे रहे थे। मेरी चूचियाँ कुरती में उभरी हुई बड़ी मस्त दिख रही थी। सहेलियों की उनके बॉयफ्रेंड के साथ चुदाई की कामुक घटनाएँ सुनकर मेरी चूत में आग लगी थी। मैंने कई बार पोर्न देखकर उंगली की, लेकिन लंड का मज़ा अलग होता है। दादा जी और गोपाल अंकल बगीचे में दारू पी रहे थे। दादा जी ने मुझे पानी लाने को कहा। मैं पानी लेकर गई, तो गोपाल अंकल मुझे घूरने लगे। उनकी आँखों में वासना थी। मैंने देखा, उनका लंड पैंट में उभर रहा था। मैं शरमा गई और वापस छत पर चली गई।
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छत पर खड़ी थी, तभी गोपाल अंकल पेशाब करने के लिए बगीचे के कोने में आए। उन्होंने जानबूझकर अपनी पैंट खोलकर लंड निकाला और मूतने लगे। उनका लंड 8 इंच लंबा, 4 इंच मोटा, काला और तगड़ा था। मैं उसे देखकर दंग रह गई। मेरी चूत गीली होने लगी। उनकी नजर मुझसे मिली, मैं घबरा गई और कमरे में भाग गई। रात के 1 बज रहे थे। नींद नहीं आ रही थी। मैंने खिड़की से देखा, दादा जी नशे में बगीचे में बेहोश पड़े थे। गोपाल अंकल कहीं दिख नहीं रहे थे।
तभी मेरे कमरे का दरवाजा खटखटाया। मैंने खोला, तो गोपाल अंकल सामने खड़े थे। वो बोले, “राधिका, मुझे तुम चाहिए।” मैंने कहा, “अंकल, ये क्या कह रहे हैं?” वो हँसे, “बेटी, तुम जवान हो, तुम्हारी चूत की आग मैं बुझाऊँगा।” मैं घबरा गई, लेकिन मेरी वर्जिन चूत में सनसनी दौड़ रही थी सील तुड़वाने के लिए। मैंने मना किया, “अंकल, ये गलत है।” वो बोले, “तेरे दादा को मैंने ज्यादा दारू पिलाई, वो सुबह तक नहीं उठेगा।” मैं कुछ बोल नहीं पाई।
नशे में दादा जी पहलवान दोस्त मेरी वर्जिन चूत की सील तोड़ने मेरे बैडरूम तक पहुँच गया
दादा जी के पहलवान दोस्त ने मेरे बैडरूम का दरवाजा बंद किया। मैं पीछे हटी, लेकिन मेरे पैर पलंग से टकराए, और मैं गिर गई। वो मेरे ऊपर झुक गए। उनकी साँसों में शराब की गंध थी। उन्होंने मेरे होंठ चूम लिए। उनका मुँह मेरे मुँह में था, जैसे वो मुझे खा जाएँगे। उनका एक हाथ मेरी चूचियों पर गया। वो मेरी कुरती के ऊपर से मेरे बूब्स मसलने लगे। मेरी साँसें तेज हो गईं। मैं शर्म से मर रही थी, लेकिन मेरी चूत गीली थी।
उन्होंने मेरी कुरती उतारी। मेरी ब्रा में मेरी चूचियाँ तनी हुई थीं। गोपाल अंकल ने ब्रा की पट्टी खींची, वो टूट गई। मेरे गोरे बूब्स उनके सामने थे। वो पागलों की तरह मेरी एक चूची चूसने लगे। दूसरी को वो जोर से दबा रहे थे। मेरी सिसकारियाँ निकल रही थीं। “अह्ह… अंकल… धीरे…” मैंने कहा, लेकिन वो नहीं रुके। उनका लंड मेरी लेगिंग्स पर चुभ रहा था। मैंने महसूस किया, मेरी पैंटी गीली हो चुकी थी।
