यह अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी “सहमति के बिना चोदा दीदी के ससुराल में उनके किरायेदार ने” एक कुंवारी लड़की “लाजवंती” की है, जो अपनी शादी शुदा दीदी के ससुराल में रहने वाले एक किरायेदार “राजवीर” के साथ प्रेम संबंध में पड़ती है और ना चाहते हुए भी उसके साथ अवैध सेक्स संबंध बना बैठती है और अपना कोमार्य भंग करवा लेती है। उनकी दोस्ती प्यार में बदलती है, और राजवीर लाजवंती से शादी का वादा करता है और उसे चुदवाने के लिए मजबूर करता है। कुंवारी लड़की लाजवंती शादी से पहले अवैध शारीरिक संबंधों से इंकार करती है, लेकिन राजवीर उसे अपने कमरे में बुलाकर उसकी सहमति के बिना चोद देता है। इस घटना के बाद लाजवंती का राजवीर से भरोसा टूट जाता है, और वह उससे दूरी बना लेती है। कहानी में लाजवंती की भावनाएँ, सामाजिक डर, और प्रेम में धोखे का दर्द उभरकर सामने आता है।
हाय दोस्तों, मैं लाजवंती हूँ। मेरी बड़ी दीदी की शादी एक ऐसे शहर में हुई है, जहाँ मेरे घर से पहुँचने में तीन-चार घंटे लगते हैं। मेरी बड़ी दीदी के ससुराल में कुछ मर्द किराये पर कमरे लेकर रहते थे। उनमें से एक था राजवीर, जो नौकरी करता था और दीदी के घर में किरायेदार था। राजवीर दीदी को ‘भाभी’ कहता था। उसका स्वभाव इतना अच्छा था कि दीदी उसे बहुत पसंद करती थीं। जब मैं मेरी बड़ी दीदी के घर जाती, राजवीर मुझसे बात करने की कोशिश करता। मैं उसकी बातों का हल्का-फुल्का जवाब दे देती। धीरे-धीरे हमारी बातचीत बढ़ी, और हम अच्छे दोस्त बन गए।
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कभी मैं छत पर होती, तो राजवीर भी वहाँ आ जाता और बातें शुरू कर देता। उसने मुझे अपना फोन नंबर दिया, और फिर हम फोन पर भी बात करने लगे। हमारी दोस्ती गहरी होती चली गई। राजवीर दीदी की बहुत मदद करता था—अगर दीदी को कुछ सामान चाहिए होता, तो वह तुरंत लाकर दे देता। दीदी के सामने भी वह मुझसे खुलकर बात करता, इसलिए हमें कोई डर नहीं था।
एक दिन मेरी बड़ी दीदी ने मज़ाक में राजवीर से कहा, “हम लाजवंती और तुम्हारी शादी करवा देंगे।” यह सुनकर राजवीर ने मुझे ‘आई लव यू’ कह दिया। पहले मैंने मना किया, लेकिन उसने दीदी की बात का हवाला दिया। आखिरकार, मैंने हाँ कर दी और उसका प्यार स्वीकार कर लिया। मैं अपने घर लौट आई, लेकिन अब हमारी फोन पर बातचीत और बढ़ गई। राजवीर कभी-कभी सेक्सी मज़ाक करता या ऐसी बातें कहता। मम्मी को हमारे रिश्ते की भनक नहीं थी। मैं अपना कीपैड फोन ब्रा में छिपाकर रखती थी।
राजवीर मेरा पहला प्यार था। मुझे यकीन था कि हमारी शादी हो जाएगी, क्योंकि मेरी बड़ी दीदी ने ऐसा कहा था। मैं उसे अपनी हर बात बताती, और वह भी अपनी ज़िंदगी की सारी बातें शेयर करता। जब मैं मेरी बड़ी दीदी के घर जाती, राजवीर मुझे चूमता। हम ज़्यादातर नीचे वाले कमरे में मिलते। वह फ्रेंच किस करता, मेरे स्तनों को कपड़ों के ऊपर से दबाता, और चूत पर भी हाथ फेरता। कई बार दीदी के किरायेदार राजवीर ने मेरी ब्रा और पैंटी के अंदर हाथ डालने की कोशिश की, लेकिन मैंने साफ मना कर दिया। मैंने कहा, “जो भी करना है, शादी के बाद कर लेना मगर शादी से पहले कुछ नहीं।”
