बिलकुल मुफ्त में पढ़ें कैसे पड़ोसी के जानवर लड़के ने मेरी भूखी चूत का सारा रस पी लिया और मैं इज्ज़तदार गृहिणी से छिनाल बन गई अन्तर्वासना हिंदी सेक्स कहानी – Bilkul muft mein padhein Kaise padosi ke janwar ladke ne meri bhookhi chut ka saara ras pee liya aur main izzatdaar grihini se chhinaal ban gayi antarvasna Hindi sex kahani – Read absolutely free How the neighbor’s animal-like boy drank all the juice of my hungry pussy and I turned from a respectable housewife into a slut Erotic Hindi sex story full of inner lust …
मेरा नाम सुधा है और मैं 36 साल की एक शादी शुदा गृहिणी हूँ, बनारस के गोदौलिया इलाके की एक सम्मानित बहू। मेरे पति आशीष कपड़े के थोक कारोबारी हैं और हफ्ते में 4 दिन बाहर रहते हैं, उनकी गैरमौजूदगी मेरे बिस्तर को ठंडा और मेरी चूत को बेताब रखती थी। पड़ोस के 22 साल के लड़के आकाश को मैं बचपन से जानती थी, वही लड़का जो अब मेरी रोज़ की शांत ज़िंदगी का तूफ़ान बनने वाला था।
आकाश ने पिछले 6 महीने से मुझे उस तरह देखना शुरू किया जैसे कोई भूखा शिकारी अपने शिकार को ताकता है। उसकी तीखी आँखें जब भी मेरी साड़ी की तंग ब्लाउज़ पर पड़तीं, मेरी चूत में एक अनजानी गर्मी दौड़ जाती थी। मैं खुद को कोसती कि 36 साल की हूँ और पति के होते हुए किसी जवान लौंडे की नज़रों से भीग रही हूँ, लेकिन हर रोज़ शीशे के सामने अपने उभरे हुए 38D बोबों को निहारती और सोचती कि काश कोई इन्हें सहलाए।

एक दिन मेरे नामर्द पति आशीष दिल्ली 3 दिन के लिए गए, घर बिलकुल सूना था और मैं अकेली अपनी रसोई में बैठी थी। शाम के 5 बजे आकाश ने दरवाज़ा खटखटाया और चीनी माँगने के बहाने अंदर आ गया। उसकी पसीने से भीगी कमीज़ के पीछे उभरता जवान सीना देखकर मेरे निप्पल अपने आप तन गए। मैंने काँपते हाथों से उसे चीनी का डिब्बा पकड़ाया, लेकिन उसने डिब्बा न पकड़कर सीधे मेरी कलाई थाम ली।
उसकी हथेली की गर्मी और उसकी आँखों में चमकता साफ़ इरादा मेरी साँसें रोकने के लिए काफी था। उसने बिना कोई देरी किए मुझे अपनी ओर खींच लिया और मेरे कान में फुसफुसाया, “सुधा आंटी, मैं आपको चोदना चाहता हूँ, बहुत समय से देख रहा हूँ आपकी रसदार चूत को।” इस बेशर्मी भरी लाइन ने मेरी सारी इज़्ज़त की दीवारें ढहा दीं और मेरी फुद्दी का रस मेरी साड़ी की पेटीकोट तक भिगोने लगा। मैंने उसे धक्का देना चाहा लेकिन मेरे हाथों ने उसकी कमर को जकड़ लिया।
मैंने हाँफते हुए कहा, “पागल हो गया है? मैं तेरी आंटी हूँ, शादीशुदा हूँ।” लेकिन पड़ोसी के जानवर लड़के ने मेरे होंठों पर अपना अंगूठा रखते हुए मुझे चुप करा दिया और बोला, “शादीशुदा रंडी ही तो सबसे ज़्यादा मज़ा देती है छिनाल आंटी, मुझे अपनी बालों वाली चूत दिखाओ आज मैं आपसे वादा करता हूँ की आपके पति से अच्छा काम लगाऊंगा।” उसके इन गंदे शब्दों ने मेरे अंदर छुपी असंतुष्ट औरत को पूरी तरह जगा दिया और मैंने खुद ही अपने शरबती होंठ उसके मुँह पर रख दिए। एक ज़ोरदार चुंबन के साथ उसने मेरी साड़ी का पल्लू सरकाकर ब्लाउज़ के हुक खोल डाले और मेरे भारी बोबे हवा में उछल पड़े।
उसने झुककर मेरे दाहिने निप्पल को अपने गर्म होंठों में ले लिया और पूरी बेरहमी से चूसने लगा। उसके मुँह की लार और दाँतों की हल्की काट मेरे पूरे शरीर में करंट की तरह दौड़ गई और मेरी चूत से रिसता पानी अब मेरी जाँघों तक बह रहा था। मैंने उसके बालों को पकड़ लिया और ज़ोर-ज़ोर से कराहने लगी जैसे कोई सालों से भूखी औरत अचानक मिली दावत पर टूट पड़ी हो। उसने दूसरे बोबे को भी बुरी तरह चूसते हुए मेरे कुल्हों पर अपनी उंगलियाँ गड़ा दीं और मैं चिल्ला पड़ी, “और ज़ोर से… मेरी चूचियाँ और चूसो।”