उन्होंने मेरी लेगिंग्स और पैंटी एक साथ खींचकर उतार दी। पहली बार मैं किसी मर्द के सामने नंगी थी। मेरी टाइट चूत उनके सामने थी। वो मेरी चूत पर हाथ फेरने लगे। मेरी सिसकारियाँ तेज हो गईं। “अंकल, प्लीज… ये गलत है,” मैंने कहा, लेकिन मेरी आवाज कमजोर थी। वो बोले, “राधिका, आज तेरी चूत की सील टूटेगी।” उन्होंने अपनी कमीज़ और पैंट उतारी। उनका लंड मेरे सामने तनकर खड़ा था। मैं उसे देखकर डर गई, लेकिन मेरी सील पैक वर्जिन चूत में दादा जी के पहलवान दोस्त का तगड़ा लंड लेने के लिए आग और बढ़ गई।
ब्लोजॉब करवाने के लिए दादा जी के पहलवान दोस्त ने मुझे नीचे बिठाया और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। “चूस इसे,” वो बोले। मैंने मना किया, लेकिन उन्होंने मेरे बाल पकड़े और मुँह में लंड घुसा दिया। उनका लंड नमकीन था, जैसे कोई गर्म लोहा। मैंने पहली बार लंड चूसा। मुझे गंदा लग रहा था, लेकिन लंड मुंह में लेकर चूसने में मज़ा भी आ रहा था। कुछ देर बाद उन्होंने लंड निकाला। मेरी साँसें फूल रही थीं। मैंने कहा, “अंकल, बस करो।” वो हँसे, “अभी तो शुरुआत है बेटी अभी तो तू देखती जा तुझे चोदकर कैसे कली से फूल बनाता हूँ।”
मेरी कुंवारी चूत की पहली दर्दनाक चुदाई दादा जी के दोस्त ने करी
मेरी वर्जिन चूत की सील तोड़ने के लिए दादा जी के पहलवान दोस्त ने मुझे पलंग पर लिटाया। मेरी टाँगें फैलाईं और अपना मोटा लंड मेरी वज्रिन चूत के होठों पर रखा। एक जोरदार धक्का मारा। “आह्ह!” मैं चीख पड़ी। ऐसा लगा जैसे मेरी चूत में आग लग गई। मेरी कुंवारी चूत की झिल्ली फट गई। खून निकलने लगा। “अंकल, निकालो… मेरी कुंवारी चूत फट गई बहुत तेज दर्द हो रहा है!” मैंने चिल्लाया। लेकिन वो नहीं रुके और मेरी खून से लथपत चूत की चुदाई करते रहे। वो दे धप्पा-धप्प धक्के मारने लगे। मेरी चूत से खून उनके लंड पर लग गया। मैं छटपटा रही थी।
कुछ देर बाद मेरी फटी हुई चूत का दर्द कम हुआ और चुदाई करवाने में मज़ा आने लगा। मैंने अपनी गांड उठाकर उनका साथ दिया। मेरी चूत में उनका लंड जड़ तक जा रहा था। “अह्ह… अंकल… और जोर से,” मैं सिसकारी। वो बोले, “राधिका, तेरी चूत कितनी टाइट है!” वो मुझे चोदते रहे। मेरी चूचियाँ हर धक्के से हिल रही थीं। मैं मदहोश थी। मेरी चूत में झरना बहने लगा। मैंने जोर से चिल्लाया और पानी छोड़ दिया।
दादा जी के पहलवान दोस्त अभी नहीं झड़े थे। चुदाई करते करते एक दम अचानक से उन्होंने मुझे पलट दिया। अब मैं उनके ऊपर थी और वो मेरे निचे। मैं उनके लंड पर बैठकर उछलने लगी और पुरे जोश के साथ उनके लंड की सवारी करने लगी। मेरे दादा जी के पहलवान दोस्त का लंड मेरी चूत में गहराई तक जा रहा था। मुझे मीठा दर्द हो रहा था। “अंकल, और तेज!” मैंने कहा। वो मेरी कमर पकड़कर मुझे चोदने लगे। कुछ मिनट बाद मेरी टाँगें दुखने लगीं। मैंने कहा, “अब आप करो।” उन्होंने मुझे गोद में उठाया और ताबड़तोड़ चुदाई शुरू कर दी।