वह मान जाता, लेकिन पाँच-दस मिनट तक लगातार फ्रेंच किस करता—होंठ चूसता, जीभ से जीभ मिलाता। दोस्तों, आप ही बताइए, अगर कोई इतनी देर तक आपको चूमे, तो क्या होगा? मेरी धड़कनें तेज़ हो जातीं, साँसें उखड़ने लगतीं, और मैं उत्तेजित होकर उससे अलग हो जाती। मैं ऊपर भाग जाती, क्योंकि मुझे डर था कि बात आगे न बढ़ जाए। राजवीर को सेक्स करने की बहुत इच्छा थी, लेकिन मैं शादी से पहले ऐसा कुछ नहीं चाहती थी। मुझे डर था कि कहीं कुछ गलत न हो जाए या किसी को पता न चल जाए। दीदी के घर में उनके देवर भी रहते थे, जो मुझ पर लाइन मारते थे। लेकिन वो आवारा टाइप के थे, इसलिए मुझे वो बिल्कुल पसंद नहीं थे। मैं उनसे बात तक नहीं करती थी।
शुरू से ही मेरे पीछे कई लड़के पड़े थे मुझे चोदने के लिए, लेकिन मैं किसी को भाव नहीं देती थी। दीदी के किरायेदार राजवीर के साथ मेरा रिश्ता खास था। वह मुझे महंगे महंगे गिफ्ट देता, महंगी महंगी होटलों में खाना खिलने के लिए ले जाता था और अगर हम लंबे समय तक न मिल पाते, तो वह मेरे शहर आ जाता। वह कहता, “लाजवंती, तुम्हें देखे हुए बहुत दिन हो गए। तुमसे मिलने का मन कर रहा है।” कई बार वह मेरे कॉलेज के बाहर भी आता। हम बाज़ार या मॉल में मिलते, बातें करते। एक बार उसने कहा, “यहाँ ठीक से बात नहीं हो पाती। चलो, होटल चलें या मेरे दोस्त के कमरे पर।” मुझे समझ आ गया कि वह अकेले में मिलना चाहता था। अगर मैं अकेले में मिलती, तो शायद वह मुझे चोदे बिना न छोड़ता। इसलिए मैंने मना कर दिया।
वह गुस्सा हो जाता और कहता, “तुम्हें मुझ पर भरोसा ही नहीं है।” हमारी नोंक-झोंक हो जाती, लेकिन मैं उसे मना लेती। दोस्तों, आजकल ज़्यादातर लड़के सिर्फ़ चूत के पीछे भागते हैं। सच्चा प्यार करने वाले शायद एक प्रतिशत ही होंगे। कुछ लड़के लड़की को पटाते हैं, उसे चोदते हैं, और फिर दूसरी की तलाश शुरू कर देते हैं। आज कल की मॉडर्न लड़कियाँ भी किसी कॉल गर्ल या रंडी से कम नहीं हैं। कम उम्र में बॉयफ्रेंड बना लेती हैं और प्यार के चक्कर में अपनी सील तुड़वा लेती हैं। कुँवारी लड़कियाँ अक्सर ऐसे लड़कों का शिकार बनती हैं, क्योंकि लड़कों को कच्ची कलियाँ ज़्यादा पसंद हैं। लेकिन गलती दोनों की होती है।
हमारा प्यार दो साल तक चला। अब राजवीर खुलकर चुदाई की बातें करने लगा। वह कहता, “शादी के बाद हम ये करेंगे, वो करेंगे।” मुझे भी यकीन था कि हमारी शादी हो जाएगी। लेकिन एक दिन राजवीर ने अपनी नौकरी छोड़ दी और दूसरी कंपनी में बेहतर जॉब जॉइन कर ली। उसके मामा की एक लड़की थी, जो बी.एड करने के लिए उसी शहर में आई। चूँकि राजवीर पहले से वहाँ रह रहा था, उसने अपनी ममेरी बहन के साथ रहना शुरू कर दिया। राजवीर ने दीदी के घर का कमरा छोड़ दिया और नया किराये का कमरा ले लिया। दोनों भाई-बहन साथ रहने लगे। इससे राजवीर को खाना बनाने जैसे कामों से छुटकारा मिल गया। उनके घरवालों को सब पता था, और उन्होंने ही दोनों को साथ रहने को कहा था।
