मेरे साथ डबल पेनेट्रेशन करा बॉयफ्रेंड व उसके दोस्त ने मिलकर थ्रीसम सेक्स कहानी :- मैं एक युवा, कामुक लड़की हूँ जिसका नाम रिया है। उम्र महज १९ साल, लेकिन मेरी चूत हमेशा से ही आग की तरह जलती रहती है। मेरे छोटे-छोटे चुचे तने हुए निप्पल्स के साथ हमेशा तैयार रहते हैं किसी भी लंड को चूसने के लिए। मैं कॉलेज में पढ़ती हूँ, लेकिन पढ़ाई से ज्यादा मेरी दिलचस्पी उन मोटे-मोटे लौड़ों में है जो मुझे रंडी की तरह चोद सकें।
मेरी जांघें पतली हैं, लेकिन गांड गोल और मुलायम, जिसे कोई भी मर्द देखकर लंड हिलाने लगता है। मैं जानती हूँ कि मैं कितनी छिनाल हूँ, कितनी भोसड़ीकी रांड हूँ जो दिन-रात चुदाई की सोचती रहती है। मेरी चूत बालों वाली है, रसदार और टाइट, जो हर बार किसी नए लंड को निचोड़कर माल छुड़वाती है। आज मैं आपको अपनी वो रात बताती हूँ जब मैंने दो मर्दों से एक साथ चुदाई करवाई, और मेरी चूत-गांड दोनों फाड़ दी गईं।

मैं शाम को अपने बॉयफ्रेंड राहुल के घर गई थी। मेरा बॉयफ्रेंड राहुल एक हरामी किस्म का मर्द है, लेकिन उसका लंड मोटा और लंबा है, जो मेरी भोसड़ी में पूरा घुस जाता है। वो मुझे पहले से ही मैसेज कर रहा था कि आज मेरी गांड मारने वाला है। मैंने सोचा, क्यों नहीं? मेरी चूत पहले से ही गीली हो रही थी। घर पहुँचते ही राहुल ने मुझे दरवाजे पर ही पकड़ लिया। उसने मेरी टी-शर्ट ऊपर चढ़ाई और मेरे चुचों को जोर से दबाया।
“साली रंडी, आज तेरी चूत और गांड दोनों चोदकर लाल कर दूंगा!” वो गरजता हुआ बोला। मैं सिसकारी भरते हुए बोली, “हाँ मादरचोद, चोद मुझे, अपनी रांड बना ले!” उसने मेरी स्कर्ट ऊपर की और मेरी पैंटी पर हाथ फेरा। मेरी चूत का रस पहले से ही बह रहा था। वो उंगली डालकर चूत चाटने लगा। मैं चीख पड़ी, “आह्ह्ह… चूत चाट ले भोसड़ीके, जीभ अंदर डाल!” उसकी जीभ मेरी भगनासा पर रगड़ रही थी, और मैं कांप रही थी।
मेरा हवसी बॉयफ्रेंड राहुल मुझे बेडरूम में ले गया। वहाँ उसका दोस्त विक्रम पहले से ही मौजूद था और वो बिलकुल नंगा बैठा हुआ था। विक्रम का लंड देखकर मेरी आँखें फटी की फटी रह गईं। उसका लंड तो मेरे बॉयफ्रेंड के लंड से भी ज्यादा मोटा था, फटा हुआ लंड जैसा। दोनों ने मुझे नंगा कर दिया मेरे साथ थ्रीसम सेक्स करने के लिए। मेरे निप्पल्स तने हुए थे, बोबे उछल रहे थे। राहुल ने मेरे चुचों को चूसना शुरू किया, जबकि विक्रम मेरी चूत में उंगली डाल रहा था। “कितनी टाइट चूत है तेरी, रंडी!” विक्रम बोला।
मैं कामुकता की आग में जलते हुए मोअन कर रही थी उई माँ… आह…. आह… आह…, “हाँ… उंगली और डालो, फाड़ दो मेरी भोसड़ी!” राहुल ने मेरे मुंह में अपना लंड ठूंस दिया। मैं लंड चूसने लगी, गले तक लेते हुए। “चूस साली, ब्लोजॉब दे अच्छा से!” वो सिर पकड़कर मुंह चोद रहा था। मेरे मुंह से लार टपक रही थी, लेकिन मजा आ रहा था। विक्रम ने मेरी गांड में उंगली डाली, मैं चीखी लेकिन चुदाई की दीवानी बन गई।
अब दोनों मुझे बिस्तर पर लिटाकर चोदने लगे। राहुल ने मेरी चूत में अपना तना हुआ लंड घुसेड़ दिया। “आह्ह्ह… मोटा लौड़ा… चोद मुझे!” मैं चिल्लाई। वो जोर-जोर से धक्के मार रहा था, चूत का रस छलक रहा था। विक्रम मेरे मुंह में लंड डालकर मुंह चुदाई करवा रहा था। मैं दोनों तरफ से चुद रही थी। मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूंज रही थीं। “चोदो मुझे, मादरचोदों… रंडी की तरह चुद रही हूँ!” राहुल ने मेरी गांड थपथपाई, “अब तेरी गांड की बारी है, छिनाल!” वो बोला।
डबल पेनेट्रेशन की शुरुआत में आग लग गई
विक्रम ने मुझे घुटनों पर बिठाया और अपना मोटा लंड मेरी गांड के छेद पर रगड़ा। मैं डर रही थी लेकिन उत्सुक भी। “धीरे से डाल, हरामी!” मैं बोली। उसने धीरे-धीरे गांड में घुसाया। दर्द हुआ लेकिन जल्दी ही मजा आने लगा। “आह्ह… गांड फाड़ दी… चोदो!” मैं चीख रही थी। राहुल मेरी चूत में फिर से लंड डाल रहा था। अब मैं दोनों छेदों से चुद रही थी। डबल पेनेट्रेशन का मजा अनोखा था।
