HomeAntarvasna Hindi Sex Storiesआखिरकार मैंने गरम वीर्य मौसी की बेटी की चूत में छोड़ दिया

आखिरकार मैंने गरम वीर्य मौसी की बेटी की चूत में छोड़ दिया

फरवरी की ठंड में जबरदस्त चुदाई करने के बाद आखिरकार मैंने गरम वीर्य मौसी की बेटी की चूत में छोड़ दिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी का सारांश :- यह पूरी तरह मूल भाई बहन अन्तर्वासना सेक्स कहानी है जिसमें मैं राहुल दिल्ली यूनिवर्सिटी का स्टूडेंट अपनी 18 साल की मौसी की बेटी अर्पिता के साथ फैमिली लंच के दौरान ठंडी फरवरी में राजाई के नीचे छुपी चुदाई शुरू करता हूं। धीरे-धीरे बढ़ते स्पर्श, आंखों का टकराव, कपड़ों का घर्षण और लंबा फोरप्ले टेरेस पर ले जाता है जहां उसकी वर्जिन फुद्दी और गांड की जबरदस्त चुदाई होती है। ब्लोजॉब मुखमैथुन गांड चाटना सब शामिल। 18 साल की लड़की की जबरदस्त चुदाई मौसी की बेटी की चुदाई के रूप में पूरी इमर्सिव और कामुक बनी है। पूरी चोदाई में गरम वीर्य झड़ना रसदार चूत का रस सब विस्तार से दिखाया गया है।


मेरा नाम राहुल है। मैं दिल्ली यूनिवर्सिटी का फाइनल ईयर स्टूडेंट हूं। उस दिन फरवरी की ठंडी दोपहर में मामा के घर लंच पर सब रिश्तेदार इकट्ठे थे। मौसी अपनी 18 साल की बेटी अर्पिता को लेकर आई थी। अर्पिता ने लाल साड़ी पहनी थी जिसमें उसकी कसी हुई कमर और उभरे बोबे साफ नजर आ रहे थे। हम सब राजाई ओढ़कर बैठे क्योंकि ठंड बहुत थी।

आखिरकार मैंने गरम वीर्य मौसी की बेटी की चूत में छोड़ दिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी

आखिरकार मैंने गरम वीर्य मौसी की बेटी की चूत में छोड़ दिया अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी Aakhirkaar maine garam veerya mausi ki beti ki choot mein chhod diya Antarvasna Hindi Sex Kahani
Aakhirkaar maine garam veerya mausi ki beti ki choot mein chhod diya Antarvasna Hindi Sex Kahani

अचानक मेरी जांघ पर उसका हाथ पड़ा। मैं चौंक गया लेकिन उसकी आंखें मेरी आंखों में गड़ी हुई थीं। उसकी सांसें तेज हो रही थीं। मैंने धीरे से उसकी उंगलियों को छुआ। कपड़े का घर्षण ऐसा लग रहा था जैसे बिजली दौड़ रही हो। हमारे आसपास मामा मामी सब बातें कर रहे थे। अर्पिता ने अपना पैर मेरे पैर से सटा दिया।

उसकी साड़ी की सिल्क मेरी जींस पर रगड़ खा रही थी। मैंने सोचा आज मौसी की बेटी की चुदाई का मौका मिल गया है। उसकी छाती ऊपर नीचे हो रही थी। मैंने हल्के से उसकी जांघ पर हाथ फेरा। वह सिसक रही थी लेकिन आवाज नहीं निकल रही थी। राजाई के अंदर हम भाई बहन की चुदाई का गन्दा खेल शुरू हो चुका था। उसकी गरम सांस मेरे कान पर पड़ रही थी।

अर्पिता ने मेरी हथेली को अपनी साड़ी के अंदर ले लिया। उसकी टाइट चूत पर मेरी उंगली फिसल गई। वह कांप उठी। मैंने धीरे से उसके निप्पल को दबाया। बोबे इतने मुलायम थे कि मेरा लंड तना हुआ खड़ा हो गया। उसके होंठ कांप रहे थे। मैंने उसकी आंखों में देखा। वह मुस्कुराई और मेरी उंगली को अपनी फुद्दी में दबा लिया। चूत का रस मेरी उंगली पर चिपक गया। आसपास सब सोने लगे थे। मैंने उसका हाथ अपने लंड पर रख दिया। वह पहली बार लंड छू रही थी। उसकी हथेली में मेरा खड़ा लंड फड़क रहा था।

राजाई के नीचे हमारी सांसें मिल रही थीं। अर्पिता ने मेरी जींस की चेन खोली। उसकी उंगलियां मेरे अंडकोष पर घूम रही थीं। मैंने उसकी साड़ी की पेटी खोल दी। उसकी चूतड़ मेरी हथेली में आ गए। गांड का नरम मांस दबाते ही वह सिसकारी भर उठी। मैंने गांड के छेद पर उंगली फेरनी शुरू की। वह कांप रही थी।

उसकी साड़ी का घर्षण मेरे लंड से टकरा रहा था। हम दोनों की धड़कनें एक हो गई थीं। लंच का समय बीत रहा था लेकिन हम नहीं रुक रहे थे। अर्पिता ने मेरे कान में फुसफुसाया कि ऊपर टेरेस पर चलो मेरा आउटडोर सेक्स करने का मन है।

मैं उठा और अर्पिता को इशारा किया। सब सो रहे थे। हम चुपके से टेरेस पर पहुंच गए। वहां अंधेरा था। ठंडी हवा में उसकी साड़ी लहरा रही थी। मैंने उसे दीवार से सटा दिया। उसकी आंखों में शर्म और लालच दोनों थे। मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया। लंबा चुंबन। उसकी जीभ मेरी जीभ से उलझ गई। मेरे हाथ उसकी साड़ी के अंदर घुस गए। बोबे दबाते हुए निप्पल काटे। अर्पिता चीखने वाली थी लेकिन मैंने मुंह दबा दिया।