जब दीदी के किरायेदार राजवीर ने मुझे बताया कि उसने दीदी का घर खाली कर दिया है, तो मुझे बहुत बुरा लगा। लेकिन हमारी फोन पर बातें होती रहती थीं और कई बार हम फोन सेक्स भी कर लिया करते थे अपनी कामवासना शांत करने के लिए। जब मैं मेरी बड़ी दीदी के घर जाती, वह मुझसे मिलने आ जाता। वह कहता, “मेरे कमरे पर मिलने आ जाओ।” लेकिन मैं मना कर देती, और दीदी भी मुझे भेजने से इंकार कर देती थीं। राजवीर की ममेरी बहन को हमारे रिश्ते के बारे में पता था। कई बार राजवीर ने उससे मेरी बात करवाई। वह भी मुझे अपने कमरे पर बुलाती, लेकिन मैं नहीं जाती। एक बार सर्दियों में मैं मेरी बड़ी दीदी के घर गई। राजवीर को फोन पर बताया, तो वह बहुत खुश हुआ।
दो दिन बाद दीदी के किरायेदार राजवीर ने कहा, “मेरे कमरे पर मिलने आ जाओ।” मैंने मना किया, लेकिन वह ज़िद करने लगा। वह गुस्सा हो गया और बोला, “मैं तुमसे मिलने इतनी दूर जाता हूँ, और तुम एक शहर में होते हुए भी नहीं आ सकतीं? मैंने तुम्हारी हर बात मानी, और तुम मेरी एक बात नहीं मान सकतीं? लगता है, तुम मुझसे प्यार नहीं करतीं।” मैंने कहा, “अगर मैं आई, तो तुम मेरी सील पैक वर्जिन चूत की चुदाई तो नहीं करोगे ना?” उसने कहा, “नहीं चुदाई नहीं करेंगे, सिर्फ़ किस करेंगे, वो भी अगर तुम चाहोगी। अगर मन नहीं होगा, तो कुछ नहीं करेंगे।” फिर उसने अपनी ममेरी बहन से मेरी बात करवाई। वह भी कहने लगी, “आ जाओ, मैं भी तुमसे मिलना चाहती हूँ।”
जब दीदी के किरायेदार राजवीर ने बहुत ज़िद की, तो मैंने दीदी को बताया। मेरी बड़ी दीदी ने पहले मना किया, लेकिन मेरे बार-बार कहने पर हाँ कर दी और बोलीं, “ठीक है, जाओ, लेकिन जल्दी लौट आना।” अगले दिन मैं तैयार हो गई। मुझे थोड़ा डर लग रहा था, क्योंकि मैं पहली बार उसके कमरे पर जा रही थी। लेकिन मैंने सोचा, उसकी ममेरी बहन भी होगी, तो वह मेरी चुदाई नहीं कर पाएगा। मैंने सलवार-कुर्ती पहनी, दुपट्टा लिया, और निकल पड़ी। घर से निकलते वक़्त मेरा दिल कह रहा था कि शायद मुझे नहीं जाना चाहिए। लेकिन फिर मैंने सोचा, कुछ नहीं होगा।
राजवीर का कमरा दीदी के घर से चार-पाँच किलोमीटर दूर था। मैं ऑटो से गई। वहाँ पहुँचकर मैंने उसकी ममेरी बहन को फोन किया, क्योंकि मुझे उसका कमरा नहीं पता था। वह मुझे चौराहे पर लेने आई। हम दोनों उसके कमरे पर पहुँचे। राजवीर का मकान मालिक वहाँ नहीं रहता था, क्योंकि उसका तबादला हो गया था। नीचे के कमरे बंद थे, और ऊपर के दो कमरे किराये पर थे, जहाँ राजवीर और उसकी ममेरी बहन रहते थे। मुझे देखकर राजवीर बहुत खुश हुआ। हम तीनों कमरे में बैठकर बातें करने लगे।