मेरी चूत और गांड दोनों भर गईं थीं। दोनों मर्द जोर-जोर से धक्के मार रहे थे। मेरे बोबे उछल रहे थे, निप्पल्स चूस रहे थे। मैं बार-बार झड़ रही थी, चूत का रस बह रहा था। “हाँ… और जोर से… भोसड़ीके… चोदो अपनी वेश्या को!” मैं चिल्ला रही थी। उनकी सांसें गरम थीं, पसीना टपक रहा था। कमरे में चुदाई की आवाजें गूंज रही थीं – फटाफट, चपचप।
राहुल ने मुझे पलटा और डॉगी स्टाइल में चोदना शुरू किया। उसका लंड मेरी चूत में पूरा घुस रहा था, गोटे मेरी चूतड़ से टकरा रहे थे। विक्रम मेरे मुंह में लंड ठूंस रहा था। मैं लंड चूसते हुए सोच रही थी, कितनी रांड हूँ मैं, दो लंडों से एक साथ चुद रही हूँ। मेरी गांड अभी भी जल रही थी लेकिन मजा इतना था कि रुक नहीं पा रही थी। “माल छोड़ दो अंदर… गरम वीर्य भर दो!” मैं गिड़गिड़ा रही थी। राहुल ने जोर से धक्का मारा और चूत में झड़ गया। गरम माल भर गया। विक्रम ने बाहर निकालकर मेरे बोबों पर माल छोड़ दिया। चिपचिपा वीर्य मेरे चुचों पर फैल गया। मैं हांफ रही थी, लेकिन अभी भी चूत में खुजली थी।
डबल पेनेट्रेशन के दौरान और गहराई में उतर गई थ्रीसम चुदाई
अब विक्रम ने मुझे अपनी गोद में उठाया और अपनी गोद में बिठाकर चोदना शुरू किया। उसका मोटा लंड मेरी चूत में घुसा, मैं ऊपर-नीचे हो रही थी। “राइड कर साली, अपनी चूत से लंड निचोड़!” वो बोला। मैं तेज-तेज हिल रही थी, मेरे बोबे उसके चेहरे पर पटक रहे थे। वो निप्पल चूस रहा था। राहुल पीछे से आया और मेरी गांड में फिर से लंड डाल दिया।
अब डबल पेनेट्रेशन फिर से। मैं चीख रही थी, “आह्ह्ह… दोनों छेद फाड़ दो… चोदो मुझे अपनी सेक्स दासी की तरह!” मेरी चूत टाइट थी लेकिन रस से भरी हुई। दोनों लंड एक साथ अंदर-बाहर हो रहे थे। सिसकारियाँ, चीखें, गालियाँ – सब मिलकर कमरा भर गया। मैं कई बार झड़ गई, मेरी चूत कांप रही थी।
फिर उन्होंने मुझे बिस्तर पर लिटाया और फिर से मेरे साथ हार्डकोर डबल पेनेट्रेशन करना शुरू कर दिया। राहुल मेरी चूत चोद रहा था, विक्रम मुंह में। मैं दोनों को संतुष्ट कर रही थी। चुदते चुदते मेरी गांड अब ढीली हो गई थी लेकिन मजा कम नहीं हुआ। “तेरी गांड कितनी गरम है, रंडी!” विक्रम बोला। मैं हंसकर बोली, “हाँ, तेरे लिए ही तो खोल रखी है!” वो जोर-जोर से गांड मार रहा था। राहुल ने मेरी चूत में उंगली डाली और क्लिटोरिस रगड़ा। मैं फिर झड़ गई। अंत में दोनों ने मेरे मुंह में लंड डालकर माल छोड़ दिया। गरम वीर्य मेरे मुंह में भरा, मैंने सब निगल लिया।
अब थककर हम तीनों लेट गए। लेकिन मेरी चूत अभी भी जल रही थी। मैंने राहुल के लंड को फिर से मुंह में लिया और चूसने लगी। विक्रम मेरी चूत चाट रहा था। हम फिर से शुरू हो गए। इस बार मैंने दोनों को एक साथ चोदा। एक लंड चूत में, दूसरा गांड में। मैं रंडी की तरह चुद रही थी, पूरी तरह सेक्स की दीवानी। मेरी चीखें कमरे में गूंज रही थीं। “चोदो… और चोदो… कभी मत रुकना!” अंत में दोनों ने मेरी चूत और गांड में माल छोड़ दिया। मैं संतुष्ट होकर लेट गई, मेरी चूत और गांड से वीर्य बह रहा था।
अन्तर्वासना हिंदी डबल पेनेट्रेशन सेक्स स्टोरी का निष्कर्ष
यह रात मेरी जिंदगी की सबसे कामुक रात थी। मैंने खुद को पूरी तरह रंडी समझ लिया था अपनी चुदास शांत करने के लिए, बॉयफ्रेंड व उसके दोस्त की रंडी बनकर डबल पेनेट्रेशन चुदाई का मजा लिया। अब मैं जानती हूँ कि मेरी भोसड़ी और गांड हमेशा तैयार रहेंगी ऐसी डबल पेनेट्रेशन चुदाई के लिए। यह हार्डकोर चुदाई अनुभव मुझे और भी छिनाल बना गया है। कामुकता की कोई सीमा नहीं होती, बस उतना ही चोदो जितना मजा आए।