फिर उसने मुझे गोद में उठाकर सीधे बेडरूम की ओर बढ़ा दिया। रास्ते में उसने मेरी साड़ी पूरी तरह खोलकर फेंक दी और अब मैं सिर्फ़ अपनी गीली पैंटी में उसकी बाँहों में थी। उसने मुझे बिस्तर पर पटकते ही मेरी पैंटी फाड़ दी और मेरी झांट के बालों से लिपटी चूत को पूरी तरह खुला कर दोनों जाँघें फैला दीं। मेरे चूत के होंठ पहले से ही सूजे हुए थे और चिपचिपा रस चूतड़ों के बीच चमक रहा था।
पड़ोसी के जानवर लड़के ने एक पल के लिए मेरी बालों वाली चूत को निहारा और फिर गिड़गिड़ाते हुए बोला, “कितनी प्यारी भोसड़ी है आपकी आंटी, इसका रस तो मैं रोज़ पीना चाहता हूँ।” उसके इतना कहते ही उसने अपनी जीभ मेरे चूत के छेद पर सीधे अंदर तक डाल दी। उसकी गर्म जीभ मेरे भोसड़े की दीवारों को सहलाने लगी और मैं अपनी गांड उछाल-उछाल कर उसकी जीभ को और अंदर खींचने की कोशिश कर रही थी। मेरे मुँह से बस गालियाँ और कराहें निकल रही थीं, “हाँ… चाट मेरी चूत… ये रांड बनकर तरस रही थी तेरे लिए।”
उसने मेरी चूत के रस को ऐसे पिया जैसे शराब हो, और बीच-बीच में मेरे तने हुए निप्पलों पर उंगलियाँ गड़ाता रहा। मैंने अपनी ही उंगलियाँ अपने मुँह में डालकर चूसते हुए अपनी हालत देखी, मैं सचमुच एक छिनाल से कम नहीं लग रही थी। फिर उसने अपनी पैंट खोली और एक ज़बरदस्त खड़ा लंड बाहर निकाला, वो मोटा लौड़ा कम से कम 8 इंच लम्बा और साँवली त्वचा वाला था जिसकी नसें गुस्से से फड़क रही थीं। उसके लंड के गोटे भी भारी-भरकम लटक रहे थे और अंडकोष की थैली पूरी भरी हुई थी।
मैं लालच से उसके बड़े लंड को पकड़कर सहलाने लगी और फिर धीरे-धीरे अपने मुँह में भर लिया। उसके लौड़े का स्वाद नमकीन और त्वचा का गंध मेरी नाक में भर गया, मेरी लार उसके लंड पर बहकर उसके अंडकोष तक पहुँच रही थी। मैंने जोरदार ब्लोजॉब शुरू कर दिया, उसके लंड को गले तक अंदर ले जाकर ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगी। आकाश मेरे बाल पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से कराह रहा था, “हाँ आंटी, मेरी लंड चूसो… क्या शानदार मुखमैथुन करती हो तुम तो पूरी धंधेवाली लग रही हो।”
कुछ देर चूसने के बाद पड़ोसी के जानवर लड़के ने मेरा मुँह अपने लंड से हटाकर मुझे घुमाया और कुत्ते की तरह बिस्तर पर झुका दिया। मेरी बड़ी गांड ऊपर उठी हुई थी और चूत की दरार से रस टपक रहा था। उसने पीछे से आकर एक ही झटके में अपना पूरा मोटा लंड मेरी टाइट चूत में घुसेड़ दिया। वो घुसाव इतना जोरदार था कि मेरी दर्दनाक चीख पूरे घर में गूँज गई और मेरे बोबे ज़ोर जरो से हवा में आगे पीछे झूल गए। मेरी चूत की मांसपेशियों ने उसके लंड को इतनी कसकर जकड़ा कि उसे भी कराहना पड़ा।
वो जानवर साला पीछे से मेरी चुदाई ऐसे कर रहा था जैसे कोई जानवर हो, हर धक्के के साथ मेरा पूरा बिस्तर हिल रहा था और हमारे जिस्मों की टक्कर से गीली आवाज़ें आ रही थीं। मैंने अपनी गांड को पीछे धकेलते हुए कहा, “और ज़ोर से चोद मेरी बुर… मुझे रंडी बनाकर चोद।” उसने मेरी गांड पर ज़ोरदार तमाचा मारा और मेरे कुल्हों को कसकर पकड़ लिया, फिर और तेज़ी से घुसने लगा। मेरे अंदर चिपचिपा माल बन रहा था और हर घुसाई के साथ वो बाहर निकलकर उसके लंड पर सफेदी जमा रहा था।