राजवीर की ममेरी बहन ने मुझे पानी दिया। हम खूब बातें कर रहे थे। फिर राजवीर ने कहा, “लाजवंती के लिए चाय बना लाओ।” मैंने मना किया, लेकिन वह चाय बनाने रसोई में चली गई। राजवीर और मैं बातें करने लगे। उसने सामने की दुकान से समोसे लाए। हम तीनों ने चाय और समोसे खाए, और मज़े से बातें की। राजवीर मेरी फोटो खींचने लगा। हम सेल्फी ले रहे थे, खूब मस्ती कर रहे थे।
मुझे आए हुए आधा घंटा हो चुका था। राजवीर बोला, “लाजवंती, बताओ क्या खाओगी? पिज़्ज़ा, बर्गर, मोमोज़, डोसा, जो चाहो बता दो।” मैंने मना किया, लेकिन उसे पता था कि मुझे मोमोज़ बहुत पसंद हैं। उसने अपनी ममेरी बहन से कहा, “लाजवंती के लिए मोमोज़ ले आओ।” मैंने बहुत मना किया, लेकिन उसने उसे दुकान पर भेज दिया। अब घर में सिर्फ़ मैं और राजवीर थे। तभी राजवीर बोला, “इतने दिनों बाद मिली हो, एक किस तो दे दो!” उसने मुझे पकड़कर चूमना शुरू कर दिया। मैंने सोचा, एक-दो बार चूमेगा, ठीक है। लेकिन वह बार-बार चूमता रहा। मैंने मना किया, “बस करो राजवीर, प्लीज़। इतना काफ़ी है।”
लेकिन वह नहीं रुका। मैं अपना सिर पीछे हटाती, तो उसने मुझे दीवार से सटाकर फ्रेंच किस करना शुरू कर दिया। मुझे उत्तेजना होने लगी। मैं उसे पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी। फिर वह मुझसे अलग हुआ। मैं हाँफ रही थी, मेरे दिल की धड़कनें तेज़ थीं, और मेरे स्तन ऊपर-नीचे हो रहे थे। तभी राजवीर ने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी। हम दस मिनट तक लिप-लॉक किसिंग कर रहे थे, लेकिन उसकी ममेरी बहन अभी तक नहीं आई थी। मैंने कहा, “मुझे इससे ज़्यादा कुछ नहीं करना, प्लीज़ मुझे जाने दो।”
राजवीर ने मेरी सहमति के बिना ही मुझे चोदने के लिए पकड़ा और गद्दे पर गिरा लिया। मैं कुछ बोल पाती उससे पहले उसने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और चूसने लगा। मैं छटपटाने लगी। उसने मेरी कुर्ती ऊपर की और कुछ ही सेकंड में उतार दी। अब मैं ब्रा में थी। वह ब्रा के ऊपर से मेरे स्तनों को दबाता और चूमता रहा। फिर उसने मेरी सलवार का नाड़ा खींच दिया। सलवार ढीली हो गई, और उसने उसे मेरे पैरों से निकालकर अलग कर दिया। दोस्तों, मैं कुंवारी लड़की आज पहली बार चुदवाने वाली थी इस लिए काम वासना में डूबी थी, इसलिए उसका विरोध कम कर रही थी। पहली बार मैं उसके सामने सिर्फ़ ब्रा-पैंटी में थी। राजवीर ने भी मेरी इज्जत लूटने के लिए अपनी जींस और टी-शर्ट उतार दी। वह अब सिर्फ अंडरवियर और बनियान में था। उसने मुझे अपने ऊपर लिटाया। फिर उसने मेरी ब्रा का हुक खोला और उसे निकाल दिया। उसने अपना अंडरवियर और बनियान भी उतार दिया।