राजाई का वो गर्म स्पर्श और अर्पिता की बढ़ती कामुकता

अब टेरेस पर हम अकेले थे। मैंने अर्पिता की साड़ी पूरी उतार दी। वह सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी। उसके चुचे बाहर निकल आए। मैंने एक बोबे मुंह में ले लिया। चूसते हुए दूसरे को दबाया। वह कराह रही थी। मेरी उंगलियां उसकी रसदार चूत में घुस गईं। टाइट फुद्दी ने मेरी उंगली को जकड़ लिया। अर्पिता ने मेरे लंड को हाथ में लिया और मुठ मारना शुरू किया। उसकी हथेली गरम थी। लंड के गोटे दबाते हुए वह नीचे झुकी।

मेरी मौसेरी बहन अर्पिता ने मेरे तने हुए लंड को मुंह में ले लिया। ब्लोजॉब शुरू हो गई। वह लंड चूस रही थी जैसे पागल हो गई हो। मेरे लंड को वह अपने गले तक ले जा रही थी जिस वजह से उसे बार बार खांसी उठ रही थी। मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह चुदाई दी। वह गैग हो रही थी लेकिन नहीं रुक रही थी। चूत का रस उसकी जांघों पर बह रहा था। मैंने उसे घुटनों के बल बैठा दिया और गांड चाटना शुरू किया। गांड का छेद चाटते हुए उंगली अंदर डाली। अर्पिता चीख रही थी। सिसकारियां भर रही थी।

मैंने उसे उठाया और दीवार से लगा दिया। अब समय आ गया था। मैंने अपना लंड उस कुंवारी लड़की की वर्जिन फुद्दी पर रगड़ा। वह कांप रही थी। धीरे से घुसाया। टाइट चूत ने लंड को चूस लिया। अर्पिता की आंखें बंद हो गईं। मैंने जोर से धक्का मारा। पूरी चुदाई शुरू हो गई। फुद्दी फट गई। खून और रस मिला। मैंने तेज तेज ठोके मारे। उसके बोबे उछल रहे थे। वह चिल्ला रही थी चोदो और जोर से चोदो।

टेरेस का अंधेरा और हमारी गांड चुदाई की जंग

चुदाई की रफ्तार बढ़ गयी। मैंने अर्पिता को घुमाया और गांड में लंड घुसाया। गांड की चुदाई शुरू। टाइट गांड ने लंड को जकड़ लिया। वह दर्द से चीख रही थी लेकिन कह रही थी और मारो। मैंने उसके कुल्हे थपथपाए। लंड पूरा अंदर बाहर। वीर्य झड़ने वाला था। अर्पिता ने मुड़कर मेरे लंड को चूसा। मुखमैथुन के बाद फिर चूत में डाला। हम दोनों पसीने से तर थे। ठंड भूल गए।

मैंने उसे जमीन पर लिटाया। अब मिशनरी पोजीशन में पूरी चोदाई करी जब तक मेरा गरम वीर्य उस छिनाल की बुर में निकल नहीं गया। मैंने उसके पैर कंधों पर। लंड गहराई तक। चूत का रस फूट रहा था। वह रंडी बन गई थी। कह रही थी मैं तुम्हारी छिनाल हूं। मेरे लंड के गोटे उसके अंडकोष से टकरा रहे थे। आखिरकार मैंने मेरा गरमा गरम वीर्य उसकी चूत में छोड़ दिया। माल निकला। वह कांप उठी।

हम थक चुके थे। लेकिन एक बार फिर से शुरू। अब वह ऊपर आ गई। काउगर्ल पोजीशन। अपनी चूत में लंड लेते हुए उछल रही थी। बोबे हिल रहे थे। मैंने मेरी कुंवारी बहन के निप्पल चबाए मेरे नुकीले दांतों से। गांड पर थप्पड़ मारे। दूसरी चुदाई में फिर वीर्य झड़ा। अर्पिता भी झड़ गई। रस निकाला। हम दोनों लिपटे रहे।

टेरेस से नीचे उतरते हुए हमने कपड़े ठीक किए। अर्पिता की साड़ी वीर्य से गीली थी। उसकी आंखों में संतोष था। मैंने उसे किस किया। अब वह मेरी सेक्स की दीवानी बन गई थी। हम वापस कमरे में आ गए। सब अभी भी सो रहे थे। राजाई ओढ़कर लेट गए। लेकिन अब हमारी उंगलियां फिर से एक दूसरे को छू रही थीं।

अर्पिता ने कान में कहा कल फिर टेरेस पर मेरी चुदाई करना भाई और मेरी गांड व चूत के अंदर अपना गरम वीर्य छोड़ना। मैं मुस्कुराया। मेरी मौसेरी बहन की फुद्दी और गांड अब मेरे लंड की गुलाम थी…


अन्तर्वासना हिंदी सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष

इस चुदाई की घटना के बाद अर्पिता और मेरा रिश्ता बदल गया। हर फरवरी की छुट्टी में हम मौसी के घर जाते और कभी राजाई में तो कभी टेरेस पर सब जगह नंगे होकर बिलकुल जंगली चुदाई करते। वह अब मेरी पूरी रंडी बन चुकी थी। 18 साल की लड़की की जबरदस्त चुदाई ने हमें दोनों को जिंदगी भर के लिए बांध दिया। आप भी ऐसी छुपी चुदाई का मजा ले सकते हैं अगर सही मौका मिले। याद रखें सावधानी जरूरी है लेकिन मजे अनलिमिटेड।

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