कुछ देर बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला और मुझे सीधा लिटाकर मेरे ऊपर आ गया। उसने मेरी टाँगों को अपने कंधों पर रखकर दोबारा मेरी चूत में प्रवेश किया, इस बार धीरे और गहराई से। हम आमने-सामने थे और उसकी आँखों में मेरे लिए एक अजीब सा प्यार झलक रहा था। उसने झुककर मेरे होंठों को चूमा और फुसफुसाया, “सुधा, तू सिर्फ मेरी रहेगी, समझी।” मैंने उसके पसीने से भीगे बदन को अपनी बाँहों में कस लिया और अपने पैर उसकी कमर से लपेट दिए ताकि उसका लम्बा लंड मेरी चूत के हर कोने को छू सके।
अब उसकी गति प्रेमी वाली थी और मैं उसकी हर साँस को महसूस कर पा रही थी। मेरे मुँह से निकल रहा था, “हाँ… आई लव यू आकाश… मुझे रंडीबाज बना दिया तूने।” वो हल्के-हल्के मुस्कुराया और फिर अपनी गति तेज़ कर दी, मैं अपने कुल्हे उछालकर उसके हर धक्के का स्वागत कर रही थी। तभी उसने मेरे गांड के छेद पर अपनी एक उंगली रगड़ी, मैं चौंकी लेकिन उसने आँख से इशारा किया और मैंने अपनी गांड की मांसपेशियों को ढीला छोड़ दिया। उसने अपनी उंगली पर मेरी ही चूत का रस लगाकर धीरे-धीरे मेरी गांड में डाल दी।
मेरे मुँह से हल्की सी चीख निकली लेकिन दर्द से ज़्यादा अजीब मज़ा आ रहा था। पड़ोसी के जानवर लड़के ने उंगली हिलानी शुरू की और साथ ही अपने लंड से चूत की चुदाई भी जारी रखी। दोहरी घुसाई ने मुझे पागल कर दिया, मैं अब कुछ भी होश में नहीं थी, सिर्फ़ चूत और गांड में लगातार मज़ा महसूस कर रही थी। आखिरकार उसने ज़ोर से गुर्राते हुए अपना गर्म वीर्य मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया और मैं भी एक ज़बरदस्त संभोग के झटके में तड़प उठी, मेरा पूरा शरीर एक बारगी ऐंठ गया और फिर ढीला पड़ गया।
हम दोनों पड़ोसी पसीने से तरबतर एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे, कमरे में सेक्स की तेज़ गंध भर गई थी। मेरी चूत से उसका चिपचिपा माल धीरे-धीरे रिस रहा था और चादर पर सफेद धब्बे पड़ गए थे। मैंने उसकी छाती पर सिर रखकर पूछा, “अब क्या होगा?” तो उसने मेरे माथे को चूमकर कहा, “यही होगा कि अब तू मेरी रांड बनकर रहेगी, यही सच है।” वो उठा, कपड़े पहने और बिना पलटे चला गया, मैं अकेली अपने बिस्तर पर नंगी पड़ी अपनी सूजी हुई चूत को निहार रही थी।
उस रात मैंने आईने के सामने अपने चूसी हुई चूचियों और चुदी हुई गांड को देखा और मन में कोई पछतावा नहीं था। मैंने अपनी उंगली अपनी चूत में डाली और आकाश का वीर्य बाहर निकालकर उसे चाट लिया, खुद को धिक्कारने की जगह अपने आप पर गर्व हो रहा था कि आखिरकार मैंने अपनी भूखी चूत और गांड की भूख मिटा ही ली। अगली सुबह आशीष का फोन आया तो मैंने बहुत सामान्य आवाज़ में बात की, जैसे कुछ हुआ ही न हो, और पति को अंदाज़ न होने दिया कि उनकी पत्नी अब उनकी नहीं रही।
प्रिय पाठकों, अब मैं सुधा एक शादी शुदा गृहणी आप सबसे यही पूछना चाहती हूँ कि क्या मैंने पडोसी के जानवर बेटे के साथ अवैध सेक्स संबंध बनाकर सही किया कि अपनी ज़िंदगी की सूनी रातों को एक जवान लड़के की बाँहों में बिताया? क्या मैं सिर्फ एक चरित्रहीन छिनाल हूँ जिसने अपने पति को धोखा दिया, या एक ऐसी औरत जिसने अपनी इच्छाओं को दबाने की बजाय जीना सीखा? कृपया अपनी बेबाक राय मुझे कमेंट्स में ज़रूर बताएँ, मैं जानना चाहती हूँ कि आप मेरी इस अन्तर्वासना हिंदी XXX चुदाई कहानी को कैसे देखते हैं।