फिर उसने मेरी सहमति के बिना ही मेरी पैंटी की इलास्टिक पकड़ी और उसे उतारकर मुझे पूरी तरह नंगी कर दिया। मुझे नंगी करने के बाद अब वह भी मेरी इज्जत लुटने के लिए बिलकुल नंगा हो गया। दोस्तों वैसे तो मैं चुदना नहीं चाहती थी मगर मेरी दीदी के ससुराल में रहने वाले उनके किरायेदार राजवीर ने मेरी उत्तेजना इतनी बढ़ गई थी कि मेरी पैंटी चूत वाली जगह से गीली हो गई थी, और वहाँ धब्बा बन गया था। राजवीर ने मेरी पैंटी को उठाया और पैंटी पर बने उस गीले से धब्बे को इशारे से दिखाया। पहली बार राजवीर ने मुझे नंगी देखा, और मैंने उसे। उस हवसी मर्द का लम्बा मोटा लौड़ा तनकर खड़ा था मेरे साथ चोदा चादी करने के लिए। उसने अपना तगड़ा लौड़ा मेरे होंठों के पास लाकर चूसने को कहा। मैंने मना किया, लेकिन वह ज़िद करने लगा, “मेरी जान, चूसो ना! आज पहली बार तुम अकेली मिली हो। सुपारा ही चूस दो।” मैंने फिर भी मना कर दिया।
फिर मेरी दीदी के ससुराल में रहने वाले उनके किरायेदार राजवीर ने मेरे पैर खोले और मेरी चूत को करीब से देखने लगा। मेरी चूत पर हल्के बाल थे, क्योंकि मैंने कुछ दिन पहले उसे चिकना किया था। वह एक मिनट तक मेरी चूत को देखता रहा। फिर वह मुख मैथुन कानर के लिए 69 की सेक्स पोज़िशन में मेरे ऊपर लेट गया और अपनी जीभ से मेरी चूत को चाटने लगा। वह मेरी भगनासा पर जीभ फेरने लगा। मैं छटपटाने लगी, मेरी सिसकारियाँ निकलने लगीं। मेरी दीदी के ससुराल में रहने वाले उनके किरायेदार राजवीर ने फिर अपना तगड़ा लौड़ा मेरे नशीले होंठों के पास किया। जैसे ही मेरा मुँह खुला, उसने अपना तना हुआ लंड मेरे मुँह में डाल दिया और बोला, “अब चूसो मेरे लंड को लौली पॉप की तरह और ब्लोजॉब का आनंद लो अपनी कामवासना शांत करने के लिए।”
दोस्तों मैं काम वासना में मजबूर थी, मुझे ना चाहते हुए भी अपनी काम वासना शांत करने के लिए उसका लंड अपने मुंह में लेकर किसी रंडी की तरह चूसना ही पड़ा। वह काफ़ी देर तक अपना लंड चुसवाता रहा और बीच बीच में मेरे मुंह की चुदाई भी करता रहा । उसका वीर्य निकलने वाला था, लेकिन उस हवसी ने अपना लंबा मोटा लंड मेरे मुंह से बाहर नहीं निकाला। फिर कुछ देर बाद वीर्य की पिचकारी मेरे मुँह में ही छूट गई। मुझे उसके वीर्य का स्वाद बहुत बुरा लगा, और मुझे उल्टी हो गई। राजवीर ने अपना तगड़ा लौड़ा और मेरी चूत को कपड़े से साफ़ किया। उस हवसी मर्द का लम्बा मोटा लौड़ा अभी भी तना हुआ था। उसने मेरे पैर खोले और मेरे चूतड़ों के नीचे तकिया रखा, जिससे मेरी चूत उभर आई। मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही थी, मैंने आँखें बंद कर लीं।
मेरी दीदी के ससुराल में रहने वाले उनके किरायेदार राजवीर ने अपना तगड़ा लौड़ा मेरी चूत की दरार में फंसाया। मैं कसमसा रही थी। उसने एक धक्का लगाया, और उसका सुपारा मेरी चूत में चला गया। मैं चीखी, “सी..ई..ई.. उई.. प्लीज़ राजवीर, दर्द हो रहा है। छोड़ दो, मैं मर जाऊँगी।” लेकिन उसने दूसरा धक्का लगाया, और उस हवसी मर्द का लम्बा मोटा लौड़ा लगभग पूरा मेरी चूत में घुस गया। मेरी चीख़ निकल गई, लेकिन सुनने वाला कोई नहीं था। मैं रोने लगी, हाथ-पैर पटकने लगी, लेकिन उसने मुझे नहीं छोड़ा। मुझे बहुत दर्द हो रहा था।