मेरी फटी हुई चूत में फिर से झरना बहने लगा। मैंने मेरे दादा जी के पहलवान दोस्त को कसकर पकड़ लिया और दूसरी बार पानी छोड़ा। उनकी चुदाई करने की स्पीड बढ़ गई। “राधिका बेटी, कहाँ निकालूँ मेरा वीर्य जल्दी से बता?” उन्होंने पूछा। “बाहर, अंकल… बाहर मैं अभी गर्भवती नहीं होना चाहती…!” मैंने कहा। उन्होंने लंड निकाला और मेरी चूत के ऊपर वीर्य छोड़ दिया। वो मेरे बूब्स चूसने लगे। मेरे निप्पल दबाने लगे। मेरी चूत की सील आज टूट चुकी थी और मैं दर्द से कराह रही थी।
रात भर की दर्दनाक चुदाई और मेरी फटी हुई चूत की हालत
कुछ देर बाद उनका लंड फिर तन गया और वो फिर से मेरी चुदाई करने के लिए तैयार हो गए। मैंने फिर से सेक्स करने के लिए मना किया, “अंकल, बस, मैं थक गई।” लेकिन वो नहीं माने। उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया और पीछे से लंड डाल दिया। उनकी चुदाई इतनी जोरदार थी कि मेरी कमर टूटने लगी। मेरी चूचियाँ हिल रही थीं। वो मेरी पीठ चाट रहे थे। मेरे बूब्स पकड़कर खींच रहे थे। मैं थक चुकी थी, लेकिन वो रुके नहीं।
कभी वो मुझे दीवार से लगाकर चोदते। कभी मेरी एक टाँग उठाकर लंड घुसाते। मेरी चूत अब भोसड़ा बन चुकी थी। रात भर उन्होंने मुझे पाँच बार चोदा। सुबह 4 बजे वो रुके। उनका नशा उतर गया था। कपड़े पहनकर वो बोले, “राधिका बेटी, तेरी कुंवारी चूत की आग ने मुझे पागल कर दिया। मैंने आज 10 साल बाद किसी लड़की को छुआ।” मैं शरम से लाल थी, लेकिन उनके लंड अपनी वर्जिन चूत की सील तुड़वाकर बहुत ही ज्यादा खुश भी थी।
वो चले गए। मेरी कमर दुख रही थी। मैं बाथरूम गई। पेशाब के साथ उनका वीर्य निकला। मैंने शीशे में देखा। मेरी चूत फूलकर लाल हो गई थी। मेरे बूब्स पर उनके दाँतों के निशान थे। मेरी कुंवारी चूत की सील टूट चुकी थी। मैं अब चुदाई के मज़े लेने लायक हो गई थी।
मेरी वर्जिन चूत की सील तोड़ी दादा जी के पहलवान दोस्त ने शराब के नशे में अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
Read for free My virgin pussy’s seal was broken by grandfather’s wrestler friend under the influence of alcohol Antarvasna Hindi sex story “- यह मेरी पहली चुदाई की कहानी थी। गोपाल अंकल ने मेरी वर्जिन चूत की सील तोड़ी और मुझे रात भर चोदा। मुझे शर्म, उत्तेजना, और असहायता का मिश्रण महसूस हुआ। अब मुझे चुदाई का मज़ा समझ आ गया। क्या आपको मेरी कहानी पसंद आई? कृपया बताएँ कि आपको कहानी, किरदार, और टोन कैसा लगा। आपकी राय मेरे लिए महत्वपूर्ण है।