दोस्तों, मैं सोचती हूँ, अगर लड़कों के लंड की जगह चूत होती और चुदाई के दौरान जब उसमें लंड जाता, तब उन्हें पता चलता कि कितना दर्द होता है चुदवाने में। राजवीर रुक गया और मुझे चूमने लगा। कुछ देर बाद उसने धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करना शुरू किया। तभी उसने कहा, “मेरी जान, तुमने तो पहले ही सील तुड़वा ली है। मैं तो तुम्हारी चूत सीलबंद समझता था।” दोस्तों, पता नहीं लड़कों को सील तोड़ने में क्या मज़ा मिलता है। हर लड़के को कुँवारी सीलबंद चूत चाहिए। मेरी बड़ी दीदी भी कहती हैं कि आजकल के लड़कों को बस चूत चोदने से मतलब है, चाहे वह सीलबंद हो या चुदी हुई।
लड़कियाँ भी कम नहीं हैं। कुछ अनजाने में, कुछ धोखे से, कुछ मजबूरी में, और कुछ मज़े के लिए शादी से पहले ही अवैध सेक्स संबंध बनाकर अपनी वर्जिन चूत की सील तुड़वा लेती हैं। आजकल तो लड़कियों की सील कम उम्र में टूट जाती है, और शादी से पहले चूत भोसड़ा बन जाती है। मैं यही कहूँगी, अगर हो सके, तो अपनी कुँवारी चूत अपने पति के लिए बचा कर रखें। कुँवारी लड़की का कौमार्य ही उसके लिए बहुत मायने रखता है।
लड़के भँवरे की तरह होते हैं—फूल का रस चूसकर दूसरे फूल की तलाश में उड़ जाते हैं। राजवीर धक्के पर धक्के लगा रहा था। मैं अपना सिर दाएँ-बाएँ हिला रही थी। चूँकि उसका वीर्य एक बार निकल चुका था, इस बार उसे ज़्यादा समय लग रहा था। मैं इस बीच झड़ चुकी थी। जब वह झड़ने वाला था, उसने लंड बाहर निकाला और हाँफते हुए झड़ गया। कुछ मिनट बाद उस हवसी मर्द का लम्बा मोटा लौड़ा फिर तन गया। इस बार उसने मुझे डॉगी सेक्स पोजीशन में चोदने के लिए घोड़ी बनाया और पीछे से मेरी टाइट चूत में अपना लंबा मोटा लंड डालकर चोदने लगा। मुझे चुदवाने में थोड़ा मज़ा और बहुत ज्यादा दर्द हो रहा था। चुदाई के दौरान मेरी सिसकारियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं।
सहमति के बिना चोदा दीदी के ससुराल में उनके किरायेदार ने :- लगभग बीस मिनट की खतरनाक चुदाई के बाद मेरी दीदी के ससुराल में रहने वाला उनके किरायेदार राजवीर झड़ गया। एक घंटे तक उसने करीब करीब हर सेक्स पोजीशन में मुझे चोदा था अपनी रंडी बनाकर। मेरी चूत का बाजा बज गया था। फिर वह अलग हुआ और कपड़े पहनने लगा। उसने मेरे कपड़े दिए, लेकिन मेरी ब्रा-पैंटी नहीं दी। मैंने माँगी, तो उसने मना कर दिया। उसने अलमारी से एक नई, सेक्सी ब्रा-पैंटी निकाली और मुझे पहनाई। मेरी पुरानी ब्रा-पैंटी उसने निशानी के तौर पर रख ली। मैंने कपड़े पहने। तभी दरवाज़े पर खटखट हुई। राजवीर ने दरवाज़ा खोला, तो उसकी ममेरी बहन खड़ी थी। उसके हाथ में मोमोज़ और कोल्ड ड्रिंक थी। राजवीर ने कहा, “इतनी देर कैसे लग गई? हम तेरा इंतज़ार कर रहे थे।” वह बोली, “भैया, मोमोज़ के लिए दूसरी दुकान पर जाना पड़ा, जो दूर थी।” राजवीर ने कहा, “चल, जल्दी दे, लाजवंती को देर हो रही है।”
दोस्तों, मुझे मेरी दीदी के ससुराल में रहने वाले उनके किरायेदार राजवीर की ममेरी बहन पर बहुत गुस्सा आ रहा था मन तो कर रहा था की आज मैं उसे भी उसके भाई के लंबे मोटे लंड से चुदवा कर उससे बदला ले लूँ। अगर वह जल्दी आ जाती, तो राजवीर को मेरी चुदाई करने का मौका नहीं मिलता। पता नहीं, वह सच बोल रही थी या झूठ? या फिर दोनों ने पहले से प्लान किया था। जब उसकी ममेरी बहन कमरे में आई, तो उसकी नज़र मेरी पुरानी ब्रा-पैंटी पर पड़ी। उसने राजवीर से पूछा, “भैया, ये ब्रा-पैंटी किस लड़की की हैं?” राजवीर ने कहा, “तुझे क्या करना? चल, मोमोज़ और कोल्ड ड्रिंक सर्व कर जल्दी से।” उसने मेरी ब्रा-पैंटी उठाकर अपनी अलमारी में रख दी। हम तीनों ने मोमोज़ और कोल्ड ड्रिंक ली। मैंने कहा, “मुझे देर हो रही है, मैं जा रही हूँ।” उसकी ममेरी बहन मुझे चौराहे तक छोड़ने आई। मैंने ऑटो पकड़ा और अपोनी इज्जत लुटाकर वापस अपने घर आ गई।
मैंने दीदी को मेरी और उसके किरायेदार की चुदाई के बारे में कुछ नहीं बताया। बताती भी तो क्या बताती??? यही कि उनके किरायेदार राजवीर ने मुझे अपनी रंडी बनाकर खतरनाक तरीके से चोदा है अपनी अन्तर्वासना शांत करने के लिए? उसके बाद मैंने राजवीर से बात करना बंद कर दिया। एक महीने तक मैंने बिल्कुल बात नहीं की। वह दीदी के फोन पर कॉल करता और मेरे बारे में पूछता। अगर मेरा फोन खुला होता, तो मेरे नंबर पर कॉल करता। राजवीर ने मुझे फिर चोदने की कोशिश की, कई बार मिलने बुलाया, लेकिन मैंने उसे अपनी चूत नहीं दी। कभी-कभी हमारी बात हो जाती थी, लेकिन धीरे-धीरे वह भी कम बात करने लगा। फिर हमारी बातचीत पूरी तरह बंद हो गई। उसका फोन नंबर भी बदल गया। इसके अलावा और भी कई घटनाएँ हुईं, जो मैं शायद कभी बताऊँ, अगर आप लोग कहेंगे। दोस्तों, मेरी ये कहानी कैसी लगी? मेल करके ज़रूर बताएँ।
दीदी के ससुराल में उनके किरायेदार ने चोदकर अन्तर्वासना शांत करी हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष:
लाजवंती की कहानी प्यार, विश्वास, अवैध सेक्स संबंध और फिर धोखे की एक दर्दनाक दास्तान है। उस कुंवारी लड़की का राजवीर पर भरोसा और शादी का सपना एक पल में टूट जाता है, जब राजवीर उसकी सहमति के बिना उसका शारीरिक शोषण करता है। यह कहानी आज के समाज में प्रेम के नाम पर होने वाले धोखे और युवाओं के बीच शारीरिक इच्छाओं की जटिलता को उजागर करती है। लाजवंती का राजवीर से दूरी बनाना उसके आत्मसम्मान और मर्यादा की रक्षा का प्रतीक है। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्चा प्यार सम्मान और सहमति पर टिका होता है, न कि सिर्फ़ शारीरिक आकर्षण पर।


